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मेंढक की कहानी

एक घने जंगल के बीचों-बीच एक पुराना और गहरा कुआँ था। उस कुएँ में एक छोटा सा मेंढक रहता था , जिसका नाम मोनू था। मोनू ने अपनी पूरी जिंदगी उसी कुएँ के अंदर बिताई थी। उसने कभी बाहर की दुनिया नहीं देखी थी , इसलिए उसके लिए वही कुआँ उसकी पूरी दुनिया था। उसे लगता था कि यही सबसे बड़ा स्थान है और इसके बाहर कुछ भी नहीं है। मोनू का जीवन बहुत साधारण था। वह रोज सुबह उठता , कुएँ के ठंडे पानी में तैरता , छोटे-छोटे कीड़े पकड़कर खाता और दिनभर आराम करता। उसे किसी बात की चिंता नहीं थी , क्योंकि उसने कभी अपने जीवन से आगे कुछ सोचने की कोशिश ही नहीं की थी। एक दिन अचानक कुछ अजीब हुआ। आसमान में बादल छा गए और तेज हवा चलने लगी। बारिश शुरू हो गई और कुछ ही देर में पानी की बूंदें तेजी से कुएँ में गिरने लगीं। उसी दौरान एक दूसरा मेंढक , जिसका नाम सोनू था , फिसलकर उस कुएँ में गिर गया। सोनू एक बड़े तालाब में रहता था। वह खुली दुनिया का आदी था—जहाँ ताजी हवा , बड़ी जगह और बहुत सारे जीव-जंतु थे। जैसे ही वह कुएँ में गिरा , उसे महसूस हुआ कि यह जगह बहुत छोटी और बंद है। मोनू ने जैसे ही सोनू को देखा , वह हैरान रह गया। उस...
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अनुशासन: सूरज की सफलता की कहानी

  सूरज का जन्म एक छोटे से गाँव में हुआ था , जहाँ सुविधाएँ बहुत कम थीं लेकिन सपनों की कोई कमी नहीं थी। बचपन से ही सूरज का स्वभाव थोड़ा अलग था। वह बाकी बच्चों की तरह दिन भर खेल-कूद में समय बिताने के बजाय कुछ नया सीखने की कोशिश करता रहता था। उसके पिता एक साधारण किसान थे और माँ घर संभालती थीं। घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी , लेकिन माता-पिता ने सूरज को हमेशा अच्छे संस्कार दिए। वे अक्सर कहते थे कि “जीवन में आगे बढ़ने के लिए सबसे जरूरी चीज़ है अनुशासन।” यह बात सूरज के मन में गहराई से बैठ गई थी। गाँव के स्कूल में पढ़ाई का माहौल बहुत अच्छा नहीं था। शिक्षक कभी-कभी ही समय पर आते और पढ़ाई भी उतनी प्रभावी नहीं होती थी। लेकिन सूरज ने कभी इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह रोज़ सुबह जल्दी उठता , सबसे पहले अपने दिन की योजना बनाता और फिर पढ़ाई में लग जाता। कई बार उसे समझ नहीं आता कि कौन सा विषय कैसे पढ़े , लेकिन वह हार नहीं मानता। वह अपने से बड़े बच्चों से पूछता , पुराने किताबों को पढ़ता और धीरे-धीरे खुद ही रास्ता ढूंढ लेता। सूरज के दोस्त अक्सर उसका मज़ाक उड़ाते थे। वे कहते , “...