Skip to main content

जब सबने मजाक उड़ाया

  स्मित एक छोटे से गाँव में रहने वाला साधारण परिवार का लड़का था, लेकिन उसके सपने साधारण नहीं थे। वह बचपन से ही कुछ ऐसा करना चाहता था, जिससे उसकी पहचान पूरे इलाके में बने और उसके माता-पिता को उस पर गर्व हो। उसके पिता रमेश गाँव में एक छोटी-सी किराने की दुकान चलाते थे। दुकान से इतनी ही कमाई होती थी कि घर का खर्च मुश्किल से चल पाता था। उसकी माँ सुनीता घर संभालती थीं और सिलाई करके परिवार की आमदनी में थोड़ा योगदान देती थीं। घर में पैसों की कमी हमेशा बनी रहती थी, लेकिन उसके माता-पिता ने कभी स्मित को सपने देखने से नहीं रोका। वे अक्सर उससे कहते थे कि बेटा, इंसान की गरीबी उसके सपनों से बड़ी नहीं होती, बस उसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करना आना चाहिए। स्मित इन बातों को अपने दिल में उतार लेता था। वह जब भी गाँव के बाहर बने बड़े-बड़े मकानों, बाजार में चलती गाड़ियों और शहर से लौटने वाले सफल लोगों को देखता, तो उसके मन में भी कुछ बड़ा करने की इच्छा जाग उठती थी। वह सोचता था कि एक दिन वह भी ऐसा काम करेगा, जिससे उसके परिवार को कभी पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। स्मित पढ़ाई में औसत था, लेकि...

रानों चिड़िया

 कालू जी कल मैं इंसानों की बस्ती में गई थी। किसान की पत्नी आलू मटर वाले चावल बना रही थी। मेरा भी आलू मटर वाले चावल खाने को दिल कर रहा है। आलू मटर वाले चावल तो रानू चिड़िया ही बना सकती है। चलो हम रानू चिड़िया के पास जाते हैं और रानू चिड़िया से कहते हैं कि वो हमें आलू मटर वाले चावल बनाकर खिलाए। कवा और कवि दोनों रानू चिड़िया के पास जाते हैं। रानू चिड़िया मेरा आलू मटर वाले चावल खाने को बहुत ज्यादा दिल कर रहा है। क्या तुम मुझे आलू मटर वाले चावल बनाकर खिलाओगी? गौरी बहन मैं अकेली तो सारे काम नहीं कर सकती। हां अगर आप काम में मेरी मदद करो तो फिर मैं आपको आलू मटर वाले चावल बनाकर खिला सकती हूं। बताओ बताओ रानू चिड़िया हमें क्या करना होगा? जो काम तुम हमारे जिम्मे लगाओगी हम वो करेंगे। मैं चावल का दाना ढूंढ कर ले आती हूं। गोरी और कालू आप आलू और मटर ढूंढ लाओ। बाकी मिर्च मसाले, तोता और कबूतर ले आएगा। हम सारी चीजें इकट्ठी कर लेंगे और फिर रात को आलू मटर वाले चावल बनाकर खाएंगे। बहुत मजा आएगा। मेरे तो अभी से मुंह में पानी आ रहा है। कौवा और कवि आलू और मटर लेने उड़ते हैं।

 और रानू चिड़िया चावल का दाना लेने चली जाती है। तोते और कबूतर भैया आज हम सब मिलकर आलू मटर वाले चावल बनाएं। तोते भैया आपको मिर्ची लानी है। और कबूतर आप नमक और कुछ मसाले ले आना। मैं लाल मिर्ची ले आता हूं। मुझे पता है लाल मिर्ची का पौधा कहां है? मैं तो कल भी लाल मिर्ची खाने गया था। नमक पहाड़ से मिलेगा। मैं ऊंचाई में उड़ता हुआ जल्दी से चला जाऊंगा और नमक ले आऊंगा। सब अपने-अपने कामों में लग जाते हैं। रानू चिड़िया नदी किनारे जाकर एक-एक चावल का दाना इकट्ठा करती है और अपनी टोकरी में रखती है। कौवा और कवि आलू और मटर ढूंढ रहे थे। वो उड़ते-उड़ते दूसरे जंगल चले जाते हैं। वहां एक सब्जी का खेत था। मटर की बेल पर मटर की फलियां लगी हुई थी। कौवा और कवी मटर की फलियां तोड़ते हैं। साथ ही कुछ छोटे-छोटे पौधे थे। गोरी किसी भी पौधे पर आलू नहीं लगा हुआ। आलू पेड़ पर लगते हैं या किसी बेल पर? हमने तो यह रानू चिड़िया से पूछा ही नहीं। कालू यहां साथ ही मेरी मां का घर है। चलो हम मेरी मां से पूछ लेते हैं। गौरी कवि और कालू कवा उड़ते हैं और गौरी की मां के घर चले जाते हैं। मां जी आज हम सब दोस्त मिलकर आलू मटर वाले चावल बना रहे हैं। हमने सब्जी के खे मटर तो तोड़ लिए लेकिन वहां किसी भी पौधे पर आलू नहीं लगे हुए।

 हमें आलू कहां से मिलेंगे? गौरी की मां यह सुनकर हंसने लगती है और अपनी बेटी गौरी से कहती है, गोरी बेटी आलू पौधों के ऊपर नहीं लगते बल्कि छोटे पौधों के नीचे जमीन में होते हैं। यह सुनकर कौवा और कवि हैरान हो जाते हैं। सासू मां सासू मां वहां कुछ छोटे पौधे थे जो कतार में लगे हुए थे। क्या उन पौधों के नीचे आलू होंगे? हां अगर वो आलू के पौधे हैं तो आलू उन पौधों के नीचे जमीन में होंगे। तोता झरने के पास जाता है। झरने के पास फूलों के पीछे एक छोटा सा पौधा था जिस पर ढेर सारी लाल मिर्ची लगी हुई थी। तोता अपनी तेज चोंच से कुछ लाल मिर्ची तोड़ता है। मेरा काम तो सबसे आसान था। लाल मिर्ची तो मुझे बहुत जल्दी मिल गई। अब शाम को मजे-मजे से आलू मटर वाले चावल खाऊंगा। पास बैठी बुलबुल तोते की बात सुन रही थी। वो तोते से कहती है धोते धोते आलू मटर वाले चावल मेरा भी खाने को बहुत दिल कर रहा है। क्या तुम थोड़े से चावल मुझे भी दे दोगे? आलू मटर वाले चावल रानू चिड़िया बना रही है। वो बहुत दया आलू है। वो सबको चावल देगी। आप ही रात को रानू चिड़िया के घर आ जाना। तोता लाल मिर्ची लेकर वापस उड़ता है। कबूतर छुप कर बैठा हुआ था क्योंकि नमक की कान के पास बड़ी चील बैठी हुई थी। मैं यहां कब से छुप कर बैठा हुआ हूं। ना जाने कब ये बड़ी चील जाएगी और कब मैं नमक लेकर वापस जाऊंगा। जब काफी देर तक चील नहीं उड़ती तो कबूतर चील के पास जाता है और डरते-डरते चील से कहता है चील चील मुझे नमक के कान से कुछ नमक लेना है क्योंकि आज हम सब दोस्त आलू मटर वाले चावल बना रहे हैं। ये पहाड़ मेरा है।

मैं अपने पहाड़ से किसी को भी नमक नहीं लेने देती। हां, अगर तुम्हें नमक लेना है तो मुझे भी आलू मटर वाले चावल खिलाना होंगे। आलू मटर वाले चावल रानो चिड़िया बना रही है। आज रात आप भी रानो चिड़िया के घर आ जाना और सभी पक्षी मिलकर आलू मटर वाले चावल खाएंगे। रानो चिड़िया ने अपने चूल्हे में आग जला ली थी। हंडिया ऊपर ढकी हुई थी। कौवा और कवे भी आलू और मटर लेकर वापस आ जाते हैं। तोता भी लाल मिर्ची ले आया था। दोस्तों, सारा मसाला तैयार है लेकिन कबूतर अभी तक नहीं आया। नमक के बिना तो कुछ भी नहीं हो पाएगा। तभी कबूतर जल्दी-जल्दी से आता है। बहुत मुश्किल से चील ने मुझे नमक लेने की इजाजत दी। कबूतर को देखकर सभी दोस्त खुश हो जाते हैं। रानू चिड़िया काम शुरू करती है और थोड़ी ही देर में आलू मटर वाले चावल बनकर तैयार हो जाते हैं। सभी पक्षी लाइन में बैठ जाते हैं। बुलबुल और चील भी पहुंच जाती है। रानू चिड़िया हंसते हुए अपने दोस्तों से कहती है। आज तो आलू मटर वाले चावलों ने हम सबको एक जगह इकट्ठा कर दिया। यह अच्छा मौका है साथ बैठने का, साथ खाने का और खूब गपशप लगाने का। फिर सभी पक्षी मजे-मजे से आलू मटर वाले चावल खाते हैं और खूब एंजॉय करते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

मेंढक की कहानी

एक घने जंगल के बीचों-बीच एक पुराना और गहरा कुआँ था। उस कुएँ में एक छोटा सा मेंढक रहता था , जिसका नाम मोनू था। मोनू ने अपनी पूरी जिंदगी उसी कुएँ के अंदर बिताई थी। उसने कभी बाहर की दुनिया नहीं देखी थी , इसलिए उसके लिए वही कुआँ उसकी पूरी दुनिया था। उसे लगता था कि यही सबसे बड़ा स्थान है और इसके बाहर कुछ भी नहीं है। मोनू का जीवन बहुत साधारण था। वह रोज सुबह उठता , कुएँ के ठंडे पानी में तैरता , छोटे-छोटे कीड़े पकड़कर खाता और दिनभर आराम करता। उसे किसी बात की चिंता नहीं थी , क्योंकि उसने कभी अपने जीवन से आगे कुछ सोचने की कोशिश ही नहीं की थी। एक दिन अचानक कुछ अजीब हुआ। आसमान में बादल छा गए और तेज हवा चलने लगी। बारिश शुरू हो गई और कुछ ही देर में पानी की बूंदें तेजी से कुएँ में गिरने लगीं। उसी दौरान एक दूसरा मेंढक , जिसका नाम सोनू था , फिसलकर उस कुएँ में गिर गया। सोनू एक बड़े तालाब में रहता था। वह खुली दुनिया का आदी था—जहाँ ताजी हवा , बड़ी जगह और बहुत सारे जीव-जंतु थे। जैसे ही वह कुएँ में गिरा , उसे महसूस हुआ कि यह जगह बहुत छोटी और बंद है। मोनू ने जैसे ही सोनू को देखा , वह हैरान रह गया। उस...

लालची दूधवाला

हमारी साइकिल है फर्राटेदार लेकर जाती हमको गांव के उस पार ओ हो निकला हूं मैं करने दूध का व्यापार मनसुख सुनीता चाची के घर के बाहर साइकिल रोकता है और घंटी बजाता है हे काकी आ जाओ दूध ले लो लाओ भाई आज जरा आधा लीटर दूध ज्यादा दे देना मेरी बिटिया को खीर खाने का मन है हां हां अभी ले लो बढ़िया सी खीर बनाकर कर खिलाना बिटिया को। मनसुख फिर से साइकिल लेकर दूसरे घर दूध देने चला जाता है। अरे मनसुख भाई ये लो तुम्हारे दूध के पैसे। आज महीना पूरा हो गया ना ? हां दीदी लाओ दो। आपका हिसाब एकदम साफ रहता है। आप एकदम समय पर पैसे दे देती हो। अरे मनसुख भैया , तुम गांव में सबसे सस्ता दूध देते हो और रोज समय पर भी आते हो। तो फिर हमारा तो फर्ज बनता है ना कि तुम्हें समय से तुम्हारे पैसे दें। अरे आपका धन्यवाद दीदी। अच्छा मैं चलता हूं। हां। इस दूध वाले की ज्यादा तारीफ नहीं कर रही थी तुम। अरे तो और क्या ? सच ही तो कह रही थी। मैंने कुछ गलत कहा क्या ? अरे मनसुख इतना ईमानदार है बेचारा। पहले हम शहर से पैकेट वाला दूध मंगाते थे। वो कितना महंगा पड़ता है और उसे लेने के लिए आपको इतनी दूर दुकान तक जाना पड़ता था। बेचारा मनसुख तो...

अंधेरे में खड़ा साया

  महाद्वीप आर्यवर्त के बीचोंबीच बसा था देश “रुद्रायन” ,  एक ऐसा राष्ट्र जो बाहर से शांत और समृद्ध दिखता था ,  लेकिन भीतर ही भीतर रहस्यों ,  साज़िशों और छिपे युद्धों से भरा हुआ था। रुद्रायन की सीमाएँ ऊँचे पहाड़ों ,  घने जंगलों और रेगिस्तानी इलाकों से घिरी थीं ,  जिससे बाहरी दुनिया से इसका संपर्क सीमित रहता था। राजधानी “वज्रनगर” आधुनिक तकनीक और प्राचीन स्थापत्य का अद्भुत मिश्रण थी। इसी राजधानी के नीचे ,  ज़मीन से कई मंज़िल नीचे ,  स्थित था देश का सबसे गोपनीय संगठन — “त्रिनेत्र एजेंसी”। इस एजेंसी का अस्तित्व आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया गया था ,  लेकिन देश की सुरक्षा इसी के हाथों में थी। अद्वित वर्मा त्रिनेत्र एजेंसी का सबसे तेज़ ,  सबसे शांत और सबसे रहस्यमय एजेंट था। उसकी उम्र करीब बत्तीस साल थी ,  चेहरा साधारण ,  आँखें गहरी और भावनाओं को छुपाने में माहिर। जो लोग उसे पहली बार देखते ,  वे कभी अंदाज़ा नहीं लगा सकते थे कि यही व्यक्ति अकेले दम पर कई देशों की खुफिया योजनाओं को नाकाम कर चुका था। अद्वित का अतीत उतना ही ध...