बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गांव में गुड़िया नाम की एक प्यारी सी बच्ची रहा करती थी। किसी बीमारी के चलते कुछ दिन पहले ही उसकी मां का देहांत हो गया था। मां के गुजर जाने के बाद उसके पिता ने ही उसका ख्याल रखा। यह क्या गुड़िया तुम अभी तक यहीं खड़ी हो? मैंने तुमसे कहा था कि जाकर खाना खा लो। अगर कोई बात है तो तुम मुझे बताओ बिटिया। गुड़िया उदास होकर जवाब देती है। पिताजी जब मां जीवित थी तो वो मुझे अपने हाथों से खाना खिलाती थी। गुड़िया की बातें सुनकर गोपाल की आंखें नम हो जाती हैं। जब मां थी तो वो सोने से पहले हर रात मुझे कहानियां सुनाया करती थी। अब कौन मुझे कहानियां सुनाएगा? रो मत मेरी गुड़िया। तेरी मां तुझे छोड़कर कहीं नहीं गई हैं। वो देख आसमान में वो चांद के रूप में तुझे देखने आई हैं बेटा। और आज तेरा पिता तुझे कहानी सुनाएगा। आओ गुड़िया।
एक दिन गुड़िया
अपने पड़ोस में खेलने जाती है। पड़ोस में उसका दोस्त रामू रहता था। अरे गुड़िया
बड़े दिनों बाद तुम खेलने आई हो। मुझे तो लगा तुम नहीं आओगी। मैं तो अपने दोस्तों
के साथ खेल चुका। अब सारे दोस्त अपने घर जा चुके हैं। अरे रामू ऐसे क्यों कहती हो? गुड़िया तुम्हारी
अच्छी दोस्त है ना। वैसे भी बेचारी कितने दिनों बाद खेलने आई है। सब चले गए तो
क्या हुआ? तुम घर में इसके साथ कोई छोटा-मोटा खेल खेल लो। अच्छी बात यह थी कि गांव के
सभी लोग गुड़िया को बहुत प्यार देते थे। उसकी मां के गुजर जाने के बाद उसका ख्याल
रखते थे। एक दिन गोपाल काम के सिलसिले में खेत पर जा रहा था। तभी पिताजी रुक जाइए
पिताजी। गुड़िया की आवाज सुनकर गोपाल रुक जाता है। गुड़िया गोपाल से कहती है, पिताजी आप बाजार
से आते हुए मेरे लिए चूड़ियां ले लीजिएगा। मां को मेरे हाथों में चूड़ियां बहुत
अच्छी लगती थी।
वो कहीं से देखेंगी
तो बहुत खुश होंगी। अरे हां हां बिटिया मैं तुम्हारे लिए चूड़ियां अवश्य ले आऊंगा।
वैसे भी कोई व्यक्ति अपने परिवार की इच्छाओं को पूरा करने के लिए ही तो कमाता है
और मेरे परिवार में तो केवल तुम ही हो। ऐसे ही समय धीरे-धीरे बीत रहा था। पर ना
जाने भगवान को क्या ही मंजूर था। गोपाल की तबीयत अचानक बहुत बिगड़ जाती है। गोपाल
ढंग से सांसे तक नहीं ले पा रहा था। उसकी इस स्थिति को देखकर घर में वैद जी को
बुलाया जाता है। वैद जी वैद जी कृपया करके मुझे बचा लीजिए। अगर मुझे कुछ हो गया तो
मेरी बेटी गुड़िया का क्या होगा? कृपया कर मुझे बचा लीजिए वैद जी। अचानक गुड़िया
के जीवन में एक बड़ा सा तूफान आया और पल में ही सब कुछ ढेर हो गया। गोपाल अब इस
दुनिया में नहीं था। वैद जी ने अपनी तरफ से गोपाल को बचाने की पूरी कोशिश थी।
पर ईश्वर को कुछ और
ही मंजूर था। घर के बाहर बैठी गुड़िया अपने पिता के लिए भगवान से प्रार्थना कर रही
थी। थोड़ी देर बाद वैद्य जी घर के बाहर आते हैं। गुड़िया उनसे पूछती है। क्या हुआ
काका? मेरे पिता की तबीयत अब कैसी है? वो कब तक ठीक होंगे? माफ़ करना गुड़िया
बिटिया। मेरे पास कहने को शब्द तो नहीं है। दिल पर पत्थर रखकर बता रहा हूं।
तुम्हारे पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुड़िया पूरी तरह से अनाथ हो चुकी थी।
मां का निधन पहले ही हो चुका था और अब उसके पिता भी उसे छोड़कर हमेशा के लिए चले
गए। कुछ दिन बीत चुके थे। गोपाल की मृत्यु को 4 दिन हो चुके थे। तभी उसके कुछ रिश्तेदार उसके
घर आते हैं। गुड़िया मेरी बच्ची कैसी है तू? जैसे ही तेरे पिता की मृत्यु के बारे में सुना
मैं यहां चली आई। मुझसे तो सोचा भी नहीं जा रहा तेरा हाल क्या हो रहा होगा। आप लोग
कौन हैं और गुड़िया आपकी क्या लगती है? देखिए देखिए हम गुड़िया के काका काकी लगते हैं।
वैसे गोपाल के कोई सगे भाई-बहन नहीं थे। इसलिए हम गोपाल के चचेरे भाई हैं। यानी कि
गुड़िया के काका काकी बस इससे मिलने आए थे।
कैसे लोग हैं आप
लोग? आपके भाई की मृत्यु को इतने दिन हो गए और आप लोग अब आ रहे हैं। आपके भाई के
अंतिम संस्कार को भी 4 दिन हो गए। बिटिया दरअसल हम लोग राजस्थान में
रहते हैं। और जैसे ही मृत्यु की खबर मिली हम लोग घर से निकल गए। घर से आते हुए
इतने दिन लग गए। अरे अरे मुझे माफ कर दीजिएगा। यह सब मैंने क्या बोल दिया? मुझे पता नहीं था
कि आप लोग इतनी दूर से आए हैं। मैं भी क्या कुछ भी अनापशनाप बोलती हूं। कोई बात
नहीं बिटिया। अच्छा हुआ तुमने अपनी तसल्ली के लिए पूछ लिया।
वैसे हम यहां
गुड़िया को लेने आए हैं। हम चाहते हैं कि गुड़िया हमारे साथ रहे। पर पर हम लोग
गुड़िया का अच्छे से ख्याल रख सकते हैं आंटी। हम समझते हैं बिटिया तुम्हारा
गुड़िया से लगाव बन गया है। पर हम गुड़िया के काका काकी हैं और गुड़िया हमारी
भतीजी है। इसलिए हमारा फर्ज है कि हम गुड़िया का पालन पोषण करें। इसलिए बेटा जरूरी
है। गुड़िया के काका काकी यानी कि रचना और रामू उसे अपने घर ले आते हैं। उस दिन के
बाद से ही गुड़िया अपने काका काकी के साथ रहने लगी थी। रचना और रामू का एक बेटा भी
था जिसका नाम आनंद था। आनंद बेटा इससे मिलो। यह तुम्हारी बहन है। अब से यह हमारे
साथ ही रहेगी। तुम बड़े भाई हो तो अपनी छोटी बहन का ख्याल रखोगे। अपना परिचय कर
लो। मेरा नाम आनंद है और तुम्हारा नाम क्या है? क्या तुम्हारा कोई घर नहीं है? आखिरकार तुम मेरे
घर रहने क्यों आई हो? क्या तुम्हारा कोई परिवार नहीं है? मेरा नाम गुड़िया
है।
चंपारण में मेरी एक
छोटी सी झोपड़ी थी। पर अब मैं अनाथ हो चुकी हूं। मेरे माता और पिता की अब मृत्यु
हो चुकी है। अरे आनंद बेटा यह तुम मुझसे किस तरह का सवाल पूछ रहे हो? बेचारी ने अपने
माता और पिता को खो दिया है और फिर तुम उससे इस तरह का सवाल पूछोगे तो वो और उदास
हो जाएगी। उसका ध्यान भटकाने की कोशिश करो। उससे पढ़ाई की बातें करो। खेल की बातें
करो। ठीक है बेटा। ऐसे ही दिन बीतने लगे थे। गुड़िया का भी अब अपने काका काकी के
साथ मन लगने लगा था। वो लोग उसका बहुत ख्याल रखते थे। पिताजी आपको याद है ना? कल स्कूल से आते
समय मैंने आपको उस दुकान पर खिलौने दिखाए थे। वो खिलौने आप याद से आते हुए ले
आइएगा। अगर आप नहीं लाएंगे तो मैं बात नहीं करूंगा। अरे बात क्यों नहीं करोगे? मैं तुम्हारे लिए
खिलौने जरूर ले आऊंगा। मुझे वो दुकान याद है। तुम चिंता मत करना।
अरे गुड़िया बेटा
अगर तुम्हें भी कुछ चाहिए तो तुम बेझिझक मुझसे बता दो। ठीक है। यह दृश्य देखकर
गुड़िया की आंखों में आंसू आ जाते हैं। वो रोने लगती है। अरे गुड़िया बिटिया ये
क्या? तुम रोने क्यों लगी? ऐसे ही मेरे पिता जब भी बाजार जाते थे तो वो
मेरे लिए कुछ ना कुछ लेकर आते थे। बस यह दृश्य देखकर मुझे अपने पिता की याद आ गई।
अरे तो इसमें रोने की क्या जरूरत है बिटिया? आखिरकार मैं भी तुम्हारे पिता के समान ही हूं।
मैं तुम्हारे लिए बाजार से कुछ अच्छा लेकर आऊंगा। उसे देखकर तुम बहुत खुश हो
जाओगी। ठीक है बिटिया। एक दिन रामू की पत्नी रचना गुस्से में उससे बोलती है, बहुत हो गया। अब
मैं और नाटक नहीं कर सकती हूं। आखिरकार मेरी भी कोई आम जिंदगी है। मैं इस तरह अब
और महात्मा बनकर नहीं घूमती फिरूंगी। मैं जैसी हूं वैसी ही रहूंगी अब। और आप आप इस
तरह अपने वादे से नहीं मुकर सकते हैं। अरे शांत हो जाओ भाग्यवान शांत हो जाओ।
आखिर सुबह-सुबह
इतना बरस क्यों रही हो? और भला मैंने कौन सा वादा किया था? भूल गए। आप भूल
गए। मुझे पता ही था। मुझे पता ही था कि आप भूल जाएंगे। आप कैसे भूल सकते हैं? आपने वादा किया
था कि आप किसी ना किसी तरह गुड़िया की वो जायदाद अपने नाम करवाएंगे। आप कैसे भूल
सकते हैं यह बात? अरे हां भाग्यवान, यह बात तो मैं
भूल ही गया था। अब वैसे भी मैं नाटक करते-करते थक गया था। उसकी फरमाइशें भी बढ़
रही थी। अब मुझे कुछ सोचना पड़ेगा। कुछ तो करना ही पड़ेगा। अगली सुबह रामू अपने
हाथों में कागज का एक टुकड़ा लेकर गुड़िया के पास जाता है। गुड़िया बेटा मुझे याद
है तुमने मुझसे एक दिन कहा था कि तुम्हें स्कूल जाना बहुत पसंद है। तुम पढ़ लिखकर
कुछ बड़ा बनना चाहती हो और अपने मां-पिता का सपना पूरा करना चाहती हो।
हां काका यह सच है।
मेरे पिता का सपना था कि मैं बड़ी होकर वकील बनूं। अपने पिता का मैं सपना पूरा
करना चाहती हूं। इसलिए मैं स्कूल जाकर पढ़ाई करना चाहती हूं। हां, मुझे पता था कि
तुम्हें स्कूल जाना बहुत पसंद है। इसीलिए मैं तुम्हारे लिए दाखिले का पर्चा लेकर
आया हूं। जल्दी से तुम इस पर्चे पर अपना अंगूठा लिखा दो। फिर तुम्हारा दाखिला हो
जाएगा। खुशी-खुशी उस कागज पर अपना अंगूठा लगा देती है। यह सोचकर कि वह स्कूल
जाएगी। पर वो रामू की चाल से अनजान थी। ऐसे ही एक दिन की बात है। मां मां मैं
स्कूल जा रहा हूं। आज मेरी परीक्षा है। आप आशीर्वाद दीजिएगा कि मेरी परीक्षा बहुत
अच्छी जाए और मैं पास हो जाऊं। मेरा आशीर्वाद तो हमेशा तुम्हारे साथ है बेटा। तुम
जाओ वरना परीक्षा के लिए देर हो जाएगी। पूजा घर के सामने मैंने तुम्हारा बस्ता रखा
है। तुम ले लेना।
फिर आनंद परीक्षा
देने के लिए अपने स्कूल चला जाता है। गुड़िया उसे देख रही थी। काकी काकी मैं भी
स्कूल जाना चाहती हूं। आनंद भैया की तरह मैं भी पढ़ना लिखना चाहती हूं। मेरे पिता
का सपना था कि वो मुझे वकील बनवाएं। इसीलिए इसीलिए मैं स्कूल जाना चाहती हूं।
अच्छा तो अब तुझे भी स्कूल जाना है। मेरे बेटे को देख कर तू उसका नकल कर रही है।
मैं वैसे भी तुझे खिला पिला रही हूं। और अब अब तेरे नखड़े भी बालूं। ये मत कहिए
काकी। काका ने तो मुझसे दाखिले के पर्चे पर अंगूठा भी लगवाया है। उन्होंने मुझसे
कहा था कि अब तुम्हारा दाखिला हो गया है और अब कुछ दिनों बाद तुम स्कूल जाने
लगोगी। फिर आप ऐसा क्यों कह रही हैं? अरे मूर्ख तेरे काका ने तुझे धोखा दिया है। वो
दाखिले का पर्चा नहीं था। वो तेरी गांव वाली जमीन का पर्चा था जिस पर तूने अंगूठा
लगाकर वो जमीन हमारे नाम कर दी है। अब वो जमीन हमारी है। [संगीत] एक दिन अचानक
रचना के घर के सामने गांव के बहुत से लोगों की भीड़ इकट्ठा होती है।
अरे आप लोग आप सब
मेरे घर पर क्यों इकट्ठा हुए हैं? क्या गांव में कोई बात हो गई है क्या? बात गांव में
नहीं बात तुम्हारे घर पर हुई है। रचना हमें खबर मिली है कि तुम्हारे घर में कोई
छोटी बच्ची रहने आई है और तुम तुम उस पर अत्याचार कर रही हो बहुत दिनों से। भला आप
लोग ये सब क्या कह रहे हैं? वो वो तो मेरी भतीजी है। भला मैं उस पे
अत्याचार क्यों करूंगी? मैं तो उससे बहुत प्यार करती हूं। मेरी प्यारी
गुड़िया है वो। देखिए रचना जी हम लोग पागल नहीं हैं। हमने अपनी आंखों से देखा है।
आप उससे घर का सारा काम करवाती हैं और फिर उसे डांटती भी हैं। कल तो हमने देखा था
कि आप उसे झाड़ू से मार भी लगा रही थी। यह सब नहीं चलेगा। गांव वालों की बातें
सुनकर रचना घबरा जाती है।
वो डर कर उनसे माफी मांगती है। मुझे माफ कर दीजिए। मुझे माफ
कर दीजिए। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। आगे से ये गलती दोबारा नहीं होगी। मैं
गुड़िया का बहुत अच्छे से ख्याल रखूंगी और उसे घर का कोई काम नहीं करवाऊंगी। अगली
सुबह रचना गुड़िया से गुस्से में बोलती है, क्यों रे तेरी वजह से मुझे गांव वालों से इतना
कुछ सुनना पड़ा? यह तूने अच्छा नहीं किया। कहीं तूने ही तो किसी गांव वाले को जाकर यह बात तो
नहीं बताई। अगर तूने ऐसा कुछ किया होगा तो मैं तुझे छोडूंगी नहीं। छोडूंगी नहीं।
यह आप क्या कह रही हैं काकी? भला मैं इस गांव में कहां
किसी को जानती हूं और अगर मैं जानती तो भी आपके बारे में ऐसा ऐसा मैं कभी नहीं कह
सकती हूं काकी नहीं कहोगी तभी अच्छा रहेगा वरना अगर कोशिश भी की तो मैं तुम्हें
मार मार कर सीधा कर दूंगी उसके बाद से तुम्हारे मुंह से एक शब्द तक नहीं निकलेगा
और बात रही स्कूल जाने की तो वो तो तुम कभी नहीं जाओगी कोई अनजान महिला घर के बाहर
जंगल से यह सारा दृश्य देख रही थी। तभी गांव का एक बुजुर्ग व्यक्ति उसे देख लेता
है। व्यक्ति क्रोधित होकर उस महिला से कहता है, राधा तुमने इस गांव में आने की हिम्मत भी कैसे
की?
अगर अन्य गांव
वालों को पता चला कि तुमने अपने कदम इस गांव में रखे हैं तो गांव वाले तुम्हें
जीवित नहीं छोड़ेंगे।
तुम्हें पता है ना
तुम्हारा यहां आना मना है? मुझे माफ कर दीजिए पापा। मैं गलती से यहां आ गई
थी। मुझसे गलती हो गई। अब मैं यहां नहीं आऊंगी। अगली सुबह वो औरत फिर रामू के घर
पर आती है। पर इस बार रामू अपने घर पर मौजूद था। अरे राधा तुम इस गांव में इस गांव
में क्यों आई हो तुम? और आई सो आई मेरे घर पर ही क्यों अपने कदम रखे
अब मेरा यह घर अपवित्र हो गया तुम्हारे कारण केवल मैं यहां आना नहीं चाहती थी पर
उस बच्ची की दर्द की पुकार मुझे यहां खींच लाई है। आप लोग उस बच्ची पर अत्याचार
करते हैं। मुझे यह बात भली-भांति पता है। तुम्हारी इतनी जरूरत मतलब तुम हमारे घर
पर नजर रखती हो। हमारा जो मन करेगा वह करेंगे। आखिर तुमसे क्या? और अगर यह बात
मैंने गांव वालों को बता दी तो वो तुम्हारा वो हाल करेंगे कि तुम सोच भी नहीं सकती
हो। मैं आप लोगों से भिड़ने नहीं आई हूं। वो तो मुझे उस बच्ची पर दया आ गई। मैं उस
बच्ची को अपने साथ ले जाना चाहती हूं और मैं उस बच्ची को मां की तरह पालूंगी। क्या
आप लोग वो बच्ची मुझे दे सकते हैं? उस औरत की बातें सुनकर रचना सोच में पड़ जाती
है। मुझे क्या लगता है हमें इस औरत की बात मानी चाहिए।
अगर यह गुड़िया को
अपने साथ ले जाना चाहती है तो ले जाने दीजिए। आखिरकार हमारा गुड़िया से मतलब ही
क्या है? वैसे भी हम गुड़िया को अपने से अलग करना चाहते हैं। हां, वैसे सही कह रही
हो तुम। अब वैसे भी गुड़िया की जमीन अब हमारे नाम हो गई है। तो आखिरकार हमारा
गुड़िया से मतलब ही क्या है? उसे ले जाने देते हैं। हमारे लिए ही अच्छा
होगा। देखो राधा मैं तुम्हें गुड़िया को ले जाने दूंगा। पर मेरी एक शर्त है। उसके
बाद से तुम और गुड़िया इस गांव में कभी नजर मत आना। वरना गांव वालों को मुझ पर शक
होगा। और फिर और फिर वो लोग मुझे पुलिस के हवाले कर देंगे। आप लोग चिंता मत करिए।
मैं गुड़िया को इस गांव से बहुत दूर लेकर चली जाऊंगी और फिर लौट कर कभी नहीं
आऊंगी। उसका ख्याल हमेशा एक मां की तरह रखूंगी। रामू और रचना फिर गुड़िया को लेने
घर के अंदर आते हैं। इन सब बातों से अनजान बेचारी गुड़िया आनंद के साथ खुशी से खेल
रही थी। तभी रामू बोलता है, गुड़िया बेटा जल्दी घर के बाहर चलो। तुमसे कोई
मिलने आया है। तुम्हारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है।
आज से तुम हमारे साथ नहीं रहोगी। तुम्हें लेने कोई आया है
बिटिया। मुझे पता है काका कौन आया होगा। जरूर जरूर मेरे पुराने गांव से मेरी सरोज
दीदी आई होंगी। वो मुझसे बहुत प्यार करती थी। अच्छा हुआ। हां हां तू तो खुशी हो
रही होगी। आखिरकार तुझे हमारे साथ अच्छा क्यों नहीं लगता था? चलो घर के बाहर
चलो। मैं दिखाती हूं कि आखिरकार तुम्हारी सरोज दीदी आई हैं या फिर कोई और। फिर
रामू और रचना गुड़िया को घर के बाहर ले आते हैं। देखो गुड़िया अब से तुम इन्हीं
आंटी के साथ रहोगी। अब यह तुम्हें अपने साथ अपने घर ले जाऊंगी। इनके साथ ही अपना
जीवन बिताना। आओ गुड़िया बेटा तुम मेरे साथ चलो। मैं तुम्हें एक मां की तरह प्यार
करूंगी। डरो मत बिटिया आ जाओ मेरे पास। राधा गुड़िया को लेकर एक जंगल में आ जाती
है। दरअसल राधा का घर एक जंगल में ही था। देखिए मां यह वही बच्ची है जिसके बारे
में मैंने आपको बताया था। अगर मेरी बेटी होती तो ऐसी ही होती।
हां बिटिया हां यह
बच्ची बिल्कुल तेरे जैसी ही है। अगर तेरी कोई संतान होती तो बिल्कुल ऐसी ही दिखती।
अब तुम कभी मत रोना कि तुम्हारी कोई संतान नहीं है बिटिया। ये क्या आंटी? आप लोग इस जंगल
में क्यों रहते हैं? यहां पर तो शेर, हाथी जैसे जानवर आते
होंगे। आप लोग इन जानवरों के बीच कैसे रहते हैं? हां गुरिया बेटा हम इस
जंगल में ही रहते हैं। यह जंगल ही अब हमारा घर है। वो देखो वो जो बूढ़ी अम्मा दिख
रही हैं वो तुम्हारी नानी है। यानी कि मेरी मां जाओ जाओ बेटा अपनी नानी के पास
जाओ। उनसे मिलो। हां बिटिया मेरे पास आओ। आओ मेरे पास। मैं तुम्हें बताती हूं कि
आखिरकार क्यों हम इस जंगल में रहते हैं और यहां जानवर बिल्कुल भी नहीं आते हैं तो
डरने की कोई जरूरत नहीं है। फिर वो बूढ़ी औरत गुड़िया को घर के अंदर ले आती है।
नानी मां नानी मां मेरा एक सवाल था। हां हां बिटिया पूछो क्या सवाल है तुम्हारा? नानी मां मेरा
सवाल आपकी उन बेटी को लेकर है। दरअसल आपकी बेटी कल भी मेरे गांव में आई थी। पर
गांव की कुछ लोग उन्हें यह कहकर भगा रहे थे कि ये औरत गांव के लिए बुरा साया है।
गुड़िया की बातें सुनकर नानी मां की आंखों में आंसू आ जाते हैं। वो जोर-जोर से
रोने लगती है। अरे नानी मां क्या बात है? आप रोने क्यों लगी? मुझे माफ कर दो
बिटिया। मैं इस बारे में तुम्हें नहीं बता पाऊंगी।
अभी समय सही नहीं
है। जब तुम बड़ी हो जाओगी तो इस बारे में तुम्हारी मां खुद बताएंगी क्योंकि तब तक
मैं जीवित नहीं रहूंगी। ऐसे ही एक दिन गुड़िया झोपड़ी के बाहर खड़ी थी। गुड़िया
बिटिया मैं शहर में काम करने के लिए जा रही हूं। शहर में बहुत बड़ी-बड़ी और
अच्छी-अच्छी दुकानें हैं। अगर तुम्हें कुछ चाहिए तो मुझे बताओ। मुझे कुछ नहीं
चाहिए आंटी। बस आप मुझे इस सवाल का जवाब बता दीजिए कि आप लोग यहां क्यों रहते हैं।
माफ कर दो गुड़िया बिटिया। मैं तुम्हें अभी यह बात नहीं बता सकती हूं। जब तुम बड़ी
हो जाओगी तब मैं तुम्हें सारी बातें बताऊंगी। वैसे मैंने तुम्हारा स्कूल में
दाखिला करवा दिया है तो कल से तुम स्कूल जाना। समय बीत जाता है। अब गुड़िया बड़ी
हो चुकी थी।
गुड़िया ने अपने
पिता का सपना पूरा किया। वो अब वकील बन चुकी थी। हां, यह घर अच्छा
रहेगा। अगर वो यह घर देखेंगी तो बहुत खुश हो जाएंगी। हां उन्हें बुलाकर लाती हूं।
गुड़िया राधा को उस घर पर लेकर आ जाती है। अब राधा बूढ़ी हो चुकी थी। अरे गुड़िया
बिटिया तुम कोलकाता से वापस कब आई? और तुमने मुझे बताया ही नहीं। और यह कहां ले आई
मुझे? मैं आज ही कोलकाता से वापस आई हूं मां। और यह यह आपका घर है। आज से आप इसी घर
में रहेंगी मां। इतना अजीब लग रहा होगा ना। आज पहली बार मैंने आपको मां कहकर
बुलाया है क्योंकि आपने हमेशा मेरी परवरिश एक मां की तरह की है। मेरी सारी इच्छाएं
पूरी की और मुझे पढ़ाया लिखाया। आपके कारण ही आज मैं वकील बन पाई। जिस दिन मैं
तुम्हें अपने घर लेकर आई थी, उसी दिन से मैंने तुम्हें अपनी बेटी मान ली थी।
उसके बाद से तुमने मेरा सर कभी नहीं झुकने दिया। और झुकने भी नहीं दूंगी मां।
इस समाज में आपका
सिर हमेशा ऊंचा रहेगा। आज अगर मेरे माता-पिता जीवित होते, तो वो मेरी
कामयाबी देखकर बहुत खुश होते। पर आज आज आप मेरे साथ हैं इसलिए मेरा जीवन इतना
अच्छा है। फिर गुड़िया और राधा दोनों घर के अंदर आ जाते हैं। दोनों बैठकर गप्पे
मार रहे थे। हां तो मां अब आपने अंदर से भी घर देख लिया। अगर आपको पसंद आया तो ठीक
वरना हम कोई दूसरा घर ले लेंगे। दूसरा घर? दूसरा घर क्या करेंगे बेटा? तूने बहुत अच्छा
घर लिया है। हां तो मां अब मैं सही मायने में कामयाब हो चुकी हूं और बड़ी भी हो
चुकी हूं। जैसा कि आपने बचपन में मुझे वादा किया था कि आप मुझे सारी बातें
बताएंगी। आपने आखिरकार अपना गांव क्यों छोड़ा था और जंगल में क्यों रहने लगी? पर पर वो बिटिया
पर पर वर कुछ नहीं मां। आपने मुझे वादा किया था। आज आपको सारी बातें बतानी होगी।
सारी बातें मां सारी बातें। ठीक है। अगर तुमने जिद कर ही ली है तो मैं बताती हूं।
यह बात तब की है जब मेरी नई-नई शादी हुई थी। मेरे पति का नाम अर्जुन था और मेरे
ससुर का नाम जयकांत था। वे लोग अमीर थे। परिवार संपन्न था और धन की कोई कमी नहीं
थी। हां तो बहू अब तो तुम्हें यह हवेली भा गया होगा। आखिरकार यहां किसी चीज की कोई
कमी नहीं है।
बस हमें एक पोता या फिर पोती चाहिए। अब अपना बचा जीवन हम
पोतापोतियों के साथ खेलकर गुजारना चाहते हैं। ठीक है ना बहू? पर मैं उन लोगों
की यह इच्छा पूरी ना कर सकी। माफ कर दीजिएगा अर्जुन साहब। आपकी पत्नी मां नहीं बन
सकती है। अच्छा अच्छा मेरा काम हो गया। अब मैं चलता हूं। इजाजत दीजिए। क्या फायदा? क्या फायदा
तुम्हारा इस घर में रहने का? जब तुम मेरा और मेरे पिता का एक सपना तक पूरा
नहीं कर सकती हो। क्या मुझे बस एक बेटा और बेटी चाहिए थी। तुम वह भी नहीं कर सकती
हो। तुम तुम इस घर में रहने के लायक नहीं हो। मैं तुम्हें इस घर में नहीं रहने
दूंगा। बाद में अर्जुन ने दूसरी शादी कर ली और दोनों ने मुझे उस घर से हमेशा के
लिए निकाल दिया।
उसके बाद मैं अपना बोरिया बिस्तर लेकर चल देती हूं। मेरी
मां ने मेरा साथ दिया। पर उसके बाद भी मेरे पति और ससुर रुके नहीं। उन दोनों ने
मेरे खिलाफ गांव में अफवाह फैला दी। वे चाहते थे कि हम लोग गांव छोड़कर हमेशा के
लिए चले जाएं। हां, जानती हूं उन्होंने यह अफवाह इसलिए फैलाई होगी
जिससे गांव के लोग आपकी बातों पर कभी विश्वास ना करें। हां, वो लोग मुझे
बदनाम करके अपनी छवि बचाना चाहते थे। उस दिन गांव के बहुत से लोगों की भीड़ इकट्ठा
होती है। राधा हमें सारी बातें पता चल गई है। तुम्हारे पति और ससुर ने सारी बातें
साफ कर दी है। उस दिन मेरे बेटे की मृत्यु हुई थी। तुमने ही जादू किया था ना।
तुमने काला जादू किया था। तुम एक जादूगरनी हो। मुझे सब पता चल गया है। उस दिन
उन्होंने मुझे बहुत खरी-खोटी सुनाई। वे लोग चाहते थे कि मैं यह गांव हमेशा के लिए
छोड़कर चली जाऊं। उन लोगों ने मुझे धमकी दिया कि अगर मैं नहीं गई तो वो लोग मेरी
मां को इस गांव में रहने नहीं देंगे।
उन्हें प्रताड़ित
करेंगे। मैं डर गई। हां और आप डर गई। और वही आपकी सबसे बड़ी गलती थी मां। आपको
डरना नहीं चाहिए था। आपको हिम्मत से काम लेना था। आपको पुलिस के पास जाना था और उन
गांव वालों के खिलाफ कंप्लेंट करनी थी। अगर पुलिस आती तो उनकी हवा निकल जाती। फिर
गुड़िया राधा को उसके पति के घर पर लेकर आती है। अर्जुन राधा को देखते ही पहचान
गया। राधा राधा ये तुम हो ना। इतने वर्षों बाद इतने वर्षों बाद तुम्हें मेरी याद
आई है। देखो ना देखो ना मेरा सब कुछ तबाह हो गया। पिताजी चले गए। मेरी मां आप लोग
को छोड़कर कभी नहीं गई थी। वो तो आप लोगों ने ही मेरी मां को घर से निकाल दिया था
और अब रो रहे हैं। अपनी गलती की बहुत देर में एहसास हुई है आपको अंकल बहुत देर
में। नहीं नहीं ये तुम क्या कह रही हो? तुम इसकी बेटी नहीं हो सकती हो।
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