हमारी साइकिल है फर्राटेदार लेकर जाती हमको गांव के उस पार ओ हो निकला हूं मैं करने दूध का व्यापार मनसुख सुनीता चाची के घर के बाहर साइकिल रोकता है और घंटी बजाता है हे काकी आ जाओ दूध ले लो लाओ भाई आज जरा आधा लीटर दूध ज्यादा दे देना मेरी बिटिया को खीर खाने का मन है हां हां अभी ले लो बढ़िया सी खीर बनाकर कर खिलाना बिटिया को। मनसुख फिर से साइकिल लेकर दूसरे घर दूध देने चला जाता है। अरे मनसुख भाई ये लो तुम्हारे दूध के पैसे। आज महीना पूरा हो गया ना? हां दीदी लाओ दो।
आपका हिसाब एकदम साफ रहता है। आप एकदम समय पर पैसे दे देती
हो। अरे मनसुख भैया, तुम गांव में
सबसे सस्ता दूध देते हो और रोज समय पर भी आते हो। तो फिर हमारा तो फर्ज बनता है ना
कि तुम्हें समय से तुम्हारे पैसे दें। अरे आपका धन्यवाद दीदी। अच्छा मैं चलता हूं।
हां। इस दूध वाले की ज्यादा तारीफ नहीं कर रही थी तुम। अरे तो और क्या? सच ही तो कह रही थी।
मैंने कुछ गलत कहा क्या? अरे मनसुख इतना
ईमानदार है बेचारा। पहले हम शहर से पैकेट वाला दूध मंगाते थे। वो कितना महंगा
पड़ता है और उसे लेने के लिए आपको इतनी दूर दुकान तक जाना पड़ता था। बेचारा मनसुख
तो घर तक दूध दे जाता है और पैसे भी शहर वाले दूध से कम लेता है और तो और अरे बस
बस भाग्यवान और ना बताओ मैं समझ गया कि मनसुख बहुत बेचारा और ईमानदार है।
अब मुझे माफ करो और जरा एक कप चाय पिला दो। हां हां अभी
लाती हूं। उधर मनसुख अपना सारा काम खत्म करके घर पहुंच जाता है। अरे आप आ गए? आज देरी हो गई। अरे पूछो
मत। साइकिल का टायर रास्ते में पंचर हो गया था। उसे ठीक कराने में बहुत देर लग गई।
ओहो। तो आप एक मोटर गाड़ी क्यों नहीं खरीद लेते? इस साइकिल पर काहे चलते हैं? जब ये इतनी खटारा है तो? ताकि मैं भोला, सीधा और गरीब लग सकूं।
क्या? क्या मतलब? अरे अगर मैं मोटर गाड़ी
से चलने लगा तो गांव वाले सोचेंगे नहीं कि इस गरीब दूध वाले के पास इतना पैसा आखिर
आया कहां से? हां। कहां से
क्या? दूध बेचकर और
कैसे? मनसुख उठकर खड़ा
होता है और सीधा अपने तबेले में जाता है। जहां मीना ने जानवरों का ताजा दूध निकाल
कर रखा था।
लेकिन सबको पता है
कि सिर्फ दूध बेचकर कोई मोटर गाड़ी खरीदने के लायक नहीं हो जाता है। मनसुख ताजा
दूध निकाल कर उसमें अरारोट मिलाने लगता है। अरे रुकिए रुकिए। ये दूध तो हमारे
इस्तेमाल का है। इसमें अरारोट क्यों मिला रहे हैं? अरे मूर्ख औरत कितनी बार तुमसे कहा है कि हमारे
इस्तेमाल का दूध अलग रखा करो। यहां तबेले में मैं सिर्फ बेचने वाला मिलावटी दूध ही
रखता हूं। जी जी माफ करिएगा। अभी हटा देती हूं। गांव वालों की सोच के विपरीत मनसुख
राम तो एक बहुत ही लालची और चालाक दूध वाला था। मीना दूध हटाकर ले जाती है। और
मनसुख हंसता हुआ खुद से कहता है, गांव वालों की नजर में मैं एक बेचारा गरीब दूध वाला हूं।
तो वहीं रहने दो।
मेरा असली चेहरा कभी किसी के सामने नहीं आ पाएगा। और मैं ऐसे ही मिलावटी दूध बेच
बेच कर बहुत सारा धन जमा करता रहूंगा। मनसुख की धोखेबाजी की गाड़ी ऐसे ही मजे से
चल रही थी। एक दिन उस गाड़ी में सवार होने के लिए कुछ और यात्री भी आ गए। एक दिन
मनसुख साइकिल से दूध बेचकर वापस घर जा रहा था। और फिर से उसकी साइकिल पंचर हो गई।
अरे यह खटारा तो नाक में दम कर रखी है। फिर से इसको बनवाना पड़ेगा। मनसुख छोटू
पंचर वाले की दुकान पर जाता है। अरे भैया फिर से आ गए आप। अरे अब तो आप एक नई
साइकिल ले ही लो। आपकी साइकिल का पंचर बनाते बनाते हम थक गए भाई। अरे कहां छोटू
भाई? घर में दाना पानी
चल जाए वही बहुत है।
अब कहां नई साइकिल
खरीदेंगे हम जैसे गरीब? छोटू साइकिल ठीक
करने लगता है और मनसुख वहीं खड़ा रहता है। बगल में एक भजिया वाले की दुकान थी। अरे
भैया इसे ठीक करने में 15-20
मिनट लगेगा। आप
कब तक खड़े रहेंगे? जाइए सामने जाकर
भजिए वाले की दुकान पर बैठ जाइए ना। अच्छा ठीक है। जब काम हो जाए तो मुझे बुला
लेना। मनसुख भजिया वाले के पास जाकर कहता है, लाओ भैया जरा एक प्लेट भुजिया खिलाओ। हां भैया अभी लो।
मनसुख के ठीक सामने दो आदमी बैठे हुए थे। दोनों कुछ विचित्र से दिख रहे थे। जैसे
वसूली करने वाले गुंडे हो। मनसुख जरा संभल कर बैठ जाता है। अचानक से उनमें से एक
आदमी को जोर से खांसी आने लगती है। अरे कैसी भजिया बनाई है तूने? नालायक।
अरे अरे क्या हुआ
भैया जी? अरे जल्दी पानी
लाओ। अरे भैया पानी तो खत्म हो गया है। मैं अभी कुएं से लेकर आता हूं। तो क्या खो
तब तक मैं खांसता ही रहूंगा। मनसुख जल्दी से उठकर अपनी साइकिल में लगे कैन से
थोड़ा दूध लेकर आता है। लो भैया इससे तुम्हें राहत मिलेगी। वो आदमी जल्दी से दूध
पी लेता है और उसकी खांसी रुक जाती है। अब जाकर आराम मिला। तुम्हारा धन्यवाद। कोई
बात नहीं भैया। इंसान ही इंसान के काम आता है ना। ये लो भैया आपकी भजिए। अच्छा मैं
अभी पानी भर के लाता हूं। कहीं किसी और को जरूरत पड़ी तो पहले से रहना चाहिए ना।
जब भजिया वाला चला जाता है तो मनसुख को अकेला पाकर वो गुंडे जैसा दिखने वाला आदमी
मनसुख से कहता है काफी शुद्ध दूध बेचते हो। क्या-क्या मिलाया था दूध में? यह सुनकर मनसुख सकपका
जाता है और भजिया उसके हाथ से गिर जाती है।
क्या मतलब है आपका
भैया? मतलब यह कि यह
दूध तो बहुत मिलावटी था। चख कर ही पता चल गया। आज तक गांव में कोई भी मनसुख के
मिलावटी दूध का स्वाद नहीं समझ पाया था। और इस नए आदमी ने एक घूंट पीकर ही समझ
लिया। मनसुख बहुत घबरा जाता है। देखो भैया इस बारे में किसी को कुछ मत बताना। चाहो
तो मुझसे कुछ पैसे ले लो। मेरे सालों का बना बनाया धंधा है। इसे चौपट मत करना। अरे
हम तुम्हारा धंधा चौपट करने नहीं आए हैं। बल्कि हम तो तुम्हारे धंधे में चार चांद
लगवा देंगे। क्या मतलब है तुम्हारा? देखो भाई, मिलावट तो तुम कर ही रहे हो। तो हम तुम्हें मिलावट से कुछ
अलग करने को नहीं कहते।
तुम बस अपने दूध
में यह मिला देना। वो गुंडा मनसुख के हाथ में एक पाउडर की पुड़िया थमाता है। ये ये
क्या चीज है भाई? नहीं नहीं ये
नशेवशे का व्यापार नहीं करता मैं। अब ये सब तुम अपने ही पास रखो। अच्छा मतलब सिर्फ
दूध में अरारोट मिलाने का व्यापार ही करते हो। चलो ठीक है। कोई बात नहीं। हमने
सोचा था तुम भी 4 पैसे ज्यादा कमा
लो। मगर ये तो अपना-अपना भाग्य है। क्या? अरे मैं तो मजाक कर रहा था। मैं तैयार हूं भाई। अब सामने से
आती लक्ष्मी को भला कौन मना कर सकता है? लाओ लाओ पुड़िया इधर लाओ। ये हुई ना बात। तो फिर ये लो इस
एक पैकेट को एक बड़े दूध के केन में मिलाना। इससे कम या ज्यादा में नहीं। तभी
स्वाद में किसी को अंतर नहीं पता चलेगा।
और हां, इसे मिलाने के बाद
तुम्हारे दूध की डिमांड गांव में चार गुना हो जाएगी। लोगों को यह बहुत अच्छा लगने
लगेगा। और चाहकर भी बिना इसे कोई पिए रह ही नहीं पाएगा। एक पुड़िया का ₹1000 हुआ। अरे अब यह तो बहुत
ज्यादा है भैया। अच्छा ज्यादा लग रहा है। चलो कोई बात नहीं मत खरीदो। अभी ये भजिया
वाला आएगा ना तो इसे ही बेच देंगे। ये तो खुशी-खुशी ₹1000 में खरीद लेगा। अरे अरे
नहीं रुको रुको। मैं देता हूं ना पैसे। ये लो। शाबाश। चलो अगले हफ्ते मिलते हैं।
मनसुख की साइकिल ठीक हो गई थी और वो पुड़िया लेकर वापस घर जाता है। जब मनसुख दूध
में पुड़िया मिला रहा था तभी वहां पर मीना आ जाती है। अरे ये आप क्या कर रहे हैं
जी? ये अब ये है
जल्दी से अमीर होने का शॉर्टकट। अब बहुत हुआ अरारोट मिलाना। अब देखो कितनी जल्दी
हम अमीर होते हैं। अरे वाह आप तो बहुत समझदार आदमी हैं।
कितना अच्छा हुआ जो मेरी मां ने आपसे मेरी शादी करवाई।
अच्छा काश मैं भी ऐसा ही कह सकता भाग्यवान। जी क्या? मैं समझी नहीं। नहीं नहीं कुछ नहीं। अच्छा ठीक
है। मैं खाना बना रही हूं। आप जल्दी से हाथ मुंह धोकर आ जाइए। एक हफ्ता बीत गया और
मंसूब के दूध की डिमांड वाकई में बढ़ गई थी। उसे अच्छा खासा मुनाफा होने लगा था और
उसका लालच भी अब दो गुना हो गया था। मुझे कम से कम 10 पुटिया दे दो लेकिन हमेशा संभल कर इसका
इस्तेमाल करना। कुछ भी हो जाए हमने जितना बोला है उससे ज्यादा पाउडर मत मिलाना दूध
में। वरना लेने को देने पड़ सकते हैं। हां हां मैं ध्यान रखूंगा। मनसुख रोज की तरह
सुनीता काकी के घर में दूध देने जाता है और आवाज लगाता है। काकी आ जाओ दूध ले लो।
मनसुख के आवाज लगाने पर अंदर से सुनीता काकी की जगह एक जवान लड़का आता है। लाओ
भैया दूध मुझे दे दो। अरे आप कौन है? आपको पहले तो कभी गांव में नहीं देखा? अरे मनसुख यह मेरा भतीजा
है। अपने पिताजी के साथ यहां कुछ दिनों के लिए छुट्टी पर आया है। अच्छा छुट्टी पर
अब शहर में क्या नौकरी करते हो भैया? पुलिस में हूं। पुलिस का नाम सुनते ही मनसुख घबरा जाता है
और उसके हाथ से बर्तन छूट जाता है। सारा दूध नीचे गिर जाता है।
अरे अरे यह क्या हो गया? यह दूध कैसे गिर गया? वो वो वो गलती से हाथ से बर्तन फिसल गया था काकी। कोई बात
नहीं दूसरा दूध दे दो। वो अरे नहीं आज तो दूध खत्म हो गया है काकी। मैं कल आता हूं
ना। अच्छा अब मैं चलता हूं। हां। इतना कहकर मनसुख जल्दी से वहां से भाग जाता है।
मनोज और सुनीता दोनों को मनसुख की ये हरकत बहुत अजीब लगती है। ये इसे क्या हो गया? इसने ऐसा तो पहले कभी
नहीं किया। हम होगी जरूर कोई बात। खैर चलिए अंदर चलते हैं बुआ जी। आज तो बाल-बाल
बचा। कहीं उस पुलिस वाले को सच का पता चल जाता तो आज तुम्हें काम से। बाकी की
जिंदगी जेल के अंदर काटनी पड़ती। उफ। अरे क्या हुआ जी? आप ऐसे हाफ क्यों रहे हैं? फिर से कुत्तों ने दौड़ा
दिया था क्या? अरे चुप करो तुम।
तुम्हारे ही बोलने की कमी है इस वक्त। जाओ यहां से। मेरे सर में दर्द हो रहा है।
उसे और मत बढ़ाओ। क्या आप भी? मैं जब भी बोलती हूं पता नहीं कैसे आपके सिर में दर्द होने
लग जाता है। ओफो तुम्हारे सामने आकर बैठना ही पाप है। मैं जा रहा हूं यहां से।
मनसुख गुस्से में
घर से बाहर जाने लगता है और तभी वो देखता है कि सामने से मनोज चला आ रहा है। अरे
दादा रे ये वापस यहां क्यों आ रहा है? मनसुख जल्दी से वापस घर के अंदर भाग जाता है। देखा नहीं रह
पाए ना मेरे बिना। अरे चुप करो तुम। जब देखो तब बकवास। क्या मैं अंदर आ सकता हूं? जी आप यहां आइए आइए। हां
वो दूध गिर गया था ना तो बुआ जी ने कहा कि आपके घर आकर दूध ले जाऊं। बड़ा विश्वास
है उन्हें आप पर। मैंने कहा कि पास की किसी दुकान से जाकर दूध ले आऊं। लेकिन
उन्होंने कहा कि मनसुख भाई के वहां से ही दूध लेकर आओ। अरे ऐसी बात है क्या? ये तो काकी का बड़प्पन
है। वरना मैं तो बस मामूली सा दूध वाला हूं। अच्छा ऐसा लगता तो नहीं है? गांव में तो आपके बहुत
चर्चे हैं। मैंने तो आज तक किसी आम दूध वाले का इतना नाम नहीं देखा है। मनसुख
थोड़ा घबराता है और फिर मीना से कहता है इन्हें चायवा पिलाओ। मैं इनके लिए दूध
लेकर आता हूं।
यह शहर से आए हैं।
बहुत बड़े पुलिस वाले हैं। अरे वाह, आप बैठिए। मैं अभी आपके लिए चाय लेकर आती हूं। मंसुख तबेले
में जाकर शुद्ध दूध निकालता है। अरे अब मैं क्या करूं? इसे मिलावटी दूध कैसे दूं? और अगर एकदम शुद्ध दूध
दिया तो फिर सुनीता काकी को स्वाद अलग लगेगा। यह तो मैं अच्छा फंस गया हूं। मनसुख
सोच विचार में डूबा था और उधर मीना चाय बनाकर ले आती है। लीजिए गरमा गरम चाय और
पनीर के पकोड़े खाइए। मनसुख तबेले से बाहर आकर बहाना बनाता है। अरे आज इतनी गर्मी
है ना जो भी बचा हुआ दूध था वो तो फट गया। माफ करना आप इतनी दूर आए और दूध ही नहीं
बचा। अरे चलिए कोई बात नहीं। आज हमारे नसीब में आपके यहां का दूध नहीं लिखा है तो
कोई बात नहीं। और वैसे भाभी जी ने बहुत कमाल की चाय और पकोड़े बनाए हैं। एकदम
शुद्ध दूध और पनीर का स्वाद था। अब मैं चलता हूं। मनोज इतना कहकर चला जाता है।
पीछे से मनसुख चिढ़ते हुए मीना से कहता है, अरे क्या जरूरत थी पकोड़े बनाने की? अरे केवल चाय देती ना उसे
ज्यादा स्वाद नहीं देना था।
छी छी कैसी बातें
करते हो। मेहमान तो भगवान होता है ना। ओफो तुमसे बहस करना ही बेकार है। गुस्से में
मनसुख चला जाता है। मनोज के डर से कुछ दिनों तक मनसुख किसी को भी दूध देने नहीं
जाता और बीमारी का बहाना लगा देता है। ये क्या चल रहा है दूध वाले? तुम हमसे पुड़िया क्यों
नहीं ले रहे हो? कहीं किसी और से
सौदा तो नहीं कर लिया? अरे नहीं गांव
में एक पुलिस वाला आकर ठहरा है। उसके रहते में मिलावटी दूध नहीं बेच सकता। कुछ दिन
इंतजार करना पड़ेगा क्या?
अच्छा ठीक है। तब
तो हमें मिलाना भी नहीं चाहिए। इसी तरह मनसुख और गुंडों का काम कुछ दिन तक ठप रहता
है। एक दिन अचानक से मनसुख देखता है कि मनोज सवेरे ही बैग लेकर स्टेशन की तरफ जा
रहा था। अरे आप वापस जा रहे हैं। हां भाई मेरी आज शहर की वापसी की ट्रेन है। अगली बार
आऊंगा तो अपनी तबीयत बढ़िया रखना। तब तुम्हारे घर का शुद्ध दूध और पनीर जरूर
खाऊंगा। इतना कहकर मनोज चला गया और मनसु खुशी से तबेले में गया। चलो बला टली अब
फिर से काम पर लगता हूं।
मीना पहले से ही
खड़ी दूध में पुड़िया वाला पाउडर मिला रही थी। अरे ये क्या चल रहा है? वो मैंने सोचा आप बहुत
दिनों से काम पर नहीं गए हैं। तो आज आपसे कहूंगी काम पर जाने को और यह पाउडर यहीं
रखा था तो मैंने सोचा मैं ही मिला दूं। मनसुख ने देखा कि मीना के हाथ में एक
पुड़िया थी। अरे तुम अपने काम से काम रखा करो। ज्यादा मेरे काम में अपनी नाक मत घुसाया
करो। हटो अब। मनसुख दूध की कैन लेकर चला जाता है। मीना चिढ़ते हुए जमीन पर पड़ी
चार और पुड़िया उठाते हुए खुद से कहती है, जब देखो तब चिल्लाते रहते हैं। इनका काम आसान करने पर भी
चिल्लाते हैं। पांचों पुड़िया दूध में डाल दी तो इन्हें तो आसानी हुई ना कभी समझते
ही नहीं। मनसुख दूध सारे गांव में बांट कर घर आ गया। उफ इतने दिनों बाद आज काम
किया। मैं तो बड़ा थक गया। जैसे ही मनसुख सुस्ताने बैठा, उसके कॉलर पर मनोज ने हाथ
रखा। मनोज को देखकर मनसुख के होश ही उड़ गए। तुम तुम यहां अरे दूध वाले नशे का तो
ठीक है। मगर इतना नशा कौन मिलाता है दूध में कि पहली घूंट में ही आदमी का सर चकरा
जाए। क्या ये क्या बकवास है? मैं नहीं जानता। ये सब तुम क्या कह रहे हो? अब और तुम्हारी तो ट्रेन
थी ना।
जी हां। मगर मेरी
ट्रेन कैंसिल हो गई है और आपकी ट्रेन का समय हो गया है। चलिए अब आपकी ट्रेन सीधा
हवालात में जाकर रुकेगी और रास्ते में आपके साथियों को भी सवार कर लेंगे। मतलब मैं
जैसे ही घर वापस गया बुआ जी ने मुझे एक गिलास दूध दिया। दूध पीते ही पता चला कि
उसमें कितना नशा था और मेरे जाते ही तुम्हारी तबीयत एकदम ठीक हो गई। बस मैं समझ
गया कि क्या हेराफेरी कर रहे हो तुम। नहीं नहीं कोई हेराफेरी नहीं है। मैंने कुछ
नहीं किया। जरूर किसी ने मुझे फंसाया होगा। शहर से मैंने अपनी टीम बुला ली है।
बाकी की तहकीकात तो वो लोग करेंगे। फिलहाल तुम चलो मेरे साथ थाने। बाकी के सवाल
जवाब वहीं होंगे। मनोज घसीट कर मनसुख को थाने ले गया और पूरे गांव को लालची चालाक
दूध वाले का असली चेहरा दिख गया। मनसुख के साथ-साथ उसके साथी भी पकड़े गए।
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