संगलपुर नामक गांव में माधव नाम का एक आदमी अपनी पत्नी और तीन बेटियों के साथ में रहा करता था वो चाट और गुपचुप का ठेला लगाया करता और उसी से उसके घर का गुजारा चला करता उसकी तीनों बेटियों के नाम थे सीमा निधि और सविता सविता सबसे छोटी थी और मां-बाप की सबसे लाडली थी वैसे तो सविता बहुत समझदार और बहुत बुद्धिमान थी और घर के कामों में अपनी मां की मदद भी किया करती थी परंतु सविता सांवली थी सविता की दोनों बड़ी बहनें उसे हमेशा ही सांवली होने का ताना दिया करती थी ऐसे ही एक दिन सविता की मां ने अपनी बेटियों के पास आकर कहा अरे सीमा और निधि सविता को देखो तो जरा वो मेरे साथ हमेशा ही घर के कामों में मदद करती है और तुम दोनों हो कि सारा दिन बैठी रहती हो जरा कुछ काम भी कर लिया करो मां सविता ठीक ही तो करती है अरे उसे तो आपके साथ बस काम ही करना चाहिए और वो धूप में जाकर काली तो हो ही नहीं सकती क्योंकि वो तो पहले से ही काली है हां मां सीमा दीदी ठीक ही कहती है यदि हमने इसकी तरह बर्तन मारने शुरू किए तो हमारे हाथ काले हो जाएंगे और यदि धूप में जाकर पानी लाना शुरू कर दिया तो हम खुद काले हो जाएंगे आप तो बस सविता से ही काम करवाया करो हमसे नहीं बेकार में हमारी रंगत पर फर्क पड़ गया तो नुकसान आप ही का होगा जब हमारी शादी कराने में दिक्कत आएगी ऐसा कहकर दोनों बहनें वहां से चली जाती हैं तब मां सविता से कहती है
बेटा तुझे भी इन
दोनों की बातों का बुरा लगता होगा ना तू चिंता मत कर तू सबसे सुंदर है और गुण में
तो तू सबसे आगे है और देखना एक दिन इन दोनों को भी इस बात का एहसास हो जाएगा और तब
यह अपनी गलती पर पछताएंगी बैठकर हां मां मैं जानती हूं मैं अपनी दोनों बहनों की
बातों का बुरा नहीं मानती हूं और मां वैसे भी मुझे घर के कामों में आपकी मदद करने
से बहुत खुशी मिलती है इसीलिए मैं आपके साथ काम करवाती हूं और ठीक ही तो कहती है
वो दोनों वो गोरी है अगर धूप में जाएंगी तो काली हो जाएंगी वैसे भी तू ही कह रही
थी ना कि तुझे इन दोनों की शादी करनी है तो मां तुम भी इन दोनों की बातों को दिल
से मत लगाया करो और चलो अब हम काम खत्म कर लेते हैं वरना जैसे-जैसे दोपहरी बढ़ेगी
काम करना मुश्किल हो जाएगा और इस तरह सविता कभी भी अपनी दोनों बहनों की बातों पर
ध्यान नहीं देती थी और हमेशा अपनी मां के साथ कामों में लगी रहती ऐसे ही सब कुछ
ठीक चल रहा था परंतु एक दिन माधव अपना ठेला बंद करके वापस घर आ रहा था
तभी रास्ते में
उसका एक्सीडेंट हो जाता है और मौके पर ही उसकी मौत हो जाती है माधव की मौत की खबर
सुनकर उसकी पत्नी के सर पर दुखों का आसमान टूट पड़ता है नहीं नहीं आप हमें छोड़कर
नहीं जा सकते मेरे साथ-साथ तीन बेटियों की जिम्मेदारी भी आप पर है नहीं आप ऐसे
कैसे जा सकते हैं मेरी नहीं तो अपनी तीन बेटियों के बारे में तो सोचते मां पिताजी
जा चुके हैं और जाने वाले कभी वापस नहीं आते लेकिन हम तीनों है ना मां तुझे
संभालने के लिए तू चिंता मत कर मां वो सभी मिलकर अपने पिता का अंतिम संस्कार करते
हैं अब माधव का देहांत हुए लगभग 15 दिन भी बीत चुके थे एक दिन सीमा अपनी मां के
पास आती है और कहती है मां घर का सारा राशन खत्म हो गया है खाने को कुछ भी नहीं
बचा अब पिताजी तो रहे नहीं रहे जो कि वो हमें कमा कर खिला सके आप बताइए मां कि अब
हमें क्या करना चाहिए क्या चारा है हमारे पास जीने के लिए बेटा तुम्हारे पिताजी
नहीं रहे तो क्या हुआ मैं तो हूं ना मैं दूसरों के घरों का झाड़ू पोछे का काम
करूंगी और तुम सभी को खिलाऊंगी तुम बिल्कुल भी किसी बात की चिंता मत करो जब तक
तुम्हारी मां जिंदा है
तुम्हें कुछ नहीं
होगा अपनी मां की इस बात को सुनकर सविता बोल उठी नहीं नहीं मां तुम्हें झाड़ू पोछा
करने की कोई जरूरत नहीं है मैं हूं ना पिताजी की दुकान को मैं संभाल लूंगी मां तुम
ही तो मुझसे कहती थी ना कि मैं तेरा बेटा भी हूं और बेटी भी तो अब बेटा बनने की
बारी है तू चिंता मत कर मैं आते ही पिताजी का ठेला वापस खोल लूंगी और उसे चलाऊंगी
भी और देखना वो बहुत अच्छा चलेगा बेटा तेरे जैसी बेटी तो बड़े भाग्य से मिलती है
मुझे तुझ पर पूरा भरोसा है तेरे काम में तेरी बहनें भी तेरी मदद करेंगी यह सुनकर
सीमा और निधि एक दूसरे को देखती हैं और फिर सीमा ने कहा लेकिन मां इतनी तेज धूप
में हम भला कैसे दुकान लगा सकते हैं और मां तुम तो जानती हो ना कि हम काला होने से
कितना डरते हैं फिर तुझे हमारी शादी भी तो करनी है ना यदि हम दोनों काले हो जाएंगे
तो फिर कौन हमें पसंद करेगा और इस सविता की तरह हमारी भी शादी होने में परेशानी
आएगी मां दीदी बिल्कुल ठीक कहती है और फिर दीदी की जरूरत भी नहीं है मैं अकेले ही
पिताजी का ठेला संभालने के लिए काफी हूं पिताजी भी तो अकेले ही अपना ढेला संभालते
थे
अभी वैसे भी वहां
ज्यादा ग्राहक नहीं आते तो इतने लोगों की जरूरत नहीं पड़ेगी तो देखना मां मैं सब
कुछ अकेले ही संभाल लूंगी ऐसा कहकर सविता अपने पिताजी के ठेले को फिर से खोलना
शुरू कर देती है सविता गुपचुप बेच रही थी और धूप लगातार बढ़ती जा रही थी इस धूप
में सविता को चक्कर आने लगता है वो गर्मी से तप रही थी और सविता चक्कर खाकर गिर
पड़ती है आसपास के कुछ लोगों ने उसे उठाया और उसके ऊपर पानी का छिड़काव किया और
उसे उठाकर बैठाया और बोलने लगे अरे ओ सविता बिटिया इतनी धूप में क्यों ठेला लगा
रही है तेरी नाजुक काया इतनी तेज धूप के लिए नहीं बनी है जा बेटा घर लौट जा बेकार
में तबीयत बिगड़ जाएगी तेरी वो औरत ऐसा कहकर वहां से चली जाती है और उसके बाद
सविता अब अपने मन ही मन में सोचने लगती है नहीं नहीं मैं घर कैसे जा सकती हूं मुझे
तो इस कड़कती धूप की आदत डालनी ही होगी मेरे घर में मेरे सिवा अब कमाने वाला कोई
भी नहीं बचा है मैं अपनी दोनों बहनों और मां को ऐसे अकेले नहीं छोड़ सकती हूं
मुझे उनके लिए कुछ
ना कुछ तो करना होगा पिताजी भी तो कितनी हिम्मत करते थे और मैं भी उनकी बेटी हूं
मुझ में भी उतनी ही हिम्मत होनी ही चाहिए और यही सोचकर सविता फिर से गुपचुप और चाट
बेचने में लग जाती है और आवाज लगा लगाकर गुपचुप और चाट बेचने लगती है गुपचुप खा लो
गुपचुप चाट खा लो गरमा गरम चाट मजेदार चटपटी चाट खा लो ऐसी चाट और कहां सविता की
आवाज को सुनकर बहुत सारे ग्राहक उसके पास आते हैं भले ही गर्मी जितनी थी लेकिन
सविता में जोश की कोई कमी नहीं थी सविता सभी को गुपचुप और चाट खिलाती है सविता के
हाथों का स्वाद भी उसके पिता की तरह ही बहुत अच्छा था क्योंकि वो सारी चाट और
गुपचुप प्रेम पूर्वक जो बनाया करती थी
ग्राहकों को उसकी
गुपचुप और चाट बहुत पसंद आती है और एक लड़की ने सविता से कहा सविता दीदी तुम्हारे
हाथों की गुपचुप और चाट खाकर तो मजा ही आ गया तुम तो बहुत ही स्वादिष्ट गुपचुप और
चाट बनाती हो अपने पिताजी से भी ज्यादा अच्छी ऐसे ही सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था एक
दिन की बात है पड़ोस की मुनिया आंटी सविता के घर आती है और उसकी मां के पास आकर
कहने लगती है अरे सविता की मां कैसी है तू और तेरी बेटियों का क्या हालचाल है पिता
की साल के बिना सही तो रह रही है ना सब हां मुनिया ताई मैं तो अच्छी हूं तुम सुनाओ
तुम कैसी हो और कैसे आना हुआ आज यहां पर सविता की मां मैं कह रही थी कि तेरी
बेटियों के लिए एक बड़ा ही अच्छा रिश्ता लाई हूं लड़का शहर में इंजीनियर है और
बड़े ही अच्छे लोग हैं वो तो तेरे घर की दोनों बेटियों को देखने के लिए आना चाहते
हैं अगर बात जंग गई तो तू अपनी एक बेटी का हाथ इस साल मिला कर ही देगी और उसे उसके
घर विदा कर देगी ठीक है मुनिया ताई जैसी आपकी और प्रभु की इच्छा मैं अपनी दोनों
बेटियों को दिखा दूंगी
उन्हें जो भी पसंद आएगी हम उसी के रिश्ते की बात आगे चला
लेंगे अब अगले दिन लड़के वाली सीमा और नेही को देखने के लिए घर आते हैं सविता ने
भी उन लोगों के लिए बहुत अच्छे नाश्ते और भोजन का प्रबंध किया हुआ था सविता बहुत
उत्सुक जो थी सभी ने नाश्ता किया और भोजन भी खाया और बहुत सारी बातें की और उसके
बाद में लड़के की मां ने कहा अरे भाई मुझे तो आपकी दोनों बेटियां पसंद है अब आप
सोच समझ कर बता देना कि आप कौन सी बेटी का विवाह करना चाहते हैं हम उसी से अपने
बेटे की शादी करवा देंगे क्योंकि आपकी दोनों ही बेटियां बहुत सुंदर है और हमारे मन
को भा गई है ऐसा कहते लड़के वाले चले जाते हैं सीमा और निधि दोनों को ही वो लड़का
बहुत पसंद आता है उनके जाने के बाद में अब सीमा ने निधि से कहा मां निधि मुझे वो
लड़का बहुत पसंद आया है
आप तो मेरा ही उससे
विवाह करवा दो तुम्हारा क्यों मेरा क्यों नहीं मां आप तो उसे मेरा ही विवाह करवा
दो इस तरह दोनों ही बहनें एक लड़के को लेकर आपस में तकरार करने लगती हैं और उनकी
तकरार होते देखकर सविता बोल उठी अरे सीमा दीदी निधि दीदी आप दोनों आपस में झगड़ा
क्यों कर रही हैं देखो लड़का तो एक ही है और विवाह भी आप दोनों में से एक का ही हो
सकता है तो मां क्यों ना हम सीमा दीदी का विवाह करवा दें उससे आखिर सीमा दीदी बड़ी
है और उनका विवाह पहले होना चाहिए और इसके बाद हम कोई और अच्छा सा लड़का देखकर
निधि दीदी की भी शादी करवा देंगे हां सविता तू बिल्कुल सही कहती है हम ऐसा ही करते
हैं सीमा पहले बड़ी है तो पहले शादी भी सीमा की होनी चाहिए निधि के लिए जो उसके
नसीब में लड़का होगा उसे मिल ही जाएगा लेकिन मां मैं कह रही थी कि निधि मैंने कह
दिया ना सीमा दीदी की ही शादी होगी उस लड़के से अब तू बेकार में यहां रूसने का
प्रोग्राम मत बैठा और सीमा तुम भी सविता से अच्छे से सारे काम सीख लो अब तुम्हें
दूसरे घर जाकर मेरी नाक नहीं कटवानी है
जिसके बाद अब सभी
घर वाले सविता की शादी के इंतजाम में लग जाते हैं और बहुत मेहनत करके पैसों का
इंतजाम करते हैं उसके बाद बड़े ही धूमधाम से अपनी बहन सीमा का ब्याह कर देती है
सीमा ब्याह करके अब खुशी-खुशी अपने ससुराल विदा हो जाती है और सविता फिर से वापस
अपनी दुकान लगाने में जुट जाती है एक दिन की बात है निधि अपने कमरे में बैठी हुई
थी और वह सीमा की शादी से बहुत जल रही थी और उसे सारा गुस्सा सविता पर आ रहा था
क्योंकि सविता के कहने पर ही उनकी मां ने यह फैसला किया था निधि ने गुस्सा होते
हुए खुद से कहा सविता ने मेरे साथ अच्छा नहीं किया उसने मेरी जगह सीमा दीदी का
विवाह करवा दिया अगर आज वो मेरा विवाह करवा देती तो बड़ी शान और शौकत से आज मेरी
विदाई हुई होती लेकिन कोई बात नहीं मैं उस सविता से इसका बदला जरूर लूंगी वो काली
कलोटी मेरी बहन जिंदगी भर याद रखेगी कि उसने मेरे साथ कितना गलत किया है और इसका
हर जाना तो उसे भुगतना ही पड़ेगा अगले दिन निधि सविता के पास गई तो सविता गुपचुप
और चाट का मसाला तैयार कर रही थी तभी निधि ने भोली सूरत बनाकर सविता से कहा सविता
तुम क्या कर रही हो लाओ मैं भी तुम्हारी मदद करवा लेती हूं
ऐसा करो यह मसाला
तो मैं बना देती हूं तुम कोई और तैयारी कर लो सारा दिन तुम अकेले इस ठेले पर खड़ी
रहती हो हमें भी तुम्हारी थोड़ी मदद करवा लेने दिया करो अरे दीदी आप मेरी मदद
करोगी मुझे तो बहुत खुशी हो रही है ठीक है आप यह मसाला तैयार करो तब तक मैं बाकी
के काम अच्छे से देख लेती हूं ताकि जब ग्राहकों की भीड़ लगे तो उन्हें किसी भी तरह
की कोई परेशानी ना हो और सारे ग्राहक हमारी गुपचुप और चाट आराम से खा पाए और ऐसा
कहकर सविता चली जाती है और निधि चुपचाप से सविता के बनाए हुए मसाले में जमाल गोटा
मिला देती है अब सविता ठेला लेकर चली जाती है और गुपचुप और चाट बेचने लगती है उसकी
दुकान पर बहुत ही जल्द ग्राहकों की भीड़ भी जुट जाती है
बहुत सारे लोग गुपचुप और चाय खाने के लिए आते हैं अब शाम के
समय सविता की ठेली पर अचानक ही एक पुलिस ऑफिसर आता है और वो पुलिस वाला बोलता है
सुनो सविता तुम्हारा ही नाम है क्या जी इंस्पेक्टर साहब मेरा ही नाम सविता है
बताइए कोई बात हो गई है क्या सविता तुम तो गुपचुप और चाट बेचती हो मैंने सुना है
कि उसमें मिलावट करती हो बहुत सारे लोगों का तुम्हारा गुपचुप और चाट खाकर पेट खराब
हो गया है कई लोगों की तबीयत तुम्हारी इस चाट को खाने की वजह से खराब हो गई है
इसलिए कुछ लोगों ने पुलिस स्टेशन जाकर कंप्लेंट की है अब तुम्हें हमारे साथ पुलिस
स्टेशन चलना होगा वो भी अभी इसी वक्त लेकिन इंस्पेक्टर साहब मैं तो बहुत दिनों से
बल्कि महीनों से यह गुपचुप और चाट बेचती हूं कभी कोई भी शिकायत नहीं आई अगर ऐसा
होता तो कोई तो ग्राहक आकर मुझसे इस बारे में शिकायत करता मैंने अपने गुपचुप और
चार्ट में कुछ भी मिलावट नहीं की है
साहब इसका फैसला तो
पुलिस स्टेशन जाने के बाद ही होगा यह सब कुछ मैं तुम्हें अभी यहां पर नहीं बता
सकता तुम्हारे गुपचुप और चार्ट के सैंपल की जांच भी होगी तभी पता चल पाएगा कि तुम
सच बोल रही हो या झूठ सैंपल की जांच के बाद सब सामने आ जाएगा इसके बाद में ऐसा
कहकर पुलिस वाला सविता को पकड़ कर थाने ले जाता है और उसके गुपचुप और चाट के सैंपल
का टेस्ट होता है और टेस्ट में वो फेल हो जाती है और उसे जेल में डाल दिया जाता है
सविता बेचारी जेल के अंदर बिलक-बिलख कर रो रही थी दूसरी तरफ जब कविता की मां को यह
बात पता चलती है तो वो बहुत दुखी होती है और खुद ही कहती है मेरी बेटी में तो कोई
दोष नहीं था क्या पता यह पुलिस वाले इसे क्यों ही पकड़ कर ले गए उसके पिता के जाने
के बाद सविता ने सब कुछ बहुत अच्छे से संभाल लिया था इस घर के मर्द की तरह सारी
जिम्मेदारियां निभाई थी लेकिन अब मेरी बच्ची जेल चली गई है ना जाने घर का खर्चा
कैसे चलेगा निधि बेटा अब तो तुझे ही दुकान लगाकर घर के खर्चे को संभालना होगा
सविता की जमानत भी करवानी होगी और उसके लिए पैसे भी तो जुटाने हैं ये क्या कह रही
हो मां मैं ठेला लगाऊंगी मुझे तो धूप में काम करने की आदत नहीं है तो मैं ये काम
कैसे कर सकती हूं
और फिर क्या बेटा क्या फिर तू तो जानती है कि सविता अब जेल
चली गई है और मेरी भी तबीयत बिल्कुल भी ठीक नहीं रहती है इसीलिए मैं तो थैले पर
खड़ी नहीं हो सकती ना अब तो तुझे ही यह सब कुछ संभालना है घर में तो राशन भी खत्म
हो गया है भला हम लोग भूखे प्यासे कब तक इस तरह अपना गुजारा कर पाएंगे अब तुझे ही
ठेला चलाना होगा अब उसके बाद निधि के पास कोई जवाब नहीं था निधि अगले दिन धूप में
गुपचुप और चाट का ठेला लगाती है धीरे-धीरे दोपहर के पहर के साथ धूप बढ़ती जा रही
थी निधि को बहुत तेज गर्मी लग रही थी वो बार-बार पानी पीकर अपनी प्यास बुझा रही थी
आखिर में निधि को चक्कर आ जाता है और वो गिर पड़ती है बड़ी मुश्किल से निधि खुद ही
लड़खड़ाते हुए अपने आप को संभालती है और छांव में जाकर बैठ जाती है जिसके बाद वो
अपने मन में सोचती है
हे भगवान ये मुझे
क्या हो गया मैंने सिर्फ एक दिन ये ठेला लगाया और मेरी इतनी तबीयत खराब लग रही है
कि मुझसे यह काम ही नहीं किया जा रहा और मेरी बेचारी छोटी बहन हर दिन ठेला लगाकर
हम लोगों का खर्चा उठाती थी यहां तक कि उसने बड़ी बहन की शादी भी करवा दी मैंने ही
बहुत बड़ी गलती की मैं अभी पुलिस स्टेशन जाऊंगी और पुलिस वालों को सारा सच बता
दूंगी मेरी गलती की सजा मेरी भोलीभाली बहन नहीं भुकटेगी उसने हम लोगों के लिए बहुत
कुछ किया है और मैंने थोड़े से गुस्से के चलते उसके साथ कितना बुरा कर दिया इसके
बाद निधि पुलिस स्टेशन में जाती है और सारी बातें पुलिस वालों को सच सच बता देती
है फिर पुलिस वाले उस पर बहुत नाराज भी होते हैं और इंस्पेक्टर निधि को जवाब देता
है अब फिर तो मैं तुम दोनों बहनों को छोड़ रहा हूं लेकिन आज के बाद ऐसा कुछ भी हुआ
तो मैं तुम दोनों को अंदर कर दूंगा और उसके बाद कोई भी तुम्हें यहां से बाहर नहीं
निकाल पाएगा समझे अब जाओ यहां से और मेरे कानों तक तुम्हारी कोई भी शिकायत नहीं
आनी चाहिए इस बात का खास ख्याल रखना चलो जाओ निधि और सविता अब घर की ओर आ जाती हैं
मां सविता को देखकर बहुत खुश हो जाती है और दौड़कर उसे गले से लगा लेती है
और खूब बिलक-बिलख
कर रोती है निधि भी अपनी मां को पूरी बात बता देती है और कहती है मुझे माफ कर दे
सविता और मां तुम भी मुझे माफ कर दो मैंने बहुत बड़ी गलती की अब मैं ऐसा कभी नहीं
करूंगी और हां सविता आज के बाद तू अकेले ढीला नहीं लगाएगी मैं भी हर दिन तेरे साथ
चला करूंगी जब मैं थक जाऊंगी तो तू ढेला लगाना और जब तू थक जाएगी तो मैं ढेला
संभाल लूंगी लेकिन अब हम दोनों बहनें मिलकर काम करेंगी और ऐसे ही दोनों बहनें
मिलकर काम करने लगती हैं दूसरी तरफ नवरात्रि आने वाली थी सीमा के ससुराल में जहां
सीमा बहुत खुश थी वहीं एक दिन भीमा की सास ने सीमा के पास आकर कहा अरे सीमा बहू
तुझे पता है ना कि नवरात्रि आने वाली है हां मां जी मैं जानती हूं मैंने तैयारियां
शुरू कर दी है और इस बार तो मैं पूरे व्रत रखूंगी मेरी मां ने मुझे नवरात्रि के
व्रत की सारी अहम बातें अच्छे से बताई हैं आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए वो सब तो
ठीक है सीमा बहू लेकिन तेरी शादी को इतने दिन हो गए हैं पर तेरे घर से अभी तक
तुझसे मिलने भी कोई नहीं आया और ना ही तेरे लिए कोई उपहार या भेंट आई है जबकि
लड़की के मायके से तो हर त्यौहार में उपहार और भेंट आने आवश्यक होते हैं मेरी भी रिश्तेदारों
में कोई इज्जत है
भला मैं क्या मुंह दिखाऊंगी सबको तू ऐसा कर तू अपने मायके
वालों को फोन करके बोल दे कि नवरात्रि से पहले पहले तेरे लिए उपहार भिजवा दे वरना
तू यहीं रहना घर में और यहीं नवरात्रि का उपवास रखना ना तुझे मैं मंदिर लेकर
जाऊंगी और ना ही किसी रिश्तेदार के घर मैं नहीं चाहती कि तेरी गरीब परिवार की वजह
से मेरी थूथू हो सीमा की सास ऐसा कहकर चली जाती है सीमा रोने लगती है और फिर अपने
मन ही मन में सोचने लगती है मेरे पिताजी तो है ही नहीं और बेचारी सविता वो जैसे
तैसे करके घर का खर्चा चलाती है उसने अपने बचे हुए पैसों से मेरी शादी करवा दी यह
भी नहीं सोचा कि उसके बाद उन लोगों का क्या होगा अब भला मेरे लिए उपहार कौन लाएगा
नहीं नहीं चाहे जो हो जाए मैं अपने घर किसी को कॉल नहीं करूंगी मैं उन्हें और
परेशान नहीं कर सकती मेरी जिंदगी बनाने के लिए वो जितना कर सकते थे उन्होंने कर
दिया है वहीं दूसरी तरफ सविता अपनी मां से कहती है
Comments
Post a Comment