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जब सबने मजाक उड़ाया

  स्मित एक छोटे से गाँव में रहने वाला साधारण परिवार का लड़का था, लेकिन उसके सपने साधारण नहीं थे। वह बचपन से ही कुछ ऐसा करना चाहता था, जिससे उसकी पहचान पूरे इलाके में बने और उसके माता-पिता को उस पर गर्व हो। उसके पिता रमेश गाँव में एक छोटी-सी किराने की दुकान चलाते थे। दुकान से इतनी ही कमाई होती थी कि घर का खर्च मुश्किल से चल पाता था। उसकी माँ सुनीता घर संभालती थीं और सिलाई करके परिवार की आमदनी में थोड़ा योगदान देती थीं। घर में पैसों की कमी हमेशा बनी रहती थी, लेकिन उसके माता-पिता ने कभी स्मित को सपने देखने से नहीं रोका। वे अक्सर उससे कहते थे कि बेटा, इंसान की गरीबी उसके सपनों से बड़ी नहीं होती, बस उसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करना आना चाहिए। स्मित इन बातों को अपने दिल में उतार लेता था। वह जब भी गाँव के बाहर बने बड़े-बड़े मकानों, बाजार में चलती गाड़ियों और शहर से लौटने वाले सफल लोगों को देखता, तो उसके मन में भी कुछ बड़ा करने की इच्छा जाग उठती थी। वह सोचता था कि एक दिन वह भी ऐसा काम करेगा, जिससे उसके परिवार को कभी पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। स्मित पढ़ाई में औसत था, लेकि...

जिन और सौदागर की कहानी

 बहुत समय पहले अरब देश में एक धनी सौदागर रहता था। उसके पास बहुत-सा धन, अनेक ऊँट, व्यापार के बड़े-बड़े कारवाँ और दूर-दूर तक फैला हुआ व्यापार था। वह ईमानदार और दयालु व्यक्ति था। लोग उसका बहुत सम्मान करते थे। एक दिन उसे व्यापार के सिलसिले में दूर के नगर जाना पड़ा। उसने अपने ऊँटों पर सामान लादा और लंबी यात्रा पर निकल पड़ा।

 

कई दिनों की यात्रा के बाद वह एक वीरान स्थान पर पहुँचा। वहाँ एक बड़ा पेड़ था, जिसकी छाया बहुत ठंडी और सुखद थी। पास में एक छोटा सा झरना बह रहा था। सौदागर ने सोचा कि कुछ देर विश्राम कर लिया जाए। उसने अपने थैले से खजूर निकाले और खाने लगा।

 

खजूर खाते समय वह उनकी गुठलियाँ दूर फेंकता जा रहा था। अचानक तेज़ हवा चलने लगी। आकाश काला पड़ गया। धरती काँपने लगी और धुएँ के बीच से एक विशाल जिन्न प्रकट हुआ। उसकी आँखें अंगारों की तरह लाल थीं और हाथ में बड़ी तलवार थी।

 

जिन्न क्रोध से गरजकर बोला, “हे मनुष्य! मैं तुम्हें मार डालूँगा।”

 

सौदागर भय से काँप उठा। उसने पूछा, “मैंने आपका क्या अपराध किया है?”

 

जिन्न बोला, “तुमने मेरी संतान की हत्या की है। जो गुठली तुमने फेंकी, वह मेरे पुत्र की आँख में लगी और उसकी मृत्यु हो गई।”

 

सौदागर ने विनम्रता से कहा, “मैंने यह काम जानबूझकर नहीं किया। मुझसे अनजाने में गलती हुई है।”

 

लेकिन जिन्न का क्रोध शांत नहीं हुआ। उसने कहा, “तुम्हें मरना होगा।”

 

सौदागर बहुत बुद्धिमान था। उसने कहा, “मेरे परिवार और बच्चे मेरा इंतज़ार कर रहे हैं। मुझे एक वर्ष का समय दे दीजिए। मैं घर जाकर अपना सारा काम पूरा कर दूँगा और एक वर्ष बाद स्वयं आपके पास लौट आऊँगा।”

 

जिन्न ने कुछ देर सोचा और फिर कहा, “यदि तुम वापस नहीं आए तो मैं तुम्हें संसार के किसी भी कोने में ढूँढ़ लूँगा।”

 

सौदागर ने वचन दिया और अपने नगर लौट आया। उसने अपना धन बाँट दिया, कर्ज़ चुका दिए और अपने परिवार को सारी बात बता दी। उसकी पत्नी और बच्चे बहुत रोए, लेकिन सौदागर ने कहा, “वचन निभाना ही सच्चे मनुष्य का धर्म है।”

 

एक वर्ष पूरा होते ही वह उसी स्थान पर वापस आया। वह पेड़ के नीचे बैठकर जिन्न की प्रतीक्षा करने लगा। तभी वहाँ एक वृद्ध व्यक्ति आया जिसके साथ एक सुंदर हिरणी थी। उसने सौदागर से उसकी उदासी का कारण पूछा।

 

सौदागर ने पूरी कहानी सुना दी। वृद्ध आश्चर्यचकित हुआ और बोला, “मैं भी इस घटना का साक्षी बनना चाहता हूँ।”

 

कुछ समय बाद दूसरा वृद्ध आया, जिसके साथ दो काले कुत्ते थे। उसने भी कहानी सुनी और वहीं रुक गया। फिर तीसरा वृद्ध आया, जिसके साथ एक खच्चर था। वह भी वहीं बैठ गया।

 

अचानक आकाश में धुआँ छा गया और वही भयानक जिन्न प्रकट हुआ। वह सौदागर को मारने के लिए आगे बढ़ा। तब पहले वृद्ध ने कहा, “यदि मैं आपको अपनी हिरणी की अद्भुत कहानी सुनाऊँ और वह आपको पसंद आए, तो क्या आप सौदागर की एक-तिहाई सजा माफ़ कर देंगे?”

 

जिन्न ने सहमति दे दी।

 

वृद्ध ने बताया कि हिरणी वास्तव में उसकी पत्नी थी। उसकी पत्नी ईर्ष्यालु थी और जादू जानती थी। उसने उसकी दूसरी पत्नी और उसके पुत्र को जादू से गाय और बछड़ा बना दिया। बाद में एक दयालु लड़की ने जादू तोड़कर उन्हें मनुष्य बना दिया और दुष्ट पत्नी को हिरणी बना दिया।

 

जिन्न को यह कहानी बहुत पसंद आई और उसने सौदागर की एक-तिहाई सजा माफ़ कर दी।

 

दूसरे वृद्ध ने अपने दो काले कुत्तों की कहानी सुनाई। वे वास्तव में उसके भाई थे। दोनों ने लालच में आकर उसे धोखा दिया था। बाद में जादू के कारण वे कुत्ते बन गए। उसकी कहानी सुनकर जिन्न ने दूसरी एक-तिहाई सजा भी माफ़ कर दी।

 

तीसरे वृद्ध ने अपने खच्चर की कहानी सुनाई। खच्चर उसकी पत्नी थी, जिसने धोखे और जादू का सहारा लिया था। अंत में उसे उसके कर्मों का फल मिला और वह खच्चर बन गई।

 

तीनों कहानियाँ सुनने के बाद जिन्न बहुत प्रभावित हुआ। उसने कहा, “आज मैंने ऐसी अद्भुत कहानियाँ पहले कभी नहीं सुनीं। मैं सौदागर को पूरी तरह क्षमा करता हूँ।”

 

सौदागर ने ईश्वर का धन्यवाद किया। तीनों वृद्धों को धन्यवाद दिया और अपने घर लौट गया। उसने अपने परिवार को सारी घटना सुनाई। सभी लोग उसकी ईमानदारी और वचनपालन से बहुत प्रभावित हुए।

 

उस दिन के बाद सौदागर ने हमेशा सावधानी से काम करना सीखा। उसने लोगों को भी सिखाया कि मनुष्य को अपने वचन का पालन करना चाहिए, चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो।

 

यह कहानी हमें सिखाती है कि सत्य, ईमानदारी, धैर्य और वचन का पालन अंततः मनुष्य की रक्षा करते हैं। क्रोध और बदले की भावना को दया और समझदारी से बदला जा सकता है।

 

इसी प्रकार शहेरज़ाद ने राजा शह्रियार को यह कहानी सुनाई। राजा पूरी रात ध्यान से सुनता रहा। जैसे ही सुबह होने लगी, शहेरज़ाद ने अगली कहानी शुरू करने का संकेत दिया और कहानी यहीं समाप्त हुई।

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