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नदी किनारे दो बहनों का रसोई

प्रीतमपुरा गांव की कोकिला एक गरीब बूढ़ी औरत है कुछ साल पहले तक वो लोगों के घर काम करके पैसे कमाती थी लेकिन अब उम्र के बोझ से लाचार होकर उसे काम छोड़ना पड़ा उसकी दो बेटियां हैं आस्था और शारदा आस्था सिलाई का काम करती है और शारदा छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर घर चलाती है शारदा तुझे बताया था मेरी दवा खत्म हो गई है शाम को लौटते वक्त लेती आना बेटा मां महीने के आखिर में एक पैसा भी नहीं बचा है हर कुछ दिन में दवा बाजार का खर्चा मैं थक चुकी हूं सब कुछ संभालते-सालते क्या करूं बेटा खुद कुछ कर नहीं सकती इसलिए तुम लोगों पर ही निर्भर हूं मुझे भी अच्छा नहीं लगता हर बार तंग करना सब कुछ मुझ पर ही क्यों कभी आस्था से भी कुछ बोल सकती हो वो भी सिलाई करके अच्छा कमाती है कुछ दिन पहले उससे ही पैसे लिए थे इसलिए अब शर्म आती है दोबारा कहने में उस वक्त तो शर्म आती है लेकिन मुझसे कुछ कहने में हिचक नहीं होती सच कहूं तो अब और नहीं झेला जाता कब इस बोझ से छुटकारा मिलेगा कौन जाने मेरी बेटियां कितना संघर्ष करती हैं जहां बाकी लड़कियां शादी करके अपनी जिंदगी सजा रही हैं वहां मेरी वजह से यह बोझ उठा रही हैं मैं अब कोई पैसा नही...

गरीब जामुन वाले का भाग्य

 सूर्यनगर नामक गांव में आदित्य नाम का एक गरीब जामुन वाला रहता था वो जामुन बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था गरीबी के कारण उसे अपने जीवन में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था जामुन ले लो जामुन ताजा और मीठा जामुन आदित्य यह जामुन कितने रुपए किलो है भाई जामुन ₹50 किलो है अरे बाप रे इतने महंगे जामुन तुम्हारे जामुन में कोई कीमती सोने जड़े हुए हैं क्या जो तुम इतने महंगे जामुन बेच रहे हो भाई यह अभी-अभी जंगल से आए हैं बिल्कुल ताजे जामुन है और वैसे भी अब तो जामुन के दाम भी बढ़ गए हैं नहीं अगर ₹20 किलो देना है तो दो वरना मैं कहीं और से ले लूंगा ₹20 यह तो बहुत ही कम है ठीक है तो तुम अपनी जामुन अपने पास रखो मैं तो चला ऐसा कहकर वह आदमी वहां से चला जाता है आज मेरा एक भी जामुन नहीं बिका पूरा दिन बीतने के बाद एक ग्राहक आया और वह भी चला गया अब मैं क्या करूं अरे आदित्य क्या सोच रहे हो नमस्ते मुखिया जी हां हां नमस्ते क्या हुआ तुम किस सोच में डूबे हुए थे

मुखिया के पूछने पर आदित्य उन्हें सब कुछ बता देता है आदित्य की बात सुनकर मुखिया जी अपने मन में सोचते हैं इसके जामुन तो वाकई बहुत ही अच्छे हैं और ताजा है वो आदमी बेवकूफ था ऐसा करता हूं कम पैसों में मैं ही इसके जामुन खरीद लेता हूं यह सब सोचकर मुखिया जी बोलते हैं ऐसा करो आदित्य तुम मुझे यह जामुन ₹30 किलो के हिसाब से 10 किलो दे दो ठीक है मुखिया जी मैं अभी दे देता हूं ऐसा कहकर आदित्य मन में सोचता है चलो कम से कम मुखिया जी ने मुझसे बहुत ज्यादा तो पैसे कम नहीं करवाए अब जो भी पैसे मिलेंगे मैं उन पैसों से घर की जरूरत का सामान ले लूंगा क्योंकि खाली हाथ भी तो मैं घर नहीं जा सकता मुखिया जी चालाकी से अपने मन में सोचते हैं

 बेवकूफ आदमी इन लोगों से प्यार के दो मीठे बोल क्या बोल दो यह लोग अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं फिर मुखिया जी जामुन लेकर वहां से चले जाते हैं और आदित्य भी अपना सामान समेट कर अपने घर की ओर निकल जाता है अजी सुनते हो अच्छा किया जो आप जल्दी आ गए क्या हुआ रूपा तुम इतनी परेशान क्यों हो रही हो मां की तबीयत बहुत खराब हो गई है उसे बहुत तेज बुखार है रूपा तुम यह क्या कह रही हो रुको मैं अभी वैद जी को लेकर आता हूं फिर आदित्य वैद्य जी के पास चला जाता है तभी रास्ते में बहुत तेज बारिश होने लगती है लेकिन तब भी आदित्य अपनी मां को बचाने के लिए जैसे तैसे करके वैद जी के पास पहुंच जाता है और आदित्य वैद जी को सारी बात बता देता है और वैद जी को अपने घर ले आता है आदित्य तुम्हारे मां को बहुत तेज बुखार है

 यह सिर्फ एक दवा से ही ठीक हो पाएगा मगर वह दवा बहुत महंगी है उसमें जिन जड़ी बूटियों को डाला गया है वह आसानी से नहीं मिलता वेद जी आप पैसों की चिंता मत कीजिए बस आप मेरी मां को ठीक कर दीजिए फिर वैद जी मां को दवाई दे देते हैं और वैद जी अपने घर चले जाते हैं सुनते हो जी आपके पास इतने सारे पैसे कहां से आए आज मुखिया जी ने मुझसे काफी ज्यादा जामुन खरीद लिए थे यह पैसे वहीं से आए थे इसका मतलब सारे पैसे मां की दवाइयों पर लग गए हां रूपा अब मेरे पास कुछ भी नहीं है फिर ऐसे ही कुछ दिन बीत जाते हैं और आदित्य की मां ठीक हो जाती है और उधर आदित्य के जामुन की बिक्री दिन भर दिन कम होती जा रही थी वो रोजाना केवल 20 या ₹40 ही कमा पाता था तो फिर एक दिन रूपा बोलती है

 अजी सुनते हो आज तो घर में कुछ भी खाने को नहीं है तुम चिंता मत करो रूपा मैं कुछ इंतजाम करता हूं बस भगवान आज अपनी सुन ले और मेरी सारी जामुन बिक जाए ठीक है रूपा मैं जामुन बेचने चलता हूं इतना कहकर आदित्य अपनी जामुन की टोकरी लेकर गांव में चला जाता है जामुन ले लो जामुन ताजा और मीठा जामुन इस तरह आदित्य पूरे गांव में जामुन बेचता है लेकिन शाम होने तक उसकी एक भी जामुन नहीं बिकती तो वह थक हार कर एक पेड़ के नीचे बैठ जाता है और मन में सोचने लगता है सुबह से शाम हो गई लेकिन अभी तक मेरी एक भी जामुन नहीं बिकी अब तो यह जामुन भी सड़ने लगी है अब मैं क्या करूं हे ईश्वर मेरे जीवन की कठिनाइयां कब खत्म होगी

आदित्य यह सोच ही रहा था कि तभी वहां से एक साधु बाबा गुजरते हैं भम देही भिक्षाम देही तुम एक दोगे ईश्वर तुम्हें सो देगा प्रणाम साधु बाबा आयुष्मान भव क्या आपको कुछ चाहिए साधु बाबा हां पुत्र मैं एक भिक्षुक हूं और यहां लोगों से भिक्षा मांग रहा हूं कैसी भिक्षा साधु बाबा पुत्र मैं अपने शिष्यों के लिए भोजन इकट्ठा कर रहा हूं इसीलिए गांव गांव लोगों से भिक्षा मांग रहा हूं पुत्र अगर तुम चाहो तो अपनी खुशी से तुम भी कुछ थोड़ी सी भिक्षा दे सकते हो क्षमा चाहता हूं साधु बाबा अभी मेरे पास आपको देने के लिए एक रुपया भी नहीं है और ना ही मेरे घर में आटा या कोई अनाज है जो मैं आपको दे सकूं और ना ही मैंने आज सुबह से कुछ कमाया है मेरे पास आपको देने के लिए कुछ भी नहीं है पुत्र क्या तुम मुझे यह जामुन दे सकते हो बाबा की यह बात सुनकर

आदित्य अपने मन में सोचने लगा हां यह जामुन तो मैं साधु बाबा को दे ही सकता हूं वैसे भी शाम हो गई है और इनके बिकने की उम्मीद भी नहीं है वैसे भी यह खराब हो जाएंगे इससे अच्छा है कि किसी के पेट में चले जाए तो ज्यादा अच्छा होगा यह सोचकर आदित्य बोलता है जी साधु बाबा आप यह जामुन ले जाइए आदित्य की बात मानकर साधु बाबा टोकरी से थोड़ी सी जामुन उठा लेते हैं ये क्या साधु बाबा आप इतनी कम जामुन क्यों लेकर जा रहे हो आप सारे जामुन ले जाइए पुत्र अगर मैंने तुम्हारी सारे जामुन ले लिए तो तुम क्या बेचोगे कोई बात नहीं साधु बाबा मैं कल दोबारा जामुन तोड़कर बेच दूंगा आप इन्हें ले जाइए पुत्र मैं इतना बड़ा टोकरी कैसे लेकर जाऊंगा साधु बाबा आप मुझे बताइए आपको कहां जाना है

 मैं इन्हें वहीं पहुंचा देता हूं ठीक है पुत्र चलो तुम मेरे साथ इतना कहकर साधु बाबा आदित्य को लेकर जंगल की ओर चले जाते हैं कुछ देर चलने के बाद वो उनकी कुटिया में पहुंच जाते हैं धन्यवाद पुत्र अरे बाबा धन्यवाद की कोई बात नहीं है यह तो मेरा फर्ज था मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है तुम सदैव खुश रहो साधु बाबा अगर आप बुरा ना माने तो मैं आपसे एक बात पूछ सकता हूं पूछो पुत्र क्या पूछना है तुम्हें साधु बाबा आपने जामुन तो ले लिए लेकिन क्या आप लोगों को केवल खाने में जामुन ही खिलाएंगे नहीं पुत्र दरअसल मैंने सब्जी और अनाज तो पहले से ही जमा किया हुआ था

और फिर मैं जामुन की ही तलाश में निकला था साधु बाबा यह तो बहुत ही अच्छा है मेरे जामुन आपके काम आ जाएंगे ठीक है बाबा अब मैं चलता हूं पुत्र रुको मैं तुम्हें कुछ देना चाहता हूं यह लो इसका नाम रानी है आज से यह चिड़िया तुम्हारा हुआ चिड़िया पर मैं इसे कैसे ले सकता हूं यह तो आपका है जब तुमने बिना किसी फायदे के मुझे अपनी पूरी जामुन की टोकरी दे दी तो मैं क्या तुम्हें एक चिड़िया भी नहीं दे सकता साधु बाबा मैं इस चिड़िया का क्या करूंगा यह कोई आम चिड़िया नहीं है पुत्र यह एक जादुई चिड़िया है यह तुम्हारे भाग्य की चाबी है जब तक यह तुम्हारे साथ रहेगी तब तक तुम्हारा भाग्य चमकता रहेगा लेकिन ध्यान रहे इसकी सच्चाई किसी को पता नहीं चलनी चाहिए फिर आदित्य रानी चिड़िया को लेकर अपने घर की तरफ निकल पड़ता है तो रास्ते में रानी चिड़िया बोलती है

 आदित्य साधु बाबा ने जो कहा उसका ध्यान रखना यह बात किसी को पता मत लगने देना कि मैं एक जादुई चिड़िया हूं ठीक है दोस्त मैं वादा करता हूं मैं यह सच कभी किसी को नहीं बताऊंगा इतना कहकर आदित्य रानी चिड़िया को अपने घर ले जाता है अजी आप इस चिड़िया को कहां से लेकर आए हो रूपा यह चिड़िया अब से हमारे साथ ही रहेगा आप इस चिड़िया को घर क्यों लेकर आए हो जी पहले ही हमारे खाने के लाले पड़े हुए हैं एक वक्त की रोटी भी मुश्किल से नसीब हो पाती है ऊपर से आप इस चिड़िया को ले आए कैसी बात कर रही हो रूपा भला यह छोटी सी चिड़िया कितना खा लेगी और रही बात खाने की तो जो हम खाएंगे वही इसे भी खिला देंगे आदित्य और रूपा बातें कर रहे थे कि तभी उन्हें आवाज आती है अरे आदित्य क्या घर पर हो जरा बाहर आओ अरे सूरज भाई आप यहां हां आदित्य वह क्या है ना आज मेरी बेटी का जन्मदिन था बहुत सारे पकवान बच गए

 मैंने सोचा गांव में बांट दूं इसीलिए मैं तुम्हें भी देने चला आया ये लो बहुत-बहुत शुक्रिया भाई आपका अरे नहीं आदित्य इसमें शुक्रिया की क्या बात है वैसे भी यह खाना खराब हो जाता तो इससे अच्छा किसी का पेट ही भर जाए सूरज यह कहकर वहां से चला जाता है यह तो बहुत स्वादिष्ट पकवान है देखो रूपा मैंने कहा था ना कि जिसके भाग्य में जो लिखा होता है वह उसे मिल मिल ही जाता है तुम खामखा चिंता कर रही थी देखो यह पकवान हमारे पास खुद चलकर आ गए आज तो हम खाएंगे स्वादिष्ट पकवान पर गाएंगे ईश्वर के गुणगान फिर वो सब मिलकर खाना खाते हैं रूपा मैं जामुन बेचने बाजार जा रहा हूं तो क्या आप इस रानी चिड़िया को भी साथ ले जाएंगे क्यों क्या हुआ कुछ नहीं मैं तो बस पूछ रही थी आदित्य रूपा की बात सुनकर जामुन बेचने चला जाता है

जामुन ले लो जामुन ताजा और मीठा जामुन आदित्य तुम्हारे जामुन तो बहुत अच्छे दिख रहे हैं क्या भाव दे रहे हो भाई जामुन ₹50 किलो है अच्छा एक काम करो मुझे 4 किलो जामुन दे दो वो आदमी बिना पैसे कम कराए आदित्य के सारे जामुन खरीद कर चला जाता है वो देखते ही देखते आदित्य के सारे जामुन बिक जाते हैं अरे वाह आज तो मेरी सारे जामुन अच्छे दामों में बिक गई अब मैं इन पैसों से मां और रूपा के लिए अच्छे कपड़े और पकवान लेकर जाऊंगा फिर आदित्य सब सामान लेकर अपने घर चला जाता है अजी ये सब क्या है आज मेरी कमाई बहुत ही अच्छी हुई है इसीलिए मैं तुम दोनों के लिए कपड़े और पकवान लेकर आया हूं और फिर इसी तरह दिन गुजरते हैं दिन प्रतिदिन आदित्य की कमाई बढ़ती जाती है फिर एक दिन उनके घर एक भोला नाम का एक व्यक्ति आता है ये लो आदित्य भाई तुम्हारे पैसे जो तुमने मुझे 6 महीने पहले दिए थे मैं वापस करने आया हूं शुक्रिया भोला भाई अरे शुक्रिया तो मुझे तुम्हारा करना चाहिए आदित्य तुमने बुरे वक्त में मेरी मदद की थी

 लेकिन यह पैसे लौटाने में मुझे थोड़ी देर हो गई इसके लिए मैं माफी चाहता हूं भोला आदित्य के पैसे वापस करता है और वो वहां से चला जाता है अजी सुनते हो यह अचानक से लोग हम पर इतने मेहरबान कैसे हो गए पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगता है जब से यह रानी चिड़िया हमारे घर आई है तभी से हमारे भाग्य बदल गए हैं रूपा तुम खामखा क्या-क्या सोच रही हो ऐसा कुछ भी नहीं है दूसरी तरफ आदित्य की तरक्की देखकर लोग जल भुन रहे थे इस आदित्य के सारे के सारे जामुन चुटकियों में बिक जाते हैं और एक हम लोग हैं सुबह से बैठे रहते हैं लेकिन हमारी एक भी फल नहीं बिकते हैं अरे हां भाई तुम बिल्कुल सही कह रहे हो इससे पहले कि इस आदित्य की वजह से हमारा धंधा बंद हो जाए हमें कुछ ना कुछ तो करना ही होगा ऐसा करते हैं भाई इसकी शिकायत अपन मुखिया जी से करते हैं बाकी वह खुद ही देख लेंगे इतना कहकर वह दोनों मुखिया जी के पास जाते हैं

 मुखिया जी नमस्ते नमस्ते कहो कैसे आना हुआ मुखिया जी हम आपको एक बहुत ही जरूरी बात बताने आए हैं बताओ कैसी जरूरी बात है मुखिया जी हमारे गांव का जो आदित्य है वो दूसरों के खेतों में जामुन चोरी करके बेच रहा है ये तुम क्या कह रहे हो हम सच कह रहे हैं मुखिया जी हमने उसे अपनी आंखों से खुद देखा है ठीक है अगर ऐसी बात है तो मैं आदित्य को इसकी सजा जरूर दूंगा वो दोनों आदमी मुखिया जी को आदित्य के खिलाफ भड़का कर वहां से चले जाते हैं मैंने तो आदित्य को बहुत ही सीधा समझा था मगर यह तो मुझसे भी ज्यादा चालाक निकला मुझे इसके बारे में पता लगाना होगा आज रात ही मैं आदित्य के यहां जाकर इस बात का पता लगाऊंगा रात होने पर मुखिया जी चुपचाप आदित्य के आंगन में आ जाते हैं और उसके घर की खिड़की के पास खड़े हो जाते हैं सुनो जी आपको मेरी कसम है मुझे बताइए आखिर हमारे भाग्य के बदलने के पीछे क्या बात है

 मुझे सच्चाई जाननी है रूपा के कसम देने पर आदित्य सारी सच-सच बात बता देता है अरे वाह यह तो बहुत ही खुशी की बात है उन दोनों की यह सारी बातें मुखिया जी सुन लेते हैं ओह तो इसका मतलब यह है कि इस चिड़िया के हाथ में ही आदित्य के भाग्य की चाबी है अगर मैं इस चिड़िया को अपने साथ ले जाऊं तो मेरा भाग्य भी बदल जाएगा फिर अगले दिन सुबह होने पर मुखिया जी उन आदमियों के साथ आदित्य के यहां पहुंच जाते हैं आदित्य तुम इतने बड़े चोर निकलोगे मैंने कभी सोचा नहीं था चोरी कैसी चोरी मुखिया जी ज्यादा बनने की जरूरत नहीं है मैं तुम्हारी सारी सच्चाई जान चुका हूं कैसी सच्चाई मुखिया जी आदित्य एक तो तुम दूसरों के खेतों से जामुन चोरी करके बेचते हो और पूछते हो कैसी चोरी तुम्हारी सजा यह है कि अब तुम्हें मुझे ₹15,000 का भुगतान करना पड़ेगा मुखिया जी मेरे पास इतने पैसे तो नहीं है और मैं सच बोल रहा हूं मैंने किसी के यहां कोई चोरी नहीं की अगर तुम्हारे पास ₹15,000 नहीं है तो मैं यह तुम्हारा चिड़िया अपने साथ ले जाऊंगा नहीं नहीं

 मैं तुम्हारे साथ नहीं जाऊंगी मुखिया जी यह मेरा चिड़िया है आप मेरे चिड़िया को ऐसे लेकर नहीं जा सकते आदित्य को बेबस देखकर वही फल वाला आदमी बोलता है मारो इसे यह हमारे खेतों में चोरी करता है और हमारी मेहनत के पैसों पर ऐश कर रहा है हां हां मारो मारो इसे यह हमारे खेतों में चोरी करता है और हमारी मेहनत के पैसों पर ऐश कर रहा है हां हां मारो इसे यह चोर है छोड़ दो मेरे पति को यह निर्दोष है इन्होंने कुछ नहीं किया है सभी की ऐसी बातें सुनकर मुखिया जी आदित्य को छोड़ देते हैं और अपने मन में सोचते हैं बेवकूफ इंसान अब मैं इसके चिड़िया से अपने भाग्य को बदलूंगा फिर ऐसे ही कुछ दिन बीत जाते हैं रानी चिड़िया के चले जाने से आदित्य की हालत पहले से भी बदतर हो जाती है सुनिए जी हमारे पास तो अब खाने के लिए कुछ भी नहीं है अब तो हमारी पहले की तरह जामुन बिकना भी बंद हो गई है

 ईश्वर पर भरोसा रखो रूपा वो कोई ना कोई रास्ता जरूर निकालेंगे और उधर सुनो चिड़िया अब से तुम मेरे साथ ही रहोगे और मैं ही तुम्हारा मालिक हूं समझे नहीं मेरा मालिक आदित्य है और वो मेरी दोस्त है मुखिया जी चिड़िया से बातें कर ही रहे थे कि तभी उनके पास व्यापारी आता है अरे रमेश भाई हां मुखिया जी मैं यहां एक काम से आया हूं कहिए क्या काम है असल में मैं इस गांव को छोड़कर जा रहा हूं और यहां मेरी बहुत सी जमीनें हैं जिन्हें मुझे बेचना है तो मैं इसमें आपकी क्या मदद कर सकता हूं यही कि अगर आप मेरी सारी जमीनें खरीद ले तो बहुत अच्छा होगा क्योंकि आपके सिवा इस गांव में मेरी इतनी सारी जमीनें कोई नहीं खरीद सकता फिर मुखिया जी उस व्यापारी की जमीनों को कम कीमत पर खरीद लेते हैं और कुछ दिनों में उन जमीनों को दो गुनी कीमत में बेच देते हैं अरे वाह यह चिड़िया तो वाकई किस्मत की चाबी है मुझे इसे सबसे छुपा कर रखना होगा वरना इसे कोई भी लेकर जा सकता है फिर ऐसे ही कुछ दिन बीत जाते हैं तो एक दिन मुखिया जी सिर्फ पिंजरे का गेट खुला ही रह जाता है और चिड़िया मौका पाते ही वहां से उड़ जाते हैं

जब थोड़ी देर बाद वो मुखिया जी आते हैं तो पिंजरे को खाली देखकर वो हैरान हो जाते हैं अरे यह क्या वो चिड़िया कहां चला गया अभी सरपंच जी उस चिड़िया को ढूंढ ही रहे थे कि तभी वही व्यापारी वहां आता है मुखिया जी आपने चालाकी से मेरी सारी जमीनों को कम कीमत पर हड़प लिया मैं आपको नहीं छोडूंगा मैं आपकी सारी सच्चाई गांव वालों को बताऊंगा नहीं ऐसा मत करो मैं बर्बाद हो जाऊंगा मैं तुम्हें तुम्हारे सारे पैसे देने के लिए तैयार हूं इतना कहकर मुखिया जी उस व्यापारी के पूरे पैसे उसे दे देते हैं पैसे लेकर व्यापारी वहां से चला जाता है मैंने आदित्य का चिड़िया छीनकर उसके साथ बहुत बुरा किया शायद मुझे आज उसी पाप की सजा मिली है और दूसरी तरफ अजी आप कहां जा रहे हो मैं जंगल की तरफ जा रहा हूं रूपा बस थोड़ी देर में आता हूं इतना कहकर आदित्य जंगल की ओर निकल जाता है प्रणाम साधु बाबा आयुष्मान बाहु पुत्र साधु बाबा मैं यहां आपको कुछ बताने आया हूं मैं जानता हूं पुत्र तुम्हारे साथ क्या हुआ है मगर कैसे बाबा मैंने बताई है रानी तुम यहां तुम्हें तो मुखिया ले गए थे ना हां दोस्त मगर मैं उसके खेत से भाग आया रानी चिड़िया आदित्य को सारी बात बता देता है आदित्य मैंने तुम्हें इसीलिए मना किया था कि जादुई चिड़िया के बारे में तुम किसी को पता मत चलने देना वरना सभी इस चिड़िया के पीछे पड़ जाएंगे क्षमा कीजिए साधु बाबा मुझसे गलती हो गई

मुझे मजबूरी में रूपा को रानी चिड़िया के बारे में बताना पड़ा था कोई बात नहीं पुत्र गलती इंसान से ही होती है यह चिड़िया मैं तुम्हें वापस करना चाहता हूं और आशा करता हूं कि तुम दोबारा कोई गलती नहीं करोगे धन्यवाद साधु बाबा मैं वादा करता हूं कि मैं दोबारा ऐसी कोई गलती नहीं करूंगा रानी चिड़िया को पाकर आदित्य का भाग्य दोबारा चमक जाता है और वो दिन प्रतिदिन अमीर होता जाता है रतनपुर गांव में एक रमेश नाम का जमींदार रहता था जिसके पास धन दौलत की कोई कमी नहीं थी लेकिन वो घमंड में हमेशा चूर रहता था जिस वजह से पूरे गांव वाले उससे परेशान रहते थे फिर एक दिन जमींदार की पत्नी मालती बोलती है अजी सुनते हो आपसे मिलने भोला आया है वो कब से आपका इंतजार कर रहा है आप जाकर उससे मिल लीजिए अरे तुम भी ना देख रही हो मैं पूजा करके आया हूं तुम मेरी पूजा को भंग करने में लगी हुई हो उसको बोल दो थोड़ी देर वो मेरा इंतजार करेगा मैं नाश्ता करने के बाद आता हूं भोला बहुत रो रहा है बोल रहा है कि उसकी मां की बहुत जोरों से तबीयत खराब है उसको डॉक्टर के पास लेकर जाना है इसलिए वो आपसे कुछ पैसे उधार लेने के लिए यहां पर आया है और आपकी पूजा भी तो खत्म हो गई है तो आप जाकर एक बार मिल लीजिए फिर बाद में नाश्ता कर लेना तुम मुझे गुस्सा दिला रही हो तुम देख रही हो ना मैं भी नहा धोकर पूजा करके उठा हूं और तुम मुझे फिर से उस दलित आदमी से मिलने को कह रही हो

 वह छोटी जाति के लोग हैं वह पता नहीं कहां-कहां से आया होगा तुम उसे यहां से भगा दो आप भले ही पूजा पाठ कितना भी कर ले लेकिन आपको पुण्य बिल्कुल भी नहीं मिलेगा क्योंकि आप कभी भी किसी का भला नहीं करते हो एक तो बेचारा इतना परेशान है और उसकी मां की तबीयत ठीक नहीं है उसको डॉक्टर के पास ले जाना है और आप है कि उसे छुआछूत कहकर भगा रहे हो तो क्या पूरे गांव के भिखारी का मैंने ही ठेका ले रखा है क्या सभी मुंह उठाकर यहां चले आते हैं पैसे मांगने के लिए मालती और जमींदार दोनों आपस में बहस कर ही रहे होते हैं कि भोला उनके घर में आ जाता है यह देखकर जमींदार को बहुत गुस्सा आ जाता है और वो गुस्से से भोला को कहता है तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर में घुसने की चलो बाहर निकलो जल्दी गेट से बाहर निकलो मालिक मेरी मां की तबीयत बहुत खराब है मुझे मां को डॉक्टर के पास ले जाना है मैं अपनी जमीन के कागज लेकर आया हूं आप इनको गिरवी रखकर मुझे कुछ पैसे दे दीजिए जिससे मैं अपनी मां को डॉक्टर के पास लेकर जा सकूं क्या कहा तुमने तुम्हारे पास जो जमीन थी वो जमीन तुम पिछली बार ही आकर गिरवी रखवा कर गए थे इस बार कौन सी जमीन के कागज लेकर आए हो हां मालिक

आप बिल्कुल सही कह रहे हो लेकिन मालिक मैं इस बार मेरे घर के कागज लेकर आया हूं अच्छा तो तुम अपने घर के कागज गिरवी रखवाना चाहते हो ठीक है मैं तुम्हें इस पर सिर्फ ₹5000 ही दे सकता हूं वह भी मुझे 15 दिन के अंदर वापस चाहिए वह भी ब्याज समेत अगर तुमने यह पैसे 15 दिन के अंदर नहीं लौटाए तो मैं तुम्हारे घर पर कब्जा कर लूंगा अगर तुम्हें यह मेरी शर्त मंजूर है तो मैं तुम्हें पैसे देने के लिए तैयार हूं मालिक मैं 15 दिन में इतने सारे पैसे आपको कैसे दे सकता हूं मेरे पास तो कोई आमदनी भी नहीं है जो मैं आपको 15 दिन में ही पैसे वापस दे सकूं आप दया कीजिए इस गरीब पर मालिक मैंने यहां कोई धर्मशाला नहीं खोल रखी जो सभी की मदद करता रहूं अगर तुम्हें मेरी शर्त मंजूर है तो मैं तुम्हें अभी पैसे दे देता हूं नहीं तो तुम यहां से जा सकते हो नहीं मालिक अगर मैं पैसे लेकर नहीं गया तो मेरी मां मर जाएगी दया करके आप यह कागज ले लीजिए और मुझे पैसे दे दीजिए फिर जमींदार भोला के घर के कागज ले लेता है और उसको पैसे दे देता है

फिर भोला पैसे लेकर अपने घर आ जाता है घर जाकर भोला अपनी मां से कहता है सुनती हो मां मैं पैसे लेकर आ गया हूं अब तुम जल्दी से तैयार हो जाओ हम दोनों डॉक्टर के पास चलते हैं अरे बेटा तुम इतने सारे पैसे कहां से लेकर आए हो हमारे पास तो एक फूटी कौड़ी भी नहीं थी अरे मां ये पैसे मैं जमींदार साहब से लेकर आया हूं जमींदार साहब को अपने घर के कागज गिरवी रखकर हे भगवान यह तुमने क्या कर दिया सारी जमीन तो पहले ही गिरवी रखकर उस जमींदार के नाम कर दिया अब हमारे पास तो सिर्फ यह घर ही बचा था और तुमने इसे भी गिरवी रख दिया तो मैं क्या करता मां तुम्हें यूं ही मरने देता माना मेरे पास पैसे नहीं है पर मैं अपनी मां को पैसों के लिए मरता हुआ नहीं देख सकता अगर तुम ठीक हो जाओगी तो पैसे हम दोबारा कमा लेंगे वो दोनों मां-बेटे ऐसे बातें कर ही रहे होते कि तभी उनके दरवाजे पर एक साधु बाबा आ जाते हैं कोई घर में है साधु बाबा की आवाज सुनकर सुमित्रा घर के बाहर जाती है कहिए साधु बाबा मैं आपकी क्या सहायता कर सकती हूं

मां जी कुछ खाने को है तो मुझे दे दो बड़ी जोर से भूख लग रही है बाबा मेरे घर में खाने को कुछ भी नहीं है सिर्फ एक रोटी है अगर आप बुरा ना माने तो मैं वो लाकर आपको दे दूंगी कोई बात नहीं मां जी भरपेट खाना खाना जरूरी नहीं होता है हम साधुओं के लिए कोई प्यार से एक निवाला दे दे वही काफी है फिर साधु बाबा सुमित्रा के हाथ से एक रोटी भिक्षा में लेकर आगे की तरफ चले जाते हैं [प्रशंसा] फिर वो चलते-चलते जमींदार के दरवाजे पर पहुंच जाते हैं और आवाज देते हैं भिक्षा मदेही भिक्षा मदेही यह आवाज सुनकर जमींदार की पत्नी मालती गेट पर आती है प्रणाम साधु बाबा आइए आइए अंदर आइए और बैठिए मैं आपके लिए खाने का इंतजाम करती हूं फिर साधु बाबा जमींदार के घर में जाकर बैठ जाता है और उन भोजन का इंतजार करता है तभी जमींदार वहां आ जाता है साधु बाबा को अपने घर में देखकर उसे बहुत गुस्सा आ जाता है और वो अपनी पत्नी के पास जाता है मालती मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है कि किसी भी भिखारी को घर के अंदर नहीं लाना है और तुम

आज फिर से इस बूढ़े को घर के अंदर ले आई और बिठा दी कि मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है कि हर किसी को घर के अंदर नहीं लाना है और ना ही मुझसे बिना पूछे किसी को कुछ देना है और ना ही किसी को कुछ खिलाना है जी आप यह क्या बोल रहे हो थोड़ा धीरे बोलिए साधु बाबा है अगर वो यह बात सुन लेंगे तो आपको श्राप दे देंगे अरे यह क्या श्राप दे देंगे मैं बहुत अच्छी तरीके से जानता हूं इन ढोंगी बाबा को जो भेष बदलकर मांग मांग कर खाते हैं और तुमने बिना सोचे समझे उसको घर में बिठा लिया पूरा घर भी गंदा करवा दिया मैं अभी उस ढोंगी बाबा को भगा कर आता हूं लेकिन साधु बाबा जमींदार और मालती दोनों की बातें सुन लेते हैं और वो बाहर आकर गुस्से से जमींदार से कहते हैं मैंने आज तक तुम जैसा घमंडी सेठ नहीं देखा जो घर आए हुए संत का इतना अपमान करे

मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि तुम एक लोमड़ी बन जाओ साधु बाबा की श्राप देते ही जमींदार उसी वक्त एक लोमड़ी बन जाता है यह देखकर उसकी पत्नी मालती बहुत परेशान हो जाती है साधु बाबा इनको क्षमा कर दीजिए आप अपना श्राप वापस ले लीजिए मेरा इस दुनिया में इनके सिवा और कोई भी नहीं है इनसे जाने-अजाने में गलती हो गई इन्हें आपके बारे में नहीं पता था आप इन्हें माफ कर दीजिए मुझे क्षमा कर दीजिए मैं अब कभी भी साधु या गरीब व्यक्ति का अपमान नहीं करूंगा मुझे आप पहले जैसा कर दीजिए मैं अपना श्राप वापस नहीं ले सकता लेकिन मैं इसका तुम्हें तोड़ जरूर बता सकता हूं जब तुम किसी ने इंसान के घर में खाना खाओगे तो तुम थोड़ा ठीक हो जाओगे दूसरा जब तुम किसी गरीब इंसान की या जरूरतमंद की मदद करोगे तो तुम आधा ठीक हो जाओगे और तीसरा जब तुम किसी भले साधु या पंडित का झूठन खाओगे तो तुम पूरी तरह से ठीक हो जाओगे ऐसा कहकर साधु बाबा वहां से चले जाते हैं और वो लोमड़ी भी गांव के बड़े से पेड़ के नीचे बैठ जाता है

 वो किसी के आने का इंतजार करता है तभी थोड़ी देर बाद वहां से घनश्याम सेठ गुजरता है और वो लोमड़ी को देखकर कहता है अरे यार यह कितना गंदा है मेरे कपड़े गंदे हो जाएंगे इसे भगाओ यहां से जल्दी से जंगली जानवर कहीं का पता नहीं कहां-कहां से चले आते हैं चल भाग जा यहां से फिर घनश्याम सेठ का आदमी जैसे ही लोमड़ी को मारने के लिए आगे बढ़ता है तो वो लोमड़ी वहां से भाग जाता है यह सब मेरे कर्मों का ही फल है मैं भी सभी के साथ ऐसा ही करता था अगर मैं ऐसा किसी के साथ नहीं करता तो आज मेरे साथ भी ऐसा नहीं होता हे भगवान मुझे माफ कर दो अब मैं कभी भी किसी के साथ ऐसा नहीं करूंगा फिर लोमड़ी चलते-चलते गांव में भोला के घर के बाहर आ जाता है भोला और उसकी मां दोनों दिल के बहुत ही नेक इंसान थे वो अपने घर पर आए हर एक पशु-पक्षी को खाना दिया करते थे भले ही उसकी मां बीमार क्यों ना हो अरे यह तो भोला है जिसे मैंने अपने घर के अंदर भी नहीं आने दिया था काश मैं ऐसा नहीं करता और सभी ब्राह्मण और गरीब मजदूर लोगों की मदद करता और उसके बदले उनसे कुछ नहीं लेता तो आज मेरी यह हालत नहीं होती लेकिन सुना है भोला की मां सभी को खाना देती है मैं भी जाकर देखता हूं शायद मुझे भी दे दे तो मेरा थोड़ा श्राप ठीक हो जाएगा देखता हूं कि कब भोला की मां बाहर आकर खाना डालती है फिर लोमड़ी वहीं बैठकर इंतजार करने लगता है

 कुछ ही देर बाद भोला की मां हाथ में कुछ थाली लेकर आई और उसने उस थाली को बाहर आंगन के एक पेड़ के पास रख दी और साथ में एक थोड़ा सा खाना पशु-पक्षी के लिए रख दिया और वापस घर में चली गई भोला के मां के अंदर जाते ही लोमड़ी ने वहां आकर रखा हुआ खाना खा लिया तभी वो थोड़ा ठीक हो गया और खुश होकर बोला अरे वाह मैं थोड़ा ठीक हो गया यानी मैंने साधु बाबा की पहली परीक्षा पास कर ली अब बची दो परीक्षा वो भी मैं जल्दी से पूरी कर लूंगा फिर मैं पहले जैसा हो जाऊंगा भोला तुम भले ही गरीब हो लेकिन दिल के बहुत ही नेक इंसान हो मैं तुम्हारा यह एहसान कभी नहीं भूलूंगा जब मैं ठीक हो जाऊंगा तब मैं तुमको और तुम्हारी मां को आदर सम्मान के साथ घर लेकर जाऊंगा और खाना खिलाऊंगा फिर वो लोमड़ी वहां से चला जाता है और अपनी दूसरी परीक्षा को पास करने के लिए वो एक बहुत ही गरीब आदमी की तलाश करता है चलते-चलते वो गांव से बहुत दूर आ जाता है तो उसे एक छोटी सी झोपड़ी दिखाई देती है लगता है मैं जिस गरीब व्यक्ति की तलाश कर रहा था वो शायद इसी झोपड़ी में रहता है मुझे वहां जाकर देखना चाहिए ऐसा कहकर लोमड़ी झोपड़ी के पास जाता है और उसकी छत पर जाकर बैठ जाता है तो उसे अंदर से आवाज सुनाई दी अरे

 यह आप क्या कर रहे हो जी यहां तो खाने के लाले पड़े हैं और आप यह रोज-रोज पंछियों के लिए अनाज के दाने रख रहे हो घर में सिर्फ दो मुट्ठी चावल थे उसमें से आप दो मुट्ठी कटोरियों में रख दिए अब हम क्या खाएंगे मुझे पता है कि घर में अनाज नहीं बचा है लेकिन जब खुद का पेट भरा हुआ हो तब भूखे को खाना खिलाने में क्या मजा है असली इंसानियत तो वो है जब हम खुद आधे पेट रहे और किसी भूखे का पेट भरने में मदद करें लेकिन हम ही क्यों जी दुनिया में करोड़ों लोग हैं वह भी पक्षियों और जानवरों के बारे में सोच सकते हैं एक हमने ही ठेका नहीं ले रखा है अगर हर कोई यही सोचे तो इस दुनिया से इंसानियत का नामोनिशान ही मिट जाएगा एक बात बताओ यह पंछी जानवर गांव और शहर में क्यों आते हैं क्योंकि हम इंसानों ने इनके रहने खाने की जगह छीन ली है पहाड़ तोड़कर नदी जंगल को पीछे हटाकर वहां पर सड़कें और ऊंची-ऊंची इमारतें बना दी हैं पेड़ काटते समय किसी ने यह भी नहीं सोचा कि इन पेड़ों पर पंछियों का बसेरा होगा पेड़ पर लगने वाले फलों से वो भूख मिटाते होंगे सबको सिर्फ अपनी ही तरक्की चाहिए फिर चाहे किसी का भी घर टूट जाए लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचता कुदरत ने जितना हक हमको दिया है यहां रहने का उतना ही हक इन सभी जीवों को भी दिया है हमारा क्या है हम तो बूढ़े हो जाएंगे पता नहीं और कितनी जिंदगी बाकी है

 लेकिन जब तक मैं जिंदा हूं मैं इन्हें खाना खिलाता रहूंगा और उनकी मदद करता रहूंगा मुझे ऐसा करके बहुत अच्छा लगता है भले ही मेरे पास कुछ खाने को हो या ना हो लेकिन जितना भी है मैं इन्हें मेरे हिस्से में से आधा हिस्सा जरूर दूंगा लेकिन मैं इन्हें कभी भूखे पेट नहीं रखूंगा अच्छा आपकी जो मर्जी है वो करिए लेकिन आप भूखे पेट कैसे रहेंगे क्योंकि आपको दवाई भी तो खानी है अगर आप दवाई नहीं खाएंगे तो फिर से आपकी तबीयत खराब हो जाएगी और घर में इसके अलावा कुछ भी नहीं है यह बात सुनकर लोमड़ी खुद से बोलता है यह कितना नेक इंसान है खुद की तबीयत खराब होने पर भी पशु-पक्षी को खाना खिला रहा है इससे बढ़कर नेक इंसान कोई हो ही नहीं सकता मुझे इनकी मदद करनी होगी मुझे इनके लिए खाने के लिए कुछ इंतजाम करना होगा फिर लोमड़ी वहां से जंगल की तरफ चला जाता है लोमड़ी जंगल से कुछ फल तोड़कर उस गरीब किसान के आंगन में रख देता है और जाकर छत पर बैठ जाता है तभी थोड़ी देर बाद राघव की पत्नी बाहर आती है और इतने सारे फल देखकर हैरान हो जाती है हे जी सुनते हो यहां आंगन में इतने सारे फल कहां से आए फिर राघव घर के बाहर आता है अरे यह तो सच में इतने सारे फल हैं कहां से आए

यह सभी अभी मैं यहां चिड़िया को दाना डालकर गया था तब तो यहां कोई फल नहीं था लगता है कोई यहां रख कर गया है देखो भाग्यवान मैं कहता था ना अच्छाई का फल हमेशा मिलता है देखो हमने अपना पेट काटकर इन पंछी को खाना डाला और ऊपर वाले ने किसी के हाथों हमारे लिए खाना भिजवा दिया यह तो बहुत ही खुशी की बात है मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा आप सही कहते थे हमें हमेशा भलाई करते रहना चाहिए ऊपर वाला सब देख रहा है फिर वो दोनों पति-पत्नी फल लेकर खाने लगते हैं वो दोनों जैसे ही फल खाते हैं तो लोमड़ी आधा इंसान और आधा लोमड़ी बन जाता है यह देखकर राघव उसकी पत्नी दोनों डर जाते हैं कौन हो तुम और ऐसे अचानक कैसे प्रकट हो गए और तुम्हारा यह शरीर आधा लोमड़ी और आधा इंसान का कैसे है मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है आप सच में एक पुण्य आत्मा हो मैं आपको सब बताता हूं पहले मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हूं आपकी वजह से मेरा आधा श्राप खत्म हो गया आपका बहुत-बहुत धन्यवाद फिर जमींदार सारी कहानी उस व्यक्ति को बताता है ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो सिर्फ अपना कर्म कर रहा हूं नहीं आप नहीं जानते कि आपने मुझ पर कितना बड़ा उपकार किया है आपके दिल में सच में पशु और जानवरों के लिए बहुत दया है चलो अब मैं चलता हूं मुझे अपनी एक और परीक्षा पास करनी है

इतना कहकर जमींदार वहां से चला जाता है और अपनी दूसरी परीक्षा भी पास कर लेता है और मन में सोचता है मैंने अब तो दूसरी परीक्षा भी पास कर ली अब तीसरी परीक्षा बची है जो कि मुझे किसी ब्राह्मण का जूठन खाना है जो कि दिल का बहुत नेक हो फिर लोमड़ी चलते-चलते गांव से बाहर आ जाता है पर उसे किसी ब्राह्मण का घर नहीं देखता वो चलते-चलते जंगल में चला जाता है तभी थोड़ी देर में रात हो जाती है तो लोमड़ी जंगल में ही सो जाता है फिर अगले दिन सुबह होते ही लोमड़ी फिर से ब्राह्मण की तलाश में निकल पड़ता है आज कैसे भी करके मुझे ब्राह्मण का झूठा खाना ही होगा नहीं तो मैं ऐसे ही रह जाऊंगा मैं एक काम करता हूं आज मैं फिर से गांव की तरफ जाता हूं वहां पर किसी ना किसी घर में झूठा खाना मुझे मिल ही जाएगा लोमड़ी चलते-चलते गांव की तरफ चला आता है और उसको देखकर पूरे गांव वाले भागने लगते हैं अरे मारो मारो इसको आधा लोमड़ी और आधा इंसान आ गया है यह तो कोई शैतान लग रहा है नहीं नहीं मुझे मत मारो मैं कोई शैतान नहीं हूं मुझे साधु बाबा ने श्राप दिया है जिस वजह से मैं ऐसा हो गया हूं मैं किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा मुझे जाने दो मुझ पर दया करो इतना कहकर लोमड़ी वहां से चला जाता है और कोई गांव वाला उसको नहीं मारता फिर वो जाते-जाते पंडित के वहां पहुंच जाता है वो पंडित घर के बाहर ही उसके झूठे बर्तन रखकर अंदर चला जाता है यह देखकर लोमड़ी बहुत खुश होता है फिर लोमड़ी उस थाली में से बचा हुआ खाना खा लेता है और पूरी तरह से ठीक हो जाता है यह देखकर वो बहुत खुश होता है अरे पंडित जी घर से बाहर आइए मुझे आपसे कुछ कहना है फिर पंडित घर के बाहर आता है

 अरे भाई कौन हो तुम और मेरे आंगन में क्या कर रहे हो तुम तो कोई बड़े आदमी लग रहे हो पर मेरे यहां पर कैसे आना हुआ पंडित जी मुझे आपका धन्यवाद करना था आपकी वजह से मेरा श्राप पूरी तरह से ठीक हो गया है आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और मैं आपको आपके परिवार के साथ आमंत्रित करता हूं आप मेरे घर पर आइए और भोजन ग्रहण कीजिए ठीक है मैं अवश्य आऊंगा फिर जमींदार वहां से सीधा भोला के घर जाता है जमींदार को देखकर भोला और उसकी मां डर जाती है भोला तुम और तुम्हारी मां दोनों आज शाम को मेरे घर आना मुझे तुम दोनों से कुछ कहना है मालिक मेरे पास पैसों का इंतजाम नहीं हुआ कृपा करके आप मुझे कुछ दिनों की और मोहलत दे दीजिए मैं आपके पूरे पैसे वापस दे दूंगा हां बेटा हम दोनों को 10 दिन की मोहलत और दे दो हम दिन रात मेहनत करके तुम्हारे पाई-पाई चुका देंगे लेकिन तुम मेरे बेटे को छोड़ दो आप चिंता मत कीजिए मैं इस बारे में आपसे बात नहीं कर रहा हूं मैं आपकी जमीन के सारे कागज और घर के सारे कागज वापस दे दूंगा इसीलिए मैं आप दोनों को अपने घर बुला रहा हूं इतना कहकर जमींदार अपने घर के लिए निकल जाता है जमींदार को सही देखकर उसकी पत्नी मालती बहुत खुश हो जाती है देखो भाग्यवान मैं बिल्कुल ठीक हो गया हूं और तुम मुझे माफ कर दो मैं तुम्हें हमेशा दान धर्म करने से रोका करता था आज से मैं तुम्हें दान धर्म करने के लिए कभी नहीं रोकूंगा अब मुझे सब समझ आ गया है इस दुनिया में दान धर्म से बड़ी चीज और कोई नहीं है इंसान के साथ ऊपर केवल उसके कर्म ही जाते हैं मैं भी अब सब गरीब के जमीनों के कागज उन्हें वापस लौटा दूंगा और आज से रोज गरीब ब्राह्मणों को भोजन कराया करूंगा तो दोस्तों हमें इस कहानी से यही सीख मिलती है कि हमें कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए और जरूरतमंद लोगों की हमेशा मदद करनी चाहिए

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