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जब सबने मजाक उड़ाया

  स्मित एक छोटे से गाँव में रहने वाला साधारण परिवार का लड़का था, लेकिन उसके सपने साधारण नहीं थे। वह बचपन से ही कुछ ऐसा करना चाहता था, जिससे उसकी पहचान पूरे इलाके में बने और उसके माता-पिता को उस पर गर्व हो। उसके पिता रमेश गाँव में एक छोटी-सी किराने की दुकान चलाते थे। दुकान से इतनी ही कमाई होती थी कि घर का खर्च मुश्किल से चल पाता था। उसकी माँ सुनीता घर संभालती थीं और सिलाई करके परिवार की आमदनी में थोड़ा योगदान देती थीं। घर में पैसों की कमी हमेशा बनी रहती थी, लेकिन उसके माता-पिता ने कभी स्मित को सपने देखने से नहीं रोका। वे अक्सर उससे कहते थे कि बेटा, इंसान की गरीबी उसके सपनों से बड़ी नहीं होती, बस उसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करना आना चाहिए। स्मित इन बातों को अपने दिल में उतार लेता था। वह जब भी गाँव के बाहर बने बड़े-बड़े मकानों, बाजार में चलती गाड़ियों और शहर से लौटने वाले सफल लोगों को देखता, तो उसके मन में भी कुछ बड़ा करने की इच्छा जाग उठती थी। वह सोचता था कि एक दिन वह भी ऐसा काम करेगा, जिससे उसके परिवार को कभी पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। स्मित पढ़ाई में औसत था, लेकि...

जिन और अलादीन की कहानी

 बहुत समय पहले की बात है। अरब देश के विशाल और समृद्ध नगर बगदाद में शह्रियार नाम का एक शक्तिशाली राजा राज करता था। उसका राज्य बहुत बड़ा था, उसकी सेना शक्तिशाली थी और उसकी प्रजा सुखी थी। राजा अपनी रानी से बहुत प्रेम करता था, लेकिन एक दिन उसे पता चला कि उसकी रानी ने उसके साथ विश्वासघात किया है। इस घटना ने राजा के हृदय को गहरे दुःख और क्रोध से भर दिया। उसने सोचना शुरू कर दिया कि संसार की सभी स्त्रियाँ विश्वासघाती होती हैं। इसी कारण उसने एक कठोर निर्णय लिया कि वह प्रतिदिन एक नई युवती से विवाह करेगा और अगली सुबह उसे मृत्यु दंड दे देगा।

 

राज्य में यह समाचार फैलते ही हर घर में डर और शोक छा गया। माता-पिता अपनी बेटियों को छिपाने लगे। कोई भी अपनी पुत्री को राजा के पास भेजना नहीं चाहता था। राजा का वज़ीर बहुत दुखी रहता था, क्योंकि उसी को प्रतिदिन किसी न किसी युवती को महल में लाना पड़ता था।

 

वज़ीर की एक बेटी थी, जिसका नाम शहेरज़ाद था। वह अत्यंत बुद्धिमान, शिक्षित और दयालु थी। उसने संसार की अनेक पुस्तकें पढ़ी थीं और उसे सैकड़ों कहानियाँ याद थीं। जब उसने राज्य की दुखद स्थिति देखी, तो उसने अपने पिता से कहा कि वह स्वयं राजा से विवाह करना चाहती है। उसके पिता यह सुनकर घबरा गए। उन्होंने उसे बहुत समझाया कि ऐसा करना मृत्यु को निमंत्रण देना है, लेकिन शहेरज़ाद अपने निर्णय पर अडिग रही। वह जानती थी कि यदि उसने कुछ नहीं किया, तो न जाने कितनी निर्दोष युवतियों की जान चली जाएगी।

 

राजा से विवाह के बाद शहेरज़ाद ने अपनी छोटी बहन दुनियाज़ाद को महल में बुलाने की अनुमति माँगी। राजा ने अनुमति दे दी। रात होने पर दुनियाज़ाद ने अपनी बहन से कोई सुंदर कहानी सुनाने का अनुरोध किया। तब शहेरज़ाद ने एक रोचक कहानी शुरू की। कहानी इतनी अद्भुत थी कि स्वयं राजा भी उसे ध्यान से सुनने लगा। जैसे-जैसे रात बीतती गई, कहानी और रोमांचक होती गई। लेकिन जब सुबह होने लगी और कहानी सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँची, तब शहेरज़ाद चुप हो गई।

 

राजा ने पूछा, “आगे क्या हुआ?”

 

शहेरज़ाद ने उत्तर दिया, “यदि महाराज अनुमति दें, तो अगली रात मैं आगे की कहानी सुनाऊँगी।”

 

राजा कहानी का अंत जानना चाहता था, इसलिए उसने उस दिन शहेरज़ाद को जीवित रहने दिया।

 

अगली रात शहेरज़ाद ने पहली कहानी पूरी की और तुरंत दूसरी कहानी शुरू कर दी। हर रात वह नई कहानी सुनाती और सुबह होने से पहले उसे अधूरा छोड़ देती। धीरे-धीरे राजा का हृदय बदलने लगा। वह अब कहानियों का इंतजार करने लगा।

 

एक रात शहेरज़ाद ने सिंदबाद जहाज़ी की कहानी सुनाई। सिंदबाद एक गरीब युवक था, जो धन कमाने के लिए समुद्री यात्राओं पर निकलता है। अपनी पहली यात्रा में वह एक ऐसे द्वीप पर पहुँचता है, जो वास्तव में एक विशाल व्हेल मछली होती है। जब लोग उस पर आग जलाते हैं, तो वह समुद्र में डूबने लगती है। सिंदबाद किसी प्रकार अपनी जान बचाता है।

 

दूसरी यात्रा में वह एक विशाल पक्षी रुख के द्वीप पर पहुँचता है। उस पक्षी के अंडे पहाड़ जितने बड़े होते हैं। सिंदबाद अपनी बुद्धि से स्वयं को उस पक्षी के पैरों से बाँध देता है और एक नए प्रदेश में पहुँच जाता है। वहाँ उसे हीरे-जवाहरात से भरी घाटियाँ मिलती हैं।

 

तीसरी यात्रा में वह एक भयानक राक्षस के हाथों फँस जाता है, जो मनुष्यों को खा जाता है। सिंदबाद और उसके साथी बड़ी चतुराई से उस राक्षस की आँखें फोड़ देते हैं और वहाँ से भाग निकलते हैं।

 

इसी प्रकार उसने सात समुद्री यात्राएँ कीं। हर यात्रा में उसने नई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन साहस और बुद्धिमानी से वह हर संकट से बाहर निकल आया।

 

एक अन्य रात शहेरज़ाद ने अलादीन की कहानी सुनाई। अलादीन एक गरीब युवक था, जो अपनी माँ के साथ रहता था। एक दिन एक जादूगर उसे धोखे से एक गुफा में भेजता है, जहाँ एक जादुई चिराग रखा होता है। अलादीन उस चिराग को अपने पास रख लेता है। जब वह गलती से चिराग को रगड़ता है, तो उसमें से एक शक्तिशाली जिन्न प्रकट होता है।

 

जिन्न कहता है, “मैं इस चिराग का सेवक हूँ। जो आदेश दोगे, मैं पूरा करूँगा।”

 

अलादीन धीरे-धीरे धनी बन जाता है। वह एक सुंदर महल बनवाता है और राजकुमारी से विवाह करता है। लेकिन जादूगर वापस आकर चिराग चुरा लेता है। अलादीन अपनी बुद्धिमानी और साहस से जादूगर को हराकर चिराग वापस प्राप्त कर लेता है।

 

इसके बाद शहेरज़ाद ने अली बाबा और चालीस चोरों की कहानी सुनाई। अली बाबा एक गरीब लकड़हारा था। एक दिन उसने जंगल में चालीस चोरों को देखा। चोर एक गुफा के सामने जाकर बोले, “खुल जा सिम-सिम।”

 

तुरंत गुफा का दरवाज़ा खुल गया। चोरों के जाने के बाद अली बाबा ने भी वही शब्द कहे और गुफा में प्रवेश किया। वहाँ सोना, चाँदी और बहुमूल्य खज़ाना भरा हुआ था।

 

चोरों को जब इस बात का पता चला, तो वे अली बाबा को मारना चाहते थे। लेकिन अली बाबा की बुद्धिमान दासी मरजीना ने अपनी चतुराई से सभी चोरों की योजना विफल कर दी। अंत में अली बाबा सुरक्षित रहा और सुखी जीवन बिताने लगा।

 

दिन बीतते गए। एक रात से दूसरी रात, दूसरी से तीसरी रात और इस प्रकार सैकड़ों रातें बीत गईं। शहेरज़ाद हर बार नई कहानियाँ सुनाती रही। कभी जादुई जिन्नों की, कभी बहादुर राजकुमारों की, कभी व्यापारियों की और कभी रहस्यमय नगरों की।

 

धीरे-धीरे राजा शह्रियार का हृदय बदलने लगा। उसे एहसास हुआ कि संसार में अच्छाई भी होती है। उसने अपने पुराने क्रोध और घृणा को त्याग दिया। अब वह न्यायप्रिय और दयालु राजा बन चुका था।

 

एक हजार एक रातें बीत जाने के बाद शहेरज़ाद ने कहा, “महाराज, मेरी कहानियाँ समाप्त हो चुकी हैं।”

 

राजा की आँखों में आँसू आ गए। उसने कहा, “तुमने मुझे नया जीवन दिया है। तुमने मेरे हृदय से घृणा को समाप्त कर दिया। मैं तुम्हें कभी नहीं खोना चाहता।”

 

राजा ने शहेरज़ाद को अपनी स्थायी रानी घोषित कर दिया और राज्य में उत्सव मनाया गया। प्रजा बहुत प्रसन्न हुई, क्योंकि अब राज्य में भय समाप्त हो चुका था।

 

इस प्रकार शहेरज़ाद की बुद्धिमानी, धैर्य और कहानी कहने की कला ने न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि पूरे राज्य को भी अन्याय और अत्याचार से मुक्त कर दिया। यही कारण है कि *अलिफ लैला* की कहानियाँ आज भी दुनिया भर में पढ़ी और सुनाई जाती हैं तथा साहस, बुद्धिमानी और आशा का संदेश देती हैं।

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