दिल्ली की सुबहें हमेशा झूठी होती हैं। वे उजाले का वादा तो करती हैं , लेकिन अपने भीतर रात के सारे राज़ छिपाए रखती हैं। आरव सिंह यह बात अच्छी तरह जानता था। वह अपनी बालकनी में खड़ा नीचे बहती ट्रैफिक की आवाज़ सुन रहा था—कारों के हॉर्न , चायवालों की पुकार , और अख़बारों की चरमराहट—सब कुछ सामान्य , फिर भी असहज। ब्लैक सन और किंगमेकर की घटनाओं के बाद उसने खुद को परछाइयों से दूर रखने की कोशिश की थी , लेकिन कुछ ज़िंदगियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें अंधेरे छोड़ते नहीं , वे अंधेरे को अपने भीतर ढोती हैं। आरव अब किसी एजेंसी का हिस्सा नहीं था , फिर भी उसकी आदतें नहीं बदली थीं—हर आवाज़ का विश्लेषण , हर चेहरे का मूल्यांकन , और हर शांति पर संदेह। उस सुबह मीरा क़ाज़ी का संदेश आया , और उसी पल आरव को समझ आ गया कि यह दिन सामान्य नहीं रहेगा। मीरा अब सिर्फ़ पत्रकार नहीं थी ; वह उन लोगों की सूची में आ चुकी थी जिनसे सत्ता डरती है। उसका संदेश छोटा था , लेकिन भारी—“मुझे कुछ मिला है। इस बार बात सिर्फ़ नेटवर्क की नहीं , विरासत की है।” आरव ने जव...
महाद्वीप आर्यवर्त के बीचोंबीच बसा था देश “रुद्रायन” , एक ऐसा राष्ट्र जो बाहर से शांत और समृद्ध दिखता था , लेकिन भीतर ही भीतर रहस्यों , साज़िशों और छिपे युद्धों से भरा हुआ था। रुद्रायन की सीमाएँ ऊँचे पहाड़ों , घने जंगलों और रेगिस्तानी इलाकों से घिरी थीं , जिससे बाहरी दुनिया से इसका संपर्क सीमित रहता था। राजधानी “वज्रनगर” आधुनिक तकनीक और प्राचीन स्थापत्य का अद्भुत मिश्रण थी। इसी राजधानी के नीचे , ज़मीन से कई मंज़िल नीचे , स्थित था देश का सबसे गोपनीय संगठन — “त्रिनेत्र एजेंसी”। इस एजेंसी का अस्तित्व आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया गया था , लेकिन देश की सुरक्षा इसी के हाथों में थी। अद्वित वर्मा त्रिनेत्र एजेंसी का सबसे तेज़ , सबसे शांत और सबसे रहस्यमय एजेंट था। उसकी उम्र करीब बत्तीस साल थी , चेहरा साधारण , आँखें गहरी और भावनाओं को छुपाने में माहिर। जो लोग उसे पहली बार देखते , वे कभी अंदाज़ा नहीं लगा सकते थे कि यही व्यक्ति अकेले दम पर कई देशों की खुफिया योजनाओं को नाकाम कर चुका था। अद्वित का अतीत उतना ही ध...