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कोहरे का ढाबा

दिसंबर की वो रात थी। शीत लहर ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले रखा था। तापमान शून्य के करीब था और कोहरा कोहरा ऐसा था मानो आसमान खुद जमीन पर उतर कर उसे निगलने आया हो। मनोहर जिसकी उम्र करीब 40 वर्ष थी। अपनी पुरानी एटलस साइकिल को कीचड़ और सूखी पत्तियों से भरी पगडंडी पर घसीट रहा था। वो पेशे से एक बंजारा था जो गांव-गांव जाकर चूड़ियां , बिंदी और श्रृंगार का सामान बेचता था। उसके दांत किटकिटाने की आवाज सन्नाटे में गूंज रही थी। उसने अपने कानों पर लपेटे हुए मफलर को और कस लिया। लेकिन ठंड थी कि सुई की तरह कपड़ों को भेद कर सीधे हड्डियों में चुभ रही थी। साइकिल के कैरियर पर बंधा हुआ लोहे का बक्सा हर छोटे-मोटे पत्थर पर खनखन की आवाज करता। उस घने अंधेरे में यह आवाज मनोहर को किसी संगीत जैसी नहीं बल्कि खतरे की घंटी जैसी लग रही थी। तभी उसे दूर कहीं सियार के रोने की आवाज सुनाई दी। मनोहर का दिल बैठ गया। उसने हनुमान चालीसा का पाठ मन ही मन शुरू कर दिया। भूत पिशाच निकट नहीं आवे। लेकिन उसके होठों से शब्द नहीं निकल रहे थे। उसके हाथ और पैर शून्य हो चुके थे। उसे महसूस होने लगा था कि अगर अगले 1 घंटे में उसे आग या क...

जादुई बैंगन

 गरीब के पेड़ पर जादुई बैंगन मसाला पूर्ण नामक एक गांव था जहां रोहित अपने परिवार के साथ बहुत खुशी से रह रहा था उसके परिवार में उसकी मैन प्रभा बहन सौम्या और बड़ा भाई राकेश और भाभी ने थी रोहित पेशे से किसी करता था वह कम पढ़ा लिखा भी था पर उसका भाई राकेश उसने शहर जाकर पढ़ की थी इसी बात का उसे घमंड था वह घमंड उसकी पत्नी में भी था रोहित अपने खेत में हाल चलकर ताप्ती गर्मी में घर आया ही था की रोटी बनाते हुए भाभी से कहता है भाभी मैं घर ए गया आज बहुत गर्मी थी थोड़ा सा पानी दे दीजिए और खाने में क्या बनाया है देवर जी मैं आपकी नौकरानी नहीं हूं तो पानी आप खुद पी लीजिए और खाना मैंने आपके लिए बनाया नहीं है मैंने सिर्फ राकेश जी और मैन जी का ही खाना बनाया है बाकी आप अपनी बहन का भी खुद बना लेना मुझे और भी कम है जब देखो भाभी भाभी करके नौकर बनाने का कम करवाता है खेत से घर आकर रोहित पानी पीकर खुद चूल्हे पर टेढ़ी मेधी रोटी बनाता है तो उसकी बहन कहती है अरे भैया अभी क्या कर रहे हो मैं बना देती हूं खाना आप ऐसे भी थक चुके हो वैसे भैया भाभी इतनी बेरुखी क्यों करती है हमसे घर की कम में भी हाथ भी नहीं बताती सिर्फ अपना कम करती हैं जहां भाई भी उसे अपने हाथ से खाना खिलाता है और घर की बड़ी बहु घमंडी होने के कारण आलसी भी थी उसे किसी के जज्बातों से कोई मतलब नहीं था सिर्फ अपने पति से मतलब रखती थी कभी-कभी मैन बहन का खर्चा चलाता था पर एक दिन उसके खेत की सब्जी के पेड़ पौधे सब खराब हो गए यहां तक की पसंदीदा बैगन भी यह देखकर रोहित अपनी मैन की गोद में सर रखकर कहता है मैन मैंने इतनी मेहनत कारी थी इसके बावजूद मेरे खेत में सारी फसल बर्बाद हो गई अब मेरे पास पैसे भी नहीं है क्या होगा चिंता मत कर बेटा तेरा बड़े भाई पैसे वाला है उससे पैसे मांग ले और खेत में दोबारा खेती कर क्या पता कुछ अच्छा हो जाए मुझे नहीं लगता की बड़े भैया पैसे देंगे पर एक बार का कर जरूर देखूंगा आखिर सौम्या की शादी का खर्चा भी तो मेरे कंधों पर है क्योंकि भाई ने पहले ही इनकार कर दिया यह बोलकर रोहित अपने बड़े भाई राकेश के पास जाकर पैसे मांगता है तभी वह तेवर दिखाकर कहता है मैं तुम्हें तुम्हारी खेत में उन पेड़ पौधों के लिए पैसे डन बिल्कुल नहीं देखा अगर आज तू मेरी तरह पढ़ लेता तो गवार नहीं होता अगर मैं किसी को एक फूटी कौड़ी नहीं दूंगा और मैं यहां रहूंगा भी नहीं अब तुम जैसे गवार लोगों के साथ मैं और मेरी पत्नी शहर में रहकर शहर के तौर तरीके से जिएंगे भैया अब जा रहे हैं आप जानते हैं मैन की तबीयत बिगड़ी हुई है फिर भी मुझे कुछ नहीं पता सब तुम ही करो मैं तो चला अगले दो दिन में ही राकेश अपना समान बांधकर पत्नी के साथ शहर की ओर रावण हो जाता है वहीं दूसरी ओर घर के खर्चे मैन की दवाई बहन की शादी को लेकर रोहित के मैन में बहुत कुछ चल रहा था क्योंकि कमाई का जरिया थाप हो गया था वह दूसरी जगह कम भी करता है तो लोगों से काफी कुछ उल्टा सीधा सुनने को मिलता है अपनी मैन बहन के पेट को पालने के लिए वह लोगों की सुनता है फिर एक बार कम से निकल दिया जाता है ऐसे में परेशान होकर वह अपने उजड़े हुए खेत में जाता है जहां उसके सारे पेड़ पौधे तहस-नहस हो रखे द ही भगवान आपने मेरे साथ ऐसा क्यों किया इतनी परिश्रम के बाद भी मुझे सफलता नहीं मिली ना मेरी नौकरी रही अब मैं अपने परिवार का ख्याल कैसे रखूंगा उसके रोते हुए आंसू ज़मीन पर पद रहे द तभी ज़मीन से दो जड़ निकलती हैं एक बड़े से पेड़ का रूप ले लेती हैं जो की बैंगन का पेड़ होता है दूसरी जड़ रोहित के पैर को पकड़ लेती है तभी रोहित का ध्यान जाता है अरे अरे इसकी जड़ तो कहीं जा रही है जरा देखता हूं मैं अपने पैरों में से वह जैसे-जैसे जड़ निकलता है और धीरे-धीरे उसे जड़ की पहुंच तक पहुंचता है तो सामने देखता है की उसके खेत में एक बड़े से बैंगन का पेड़ है जिसे देखकर वो कहता है इतना बड़ा पेड़ कैसे आया और इस पर तो बहुत सारे बैंगन भी हैं रोहित चमचमाती बैंगन को देखकर दो बैंगन तोड़ता है जिसके तोड़ते ही वहां दो नए बैंगन ए जाते हो नहीं है तभी जादुई बैंगन पेड़ खुशी से झूम करके हूं तुम इतने हताश परेशान द की तुम्हारे अलसो उसे में पिघल गया और मेरी जड़ ज़मीन से निकलकर एक बड़ी जादुई बैंगन के पेड़ में तब्दील हो गई और तुम जितने मर्जी चाहो इस बैंगन को तोड़ सकते हो ये कभी खत्म नहीं होंगे ना खराब होंगे इन्हें ब्रिज को अपने घर की सारी स्थिति ठीक कर सकते हो सच में मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा मेरी मदद करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया फिर रोहित जादुई बैंगन को तोड़कर अपने गमछे में रखता है तभी पेड़ पर और बैंगन ए जाते हैं जादुई बैंगन पेड़ का शुक्रिया अदा करके वो घर पर बैंगन ले जाता है यह देखकर मैन और बहन कहती हैं भैया इतने सारे बैंगन कहां से ले तुम पर तो पैसे नहीं द हान बेटा बताना अभी तक तो तेरे हाथ खाली द अचानक कैसे भर गए हमारी सन ली मेरे खेत में जादुई बैंगन का पेड़ होगा है जिससे अब हम अच्छी जिंदगी काटेंगे तुम बैंगन का भरता और बैंगन के पकोड़े चाय के साथ बना दो उसके बाद में मंडी में बैगन का इतना सस्ता दूंगा की पूरे बाजार में कोई बेच नहीं रहा होगा इससे सभी लोग मेरे बैंगन खरीदेंगे पकोड़े का नाश्ता करते हैं उसके बाद रोहित मंडी में ढेर सारे बैंगन लेकर बेचने के लिए निकल जाता है बैंगन ले लो बैंगन ₹10 किलो सस्ते ताजा ताजा बैंगन ले लो बड़े बैंगन छोटे बैंगन बनाओ इसका भरता पकौड़ी सब्जी अचार बैंगन बैंगन अरे आप तो बहुत सस्ते बैंगन दे रहे हो जरा एक किलो दे दीजि मुझे तो 2 किलो दे दीजिए भाई साहब कुछ ही देर में एक-एक करके रोहित के सारे बैंगन खत्म हो जाते हैं वह दोबारा से जादुई पेड़ से बैंगन तोड़कर लता है और मंडी में बेचता है सस्ते के कारण फिर से बैंगन खत्म करके वह अपने घर लौट आता है जहां उसकी पहली कमाई बहुत ज्यादा होती है इससे तीनों खुश हो जाते हैं इसी तरह रोहित जादुई बैंगन पेड़ की मदद से रोज बैंगन बेचता है जिससे उसे काफी मुनाफा होता है 6 महीने बाद पैसे कठे करके वह अपनी बहन की शादी अच्छे घर में कर देता है वहीं दूसरी और अपनी मैन का इलाज भी करवा देता है जिसके बाद उसकी मैन स्वस्थ हो जाती है तभी प्रभा कहती है बेटा तूने अपने भाई के जितना पढ़ा लिखा ना होने के बाद भी परिश्रम और सफलता प्राप्त की है मैं बहुत खुश हूं और अपनी बहन की शादी भी कर दी मैं भी ठीक हूं तू अपने ऊपर भी ध्यान दे मैं भी अपनी बहु पर हुकुम चला हूं बड़ी बहु बेटों ने तो वो रूप दिखाया जो मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी क्या बोलूं मैन आप ही कोई अच्छी सी लड़की देख लो जिससे मैं शादी कर सकूं बेटा ये कहकर प्रभावित के लिए लड़की ढूंढते है वहीं दूसरी ओर रोहित जादुई बैंगन पेड़ से बैंगन को बेच देता है उन पैसों से वह गरीब लोगों की मदद करता है और उन्हें भी खाने के तौर पर बैंगन बांट देता है वह किसी को भी अपने घर से खाली हाथ नहीं भेजता था शुभ मुहूर्त देखकर प्रभु अपने बेटे रोहित की शादी सुप्रिया नाम की सुशील लड़की से कर देती है जिसके बाद सुप्रिया घर की सारी जिम्मेदारी संभालती है और रोहित एक अच्छा खास व्यापारी बनकर खुशी खुशी रहता है हेलो आओ भाई आलू ले लो प्याज ले लो टिंडे ले लो भाई साहब जरा आधी किलो आलू तो देना है और उसे औरत को दे देता है जिसके बाद वह बाजार में ठेले को यहां से वहां ले जाकर लोगों को सब्जियां बेचता रहता है इसी प्रकार उसका रोजमर्रा का खर्चा चल रहा था शाम होते होते धामू कमाए हुए पैसों में से कुछ दवाइयां खरीदना है और घर को लौटने लगता है मेरी पत्नी और मेरे बच्चे मेरा इंतजार कर रहे होंगे धामू जैसे ही घर पहुंचता है उसकी तीनों काली बेटियां घर में साफ-सफाई और खाना बना रही होती है अरे मेरी बच्ची हो तुम इतनी छोटी सी उम्र में घर के कम क्यों कर रही हो पिताजी मैन की तबीयत बिल्कुल भी ठीक नहीं है सुबह से सिर्फ आपका ही नाम पुकार रही है हान पिताजी आज उन्हें दवाई लिए हुए पूरे एक हफ्ता हो गया है पिताजी आप पहले मैन के पास चले जाइए जैसे ही धामू निर्मला के पास जाता है निर्मला दर्द से कर हर रही होती है देखिए जी मेरा कुछ नहीं पता की मैं कब इस दुनिया को छोड़कर चली जाऊं हमारी तीन बेटियां हैं अब आपको उनकी जिंदगी बनानी है मुझसे वादा करो की आप हमारी तीनों बेटियों की परवरिश अच्छे से करोगे मैं तुमसे वादा करता हूं निर्मला मैं अपनी तीनों बेटियों की परवरिश अच्छे से करूंगा लेकिन तुम ऐसा कुछ मत कहो तो मैं कुछ नहीं होगा दामू इतना कही रहा होता है की तभी अचानक से निर्मला की आखिरी बंद हो जाती है जिसके चलते धामू बहुत फूट-फूट कर रोने लगता है दामों अपनी पत्नी निर्मला का अंतिम संस्कार कर देता है जिसके बाद वह सब्जी बेचकर अपनी तीनों बेटियों को पढ़ने लिखने का कम शुरू कर देता है मेरे बेटियों मैं चाहता हूं की तुम अपनी मैन का सपना पूरा करो और पढ़ लिखकर कुछ बानो मैं तुम्हें किसी काबिल देखना चाहता हूं दिन-रात मेहनत करता है और सब्जी बेचने के साथ साथ वह एक फैक्ट्री में कम करना भी शुरू कर देता है देखते ही देखते कुछ समय बिताने लगता है जिसके चलते उसकी बेटियां शादी के लायक बड़ी हो जाती है एक दिन नामु फैक्ट्री में कम कर रहा होता है जिस मशीन में धामू कम कर रहा था अचानक से खराब हो जाती है और धामू के दोनों हाथ उसे मशीन के अंदर ए जाते हैं जिसके चलते वह बेचारा अपाहिज हो जाता है पिताजी पिताजी क्या हो गया के हाथों को पिताजी यह सब कैसे हुआ और किसने किया मेरी ही गलती की वजह से मेरे दोनों हाथ मशीन में चले गए और मैं अब अहित हो गया नहीं पिता जी ऐसा मत कहिए आपके दोनों हाथ अभी सही सलामत है हम तीनों बेटियां आपके दया और बाएं हाथ हैं मैं तुम्हें पढ़ा लिखा तो नहीं पाया लेकिन तुम्हारी सदियों के लिए मैंने कुछ पैसा जोड़ा है तुम शादी करके अपना घर बसा लो माताजी अरे बिटिया बेटी तो पराया धन होती है एक एन एक दिन तो उन्हें जाना ही होता है तो क्यों चिंता करती है मेरी बच्ची धामों की तीनों बेटियां उसकी बातें सुनकर रोने लगती हैं जिसके बाद बेचारा अपाहिज धामू अपनी तीनों बेटियों के लिए रिश्ते ढूंढना शुरू कर देता है लेकिन कई कोशिशें के बाद भी उसे अपनी बेटियों के लिए कोई अच्छा रिश्ता नहीं मिल पता क्योंकि उसकी बेटियों का रंग सांवला था तुम्हें आजकल कोई भी कालिया सांवली लड़कियों से शादी नहीं करना चाहता सबको तो अपने घर में गोरी बहु चाहिए जैसे पंडित जी मैं अपनी तीनों बेटियों की शादी अच्छे घर में करना चाहता हूं उसके चलते मुझे जितना दहेज देना होगा मैं वो भी दे दूंगा अच्छा ऐसी बात है तो फिर यह देखो यह तीन लड़के तीनों भाई हैं और अच्छे घर से हैं तीनों खुद की कंपनी चला रहे हैं जितनी जल्दी हो सके लड़कों से मेरी तीनों बेटियों की शादी की बातचीत आगे बढ़ाओ लेकिन याद रहे दहेज में पूरा पंच टोला सोना और घर का सारा समान और तीनों दामादों को गाड़ियां देनी होगी शादी कर देता है शादी के बाद जब तीनों अपने ससुराल में आती है तो घर पर आए हुए मेहमान उन्हें देखकर कहते हैं अरे जरा देखो तो सही विमला की बहु कितने सांवले रंग और काले चेहरे वाली है ऊंची दुकान देख के पकवान जितने योनि है उतनी ही इनकी बहु काली है तभी वहां विमला ए जाती है मैं बहुत देर से सोच रही थी की पुरी पार्टी में ऐसे लोग कहां चले गए जो अपने मनोरंजन के लिए लोगों का मजाक उड़ते हैं हमने तो वही कहा जो सच है अच्छा ऐसी बात है तो फिर तुम काली क्यों हो अरे कला होना कोई पाप नहीं है ये तो ऊपर वाले ने ही दो रंग बनाए हैं और मुझे तो मेरी बहु बहुत सुंदर लगती है विमला की बात के आगे कोई कुछ नहीं का पता वही विमला की तीनों बहु ये सब सुनकर बहुत खुश होती हैं लेकिन शादी के बाद सभी फंक्शन के बाद विमला अपनी बहू से कहती है देखो इस घर की कुछ कायदे और कानून है हमारे घर की बहु बाहर नहीं जाती जो चाहिए उसे इस घर में ही मिल जाएगा बाकी के नियम धीरे-धीरे सिख जाओगी ये कहकर वहां से चली जाती है अरे मुझे तो लगा था की हमारी सास बहुत अच्छी हैं लेकिन यह तो बहुत सख्त हैं लेकिन हम तीनों को अपनी मैन को और अपने पिता का सपना भी तो पूरा करना है और उसके लिए हमें पढ़ के साथ-साथ बाहर भी जाना होगा यह सब कैसे होगा तीनों बहनों को अपनी मैन का सपना पूरा करना था जिसके चलते वह अपने ही घर में छुप-छुप कर पढ़ शुरू कर देती हैं जब रात के समय घर के सभी सदस्य सो जाते हैं तब तीनों बहाने अपनी किताब निकल कर पढ़ शुरू कर देती हैं देखते ही देखते यह तीनों बहाने पढ़ करके कुछ ना कुछ बन जाती हैं निशा डॉक्टर की पढ़ पुरी कर लेती है आयशा वकील की ओर राधा कलेक्टर की जिसके बाद वह तीनों अपने पिता के पास जाती हैं पिताजी देखो मैं वकील बन गई और मैं कलेक्टर बन गई देखो पिताजी मैं अभी डॉक्टर बन गई आपका सपना हम तीनों बहनों ने पूरा कर दिया तुम्हारी मैन यह देखकर बहुत खुश हुई होगी तभी वहां अचानक से विमला अपनी कुछ बिगड़ैल सहेलियों को लेकर पहुंच जाती है जिसे देखकर निशा आयशा और राधा तीनों बहुत दर जाती है माफ कर दीजिए मैन जी हम अपने पिताजी का सपना पूरा करना चाहते द इसलिए हमने पढ़ की अरे बहु तुम क्यों माफी मांग रही हो माफी मांगने के लिए तो मैं इन्हें लेकर आई हूं ये वही औरतें हैं जिन्होंने ये कहा था की मेरी सांवली बहु किसी लायक और किसी काबिल नहीं तो देख लिया तुम सब ने की रंग और रूप कुछ मायने नहीं रखता असल जिंदगी में इंसान की समझदारी और उसकी अच्छाई ही मायने रखती है और उन्हें फक्र से अपने घर वापस लेकर जाती है जिसके बाद वह सभी एक साथ खुशी-खुशी रहने लगते हैं

 

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