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तेज बारिश और चिड़िया

  रानो चिड़िया अपने छोटे से बच्चे के साथ डिंगो के घोंसले में बैठी हुई थी कि सभी पक्षी तेजी से एक दिशा में उड़ते हुए जा रहे थे। मम्मा यह सारे पक्षी आज सुबह-सुबह इतनी जल्दी में क्यों है ? कुकू बेटा शायद वो सब दाना लेने जा रहे होंगे। तभी पास से कालू कौवा गुजरता है और रानू चिड़िया कालू कौवे से पूछती है कालू भैया आप सब इतनी जल्दी में क्यों हैं ? कहां जा रहे हैं आप ? रानू चिड़िया जंगल में तेज बारिश के साथ तूफान आ रहा है। हम सब नारियल के पेड़ से पत्ते लेने जा रहे हैं ताकि अपनेपने घरों को मजबूत बना सके। ऐसे कहते हुए कालू कौवा वहां से उड़ जाता है। कुकू बेटा हमारा घर तो तिनकों का है। मैं नारियल के पेड़ से पत्ते ले आती हूं। मम्मा जल्दी आना। मुझे अकेले बहुत डर लगता है। मम्मा चिड़िया नारियल के पेड़ से पत्ते लेने चली जाती है। जब रानो चिड़िया नारियल के पेड़ के पास पहुंचती है तो उस पर कोई भी पता ना था। रानू चिड़िया मैना से पूछती है मैना सुना है सारे पक्षी नारियल के पेड़ से पत्ते तोड़ रहे हैं लेकिन इस नारियल के पेड़ पर तो अब कोई भी पत्ता नहीं है। चिड़िया बहन इस पेड़ के पत्ते खत्म हो गए हैं और अब ...

रानों चिड़िया

 कालू जी कल मैं इंसानों की बस्ती में गई थी। किसान की पत्नी आलू मटर वाले चावल बना रही थी। मेरा भी आलू मटर वाले चावल खाने को दिल कर रहा है। आलू मटर वाले चावल तो रानू चिड़िया ही बना सकती है। चलो हम रानू चिड़िया के पास जाते हैं और रानू चिड़िया से कहते हैं कि वो हमें आलू मटर वाले चावल बनाकर खिलाए। कवा और कवि दोनों रानू चिड़िया के पास जाते हैं। रानू चिड़िया मेरा आलू मटर वाले चावल खाने को बहुत ज्यादा दिल कर रहा है। क्या तुम मुझे आलू मटर वाले चावल बनाकर खिलाओगी? गौरी बहन मैं अकेली तो सारे काम नहीं कर सकती। हां अगर आप काम में मेरी मदद करो तो फिर मैं आपको आलू मटर वाले चावल बनाकर खिला सकती हूं। बताओ बताओ रानू चिड़िया हमें क्या करना होगा? जो काम तुम हमारे जिम्मे लगाओगी हम वो करेंगे। मैं चावल का दाना ढूंढ कर ले आती हूं। गोरी और कालू आप आलू और मटर ढूंढ लाओ। बाकी मिर्च मसाले, तोता और कबूतर ले आएगा। हम सारी चीजें इकट्ठी कर लेंगे और फिर रात को आलू मटर वाले चावल बनाकर खाएंगे। बहुत मजा आएगा। मेरे तो अभी से मुंह में पानी आ रहा है। कौवा और कवि आलू और मटर लेने उड़ते हैं।

 और रानू चिड़िया चावल का दाना लेने चली जाती है। तोते और कबूतर भैया आज हम सब मिलकर आलू मटर वाले चावल बनाएं। तोते भैया आपको मिर्ची लानी है। और कबूतर आप नमक और कुछ मसाले ले आना। मैं लाल मिर्ची ले आता हूं। मुझे पता है लाल मिर्ची का पौधा कहां है? मैं तो कल भी लाल मिर्ची खाने गया था। नमक पहाड़ से मिलेगा। मैं ऊंचाई में उड़ता हुआ जल्दी से चला जाऊंगा और नमक ले आऊंगा। सब अपने-अपने कामों में लग जाते हैं। रानू चिड़िया नदी किनारे जाकर एक-एक चावल का दाना इकट्ठा करती है और अपनी टोकरी में रखती है। कौवा और कवि आलू और मटर ढूंढ रहे थे। वो उड़ते-उड़ते दूसरे जंगल चले जाते हैं। वहां एक सब्जी का खेत था। मटर की बेल पर मटर की फलियां लगी हुई थी। कौवा और कवी मटर की फलियां तोड़ते हैं। साथ ही कुछ छोटे-छोटे पौधे थे। गोरी किसी भी पौधे पर आलू नहीं लगा हुआ। आलू पेड़ पर लगते हैं या किसी बेल पर? हमने तो यह रानू चिड़िया से पूछा ही नहीं। कालू यहां साथ ही मेरी मां का घर है। चलो हम मेरी मां से पूछ लेते हैं। गौरी कवि और कालू कवा उड़ते हैं और गौरी की मां के घर चले जाते हैं। मां जी आज हम सब दोस्त मिलकर आलू मटर वाले चावल बना रहे हैं। हमने सब्जी के खे मटर तो तोड़ लिए लेकिन वहां किसी भी पौधे पर आलू नहीं लगे हुए।

 हमें आलू कहां से मिलेंगे? गौरी की मां यह सुनकर हंसने लगती है और अपनी बेटी गौरी से कहती है, गोरी बेटी आलू पौधों के ऊपर नहीं लगते बल्कि छोटे पौधों के नीचे जमीन में होते हैं। यह सुनकर कौवा और कवि हैरान हो जाते हैं। सासू मां सासू मां वहां कुछ छोटे पौधे थे जो कतार में लगे हुए थे। क्या उन पौधों के नीचे आलू होंगे? हां अगर वो आलू के पौधे हैं तो आलू उन पौधों के नीचे जमीन में होंगे। तोता झरने के पास जाता है। झरने के पास फूलों के पीछे एक छोटा सा पौधा था जिस पर ढेर सारी लाल मिर्ची लगी हुई थी। तोता अपनी तेज चोंच से कुछ लाल मिर्ची तोड़ता है। मेरा काम तो सबसे आसान था। लाल मिर्ची तो मुझे बहुत जल्दी मिल गई। अब शाम को मजे-मजे से आलू मटर वाले चावल खाऊंगा। पास बैठी बुलबुल तोते की बात सुन रही थी। वो तोते से कहती है धोते धोते आलू मटर वाले चावल मेरा भी खाने को बहुत दिल कर रहा है। क्या तुम थोड़े से चावल मुझे भी दे दोगे? आलू मटर वाले चावल रानू चिड़िया बना रही है। वो बहुत दया आलू है। वो सबको चावल देगी। आप ही रात को रानू चिड़िया के घर आ जाना। तोता लाल मिर्ची लेकर वापस उड़ता है। कबूतर छुप कर बैठा हुआ था क्योंकि नमक की कान के पास बड़ी चील बैठी हुई थी। मैं यहां कब से छुप कर बैठा हुआ हूं। ना जाने कब ये बड़ी चील जाएगी और कब मैं नमक लेकर वापस जाऊंगा। जब काफी देर तक चील नहीं उड़ती तो कबूतर चील के पास जाता है और डरते-डरते चील से कहता है चील चील मुझे नमक के कान से कुछ नमक लेना है क्योंकि आज हम सब दोस्त आलू मटर वाले चावल बना रहे हैं। ये पहाड़ मेरा है।

मैं अपने पहाड़ से किसी को भी नमक नहीं लेने देती। हां, अगर तुम्हें नमक लेना है तो मुझे भी आलू मटर वाले चावल खिलाना होंगे। आलू मटर वाले चावल रानो चिड़िया बना रही है। आज रात आप भी रानो चिड़िया के घर आ जाना और सभी पक्षी मिलकर आलू मटर वाले चावल खाएंगे। रानो चिड़िया ने अपने चूल्हे में आग जला ली थी। हंडिया ऊपर ढकी हुई थी। कौवा और कवे भी आलू और मटर लेकर वापस आ जाते हैं। तोता भी लाल मिर्ची ले आया था। दोस्तों, सारा मसाला तैयार है लेकिन कबूतर अभी तक नहीं आया। नमक के बिना तो कुछ भी नहीं हो पाएगा। तभी कबूतर जल्दी-जल्दी से आता है। बहुत मुश्किल से चील ने मुझे नमक लेने की इजाजत दी। कबूतर को देखकर सभी दोस्त खुश हो जाते हैं। रानू चिड़िया काम शुरू करती है और थोड़ी ही देर में आलू मटर वाले चावल बनकर तैयार हो जाते हैं। सभी पक्षी लाइन में बैठ जाते हैं। बुलबुल और चील भी पहुंच जाती है। रानू चिड़िया हंसते हुए अपने दोस्तों से कहती है। आज तो आलू मटर वाले चावलों ने हम सबको एक जगह इकट्ठा कर दिया। यह अच्छा मौका है साथ बैठने का, साथ खाने का और खूब गपशप लगाने का। फिर सभी पक्षी मजे-मजे से आलू मटर वाले चावल खाते हैं और खूब एंजॉय करते हैं।

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