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तीन गरीब बुढ़िया की लालची बहू

  दिल्ली के एक आलीशान बंगले में राहुल और उसकी पत्नी सीमा रहते थे। एक रोज सीमा सुबह-सुबह राहुल के लिए नाश्ता बनाकर लाई। हम अब इतने अमीर हो चुके हैं तो मुझे खाना क्यों बनाना पड़ता है ? तुम एक नौकरानी नहीं रख सकते क्या ? अरे यार , तुम्हें सिर्फ हम दो लोगों का ही खाना बनाना पड़ता है। उसमें भी तुम्हें नौकरानी चाहिए। मुझे खाना बनाने में कोई तकलीफ नहीं है। लेकिन एक रॉयल लाइफ जीने में क्या ही हर्ज है। तुम मेरे लिए इतना नहीं कर सकते। अच्छा अच्छा ठीक है मेरी मां। कल मैं दिल्ली के सबसे बड़े और सबसे फेमस शेफ को अपने घर अपॉइंट कर लेता हूं। अब तो खुश हो ना तुम। यह हुई ना राजाओं वाली बात। तभी अचानक डोर बेल बजे। सुबह-सुबह नाश्ते के टाइम पर कौन मूड खराब करने आ गया। ऐसा करना मेरे लिए एक मैनेजर भी रख लेना। वो दरवाजा खोलने के काम आएगा। ठीक है रख लूंगा मेरी मां। लेकिन फिलहाल मैं ही तुम्हारे मैनेजर बन जाता हूं। मैं ही दरवाजा खोल कर देखता हूं। राहुल ने अपना नाश्ता बीच में ही छोड़कर दरवाजा खोला तो बाहर डाकिया आया हुआ था। मिस्टर राहुल खन्ना आप ही हैं। किससे बात करना चाहते हैं चाचा ? जब आप मेरे एड्रेस पर ...

मजदूर की बेटी की शादी

 ठंड का महीना शुरू हो चुका था। सुबह शाम घना कोहरा छाया रहता और रात की ठंडी हवा झोपड़ी के फटे पर्दों से भीतर तक आ जाती थी। राजू दिन भर अपने मालिक के यहां मुंशीगिरी किया करता था। हिसाब किताब लिखना। अब जब वह अपनी बेटी को बड़ा होता देखता तो उसके दिल की बेचैनी और बढ़ जाती। बेटी की उम्र बढ़ रही थी और उसके साथ ही राजू की चिंता भी। राजू की पत्नी का देहांत पहले ही हो चुका था। पिताजी क्या हुआ? आप रोज ऐसे ही खामोश क्यों बैठे रहते हैं ने? पूरा दिन किसी सोच में डूबे रहते हो। कुछ नहीं बेटी। बस वक्त बहुत तेजी से निकल रहा है। तू कब इतनी बड़ी हो गई पता ही नहीं चला।

 पिताजी आप मुझे देख कर क्यों उदास हो जाते हैं? बेटी अब तेरी उम्र बढ़ती चली जा रही है। अगर तेरी मां जिंदा होती ना तो वो इस बारे में मुझसे ज्यादा फिक्र करती। तेरे कपड़े, तेरी जिम्मेदारियां, तेरी शादी सब कुछ वही संभाल लेती। पिताजी मां को याद करके दुखी मत होइए। मैं हूं ना आपके साथ। तू है। इसी वजह से तो मैं आज तक हिम्मत से जी पा रहा हूं। लेकिन सच यही है बेटी। लड़की ज्यादा दिन मायके में नहीं रहती। नहीं पिताजी मुझे शादी नहीं करनी। मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी। आपके जाने के बाद आपको कौन देखेगा? कौन आपका खाना बनाएगा? कौन आपके लिए पानी भरेगा? पगली, यही तो मैं तुझे समझाना चाहता हूं। तू कब तक मेरे सहारे रहेगी और मैं कब तक तेरे भरोसे? आप ऐसे क्यों बोल रहे हो पिताजी? मुझे आप ही चाहिए बस। बेटी, मैं भोले के भरोसे जी रहा हूं। लेकिन हर पिता की एक ही ख्वाहिश होती है। अपनी बेटी को उसके अपने घर में खुश देखना।

 अगली सुबह हल्की ठंड के साथ सूरज निकल चुका था। राजू रोज की तरह काम पर पहुंच गया। तभी पास में काम कर रहा एक मजदूर उसे गौर से देखने लगा और बोला, "अरे राजू भाई, आज भी बड़े खोए-खोए से लग रहे हो। रोज यही हाल रहता है। कोई परेशानी है क्या? नहीं रे। कुछ खास नहीं है। कुछ खास नहीं होता तो आदमी इतना चुप नहीं रहता। दिल का बोझ चेहरे पर दिख ही जाता है। क्या बताऊं भाई? मेरी बेटी की उम्र बढ़ती चली जा रही है। दिन रात बस यही सोचता रहता हूं। कब तक उसे यूं ही अपने साथ रखूं? तो क्या उसकी शादी की सोच रहे हो? हां, सोच तो रहा हूं। अगर कोई अच्छा शरीफ घर का रिश्ता मिल जाए तो उसकी शादी कर दूं। बस यही चाहा है कि वह खुश रहे। राजू भाई अगर आपको शादी की ही चिंता है ना तो एक काम करो। क्या काम? गांव के कोने में आकाश रहता है। वही तो है जो शादियां तय करवाता है। पूरे इलाके में उसी का नाम चलता है। अच्छे बुरे रिश्तों की पूरी जानकारी रहती है उसके पास। अरे वही आकाश क्या सच में ठीक आदमी है? हां भाई कई घरों की बेटियों की शादी करवा चुका है। हो सकता है तुम्हारी बेटी के लिए भी कोई अच्छा रिश्ता ढूंढ दे।

राजू का काम खत्म हो चुका था लेकिन आज उसका मन घर जाने का नहीं था। नमस्ते भाई। मेरा नाम राजू है। मैं इसी गांव में मजदूरी करता हूं। बोलो। क्या काम है? भाई बात यह है कि मेरी लड़की की उम्र बढ़ती चली जा रही है। मां तो उसकी पहले ही गुजर चुकी है। अब मैं ही उसका सब कुछ हूं। लड़की देखने में भी अच्छी है। संस्कार वाली है। घर का हर काम जानती है। बस एक अच्छा सा घर मिल जाए। यही चाहता हूं। तो तुम रिश्ता करवाने आए हो? हां भाई, सुना है आप रिश्ते करवाते हो। इसी भरोसे चला आया हूं। तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हारी बेटी के लिए भी कोई ठीक-ठाक रिश्ता ढूंढ लूंगा। बहुत-बहुत मेहरबानी भाई। अगर आप मेरी बेटी के लिए अच्छा रिश्ता ढूंढ दोगे तो समझो मेरी आधी जिंदगी की चिंता खत्म हो जाएगी। इतना कहकर राजू धीरे-धीरे वहां से निकल पड़ा। अगली सुबह गांव में हलचल थी। आकाश एक अधेड़ उम्र के आदमी को साथ लेकर खड़ा था। यह है लड़के के पिताजी। कल मैंने आपकी बेटी के बारे में बात की थी ना वही रिश्ता। नमस्ते जी। देखो राजू, हमें तुम्हारी लड़की बहुत ही पसंद आ गई है।

 लड़की सुलझी हुई लगती है, संस्कारी है। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जी। लड़की तो सच में बहुत बढ़िया है। अब हम कुछ जरूरी बातें आपस में कर लें। लड़की को अंदर भेज दो। बेटी, जरा अंदर चली जाओ। बेटी ने सिर झुका कर अंदर कदम रख लिया। देखो राजू शादी में हर मां-बाप को अपनी बेटी को कुछ ना कुछ देना ही पड़ता है। मेरा लड़का पढ़ा लिखा है, समझदार है और मेहनती भी। आजकल ऐसे लड़के आसानी से नहीं मिलते। हां राजू भाई, आजकल पढ़े लिखे लड़कों की बड़ी कदर है। हम ज्यादा नहीं मांगेंगे। बस एक कार और ₹1 लाख कैश। जी, मैं तो एक मामूली मजदूर हूं। इतने पैसे मैं कहां से लेकर आऊं? राजू भाई हम किसी पर जोर जबरदस्ती नहीं कर रहे। आजकल सरकारी नौकरी वाले और पढ़े लिखे लड़के बहुत कम मिलते हैं। अगर तुम्हें यह शादी मंजूर है तो इंतजाम करना पड़ेगा। सोच लो राजू। अगर तुम्हें रिश्ता मंजूर हो तो एक कार और 10 लाख का इंतजाम कर लेना। फिर मुझे बोल देना।

 ठीक है राजू भाई हम चलते हैं। जवाब जल्दी देना। मैं अपनी बेटी की शादी के लिए इतना बड़ा इंतजाम कहां से करूं? तभी अंदर से बेटी बाहर आई और घबरा कर बोली पिताजी क्या हुआ? आप इतने परेशान क्यों लग रहे हो? रिश्ता अच्छा नहीं था क्या? बेटी रिश्ता तो उन्हें पसंद आ गया। तो फिर आप इतने उदास क्यों हो? क्योंकि बेटी उनकी मांग बहुत बड़ी है। क्या मांग? एक कार और ₹1 लाख कैश। क्या पिताजी यह तो बहुत ज्यादा है। हम इतना पैसा कहां से लाएंगे? यही तो मेरी मजबूरी है बेटी। मैं दिन भर मजदूरी करता हूं। पसीना बहाकर दो वक्त की रोटी जुटाता हूं। इतनी बड़ी रकम मेरे बस की बात नहीं। तो पिताजी आप मना कर दीजिए। मुझे ऐसी शादी नहीं चाहिए। बेटी आजकल बिना दहेज के रिश्ता मिलना आसान नहीं रहा। हर कोई पढ़े लिखे लड़के का नाम लेकर सौदेबाजी करता है। नहीं बेटी तू बोझ नहीं है। तू तो मेरी जिंदगी है। लेकिन यह दुनिया हर चीज को पैसों में तोती है।

 अगर मेरी शादी की वजह से आपको कर्ज में डूबना पड़े तो मुझे वह शादी मंजूर नहीं। सुबह का वक्त था। राजू काम पर तो आ गया था। लेकिन आज उसके हाथ चल रहे थे और दिमाग कहीं और था। सेठ यह सब दूर से देख रहा था। थोड़ी देर बाद वह खुद चलकर राजू के पास आया और भारी आवाज में बोला राजू आज तू ठीक से काम नहीं कर रहा इतने सालों से मुझे जानता है तू मैंने तुझे कभी इतना बिखरा हुआ नहीं देखा क्या बात है मन कहीं और है लगता है माफ कीजिए मालिक बस थोड़ा परेशान हूं परेशान है तो बता आदमी परेशानी तब बढ़ा लेता है जब अकेले सहता है तूने मेरे यहां बरसों ईमानदारी से काम किया है अगर अगर मैं तेरी बात नहीं सुनूंगा तो फिर कौन सुनेगा? मालिक मेरी बेटी की शादी का मामला है।

 रिश्ता आया है लेकिन उनकी मांग बहुत बड़ी है। रात दिन यही सोचकर दिल घबरा रहा है। बेटी की शादी कोई छोटी बात नहीं होती राजू। हर पिता का दिल कांपता है। साफ-साफ बता कितने पैसों की जरूरत है। मालिक ₹1 लाख चाहिए। जानता हूं बहुत बड़ी रकम है। कहने में भी शर्म आ रही है। राजू तू मजदूर जरूर है लेकिन छोटा आदमी नहीं है। तूने कभी बेईमानी नहीं की। कभी काम से भागा नहीं। ऐसे आदमी आजकल बहुत कम मिलते हैं। पैसा तो आज है कल नहीं रहेगा। लेकिन इंसान की इज्जत और भरोसा हमेशा रहता है। तू अगर पहले बता देता तो इतना परेशान ना होता। मालिक डर लग रहा था। लगा आप क्या सोचेंगे? गरीब आदमी की बेटी की शादी में इतना पैसा। बस कर राजू अपनी गरीबी को अपने ऊपर हावी मत होने दे। बेटी की शादी भगवान का काम होता है। अगर आज मैं तेरी मदद कर सकता हूं और नहीं करूं तो मेरे पैसों का क्या मतलब? तुझे 12 लाख चाहिए ना? मैं इंतजाम कर दूंगा।

 तू पैसे ले लेना। और हां, एक बात ध्यान रख खुद को इतना दुखी मत किया कर। राजू का मन थोड़ा हल्का हो चुका था। आंखों में उम्मीद और चेहरे पर भरोसा लिए वो सीधा आकाश के घर पहुंचा। अरे राजू भाई इतनी जल्दी कोई खबर है क्या? हां भाई बहुत बड़ी खबर है। पैसों का इंतजाम हो चुका है। आप रिश्ता पक्का कराइए और शादी की तैयारी शुरू करवा दीजिए। राजू भाई अब ये शादी थोड़ी मुश्किल लग रही है। क्या मतलब? कल तो सब ठीक था। देखो राजू बात यह है कि लड़के वालों ने अब शर्त बदल दी है। शर्त बदल दी। कैसी शर्त? अब वो 10 लाख कैश नहीं 15 लाख कैश और कार मांग रहे हैं। भाई मुझे तो बड़ी मुश्किल से 10 लाख का इंतजाम हुआ है। वो भी अपने सेठ से उधार लेकर। मैं मजदूर आदमी हूं। इतना पैसा मेरे बस का नहीं। तो फिर मैं क्या करूं राजू? बाजार में जो ज्यादा देता है उसी से रिश्ता पक्का होता है। आपने तो कहा था कि चिंता मत करो। रिश्ता पक्का है। अब आप ही शर्तें बदल रहे हो। मैं सिर्फ खबर दे रहा हूं। फैसला तुम्हारे हाथ में है। ठीक है भाई। फिर मैं चलता हूं।

 इतना बंदोबस्त मेरे बस का नहीं। जो पैसा जुटाया है वो भी उधार का है। मेरी बेटी की शादी कोई सौदा नहीं है। अगर किस्मत में यही लिखा है तो भगवान पर छोड़ देता। राजू भारी कदमों से घर पहुंचा। 10 लाख से ₹15 लाख इतनी बड़ी रकम मैं कहां से लाऊं? वो बार-बार सिर पकड़ कर बुदबुदाने लगा। थोड़ी देर में उसकी हालत बिगड़ती चली गई और वह वहीं लेट गया। राजू काम पर नहीं आया। सेठ को अब नुकसान होने लगा था। हिसाब किताब में गड़बड़ी, काम में देर सब कुछ राजू की गैर मौजूदगी की वजह से हो रहा था। अरे भाई, यह राजू कई दिनों से क्यों नहीं आ रहा? जब से वो गया है, हिसाब किताब सब उलट-पुलट हो गया है। मालिक क्या बताऊं? उसकी हालत बहुत खराब हो गई है। क्या मतलब? अचानक ऐसा क्या हो गया? मालिक, उसने तो पैसे इकट्ठे कर लिए थे। कुछ आपसे उधार लेकर, कुछ इधर-उधर से।

 लेकिन लड़के वालों ने अचानक अपनी मांग बढ़ा दी। फिर बस मालिक उसी टेंशन में उसकी तबीयत बिगड़ गई। दिन-रा यही सोचता रहा कि बेटी की शादी कैसे होगी? बेटी का मामला होता ही ऐसा है। अगर सही समय पर बच्चों की शादी ना हो तो आदमी चिंता में ही टूट जाता है। गरीब आदमी की मजबूरी सबसे बड़ी होती है। बेटी की चिंता उसे अंदर ही अंदर खा जाती है। राजू जैसा ईमानदार आदमी ऐसे ही नहीं गिरता। यह समाज की लालच भरी सोच है जिसने उसे इस हालत में पहुंचा दिया। पता लगाओ उसकी हालत कैसी है। जरूरत पड़ी तो मैं खुद उसके घर जाऊंगा। काम बाद में देखा जाएगा। पहले इंसान की जान जरूरी है। ठीक है मालिक। सेठ खुद राजू को देखने उसके घर पहुंचा। अरे राजू यह तेरी तो हालत बहुत ही बुरी हो गई है। यह क्या हाल बना लिया तूने? मैं तो समझा था बस थोड़ा कमजोर होगा लेकिन तू तो बिल्कुल टूट गया है। अरे कुछ नहीं मालिक। बस थोड़ी बहुत तबीयत खराब हो गई है। दो-चार दिन में ठीक हो जाऊंगा। थोड़ी बहुत तबीयत? झूठ मत बोल मुझसे। तेरे चेहरे पर सब लिखा है। यह बीमारी नहीं चिंता है। और वह भी बेटी की चिंता। राजू मैंने जिंदगी देखी है।

 मेहनत से शरीर थकता है लेकिन टूटता नहीं। शरीर तब टूटता है जब मन टूट जाता है। तूने बहुत ज्यादा बोझ अपने दिल में भर लिया है। मालिक गरीब आदमी की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी मजबूरी होती है। हेल्पिंग है। मैं चाहकर भी अपनी बेटी को सुख नहीं दे पा रहा। बकवास मत कर। तूने अपनी बेटी को जो दिया है वह बहुत अमीरों के पास भी नहीं होता। ईमानदारी और संस्कार। बाकी सब ऊपर वाले के हाथ में है। देख कल मेरे बेटे की शादी है। पूरा घर खुशियों में डूबा है। ठीक है मालिक जैसा आप कहो। कल तक इतनी तो मेरी तबीयत ठीक हो ही जाएगी। अगली सुबह हल्की धूप निकल चुकी थी। राजू अपनी बेटी का हाथ थामे मन में हजारों डर और उम्मीदें लिए अपने मालिक के बड़े से आंगन में पहुंचता है। राजू को देखते ही मालिक आगे बढ़कर बोलता है अरे राजू आ गया तू आज तो तू काफी ठीक लग रहा है। कल तो तेरी हालत देखकर डर ही गया था। मालिक आपकी दुआ से तबीयत तो ठीक है।

 बस दिल में एक ही चिंता रहरह कर उठती है। बेटी बड़ी हो रही है। अगर इसकी शादी हो जाती तो मेरी सारी टेंशन खत्म हो जाती। यह सुनकर मालिक थोड़ी देर राजू की बेटी को ध्यान से देखता है। राजू तू बेकार की चिंता करता है। तेरी बेटी भी इंसान की औलाद है। भगवान ने इसे भी सलीके और संस्कार दिए हैं। इसकी भी शादी जरूर होगी। मालिक जैसे हालात है। मुझे तो कोई रास्ता नजर नहीं आता। एक काम कर राजू तू अपनी बेटी की शादी मेरे छोटे बेटे से कर दे। ये ये आप क्या कह रहे हैं मालिक? आप मालिक हैं और मैं आपका नौकर। मेरी इतनी हैसियत कहां कि आपकी बहू? खबरदार आज के बाद अपने मुंह से यह नौकर शब्द मत निकालना। इंसानियत सबसे बड़ी होती है राजू। तू मेहनती है, ईमानदार है। तेरी बेटी में भी कोई कमी नहीं। मालिक, लोग क्या कहेंगे? समाज, रिश्तेदार। समाज को मैं देख लूंगा। मुझे ऐसी बहू चाहिए जो घर को समझे, रिश्तों की कदर करे। तेरी बेटी मेरे घर की बहू बनेगी। यह सुनते ही राजू की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगते हैं। शादी की बात तय होते ही पूरे घर में खुशियों का माहौल बन जाता है।

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