रोज की तरह मजदूरी से लौटती हुई गीता थककर एक
पेड़ की नीचे बैठ गई तभी उसकी नजर सामने एक पत्थर पर पड़ी जो शिवलिंग जैसा लग रहा
था वो सोचने लगी अरे यह तो शिवलिंग लग रहा है पर लगता है यहां सेवा करने वाला कोई
नहीं है अरे यह तो भोलेनाथ का रूप है मैं इनकी सेवा करूंगी भोलेनाथ बहुत जल्दी
प्रसन्न हो जाते हैं कल से रोज सुबह काम पर जाने से पहले इनकी पूजा करूंगी अगर
भोलेनाथ प्रसन्न हो गए तो मेरा भी जीवन बदल जाएगा यह सोचकर गीता उठी शिवलिंग के
पास पहुंची उसके आगे मत्था टेका और अपने घर चली गई
अगली सुबह नहा धोकर
गीता घर से निकली और जैसा कि उसने सोचा था शिवलिंग के पास गई उस पर जल चढ़ाया फूल
चढ़ाए प्रार्थना की मथा टेका और काम पर चल दी गांव शकरपुर की रहने वाली गीता एक
अनाथ लड़की थी गरीब थी इसलिए मेहनत मजदूरी के सिवा कोई रास्ता नहीं था इस बार उसे
एक खेत में फसल कटाई का काम मिला था जिसे वह दूसरी मजदूरों के साथ कर रही थी काम
करते करते उसकी बात अपनी सहेली मीना से हुई गीता कुछ सोचा है तूने यह काम तो कल
खत्म हो जाएगा उसके बाद क्या होगा भोलेनाथ सब अच्छा ही करेंगे मीना ना कोई ना कोई
रास्ता निकल ही आएगा मैंने सुना है कि यहां के जमींदार साहब अपनी हवेली का काम
करवा रहे हैं उन्हें भी मजदूरों की जरूरत है
मैं तो परसों वहां
जाकर बात करूंगी तू भी आ जा ना ठीक है तू जा रही है तो मैं भी चली जाऊंगी यह कहकर
गीता और मीना अपने अपने काम में लग गई दो दिन बाद सुबह-सुबह काम की तलाश में
निकलने से पहले रोज की तरह गीता ने शिवलिंग पर जल चढ़ाया पूजा की और प्रार्थना की
भोलेनाथ आज मैं एक नए काम के लिए जमींदार के यहां जा रही हूं मेरी मदद करना अपना
आशीर्वाद देना कि मेरा काम हो जाए भोलेनाथ का आशीर्वाद लेकर गीता जमींदार के यहां
पहुंच गई जमीदार ने गीता को काम समझाया देखो भाई हमारा बड़ा घर बन रहा है यहां कुछ
मस्तूर की जरूरत है घर बनाने के काम में भी और कटी हुई फसल को संभालने के काम के
लिए भी तुम्हें दो वक्त के खाने के साथ रोज के 100 मिलेंगे पर हां
काम ईमानदारी से करना होगा जी सरकार मैं पूरी ईमानदारी और पूरी मेहनत से काम
करूंगी
जमींदार ने गीता को काम पर रख लिया गीता अपनी सहेली मीना और
दूसरे मजदूरों के साथ मिलकर काम करने लगी कभी ईट उठाना कभी गारा मिट्टी मिलाना कभी
गोदाम में जाकर फसलों को ठीक से रखना कई दिनों तक ऐसे ही काम चलता रहा गीता खुश थी
कि खाने को तो मिल ही रहा है जब काम खत्म होगा तो इकट्ठे पैसे मिल जाएंगे और वो
उसके काम आएंगे वो भोलेनाथ से भी अपनी खुशी को बताती है भोलेनाथ आपकी कृपा से
अच्छा काम मिल गया है मेरे अच्छे पैसे बन जाएंगे मैंने तो सब तय कर लिया है जो
पैसे मिलेंगे उनमें पहले तो घर की छत बनवाऊंगा कर रखूंगी अगर आगे चलकर कोई काम ना
मिला तो अपना ही कुछ काम कर लूंगी मेरी मां भी सब्जियां बेचा करती थी मैं भी वही
कर लूंगी बस ऐसे ही अपनी कृपा बनाए रखना भोलेनाथ जय जय भोलेनाथ यह कहकर गीता ने
शिवलिंग के आगे मथा टेका और काम पर चल दी आखिर एक दिन काम खत्म हो ही गया उस दिन
गीता बहुत खुश थी मीना पूरी 40 दिन हो गए हैं 100 दिहाड़ी के हिसाब
से तो पूरे 4000 बन गए हां गीता जब पैसे मिल जाए तो उन्हें संभाल कर रखना
मुसीबत के समय काम आएंगे काम खत्म होने पर जब गीता और मीना जमींदार के पास पैसे
मांगने पहुंची तो जमीदार गुस्से से भरकर बोला क्या पैसे कैसे पैसे मजदूरी के पैसे
सरकार आपने कहा था कि जितने दिन मजदूरी होगी उतने दिन खाना मिलेगा और साथ में 100 रोज के हिसाब से
मजदूरी मिलेगी अरे क्या बकवास करती हो मैंने ऐसा कब कहा अरे मैंने कहा था
मजदूरी का काम है तुम दिन भर मजदूरी करोगी और बदले में
तुम्हें दो वक्त का खाना मिलेगा तुमने मजदूरी की मैंने खाना दिया हिसाब बराबर अब
चलो निकलो यहां से अगली बार कोई काम होगा तो आदमी भेजकर बुला लूंगा नहीं सरकार
आपने कहा था कि दो वक्त का खाना मिलेगा और 00 रोज के हिसाब से मजदूरी
चाहे तो मीना से भी पूछ लीजिए सरकार अरे मुझे क्या दूध पीता बच्चा समझा है हैं साथ
में इसे भी सिखा पढ़ा कर ले आई अरे मैं क्या तुम जैसी औरतों की चालाकी नहीं समझता
पहले पेट भर कर खाना खा लिया अब चालाकी से मुझसे पैसे ठना चाहती हो चलो निकलो यहां
से कहीं ऐसा ना हो जाए कि मुझे गुस्सा आ जाए और मैं कुछ कर बैठूं आओ यहां से गीता
और मीना को समझ आ गया था कि यह इंसान अब पैसे नहीं देने वाला यहां से चलने में ही
भलाई है
गीता और मीना आंखों में आंसू लिए अपने अपने घर चली गई गीता
अपने घर चरपा पर लेटे लेटे अपनी टूटी छत की ओर देख रही थी उसकी आंखों में आंसू थे
वह अपने आप से कहने लगी थोड़े दिनों में बारिश शुरू हो जाएगी मैंने सोचा था मजदूरी
के पैसे मिलेंगे तो छत की मरम्मत करवा लूंगी पर जमींदार ने तो पैसे देने से ही मना
कर दिया अब मैं क्या करूंगी इसी तरह आंखों में आंसू लिए गीता अपने आने वाले कल के
बारे में सोच रही थी तभी उसे अपनी मां की कही बात याद आई बेटा जिसका कोई नहीं होता
उसका ईश्वर होता है जब समस्या का कोई हल ना निकले तो ईश्वर से प्रार्थना करो वह हर
समस्या सुलझा है मां ठीक कहती थी मुझे भोलेनाथ से अपनी समस्या बतानी चाहिए
वही कोई रास्ता
निकालेंगे अगली सुबह गीता रोज की तरह शिवलिंग के पास पहुंची जल चढ़ाया बेल पत्ते
और फूल चढ़ाए और आंखों में आंसू लिए प्रार्थना करने लगी भोलेनाथ मेरे साथ अन्याय
हुआ है मेरी 40 दिन की मजदूरी जमींदार ने मार ली है मुझे मेरी मजदूरी दिलवा
दो भोलेनाथ रोते रोते गीता ने अपना सिर भोलेनाथ के आगे टिका दिया तभी गीता के
कानों में आवाज पड़ी उठो पुत्री भोलेनाथ आप हां पुत्री मैंने तुम्हारी प्रार्थना
सुन ली है तुम चिंता मत करो मेहनत की कमाई कभी कहीं नहीं जाती तुम्हारी 40 दिन की भक्ति भी
पूरी हुई है और 40 दिन की मजदूरी भी तुम आराम से घर जाओ तुम्हारी
हक की कमाई खुद तुम्हारे घर चलकर आएगी गीता ने अपने आंसू पोछे और चेहरे पर मुस्कान
लिए घर वापस आ गई
उधर जमींदार अपनी
तिजोरी में नोट गिन गिन कर रखे जा रहा था ये एक और गड्डी हो गई अच्छा हुआ की सारी
फसल अच्छे दामों पर बाजार में बिक गई गोदाम में पड़ी रहती तो देखभाल पर भी खर्चा
होता और कुछ खराब भी हो जाती किस्मत साथ दे तो ऐसे ही धन बरसता है बढ़िया ये ये गई
अंदर यह कहकर जमीदार ने तिजोरी का दरवाजा बंद किया और खुशी से सीटी बजाता बाहर की
ओर चला तभी उसकी बेटी सुवेला अंदर आई पिताजी पिताजी पिताजी मुझे कुछ पैसे चाहिए
बहुत दिन हो गए मैंने अपने लिए कुछ नए कपड़े नहीं खरीदे और मुझे कान के बुंदे भी
लेने हैं
मुझे कुछ पैसे
दीजिए ना हां क्यों नहीं क्यों नहीं अपनी बेटी के लिए पैसों की क्या कमी है अभी
देता हूं रुक जाओ जमींदार ने अपनी कमर में खूसी हुई चाबी निकाली और तिजोरी खोली और
एक गड्डी उठाई ये क्या ये तो कोरे कागज के टुकड़ों की गड्डी लगती है ये क्या हो
गया ये कैसे हो सकता है जल्दी से उसने वो गड्डी फेंकी और दूसरी गड्डियां देखने लगा
पर सारी गड्डियां वैसी ही थी एकएक कर उसने सारी गड्डियां फेंक दी कमरे में चारों
ओर सफेद कागज के टुकड़े फैल गए ये यह भी कागज के टुकड़े की यह भी कागज का टुकड़ा
ये मेरे साथ क्या हो गया इतना बड़ा धोखा मैं तो बर्बाद हो गया
मैं तो बर्बाद हो गया यह क्या पिताजी आपकी तिजोरी में नोटों
की जगह यह सफेद कागज के टुकड़े अरे वही तो बेटी समझ नहीं आ रहा यह हुआ कैसे मैंने
तो फसल बेचकर सारे नोट देख कर लिए थे मेरे साथ बहुत बड़ा धोका हुआ है बेटी सारे
पैसे मिट्टी हो गए सारे पैसे सारे पैसे काग के टुकड़े में बदल [हंसी] गए अरे
घबराइए मत पिताजी आपकी दूसरी तिजोरी में गहने तो पड़े हैं ना उनके सहारे काम चल
जाएगा तुम सही कहती हो बस उस तिजोरी में सब कुछ ठीक हो देखता हूं यह कहकर जिमीदार
ने अपनी दूसरी तिजोरी खोली जिसमें गहनों की जगह सांप लरा रहे थे जमीदार की बेटी यह
देखकर चीख मार करर बाहर की ओर दौड़ी आ सांप सांप पिताजी सांप जमीदार ने अपने डर पर
काबू पाते हुए झड़ से तिजोरी का दरवाजा बंद किया और वह बरी तरह से रोने लगा सा
मेरा सारा सोना सारे सेवर कहां गए ये साप के सेवर गए ये क्या हो गया मैं तो कहीं
का ना रहा ये क्या हो गया
रोते-रोते जमीदार की नजर अपने सामने दीवार पर लगी भोलेनाथ
की तस्वीर पर गई वह तेजी से दौड़ा और रो रो कर कहने लगा भोलेनाथ भोलेनाथ भोलेनाथ
भलेनाथ क्या किया भोलेनाथ मैं तो पूरी तरह बर्बाद हो गया अपने भक्त के साथ ऐसा
करना आपको शोभा देता है क्या तभी वहां तेज प्रकाश हुआ जमीदार ने देखा कि साक्षात
भोलेनाथ सामने खड़े हैं और तुमने जो गीता मीना और दूसरे मजदूरों के साथ किया वैसा
भी कोई करता है क्या दूसरों का हक मारकर कभी कोई नहीं पनपता उसके सारे पैसे किसी
ना किसी बहाने पानी में बह जाते हैं उसके काम नहीं आते मुझसे बड़ी भूल हो गई
भोलेनाथ मुझसे बड़ी भूल हो गई आप मुझे आदेश दें आप जैसा कहेंगे मैं वैसे ही करूंगा
भोलेनाथ हम तो ठीक है
सारे मजदूरों को उनका हक दो जितने पैसों का वादा किया था उन्हें वो सब दो और गांव में एक लंगर की भी व्यवस्था करो कभी किसी मजदूर के पास खाने को पैसे ना हो तो व वहां खा ही लेगा ऐसा ही होगा भोलेनाथ ऐसा ही होगा भोलेनाथ तो जाओ देखो तुम्हारा धन पहले जैसा हो गया है यह सुनते ही जमींदार ने कागज के टुकड़ों की ओर देखा जो फिर से नोट बन चुके थे उसने जल्दी से सबको तिजोरी में रखा दूसरी तिजोरी खोलकर देखा तो उसमें पहले की तरह जेवर भरे हुए थे जमीदार ने गीता और दूसरे मजदूरों को बुलाकर उनकी मजदूरी दी और गांव में एक लंगर का भी इंतजाम किया गीता ने अपनी छत मरम्मत करवा ली थी और अपनी सब्जी की रेढ़ी लेकर बेचने जाने से पहले वह शिवलिंग की पूजा अवश्य करती जल चढ़ाती और एक सब्जी भी अर्पित करती हे भोलेनाथ मेरी अच्छी कमाई करवाना और आशीर्वाद देना कि मेरी कमाई में बरकत भी हो और फिर सब्जी बेचने चल देती सब्जी ले लो सब्जी ताजा हरी हरी सब्जी
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