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तीन गरीब बुढ़िया की लालची बहू

  दिल्ली के एक आलीशान बंगले में राहुल और उसकी पत्नी सीमा रहते थे। एक रोज सीमा सुबह-सुबह राहुल के लिए नाश्ता बनाकर लाई। हम अब इतने अमीर हो चुके हैं तो मुझे खाना क्यों बनाना पड़ता है ? तुम एक नौकरानी नहीं रख सकते क्या ? अरे यार , तुम्हें सिर्फ हम दो लोगों का ही खाना बनाना पड़ता है। उसमें भी तुम्हें नौकरानी चाहिए। मुझे खाना बनाने में कोई तकलीफ नहीं है। लेकिन एक रॉयल लाइफ जीने में क्या ही हर्ज है। तुम मेरे लिए इतना नहीं कर सकते। अच्छा अच्छा ठीक है मेरी मां। कल मैं दिल्ली के सबसे बड़े और सबसे फेमस शेफ को अपने घर अपॉइंट कर लेता हूं। अब तो खुश हो ना तुम। यह हुई ना राजाओं वाली बात। तभी अचानक डोर बेल बजे। सुबह-सुबह नाश्ते के टाइम पर कौन मूड खराब करने आ गया। ऐसा करना मेरे लिए एक मैनेजर भी रख लेना। वो दरवाजा खोलने के काम आएगा। ठीक है रख लूंगा मेरी मां। लेकिन फिलहाल मैं ही तुम्हारे मैनेजर बन जाता हूं। मैं ही दरवाजा खोल कर देखता हूं। राहुल ने अपना नाश्ता बीच में ही छोड़कर दरवाजा खोला तो बाहर डाकिया आया हुआ था। मिस्टर राहुल खन्ना आप ही हैं। किससे बात करना चाहते हैं चाचा ? जब आप मेरे एड्रेस पर ...

तीन गरीब बुढ़िया की लालची बहू

 दिल्ली के एक आलीशान बंगले में राहुल और उसकी पत्नी सीमा रहते थे। एक रोज सीमा सुबह-सुबह राहुल के लिए नाश्ता बनाकर लाई। हम अब इतने अमीर हो चुके हैं तो मुझे खाना क्यों बनाना पड़ता है? तुम एक नौकरानी नहीं रख सकते क्या? अरे यार, तुम्हें सिर्फ हम दो लोगों का ही खाना बनाना पड़ता है। उसमें भी तुम्हें नौकरानी चाहिए। मुझे खाना बनाने में कोई तकलीफ नहीं है। लेकिन एक रॉयल लाइफ जीने में क्या ही हर्ज है। तुम मेरे लिए इतना नहीं कर सकते। अच्छा अच्छा ठीक है मेरी मां।

कल मैं दिल्ली के सबसे बड़े और सबसे फेमस शेफ को अपने घर अपॉइंट कर लेता हूं। अब तो खुश हो ना तुम। यह हुई ना राजाओं वाली बात। तभी अचानक डोर बेल बजे। सुबह-सुबह नाश्ते के टाइम पर कौन मूड खराब करने आ गया। ऐसा करना मेरे लिए एक मैनेजर भी रख लेना। वो दरवाजा खोलने के काम आएगा। ठीक है रख लूंगा मेरी मां। लेकिन फिलहाल मैं ही तुम्हारे मैनेजर बन जाता हूं। मैं ही दरवाजा खोल कर देखता हूं। राहुल ने अपना नाश्ता बीच में ही छोड़कर दरवाजा खोला तो बाहर डाकिया आया हुआ था। मिस्टर राहुल खन्ना आप ही हैं। किससे बात करना चाहते हैं चाचा? जब आप मेरे एड्रेस पर आए हैं तो मैं ही तो राहुल होऊंगा ना। अच्छा अच्छा। यह बात तो मुझे पता ही नहीं थी। खैर यह लीजिए आपकी चिट्ठी आई है।

मोबाइल के जमाने में भला चिट्ठी कौन भेजता है? ठीक है। थैंक यू चाचा। ये लो बच्चों के लिए मिठाई लेते जाना। आज के जमाने में भी आप जैसे दिल वाले यहां रहते हैं दिल्ली जैसे शहर में। यकीन नहीं होता। थैंक यू मिस्टर राहुल। इतना बोलकर डाकिया वहां से चला गया। राहुल ने दरवाजा बंद किया और लिफाफा खोलते-खोलते फिर से नाश्ते की टेबल पर आकर बैठ गया। किसका लव लेटर आया है राहुल? अरे यार पहले खोल कर देखने तो दो। राहुल ने जब लेटर पढ़ा तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। क्या हुआ राहुल? तुम्हारे चेहरे का एक्सप्रेशन देखकर लग रहा है कि कोई बुरी खबर है? कहीं बिजनेस में कोई घाटा तो नहीं हो गया? यार, तुम्हें हमेशा मेरे बिजनेस की क्यों पड़ी रहती है? मौसा जी खत्म हो गए।

 तुम तो जानती हो मेरी मां अपने दोनों बहनों के साथ रहती है गांव में। एक मौसा ही बचे थे। वह भी चल बसे। गांव वालों ने चिट्ठी भेजी है। हमें अभी निकलना होगा। वो तुम्हारे मौसा थे। पिता नहीं। वहां जाएंगे तो 100 तरीके की बातें होंगी। गांव वाले ताने मारेंगे कि अपने मां-बाप को छोड़कर शहर क्यों चले गए? लोगों के ताने सुनने को तैयार हो तुम। सीमा, यह तुम कैसी बातें कर रही हो? उनका हमारे अलावा कोई नहीं है। उनका अंतिम संस्कार कौन करेगा? जब गांव वाले चिट्ठी लिख सकते हैं तो वह तुम्हारे मौसा का अंतिम संस्कार भी कर सकते हैं। और वैसे एक बात बताओ आज तक मैंने जितनी भी तुम्हें सलाह दी है उससे कभी तुम्हारा नुकसान हुआ? अगर मैं जबरदस्ती करके तुम्हें दिल्ली ना लाती तो तुम इतने बड़े बिजनेसमैन बन पाते।

 जिंदगी में कभी-कभी कठोर फैसले लेने पड़ते हैं। अगर हम गांव चलेंगे तो तुम्हारी मां रोने लगेंगी। तुम्हारा दिल पिघल जाएगा और फिर से तुम गांव में ही बस जाओगे। फिर सारा का सारा बिजनेस धरा का धरा रह जाएगा। बात तो तुम सही कह रही हो सीमा। अगर मैं तुम्हारे कहने पर अपने दिल को पत्थर ना बनाता तो आज मैं इस मुकाम पर ना होता। लेकिन मां को बुरा लगेगा ना। पहले मौसा जी का अंतिम संस्कार हो जाने दो। फिर मैं बताती हूं क्या करना है। राहुल अपनी बीवी की बातों में आ गया। वो चुपचाप ऑफिस चला गया। वहीं दूसरी तरफ गांव में राहुल की बूढ़ी मां गंगा और उसकी दो बूढ़ी बहनें जमुना और सरस्वती रो रही थी। सरस्वती के पति का मृत शरीर घर के बाहर रखा था। पूरा गांव वहां इकट्ठा था।

 धीरे-धीरे शाम हो गई पर राहुल और सीमा नहीं आए। बहन गंगा, जमुना और सरस्वती कहना तो नहीं चाहिए लेकिन आपका बेटा बिल्कुल पत्थर दिल का हो चुका है। मुझे नहीं लगता कि वह आएगा। चाची आप फिक्र मत करो। मौसा जी का अंतिम संस्कार मैं करूंगा। आखिर वो मेरे पिता जैसे ही हैं। आप लोग ही तो हमारे सुख और दुख के साथी हो। अगर आप लोग ना होते तो हम तीनों यह दुनिया छोड़कर अब तक जा चुके होते। हमारे बेटे और बहू से अच्छे तो यह गांव वाले हैं जो मुसीबत में हमारा साथ देते हैं। चलो बेटा अंतिम संस्कार कर देते हैं। मुझे नहीं लगता कि वह लोग आएंगे। सूरज ढलने वाला था। इसलिए जल्दी-जल्दी गांव वाले उनके मृत शरीर को गंगा घाट ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया। अब उस बड़े से घर में सिर्फ गंगा, जमुना, सरस्वती तीनों बहनें ही बची थी। घर में मातम छाया था।

मैंने अपने गहने बेच के दूसरे के घरों में काम करके अपने बेटे को पढ़ाया लिखाया ताकि बुढ़ापे में वह हमारा सहारा बन सके। यहां तक कि तुम दोनों ने भी अपने-अपने गहने बेच दिए थे। यह सिला दिया हमारे बेटे ने। गंगा दीदी, अब शिकायतें करने से कोई फायदा नहीं। अब जितनी भी हमारी उम्र बची है, एक दूसरे के साथ हंस खेल के गुजार लेते हैं। इसी में हमारी भलाई है। सही कह रही हो बहन। तभी अचानक आसमान में बिजली, कड़की और मूसलाधार बारिश होने लगी। हम तीनों की हालत देखकर ऊपर वाले को भी रोना आ गया। पर हमारे बेटे का दिल ना पसीजा। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में भी बारिश हो रही थी। राहुल रात को अपनी कार से बंगले के बाहर पहुंचा। बाहर ही तैयार होकर उसकी बीवी पहले से ही खड़ी थी। क्या बात है मेरी रानी? तुम तो इस बरसात में कहर डाल रही हो। चलो आज हम पहले मूवी देखेंगे।

 फिर बाहर ही रेस्टोरेंट में खाना खाएंगे। राहुल अपनी बीवी को कार में बैठाकर मूवी दिखाने ले गया। दोनों ने पहली मूवी देखी। फिर बड़े मजे से रेस्टोरेंट में डिनर किया। एक तरफ दोनों ऐसे हंस बोल रहे थे जैसे कुछ हुआ ही ना हो और वहीं दूसरी तरफ राहुल की मां गंगा अपनी दोनों बहनों के साथ रो रही थी और किसी तरह सरस्वती को दिलासा दे रही थी। ऐसे ही दिन बीत रहे थे। फिर एक दिन राहुल अपने ऑफिस में था। तब सीमा को एक ख्याल आया। मुझे लगता है कि मैंने एक फैसला गलत ले लिया। मौसी ससुर के अंतिम संस्कार में ना जाकर। उनकी इतनी बड़ी जायदाद है। अगर किसी दिन तीनों बुढ़िया टपक गई तो गांव वाले तो हथियार लेंगे सारी जायदाद। इससे पहले कि तीनों बुढ़िया ऊपर वाले को प्यारी हो जाए। मुझे राहुल के साथ गांव जाना होगा और सारी प्रॉपर्टी अपने नाम कर लेनी होगी। रात को जब राहुल घर आया तब सीमा की आंखों से आंसू टपक रहे थे। सीमा की आंखों में आंसू देखकर राहुल घबरा गया।

 उसने उसे गले लगा लिया। अरे सीमा क्या हुआ तुम्हें? तुम रो क्यों रही हो? मैंने आज तक तुम्हें रोते हुए नहीं देखा। पर आज ऐसा क्या हो गया? मैंने अपनी जिंदगी में आज तक कोई फैसला गलत नहीं लिया। पर मुझे लगता है मौसा के अंतिम संस्कार में ना जाकर हमने बहुत बुरा किया। हमें गांव वालों से डरना नहीं चाहिए था। हमें वहां जाना चाहिए था। आखिर वह भी हमारा परिवार है। सीमा तुम्हारा भी मुझे कुछ समझ में नहीं आता। कभी कहती हो जाना चाहिए। कभी कहती हो नहीं जाना चाहिए। खैर जो भी हुआ जाने दो। अब कर भी क्या सकते हैं? अब तो उनका अंतिम संस्कार हो ही गया होगा। चलो जल्दी से खाना लगाओ। अब मत रो। अरे यार तुम मेरी बात तो सुनो। उनका अंतिम संस्कार हो गया तो क्या हुआ? ऐसा करते हैं हम कल ही काम चलते हैं। हमारी तीनों माएं गंगा, जमुना, सरस्वती हमें देखकर बहुत खुश होंगी।

 और वैसे भी तुम किसी की नौकरी थोड़ी ही करते हो। तुम्हारा बिजनेस तो अब काफी ग्रो कर चुका है। मैनेजर संभाल लेगा। सीमा तुम्हारा दिल कितना बड़ा है। सही कह रही हो। मां और मौसी जी हमें देखकर बहुत खुश होंगे और हमें माफ भी कर देंगे। अरे सासू मां से बोल देंगे कि हमें आज ही चिट्ठी मिली। सारा इल्जाम डाकी पर डाल देंगे। फिर वो कुछ नहीं कह पाएंगी। क्या बात है सीमा? तुम्हारा दिमाग तो बिल्कुल चाचा चौधरी की तरह चलता है। चलो जल्दी से बैग पैक कर लो। कल हम सुबह ही निकलेंगे अपनी कार से। बहुत दिनों से गांव को देखा नहीं है। पुरानी यादें ताजा हो जाएंगी। तो इस तरह राहुल लगभग अपनी बीवी का गुलाम था। उसकी मानसिकता को सीमा ने बहुत ही बुरी तरह जकड़ रखा था। उसे पता भी नहीं था कि वह सीमा का गुलाम है और यही सबसे बड़ी परेशानी वाली बात थी। अगली सुबह जल्दी से तैयार होकर दोनों गांव के लिए निकल पड़े। लेकिन रास्ते में सीमा को उल्टी होने लगी।

क्या हुआ सीमा? तुम तो हर सुबह नींबू पानी पीती हो। फिर उल्टी क्यों हो रही है? पता नहीं राहुल अचानक से उल्टी क्यों होने लगी? चलो कोई बात नहीं। थोड़ी दूर डॉक्टर पंकज त्रिपाठी का क्लीनिक है। मैं दिखा देता हूं। राहुल सीमा को डॉक्टर पंकज के पास लेकर गया। डॉक्टर ने उसकी जांच की और कहा यार राहुल तुम बिजनेसमैन क्या बन गए? तुमने तो आना ही बंद कर दिया। आए भी तो इतनी बड़ी खुशखबरी लेकर। पंकज यार मेरी बीवी बीमार है। इसमें कौन सी खुशखबरी? राहुल बिजनेस के चक्कर में लगता है तुम्हारा दिमाग बिल्कुल गोबर हो गया है। भाभी जी मां बनने वाली है। क्या? हां। भाभी जी मां बनने वाली है। भाभी जी बहुत-बहुत बधाई हो आपको। और हां याद रखना बच्चे की डिलीवरी मेरे अस्पताल में ही होगी और मैं कोई चार्ज नहीं करूंगा। सीमा तुम मां बनने वाली हो। ऐसा करते हैं। गांव जाने का प्लान कैंसिल कर देते हैं।

 कुछ दिन बाद चलेंगे। अभी तुम्हें आराम की जरूरत है। यह सुनकर सीमा घबरा गई। वो मन ही मन सोचने लगी। अरे यार मुझे भी इसी वक्त मां बनना था। अगर अभी गांव नहीं गए तो गांव वाले सारी प्रॉपर्टी हड़प लेंगे। पता नहीं कब तीनों बुढ़िया को भगवान अपने पास बुला ले। अरे क्या सोच रही हो सीमा? चलो घर चलते हैं और पार्टी करते हैं। आज रात पंकज भी हमारे साथ चलेगा। हां मैं बिल्कुल तैयार हूं। अरे नहीं नहीं पार्टी हम लोग वापस आकर कर लेंगे। मैं मां बनने वाली हूं। यह खबर जब मेरी सासू मां सुनेंगी, तो उन्हें कितनी खुशी होगी। तुम नहीं चाहते ना कि मेरी सासू मां मेरी तारीफ करें। हां, यह भी सही बात है। प्रेगनेंसी के दौरान तुम मां के पास रहोगी तो बच्चा स्वस्थ पैदा होगा। गांव का एनवायरमेंट भी बहुत अच्छा रहता है। चलो चलते हैं गांव। पंकज मैं तुमसे कुछ दिनों बाद मिलता हूं। फिर पार्टी करेंगे। तो इस तरह राहुल और सीमा फाइनली अपने गांव पहुंच ही गए। राहुल बड़े ही ध्यान से अपने गांव को देख रहा था। उसे उसका बचपन याद आ रहा था। जैसे ही वह अपने घर के पास पहुंचा तो देखा बाहर बहुत सारे गांव वाले इकट्ठा थे।

गंगा, जमुना, सरस्वती उदास बैठी थी। राहुल और सीमा जैसे ही गाड़ी से बाहर आए, गांव वालों की नजर उन पर पड़ी। कौन हो भाई साहब? क्या लेने आए हो यहां? और यह औरत कौन है? अरे काका पहचाना नहीं मुझे। मैं हूं राहुल और यह आपकी बहू सीमा। काका इन दोनों लोगों से कह दो कि मैं किसी राहुल और सीमा को नहीं जानती और ना ही हमारा गांव इन्हें जानता है। राहुल और सीमा भागकर अपनी मां के पास आए। दोनों ने गंगा जमुना सरस्वती के पैर छुए और कहा समझ गया मां आप सब लोग हमसे बहुत नाराज हो। दरअसल हमें आज ही चिट्ठी मिली। लेकिन जब चिट्ठी में तारीख देखी तो एक हफ्ते पहले की थी। उसमें हमारी क्या गलती है? अरे नहीं बेटा तुम लोगों की आज तक कभी कोई गलती रही है क्या? चलो चिट्ठी लेट में पहुंची होगी। यह हम लोग मानते हैं। लेकिन इतने साल बीत गए।

 कभी तुम लोगों का दिल नहीं किया कि जाकर अपनी बूढ़ी मां और मौसी से मिले। एक-द दिन का टाइम तो इंसान निकाल ही लेता है। आप लोगों की बातें बिल्कुल सही है। आप लोग बड़े हैं। हमें जो भी कहेंगे हमें मंजूर है। हम तो आपको यह खुशखबरी देने आए थे कि मैं मां बनने वाली हूं। यह सुनकर गंगा जमुना सरस्वती की आंखों में एक नई चमक आ गई। बहू, क्या तुम सही कह रही हो? इसका मतलब मेरा पोता आने वाला है। मैं अपने पोते के साथ खेलूंगी। जमुना सरस्वती हमारा पोता आने वाला है। हां दीदी हमारे घर भी अब किलकारी गूंजेगी। बच्चों तुम लोगों को अपनी गलती का एहसास हो गया है। इसलिए हम तीनों तुम्हें माफ करते हैं। तुम लोगों ने इतनी बड़ी खुशखबरी दी है तो तुम सबकी सारी गलतियां माफ। क्या बात है मां। देखो सीमा। मां का दिल कितना बड़ा है। काका जल्दी से हलवाई को पकड़ कर लाओ। अब अगले एक हफ्ते तक किसी के घर खाना नहीं बनेगा। हर रोज पार्टी होगी।

 इस गांव में आसपास के जितने भिखारी हैं सबको इनवाइट कर दो। ठीक है बेटा हम अभी हलवाई को बुलाकर लाते हैं। गंगा, जमुना, सरस्वती तुम तीनों की जिंदगी में खुशियां लौट आई हैं। अब रोना-धोना बंद करो। तो इस तरह गांव वाले जश्न की तैयारी करने में लग गए। इधर राहुल और सीमा घर के अंदर आ गए। गंगा, जमुना, सरस्वती ने अपने हाथों से शरबत बनाकर राहुल और सीमा को पिलाया। सीमा ने चुपके से शरबत फेंक दिया। बहू, यह शरबत मैंने गन्ने के रस का निकाल कर बनाया है। गांव में बिल्कुल शुद्ध चीजें मिलती है। आने वाले बच्चे के लिए बहुत अच्छा है। तुम्हें पसंद नहीं आया क्या? अरे सासू मां, मुझे बहुत पसंद आया। देखो मैंने पूरा गिलास खाली कर दिया। अच्छा इतना पसंद आया तो यह लो। एक गिलास और पियो। अरे नहीं मां जी पेट बहुत भराभरा लग रहा है। रात में पी लूंगी। रात में राहुल ने पूरे गांव को भोजन करवाया। पूरा गांव खुशियों में डूबा हुआ था।

 गंगा, जमुना, सरस्वती को तो जैसे नई जिंदगी मिल गई थी, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि खुशियां सिर्फ पल भर की है। ऐसे ही दिन बीत रहे थे और राहुल हर रोज गांव वालों को खाना खिलाता जा रहा था। फिर एक रोज सीमा ने राहुल से चुपके से कहा, राहुल चलो ना अपने खेतों के पास चलते हैं। मैंने बहुत दिनों से खेत नहीं देखे। हां बेटा जा बहू को अपने खेत दिखाकर ले आ। आखिर उसे भी तो पता चले कि गांव में हमारे पूर्वजों की खेती कितनी है। राहुल सीमा को लेकर खेतों के पास पहुंच गया। राहुल को खेतों में अपना बचपन दिखाई दे रहा था। जब बचपन में वह अपने मां-बाप के साथ खेतों में ढान लगाया करता था। अपने दोस्तों के साथ खेलता था। यह सब उसे साफ-साफ दिख रहा था। तभी सीमा ने उसके कंधे पर हाथ रखा जिससे वह सपनों से बाहर आ गया। सुनो खेत तो मैंने देख लिए हैं लेकिन मुझे तुमसे जरूरी बात करनी है। तुम जब से आए हो गांव वालों पर खर्चा किए जा रहे हो।

 उसे मुझे कोई तकलीफ नहीं है। लेकिन मेरी बात सुनो। हां बोलो। क्या बात है? बात यह है कि अब हमारे खानदान में सासू मां और हमारी मौसी सास के अलावा कोई नहीं बचा। हमारे पूर्वजों की जमीन, हमारा पुराना घर सब उन तीनों के ही नाम पर है। हम लोग तो कुछ दिनों बाद फिर से दिल्ली चले जाएंगे। तीनों की उम्र भी हो रही है। ना जाने कब ऊपर वाले का बुलावा आ जाए। ऐसा कहना तो नहीं चाहिए लेकिन भगवान की मर्जी के आगे किसकी चलती है। अगर हम लोग वक्त पर यहां ना पहुंचे तो गांव वाले सारी जमीन जायदाद अपने नाम करवा लेंगे। सीमा कैसी बातें कर रही हो। तुमने देखा नहीं गांव वाले कितने प्यार से हमारे साथ रहते हैं। गांव वाले इतने चालाक नहीं होते। मैंने उनके साथ बचपन गुजारा है। राहुल तुम एक बिजनेसमैन हो और एक बिजनेसमैन की तरह सोचो। इमोशंस में मत बहो।

 यह सारी जायदाद एक बार तुम अपने नाम करवा लो। क्या दिक्कत है? जरा सोचो कि गांव वाले हमारी सासू मां की इतनी सेवा क्यों करते हैं? ससुर जी का अंतिम संस्कार इन्होंने क्यों किया था? इसके पीछे जरूर कोई लालच ही तो होगा। जरा बिजनेस माइंड से सोचो। समझ आ जाएगा। वैसे सीमा बात तो तुम सही कह रही हो। अब किसके मन में लालच आ जाए कहां नहीं जा सकता क्योंकि पैसों की जरूरत तो सभी को है और गांव वाले बेचारे भी गरीब हैं। गरीबों में लालच बहुत होता है। मैं आज रात ही मां से बात करता हूं। [संगीत] रात में गंगा, जमुना, सरस्वती तीनों ने मिलकर अपने बेटे बहू के लिए अच्छे-अच्छे पकवान बनाए। सब एक साथ बैठकर खाना खा रहे थे। आज कितने सालों बाद एक साथ बैठकर हम लोग इस घर में खाना खा रहे हैं। अब तो ऊपर वाला भी बुला ले तो कोई गम नहीं। मां। हम आपसे कुछ बात करना चाहते हैं। हां बोलो बेटा। क्या बात है? आप लोग बुरा मत मानना। लेकिन मैं चाहता हूं कि यह जितना भी खेत है, यह घर, जमीन, जायदाद सब आप मेरे नाम पर कर दीजिए। फिर मैं जमीन पर एक बहुत बड़ी फैक्ट्री डालूंगा। राहुल के मुंह से यह बात सुनकर गंगा, जमुना, सरस्वती के दिल को बहुत तेज ठेस पहुंची। तो अब समझ में आया कि तुम लोग इतने सालों बाद अचानक कैसे आ गए।

 उस डाकिए ने बिल्कुल सही समय पर चिट्ठी पहुंचाई होगी। तुम लोगों ने सोचा होगा कि कहीं हम तीनों अचानक भगवान को प्यारे ना हो जाए। इसलिए सारी जायदाद अपने नाम करवा लेते हैं। सही कहा ना? हां। तो इसमें बुराई क्या है? तुम तीनों ये सारी जायदाद अपने साथ ऊपर लेकर जाओगी क्या? अपने बेटे के मुंह से इतने कठोर शब्द सुनकर तीनों को हार्ट अटैक आ गया। अरे राहुल, इन तीनों की तो सांसे बंद हो गई। अब क्या होगा? सोचो कुछ। अरे सोचना क्या है सीमा? मां-बाप के गुजर जाने के बाद सारी जायदाद ऑटोमेटिक बेटे के नाम पर हो जाती है। चलो गांव वालों को इकट्ठा करो और हां थोड़ा जोर-जोर से रोना वरना यह गांव वाले हमें ताने मार मार कर पागल कर देंगे। राहुल ने रो-रो कर पूरे गांव को इकट्ठा कर लिया। गंगा जमुना सरस्वती की मृत शरीर उनके घर के बाहर रखी थी। गांव वालों को जैसे सदमा सा लग गया था। चलो कम से कम आखिरी समय में इन तीनों को तुम दोनों ने खुशियां तो दे ही दी थी। इन तीनों की आत्मा को शांति मिल जाएगी। रात भर पूरा गांव रोता रहा।

 सुबह राहुल ने तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया। और फिर गांव के एक वकील साहब के पास पहुंच गया। अरे वकील साहब कुछ साइन वाइन करने हो तो बता दो। मैं अपनी सारी प्रॉपर्टी बेचकर दिल्ली में प्रॉपर्टी लेना चाहता हूं। इस गांव में अब कुछ नहीं बचा। कौन सी गलतफहमी में जी रहे हो बेटा? इस गांव में तुम्हारी कोई प्रॉपर्टी नहीं है। तुम्हारी तीनों मांओं ने दुनिया छोड़ने से ठीक एक दिन पहले अपनी सारी प्रॉपर्टी अनाथालय को दान कर दी थी। यह सुनकर राहुल और सीमा के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। दरअसल जब राहुल और सीमा अपने खेतों के पास खड़े होकर प्रॉपर्टी के बारे में बात कर रहे थे तब गंगा जमुना सरस्वती भी पीछे-पीछे आ गई थी और उन्होंने उनकी सारी बात सुन ली थी।

उसी वक्त वह वकील के पास गई और अपनी सारी प्रॉपर्टी अनाथ आश्रम को दान दे दी। बहुत तारीफें करते थे ना तुम अपनी मां की और अपनी मौसियों की। कुछ नहीं छोड़ा हमारे लिए उन्होंने। फालतू में मैंने उस बुढ़िया की तारीफ कर दी थी उस दिन। चलो दिल्ली चलते हैं। अब दोबारा कभी नहीं आएंगे यहां। राहुल और सीमा वापस दिल्ली लौट आए। 9 महीने बाद सीमा ने एक बेटे को जन्म दिया। राहुल ने सबको पार्टी दी। स्कूल के बाद उसने अपने बेटे विक्रम को लंदन में पढ़ने के लिए भेज दिया। फिर एक दिन फाइनली मेरी डिग्री कंप्लीट हो चुकी है। कल मैं इंडिया जाऊंगा। अपने मां-बाप को अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में बता दूंगा और फिर मैं लंदन ही शिफ्ट हो जाऊंगा। फिलहाल सो जाता हूं।

 विक्रम अगले दिन फ्लाइट पकड़ कर वापस दिल्ली आ गया। अब राहुल और सीमा बूढ़े हो चुके थे। दोनों अपने बेटे विक्रम को देखकर बहुत खुश हुए। विक्रम बेटा होली दिवाली को तो कॉलेज की छुट्टी होती होगी। लेकिन तू तो सीधा 3 साल बाद वापस आया। मॉम डैड लंदन यहां चांदनी चौक के पास नहीं है और वैसे भी मुझे दिल्ली के प्रदूषण में रहना सूट नहीं करता। अरे हां, एक बात तो बताना आपको भूल ही गया। मैं बहुत जल्द लंदन में एक स्टार्टअप शुरू करने वाला हूं। उसमें मेरी गर्लफ्रेंड के पापा फंड करने वाले हैं। उससे शादी करके मुझे वहां की नागरिकता भी मिल जाएगी। अरे बेटा अपना इंडिया किसी से कम है क्या? तू यहां पर कोई भी स्टार्टअप शुरू कर दे। तेरे बिजनेस की वजह से कम से कम लोगों को नौकरी तो मिलेगी। डैडी इंडिया के सिर्फ कस्टमर अच्छे हैं। यहां के लोगों का माइंडसेट ठीक नहीं है। यहां के लोग अपनी सरकार तो ठीक से चुन नहीं पाते। ऐसे लोगों को अगर मैं अपनी कंपनी में रख लूंगा तो मेरी कंपनी ही डूब जाएगी। अरे ठीक है बेटा। कोई बात नहीं तुझे जो करना है कर।

 कम से कम गर्व से कह तो सकेंगे कि मेरा बेटा लंदन का बिलेनियर है। मेरा बिजनेस भी तो तुझे ही संभालना है। पापा मैंने लंदन में सीखा है कि कभी भी अपने मां-बाप पर डिपेंड नहीं रहना चाहिए। मैं खुद अपना बिजनेस खड़ा करूंगा और अपने दम पर अपना नाम बनाऊंगा और तभी आपको गर्व होना चाहिए। अगर मैं आपका बना बनाया बिजनेस करूंगा तो उसमें मेरा क्या योगदान? आई एम प्राउड ऑफ यू माय सन। तेरी लंदन जाकर तो पूरी मेंटालिटी ही बदल गई है। काश ऐसी मेंटालिटी इंडिया के हर यूथ की हो जाए तो कमाल हो जाए। विक्रम दिल्ली में भी लैपटॉप पर अपने प्रोजेक्ट पर ही काम किया करता था। एक रोज उसकी गर्लफ्रेंड का फोन आया। हेलो विक्रम। व्हेन आर यू कमिंग टू लंदन? जेनी मैंने तुम्हें हिंदी सिखाई है ना तो हिंदी में ही बात किया करो जिससे तुम्हारी प्रैक्टिस अच्छी हो जाए।

मैं बोल रही हूं तुम लंदन कब आ रहे हो? हमें अपना स्टार्टअप जल्दी शुरू करना होगा। वरना पापा फंड नहीं करेंगे तो तुम तो अपने पापा से इन्वेस्ट कराओगे नहीं। तुम्हारा ईगो बीच में आ जाएगा। ठीक है। मैं कल सुबह की फ्लाइट से आता हूं। अगली सुबह। बेटा 3 साल बाद तू आया है और एक हफ्ते भी नहीं रुका। इतनी जल्दी जा रहा है तू। मां आप मुझे अपनी बचपन की कहानियां सुनाया करती थी ना। आप भी तो अपनी साससुर को छोड़कर दिल्ली आ गए थे। जिंदगी में कभी-कभी कठिन फैसले लेने पड़ते हैं और यह मैंने आप लोगों से ही सीखा है। इतना बोलकर राहुल लंदन निकल गया। उसने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मिलकर बिजनेस शुरू किया और कुछ ही दिनों में उनका बिजनेस चल पड़ा। धीरे-धीरे कई साल बीत गए, लेकिन विक्रम इंडिया वापस नहीं आया। हर बार वह अपने मां-बाप से कोई ना कोई बहाना बना देता था।

 उसने जैनी से शादी कर ली और शादी में भी अपने मां-बाप को नहीं बुलाया। उसने सिर्फ शादी की फोटो अपने मां-बाप को भेज दी। सीमा यह सब देखकर मुझे समझ आ गया कि जो हमने अपने मां-बाप के साथ किया वही अब हमारा बेटा हमारे साथ कर रहा है। कुछ ही दिनों बाद राहुल को एहसास होने लगा कि वह सीमा के हाथ की कठपुतली बना रहा पूरी जिंदगी। इसी गिल्ट की वजह से उसे हार्ट अटैक आ गया और वह दुनिया छोड़कर चला गया। सीमा ने विक्रम को फोन किया लेकिन विक्रम अपने बाप को मुखाग्नि देने तक नहीं आया। सीमा ने खुद ही राहुल का अंतिम संस्कार किया। जो गलतियां मैंने अपनी जवानी में की उन सबका फल मुझे मिल रहा है। मैंने पूरी जिंदगी लालच किया। हो सके तो मुझे माफ कर देना भगवान। इसलिए दोस्तों, वक्त करवट जरूर लेता है। हम जैसे बीज बोते हैं, वैसे ही फल हमें मिलता है। इसलिए अपने लालच के चक्कर में ना ही कभी अपने मां-बाप का ना ही किसी भी इंसान का दिल दुखाना चाहिए।

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