स्मित एक छोटे से गाँव में रहने वाला साधारण परिवार का लड़का था, लेकिन उसके सपने साधारण नहीं थे। वह बचपन से ही कुछ ऐसा करना चाहता था, जिससे उसकी पहचान पूरे इलाके में बने और उसके माता-पिता को उस पर गर्व हो। उसके पिता रमेश गाँव में एक छोटी-सी किराने की दुकान चलाते थे। दुकान से इतनी ही कमाई होती थी कि घर का खर्च मुश्किल से चल पाता था। उसकी माँ सुनीता घर संभालती थीं और सिलाई करके परिवार की आमदनी में थोड़ा योगदान देती थीं। घर में पैसों की कमी हमेशा बनी रहती थी, लेकिन उसके माता-पिता ने कभी स्मित को सपने देखने से नहीं रोका। वे अक्सर उससे कहते थे कि बेटा, इंसान की गरीबी उसके सपनों से बड़ी नहीं होती, बस उसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करना आना चाहिए। स्मित इन बातों को अपने दिल में उतार लेता था। वह जब भी गाँव के बाहर बने बड़े-बड़े मकानों, बाजार में चलती गाड़ियों और शहर से लौटने वाले सफल लोगों को देखता, तो उसके मन में भी कुछ बड़ा करने की इच्छा जाग उठती थी। वह सोचता था कि एक दिन वह भी ऐसा काम करेगा, जिससे उसके परिवार को कभी पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। स्मित पढ़ाई में औसत था, लेकि...
एक समय की बात है। एक विशाल और समृद्ध राज्य पर न्यायप्रिय और बुद्धिमान राजा वीरेंद्र का शासन था। उनके दरबार की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी। वहाँ केवल न्याय ही नहीं होता था , बल्कि ज्ञान , बुद्धिमत्ता और तर्क की भी बड़ी कद्र की जाती थी। राजा का मानना था कि केवल बलवान व्यक्ति ही महान नहीं होता , बल्कि सच्ची महानता बुद्धि और विवेक में होती है। इसी कारण उनके दरबार में विद्वान , कवि , कलाकार , सैनिक और मंत्री नियमित रूप से उपस्थित रहते थे। राज्य के लोग सुखी थे और अपने राजा पर गर्व करते थे। राजा समय-समय पर दरबारियों की बुद्धि की परीक्षा भी लेते रहते थे ताकि वे सदैव सतर्क और चतुर बने रहें। एक दिन उन्होंने निश्चय किया कि आज ऐसा प्रश्न पूछा जाए जिसका उत्तर केवल वही दे सके जिसके पास तेज बुद्धि और शांत मन हो। अगले दिन भव्य राजदरबार सजा। सुनहरे सिंहासन पर राजा विराजमान थे। दोनों ओर मंत्री , सेनापति , राजगुरु और विद्वान बैठे थे। दरबार में अनेक उत्सुक लोग भी उपस्थित थे। सभी यह जानने को उत्सुक थे कि आज राजा कौन-सी चुनौती देने वाले हैं। राजा मुस्कराए और अपने हाथ में सफेद चाक लेकर दरबार के बीच रखी ए...