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राम नाम ने बदल दी किस्मत

  तुम धन्य हो हनुमान। तुम सचमुच धन्य ही हो। तुमने मुझसे संगीत विद्या सीखी और हनुमत संगीत के प्रणेता बन गए। तुमने सूर्यदेव से ज्ञान , विज्ञान और युद्ध विद्या सीखी और इतने महान महावीर बन गए। परंतु तुम इतने बड़े कवि हो यह बात तो कोई जानता ही नहीं था। महर्षि मैं कवि कहां ? मैं तो प्रभु श्री राम का तुच्छ सा भक्त हूं। बस तुम अपने आप को तुच्छ कहते हो। पूरे संसार में तुमसे बड़ा श्री राम का भक्त कोई नहीं है। हनुमान देवर्षि यह तो आपकी कृपा है और आपका पक्षपात आप अकारण ही मुझे महान बताते हैं। नारायण नारायण मैं असत्य नहीं कह रहा हनुमान जो मैं देखकर आया हूं वही सत्य बता रहा हूं। कौन सा सत्य देख आए हैं आप ? देवर्षि आप अचानक मौन क्यों हो गए ? सोच रहा हूं तुम्हें बताऊं या नहीं ? कहीं इस बात से तुम्हारे हृदय को आघात तो नहीं पहुंचेगा। हनुमान मैं बजरंग हूं महर्षि। मेरा शरीर वज्र का है। आप यह भली-भांति जानते हैं। आप मेरे हृदय को कोई आघात नहीं पहुंचा सकते।   बताइए। नारायण नारायण तुम गलत समझ रहे हो हनुमान। मैं तुम्हारे हृदय को तुमसे अधिक जानता हूं। वज्र शरीर होते हुए भी तुम्हारा हृदय फूल से भी अधि...

राम नाम ने बदल दी किस्मत

 तुम धन्य हो हनुमान। तुम सचमुच धन्य ही हो। तुमने मुझसे संगीत विद्या सीखी और हनुमत संगीत के प्रणेता बन गए। तुमने सूर्यदेव से ज्ञान, विज्ञान और युद्ध विद्या सीखी और इतने महान महावीर बन गए। परंतु तुम इतने बड़े कवि हो यह बात तो कोई जानता ही नहीं था। महर्षि मैं कवि कहां? मैं तो प्रभु श्री राम का तुच्छ सा भक्त हूं। बस तुम अपने आप को तुच्छ कहते हो। पूरे संसार में तुमसे बड़ा श्री राम का भक्त कोई नहीं है। हनुमान देवर्षि यह तो आपकी कृपा है और आपका पक्षपात आप अकारण ही मुझे महान बताते हैं। नारायण नारायण मैं असत्य नहीं कह रहा हनुमान जो मैं देखकर आया हूं वही सत्य बता रहा हूं। कौन सा सत्य देख आए हैं आप? देवर्षि आप अचानक मौन क्यों हो गए? सोच रहा हूं तुम्हें बताऊं या नहीं? कहीं इस बात से तुम्हारे हृदय को आघात तो नहीं पहुंचेगा। हनुमान मैं बजरंग हूं महर्षि। मेरा शरीर वज्र का है। आप यह भली-भांति जानते हैं। आप मेरे हृदय को कोई आघात नहीं पहुंचा सकते।

 बताइए। नारायण नारायण तुम गलत समझ रहे हो हनुमान। मैं तुम्हारे हृदय को तुमसे अधिक जानता हूं। वज्र शरीर होते हुए भी तुम्हारा हृदय फूल से भी अधिक कोमल है। तिनके सी भी चोट लगे तो विचलित हो उठते हो। नारायण नारायण। जय श्री राम। अब बात मत घुमाइए देवर्षि। ऐसा कौन सा सत्य है जिसे आप मुझसे छिपाना चाहते हैं? नारायण नारायण। मैं छिपाने से नहीं डर रहा हनुमान। बस इतना डर है कि बताने से कोई अनर्थ ना हो जाए। यदि अनर्थ होना है तो होने दीजिए। परंतु अब मेरे धैर्य की सीमा समाप्त हो रही है। कृपया शीघ्र बताइए देवर्षि। ठीक है हनुमान शायद मैंने तुमसे एक बात छिप रखी है। तुम्हारे प्रिय श्री राम के एक महान भक्त ने अपनी दिव्य दृष्टि से श्री राम के संपूर्ण जीवन की कथा देख ली है और उसी पर वो एक महाकाव्य रच रहा है। प्रभु श्री राम के जीवन पर महाकाव्य अद्भुत बात कहते हैं आप देवर्षि अर्थात वह भक्त पहले ही जान चुका है कि प्रभु श्री राम आगे क्या-क्या करने वाले हैं।

हां हनुमान और उस महाकाव्य का नाम है रामायण। रामायण धन्य हो वो राम भक्त। देवर्षि कृपया उस भक्त का नाम बताइए। महर्षि वाल्मीकि उनका जीवन कथा भी अत्यंत अद्भुत है। हनुमान मुझे महर्षि वाल्मीकि की जीवन कथा सुनाइए। महर्षि आओ हनुमान बैठो। मुझे पूरा विश्वास है कि उनकी कथा सुनकर तुम आश्चर्यचकित रह जाओगे क्योंकि कोई सोच भी नहीं सकता था कि रत्नाकर डाकू जैसा क्रूर व्यक्ति इतना महान ऋषि महाज्ञानी और राम भक्त बन सकता है। राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे अरे भाग्यवान तुम रुक क्यों गई और चुप क्यों हो गई भगवान का नाम लेती चलो मैं तो थक गई स्वामी अब और नहीं चला जा रहा हमसे और कितनी दूर है तीर्थ स्वामी अरे मुझे क्या पता मैं कौन सा रोज जाता रहता हूं बस भगवान का नाम लेती चलो और चलते चलो। चलते-चलते पहुंच जाएंगे।

और हां, भगवान के तीर्थ पहुंचने में शांति रखनी चाहिए। यह उतावलापन मत दिखाओ। अरे स्वामी, मैं तो बहुत थक गई। थोड़ी देर सुस्ता लेते हैं। अरे सुस्ताने की बात मत करो। यह जंगल लुटेरों का है। यहां का मशहूर रत्ना डाकू दिन दहाड़े यात्रियों को लूट लेता है। अरे बाप रे। तो फिर यहां रुकना ठीक नहीं। जल्दी चलिए यहां से। राधे राधे। राधे राधे। इतने सारे गहने। आज तो तेरे भाग जाग गए रत्ना। अरे रुक जा। ए रुक जा। उतार सारे गहने। नहीं तो जान से हाथ धो बैठोगे तुम दोनों। मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं। भगवान के लिए हमें छोड़ दो। भगवान कहां है भगवान? यहां कोई भगवान नहीं है। कोई तेरी रक्षा नहीं करेगा। जल्दी से चुपचाप सारे गहन उतार दे। हम राधा नाम लेकर तीर्थ यात्रा करने निकले हैं। तुझ जैसे डाकू से भगवान हमारी रक्षा करेंगे। मैं तुझे कुछ नहीं दूंगा। कुछ नहीं देगा। इतने सारे गहनों में से कुछ भी नहीं देगा। कहता था कि भगवान तेरी रक्षा करेंगे। अरे इनका भगवान देख कितना सोना लूटा मैंने। इतना तो महीने भर में भी नहीं लूटता।

आज मेरी धंती प्रसन्न हो जाएगी। धंती ए धंती ये धंती ए बाबा देख तेरे लिए क्या लाया हूं। देख क्या लाया हूं। पहन लेगी तो रानी बन जाएगी। अरे अब देख क्या रही है? पहन के तो दिखा। बाबा आज दो धनवान तीर्थ यात्री जा रहे थे। मैंने दोनों को समाप्त कर दिया और सब लूट लिया। लगता है तू पहले से अब आगे बढ़ गया है। अब तू सारे दांव सीख गया है। बाबा तुझसे देखकर ही तो सीखा हूं। लेकिन तू मुझसे ज्यादा भाग्यशाली है। मुझे आज तक कभी ऐसा माल नहीं मिला। हां बाबा। आज तो सचमुच मेरा भाग्य जाग गया। अब तो तेरे भाग्य और भी जागेंगे बेटा। अरे वाह मां बाबा। देखो तो जरा बिल्कुल रानी जैसी लग रही है ना और सुन यह तो बस शुरुआत है कल तेरे लिए और भी गहने लाऊंगा रानी बना दूंगा रानी रत्ना तू कितना अच्छा है रे ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय नारायण नारायण परमपिता ब्रह्मा देव यह कैसा न्याय है आपका? भगवान के भक्त तीर्थ यात्रियों की हत्या देखकर भी आप मौन बैठे हैं।

 क्या हो गया है आपको? शांति शांति धारण करो नारद। अधर्म, हिंसा और हत्याओं की नींव पर ही धर्म और भक्ति जन्म लेते हैं। तुम तो संसार में ऐसी घटनाएं प्रतिदिन देखते हो। ना ना नारायण नारायण मैंने राक्षसों को धर्मात्माओं का संहार देखा है। परंतु तीर्थ यात्रियों की ऐसी जघन्य हत्या यह तो नहीं ब्रह्मदेव जिस तरह तुमने आज रत्ना डाकू के हाथों जो क्रूर हत्या देखी उसी से एक महान घटना का जन्म होगा और उसे जन्म देने वाले तुम ही होगे। नारायण ये ये क्या कह रहे हैं आप परमपिता? उस घटना का सूत्रपात कराने के लिए ही मैंने तुम्हारे भीतर रत्ना को देखने की प्रेरणा जगाई थी। अब तुम जाओगे रत्ना के पास उसके हाथों लूटने के लिए। जैसा आपकी इच्छा। नारायण मैं उस हत्यारे के पास क्या मुझे भी मरवाने भेजना चाहते हैं आप? शांति। तुम मेरे मानस पुत्र हो नारद। तुम्हें भला कौन मार सकता है? रत्ना में एक महान आत्मा निवास कर रही है। जो अधर्म, हिंसा और मोह के अंधेरे में भटक रही है। तुम उसे सत्य और ज्ञान का प्रकाश दिखाओ।

उसमें प्रेरणा जगाओ। फिर देखना रत्ना का हृदय कैसे परिवर्तन से भर उठेगा। यह असंभव है। रत्ना जैसा क्रूर, हत्यारा, लुटेरा, एक महान आत्मा इस बात पर मुझे विश्वास नहीं होता। कहीं आप मुझसे विनोद तो नहीं कर रहे। यदि तुम्हें ब्रह्मा की बात पर ही विश्वास नहीं तो समझ लो संसार में कोई भी सत्य विश्वास के योग्य नहीं। जाओ नारद जैसा मैंने कहा है वैसा ही करो। जाओ जो आज्ञा परमपिता कल्याण भव नारद तुम भी कितने मूर्ख हो। क्या आवश्यकता थी रत्ना की क्रूरता देखकर ब्रह्मा जी के पास जाने की? नारायण नारायण अब जो किया है उसका फल भुगतो। अब सोच क्या रहा है नारद? चलो नारायण नारायण। सुबह से शाम हो गई। एक भी राहगीर इधर से नहीं निकला। बाबा तो कह रहा था तेरे भाग्य जाग गए। अगर आज कुछ लेकर नहीं गया तो धंती को क्या मुंह दिखाऊंगा? नारायण नारायण नारायण नारायण नारायण रत्ना डाकू मेरा नाम कैसे जानता है रे तू पक्का पहले भी मेरे द्वारा लूट चुका है तो फिर यहां दोबारा लूटने क्यों आया है नारायण नारायण नारायण का नाम लो रत्ना ये मेरी तुमसे पहली मुठभेड़ है अच्छा तो मुझे दिखाने के लिए फूलों के गहने पहन रखे हैं अब जल्दी बता असली सोने और रत्नों के गहने कहां है? नारायण भक्त के पास तो केवल नारायण नाम का गहना होता है।

 यह सोने रत्न के गहने में कहां से लाऊं भैया? इस तंबूरे में क्या है? इस तंबूरे में तंबूरे में भी नारायण का नाम है। देखो सुनो। नारायण नारायण नारायण बोलो रे नारायण नारायण नारायण भज मन नारायण रे सुखदख दोनों छाया है सत्य एक ही नाम रे नारायण नारायण जग का ये सहारा रे चुप बिल्कुल कल भी भगवान का नाम लेने वाले दो यात्री यहां से निकले थे नारायण भक्त उनके पास बहुत गहने थे मैंने मार कर उन्हें लूट लिया नारायण नारायण अरे मारा क्यों मतलब मारा क्यों ऐसे ही लूट कर छोड़ देते ना मान ही नहीं रहे रे अब तू मान जा नारायण भक्तों के पास बहुत महंगे गहने होते नारायण नारायण यह तुमने सत्य कहा रत्ना भैया नारायण का नाम लेने वालों के पास मूल्यवान गहनों की कमी नहीं होती। मैं तुम्हें इससे भी अधिक मूल्यवान गहने दे सकता हूं। अगर तुम मेरी एक बात मान लो तो। कौन सी बात? पहले मेरी एक बात ध्यान से सुन लो। किसी की हत्या करके लूटने से बड़ा पाप और कोई नहीं होता।

यह पाप क्या होता है? मैं नहीं जानता किसी पाप को। मैंने तो आज तक नहीं देखा। पाप वही जो जीवन में बार-बार दुख दे और आगे बढ़ने ना दे। हां वही ना जैसे किसी को चोट लग जाए या तड़प-तड़प कर मर जाए वही ना। अपना किया पाप इतने तक सीमित नहीं रहता रत्ना। मर जाने के बाद भी वो पाप कर्म उस प्राणी का पीछा नहीं छोड़ता। मर जाने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ता। यह कैसे हो सकता है? जो बात तुम्हें पता नहीं वही तो बताने आया हूं। हम जब मर जाते हैं तो यह शरीर छोड़कर परलोक चले जाते हैं। परलोक यह परलोक क्या होता है? नारायण नारायण अब मैं तुम्हें इस समय परलोक तो नहीं ले जा सकता ना। मेरी बातों पर विश्वास करो रत्ना। तुम्हारी बातें सुनने में अच्छी लग रही है। मैं समझ गया। तुम जो कहोगे सच कहोगे। बोलो अब क्या कहना चाहते हो? रत्ना तुम जो यह लूट मार और हत्या करते हो किसके लिए? अपने लिए, अपनी घरवाली के लिए, अम्मा के लिए और बाबा के लिए। तुम्हारी लूट मार और हत्या से लाया हुआ धन उन्हें अच्छा लगता है ना? हां, बिल्कुल अच्छा लगता है बल्कि बहुत अच्छा लगता है।

 बहुत अच्छा लगता है। इसीलिए तुम्हारी पत्नी लूट का धन मिलने पर फूल की तरह खिल जाती है और तुम्हारा बाबा तुम्हारी बढ़ाई करता है। है ना? हां बिल्कुल तुम सही कह रहे हो। बिल्कुल ऐसा ही होता है। तो रत्ना लूट मार और हत्या से मिलने वाला पाप जो तुम्हें इस लोक और परलोक दोनों में मिलेगा उसमें भी क्या वे तुम्हारा साथ देंगे? हां क्यों नहीं देंगे? वो मेरे सुख-दुख के साथी हैं। नहीं देंगे वे तुम्हारा साथ। अगर विश्वास नहीं होता तो अभी जाकर पूछ आओ। मैं यहीं तुम्हारा इंतजार करूंगा। तुमने जो सोने के गहने देने का वचन दिया है, पहले वह दो फिर जाऊंगा। मैं तुम्हें इससे भी अधिक धन दूंगा। अच्छा अब समझा। तुम भागने का सोच रहे थे इसलिए गाने सुना रहे थे। अरे रत्ना अच्छा तुम ऐसा करो मुझे इस पेड़ से बांध दो। तुम जैसे लोगों के लिए मैं हमेशा एक रस्सी अपने पास रखता हूं। नारायण नारायण। जादू से छूट कर भागोगे तो नहीं? तुमने इतना कसकर बांधा है। रत्ना मुझे तुमसे स्नेह हो गया है। अभी तुम्हारी आत्मा पूरी तरह नहीं सोई है। अच्छा रत्ना याद है ना? क्या पूछना है घर वालों से? हां हां पूरी तरह याद है। अभी आता हूं। भागने की सोचना भी मत। बाबा ए बाबा रत्ना खाली हाथ आज मेरे लिए आज कुछ नहीं लाए क्या? नहीं मैं तुम सबसे कुछ पूछने आया हूं। क्या पूछने आया है? और आज कोई शिकार नहीं मिला क्या? नहीं।

 पहले ये बताओ तुम लोग परलोक में मेरा साथ दोगे या नहीं? रत्ना लूटमार करना तुम्हारा काम है। और तुमने ये किसने कहा कि इसमें दुख मिलेगा? हां। दुख मिलेंगे बिल्कुल यह सत्य है बिल्कुल अब तुम सब यह बताओ कि तुम सब मेरे पाप से मिलने वाले दुख में मेरा साथ दोगे या नहीं धंती मैं तुमसे पूछता हूं मैं तुम लोगों के लिए लूटमार करता हूं हत्या करता हूं उससे मिलने वाले पाप में तुम मेरा साथ दोगी ना हम तुम्हारा साथ नहीं देंगे तेरा काम है हमें सुखी करना दुखी करना नहीं और हम तुम्हारे साथ दुख क्यों उठाएं? धंती ठीक कहती है। तेरी करनी का फल तू भोगेगा। हम क्यों भोगे? तो मैं जो यह पाप करता हूं तुम उसके साथी नहीं हो। नहीं बिल्कुल नहीं। तू अपना काम करता है और उस पाप से हमें क्या लेना देना? तू यह भानू की बातें छोड़ और जल्दी जा। नहीं तो शिकार हाथ से निकल जाएगा। आज तूने कुछ नहीं लूटा। जा जल्दी जा। मतलब जो मैंने पाप किया उसमें यह कोई साथ नहीं देगा। मैं कोई धन या गहने लूट कर लाता था तो उसमें सब साथ देते थे। पर इसमें नहीं देंगे।

यह मेरे से क्या हो गया? मैंने कितने पाप कर दिए। अब मैं इसका प्रायश्चित कैसे करूंगा? यह मैंने क्या कर दिया? अरे कितना कसकर बांधा है इसने। अरे भाई रत्ना थोड़ा शीघ्र आ और इस झटपटाते नारद को छोड़ा। हे आ नारायण नारायण लगता है इसके घर वालों ने इसे सही उत्तर [संगीत] दिया है। क्या बात है रत्ना? चुप क्यों हो ऐसे? मेरा बंधन तो खोलो अब। अरे कुछ बोलते क्यों नहीं भाई? बता क्या है? तुम सही कह रहे थे। वो लोग मेरे पाप में साथ देने से मना कर चुके हैं। मेरा दुख मुझे [संगीत] ही भोगना पड़ेगा। तो रत्ना अपने इस दुख देने वाले पाप कर्मों को छोड़ दो। यह हत्याएं, यह लूटमार तुम्हें नरक के द्वार में धकेल देंगी। जहां तुम्हें जलने और छटपटाने के सिवाय और कुछ भी नहीं मिलेगा। और जहां तुम्हें बचाने वाला भी कोई नहीं होगा। यदि मैं लूट मार छोड़ दूं तो क्या मां बाबा और धंती भूखे नहीं मर जाएंगे। इसकी चिंता करने की तुम्हें कोई आवश्यकता नहीं है। अगर तुम अपने पाप कर्म छोड़ दो तो उनकी देखभाल भगवान करेगा। भगवान लेकिन कहां है भगवान? मैंने तो आज तक उसे देखा नहीं। मैं तुम्हें दिखाऊंगा भगवान। वो बड़ा दयालु है। दुखियों का दुख दूर करता है और भूखों का पेट भरता है। मैं तुम्हारे उस भगवान से मिलना चाहता हूं। और तुमने अभी तक अपना नाम नहीं बताया। मेरा नाम? मेरा नाम है नारद। नारायण भक्त नारद। अरे मेरा तो काम ही है भक्तों को भगवान से मिलाना।

 परंतु तुम उनसे इतनी आसानी से नहीं मिल सकते। अपने पाप के प्रायश्चित के लिए तुम्हें तपस्या करनी होगी। तपस्या कैसे करते हैं? मुझे उसके बारे में कुछ नहीं मालूम। मैं बताऊंगा तुम्हें। आओ मेरे साथ। आओ रत्ना। यह लुटेरों का बहाना छोड़ो। यह पहनकर यहां आसन लगाकर बैठ जाओ और कहते रहो राम राम राम और जब तक कहते रहो जब तक भगवान तुम्हारे पास ना आ जाए बोलो राम राम हां अब बोलो राम राम राम रा म राम मरा मराम अरे नहीं ऐसे नहीं राम राम राम राम राम भगवान के नाम से तुम्हारी आत्मा पवित्र हो जाएगी नारायण नारायण राम नाम भज ले राम नाम सुखधाम भज ले राम नाम सुखधाम भज ले राम नाम सुखधाम तेरा पूर्ण हो सब काम तेरा पूर्ण हो सब काम भज ले राम नाम सुख धाम भज ले राम नाम सुख धाम आ संत समागम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम रटना तुम्हारी तपस्या सफल हुई। अब तुम रटना नहीं तपस्वी वाल्मीकि बन चुके हो। अब वाल्मीकि बनकर बाहर आओ और हमसे वरदान प्राप्त करो। प्रणाम कल्याण भाव मैं मैं रटना नहीं तपस्वी वाल्मीकि हूं।

हां तपस्वी वाल्मीकि तुमने राम राम के जप से राम का नाम अमर कर दिया है। तुम्हारी सोई आत्मा जाग चुकी है और उसके साथ ही तुम्हारी दिव्य दृष्टि भी जाग उठी है। दिव्य दृष्टि हां इस दिव्य दृष्टि प्रत्यक्ष देख सकोगे और राम कथा स्वयं लिखोगे। मैं राम कथा लिखूंगा परंतु लिखना मुझे नहीं आता ब्रह्मदेव इस तपस्या के साथ ही तुम सब कुछ सीख चुके हो वाल्मीकि जो तुम्हें सीखना चाहिए। जैसे ही तुम लेखनी उठाओगे देवी सरस्वती [संगीत] तुम्हारी महान आत्मा में राम कथा का संचार करेंगी। तुम आदि कवि बनकर संस्कृत भाषा में अनुष्टुप छंद से राम कथा रामायण की रचना करोगे और महर्षि वाल्मीकि बनकर युगों युगों तक अमर हो जाओगे। मैं आपके इस वरदान को पाकर धन्य हो गया। ब्रह्मदेव जय श्री राम। मैं आपकी कथा प्रारंभ करते हुए आपको प्रत्यक्ष रूप से देख रहा हूं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को जो इस पृथ्वी तल पर दुष्टों का नाश करने और मनुष्य को एक नया आदर्श देने के लिए प्रकट हुए हैं। सारे संसार को शरण देने वाले भक्तों को अभय देने वाले परमानंद स्वरूप परमात्मा श्री राम को मैं वाल्मीकि नमन करता हूं। नारायण नारायण

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