एक बार की बात है हमीरपुर नाम के गांव में काशीनाथ नाम का एक आदमी अपनी पत्नी श्याम और कर बेटियों के साथ राहत था उसे गांव में हनुमान जी का एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर था काशीनाथ इस मंदिर की देखरेख करने का कम करता था फिर एक दिन कुछ अमीर लोग हनुमान जी के मंदिर में देर सारे गहरी दाल कर देते हैं दूसरी तरफ बलवंत नाम के एक चोर को इस बड़े में पता चला है फिर वो अपने साथियों के साथ मिलकर मंदिर से गने चुराने पहुंच जाता है लेकिन काशीनाथ उन सभी को रॉक लेट है और उनका मुकाबला करने लगता है काशीनाथ अकेला था इसलिए वो उन सभी का सामना नहीं कर पता फिर बलवंत उसकी हत्या की थी अपने साथियों के साथ मंदिर के अंदर दाखिल हो जाते हैं
लेकिन हनुमान जी की
शक्ति के आगे उनकी एक नहीं चलती और उन सभी पर खोलना हुआ तेल गिरने लगता है ये
मंदिर तो बहुत ही शक्तिशाली है चलो सब लोग अपनी जान बचाकर भागो यहां से उसके बाद
बलबन तो अपने आदमियों के साथ वहां से भाग निकलता है लेकिन दूसरी तरफ काशीनाथ के
करने के करण उसकी पत्नी शाम और उसकी चारों बेटियां पुरी तरह से असहाय हो गई थी मां
हमारी घर का राशन खत्म हो गया है अब तो अनाज का एक दाना भी नहीं बच्चा हमारा गुजरा
कैसे होगा मां मैं आज पुरी गांव में कम ढूंढने गई थी लेकिन किसी ने मुझे कम नहीं
दिया कल मैं शहर जान वाली हूं शायद वहां मुझे कोई कम मिल जाए फिर अगले दिन श्याम
कम की तलाश में शहर चली जाति है लेकिन पूरा दिन भड़काने के बाद भी उसे कोई कम नहीं
मिलता उसके बाद वो दुखी होकर अपने घर लोट आई है की उसकी चारों बेटियां फूट-फूट कर
रो रही हूं इसलिए हमें स्कूल से निकाल दिया गया है
है बजरंगबली आप
हमारी कैसी परीक्षा ले रहे हो मेरा पति आपकी सेवा करते-करते मा गया और आपको हम पर
जरा भी तरस नहीं ए रहा लगता है आप सिर्फ अमीरों के ऊपर अपनी कृपा करते हैं हम
गरीबों के जीने करने से आपको कोई फर्क नहीं पड़ता इस तरह श्याम दुखी होकर हनुमान
जी को कोसाना शुरू कर देती है फिर अगले दिन श्याम के साथ-साथ उसकी चारों बेटियां
भी कम की तलाश करने लगती है शाम होते-होते उन सभी को एक रेस्टोरेंट में बर्तन धोने
का कम मिल जाता है रेस्टोरेंट के मालकिन कामिनी बहुत ही लालची औरत थी वह सभी की
मजबूरी का फायदा उठाने का फैसला करती है रेस्टोरेंट के साथ साथ कामिनी उन सभी से
अपने घर का पूरा कम करवाती थी दूसरी तरफ कामिनी चारों बहनों से लोगों के घरों में
खाने को पार्सल करवाने का कम भी करवाती थी और इनकी माधुरी रेस्टोरेंट का कम अकेले
संभल लेती है आखिर यह तुझे कहां से मिले इन्हें तनख्वाह भी बहुत ज्यादा देनी पड़ती
होगी अरे मैं बेवकूफ हूं जो इन तनख्वाह दूंगी तू तो जानती है
मैं लोगों को बेवकूफ बना कर उनका फायदा उठाती हो मैं इसे
इसी तरह कम करवाती रहूंगी और जब पैसे देने की बड़ी आएगी तब इन पर झूठ इल्जाम लगाकर
उनकी टी भी करूंगी तेरी इसी चल की वजह से तो इतनी अमीर बनी है दूसरी तरफ श्याम उन
दोनों की साड़ी बातें सुन लेती है अच्छा तो ये औरत मुझे और मेरी बेटियों को बेवकूफ
समझ रही है मैं इसी वक्त यहां से कम छोड़ दूंगी उसके बाद श्याम कामिनी को भला बड़ा
का कर अपनी बेटियों के साथ वहां से जान लगती है अपनी बेज्जती होती देख कामिनी को
बहुत गुस्सा आता है और वो अपने भाई बलबन को वहां बुलाकर शर्मा के साथ साथ उसकी
बेटियों की खूब टी करवाती है तुम सबको मार खिलौने के बाद अब मुझे सुकून मिल रहा है
चलो निकालो यहां से और दोबारा अपनी शक्ल मुझे मत दिखाना उसके बाद शाम अपनी बेटियों
के साथ रोटी हुए वहां से चली जाति है
उसने हमसे इतने दोनों तक मुक्त कम करवाया और हमारी टी भी
करवाती मां आखिर यह दुनिया इतनी बुरी क्यों है यहां तो किसी के अंदर जरा भी
ईमानदारी और दया भावना नहीं है हर कोई गरीब की मजबूरी का फायदा उठाने की सोचता है
हां बेटी ये दुनिया ऐसी है यह गरीब को बहुत संघर्ष करना पड़ता है चलो कहानी और
जाकर कम ढूंढते हैं अगर जिंदा रहना है तो कम तो करना ही पड़ेगा उसके बाद सभी कम
ढूंढने के लिए भड़काने लगता हैं वह सभी एक पुल के ऊपर से गुर्जर रहे थे तभी अचानक
तेज बारिश शुरू हो जाति है और बारिश की वजह से पुराना कमजोर पुल टूटने लगता है शाम
अपनी चारों बेटियों को पड़कर किसी तरह पुल पर करने की कोशिश करने लगती है लेकिन
देखते ही देखते वह फूल टूट जाता है और वह सभी नदी में गिर जाते हैं इस तरह श्याम
और उसकी बेटियां बजरंगबली से मदद की गुहार लगाने लगती है दूसरी तरफ मंदिर में
विराजमान बजरंगबली उन सभी की प्रार्थना सुन लेते हैं उसके बाद बजरंग बाली अपनी
शक्ति से एक विशाल सुनहरी रोटी प्रकट कर देते हैं फिर वो रोटी हवा में उड़ते हुए
नदी में पहुंच जाति है तुम सबकी सहायता के लिए मुझे बजरंग बाली ने भेजो है चलो आओ
तो मुझमें पर स्वर हो जो उसके बाद शाम अपनी बेटियों के साथ रोटी के ऊपर स्वर हो
जाति है
फिर वो रोटी उड़ते
हुए उन सबको नदी से बाहर निकलते हैं मेरे रहते ही तुम सबको किसी भी चीज की फिक्र
करने की जरूर नहीं है मैं तुम सब का पेट भरने के साथ-साथ तुम सब की कमाई का जरिया
भी बनाऊंगी मैं तुम सबको बीमारियां दूर करने वाली जादू रोटियां दूंगी जिन्हें बीच
कर तुम सबको अच्छे खेस पैसे मिलेंगे उसके बाद सुनहरी रोटी वहां बीमारी दूर करने
वाली देर साड़ी रोटियां प्रकट कर देती है फिर जादू रोटी श्याम और उसकी बेटियों को
लेकर शहर के बाजार में पहुंच जाति है हमारे पास शरीर के सभी रोगो का इलाज है आई
हमारे पास और जादू रोटियां खाकर पुरी तरह ठीक हो जाइए इस तरह श्याम और उसकी
बेटियां लोगों को आवाज देने लगती है जादू रोते की बात सुनकर वह लोगों की भीड़
इकट्ठा हो जाति है सुनो बहन दिन-ब-दिन मेरी आंखों की रोशनी कम होती जा रही है लगता
है कुछ दोनों में मैं अंधा हो जाऊंगा क्या तुम्हारी जादू रोटियां खाता ही मेरी
आंखें ठीक हो शक्ति है और अगले ही पाल उसकी आंखों की तकलीफ पुरी तरह गायब हो जाति
है और श्याम की जादू रोते की तारीफ करने लगता है
कुछ दोनों पहले
एक्सीडेंट में मेरा हाथ टूट गया था लो तुम्हारी रोटी खाकर अपना हाथ ठीक करना चाहता
हूं उसके बाद वो आदमी भी श्याम से रोटी खरीद कर का लेट है और कुछ ही पलों में उसका
टूटा हुआ हाथ पुरी तरह ठीक हो जाता है बस फिर क्या था ये देखकर वहां मौजूद सभी लोग
श्याम से रोटियां खरीदना शुरू कर देते हैं देखते ही देखते श्याम बहुत साड़ी
रोटियां बचती है अरे वह हमारे पास तो बहुत साड़ी पैसे इकट्ठा हो गए हां मां इन
पैसों से हम स्कूल की फीस भर के दोबारा अपनी पढ़ाई शुरू कर सकते हैं मैंने
तुम्हारी पैसों की समस्या तो खत्म कर दी अब मैं तुम सबको एक घर भी दूंगी उसके बाद
उसे जादू रोटी के अंदर से देर साड़ी रोटियां बाहर निकाल कर आपस में जुड़ने लगती
हैं और देखते ही देखते वहां रोते से बनाई घर तैयार हो जाता है उसे घर को देख कर
श्याम और उसकी बेटियों की खुशी का ठिकाना नहीं राहत उसके बाद वह सभी मजे से उसे
रोटी से बने घर में रहने लगता हैं
लेकिन फिर एक दिन कामिनी और उसका भाई बलवंत शय मां की जादू
रोटी के बड़े में जान लेते हैं मैंने सब पता कर लिया है बहन ओ श्याम को कहानी से
जादू रोटी मिल गई है वो रोटी बहुत ही शक्तिशाली है हमें किसी भी तरह उसे रोटी को
हासिल करना होगा तो फिर डर किस बात की है भैया चलो आज शाम और उसकी बेटियों के
हत्या करके उसे जादू रोटी को अपने घर ले आते हैं उसके बाद कामिनी अपने भाई के साथ
श्याम और उसकी बेटियों को करने के लिए उनके घर पहुंचती है अरे वह यह रोटी से बना
घर तो बहुत ही सुंदर है इन्हें करने के बाद मैं इस घर में रहूंगा लेकिन तभी जादू
रोटी उड़ते हुए उनके सामने ए जाति है मेरी रहते हुए कोई भी श्याम और उसकी बेटियों
का कुछ नहीं बिगाड़ सकता ठहरो मैं अभी तुम दोनों को सबक सिखाती हूं उसके बाद जादू
रोटी कामिनी और बलबन को अपने ऊपर बिठाकर हवा में उड़ते हुए उन्हें दूर एक टापू के
ऊपर ले जाकर पटका देती है उसे टापू के ऊपर मौजूद बचाओ मुझे अरे आप रे अरे यह सांप
और बिच्छू तो मैंने शरीर फैट गए अरे कोई मुझे बचाओ लेकिन दोनों बैक नहीं पाते और
थोड़ी ही डर में सांप बिच्छू के जहर के करण उन दोनों की मौत हो जाति है
इस तरह उन दोनों को
उनके लालच का फल मिल जाता है उसके बाद जादू रोटी हवा में उड़ते हुए वापस श्याम के
पास पहुंच जाति है उसे दिन के बाद से शाम और उसकी बेटियों के जीवन में कभी कोई
परेशानी नहीं आई और वो सभी हंसी खुशी अपना जीवन जीने लगती है दर्द हो रहा है और
जोर से ध कल जाति है और उसके सर पर चोट ग है और सर से खून निकालने लगता है राजेश
घर का दरवाजा बैंड कर देता है अब सरल कहां जाएगी क्या करेगी मगर उसके साथ ऐसा बर्ट
क्यों किया जा रहा एक भोली भाले लड़की है यहां से दूर रतनपुर नाम के गांव में उसका
घर था उसके मां-बाप गुर्जर गए थे इसीलिए वो अपने चाचा और चाचा के पास रहती थी
हमेशा चाचा और चाचा से ताली सुनती थी और घर के कम करती थी उसे उम्मीद थी की शादी
के बाद उसका जीवन पुरी तरह से बादल जाएगा मगर हम दहेज का पैसा कहां से देंगे और
देंगे ही क्यों यह हमारी सगी बेटी थोड़ी है तुम चिंता मत करो
मैं सब कुछ संभल
लूंगा दहेज मांगती है हम तो 5 लाख लेंगे शादी के 5 महीने के बाद एक-एक लाख रुपए दे देंगे और शादी पक्की हो
जाति है रात को तरला की चाचा कहती है आपने बोल तो दिया की दे देंगे मगर क्यों
देंगे कहां से देंगे [संगीत] एक बार इसकी शादी हो जाए फिर मैं दहेज का एक भी पैसा
नहीं दूंगा और फिर वो लोग इसके साथ क्या करेंगे ऐसे ही एक महीने बीत जाते हैं एक
महीने बाद राजेश कहता है क्या बात है एक महीना हो गया अभी तो सरल के चाचा से पैसे
क्यों नहीं दिए तो फिर हम सरल पर अत्याचार करेंगे बहुत गुस्सा हो जाति है और बिना
दहेज के हम इस काली चुड़ैल को इस घर में रखेंगे क्या चल बेटा उसे सब एक शिखा दोनों
मिलकर सरल को बहुत डंडे से भी मार जो बचाओ मगर कौन है इस दुनिया में उसका सका सरल
मार का लेती है और अकेली कमरे में बैठकर सिसक सीसक कर रोती रहती है
है भगवान मेरे तो
सोचा था की शादी के बाद मेरे साथ सब कुछ अच्छा होगा मगर क्यों नहीं हो रहा है
भगवान मैं क्या करूं आखिर मेरी गलती क्या है और उसके पेट में कुछ महसूस होने लगता
है उसे पता चला है की वह प्रेग्नेंट है वह बहुत खुश होती है और उधर जानकी और राजेश
मिलकर दूसरी शादी का प्लेन बनाते हैं और जान की लड़की ढूंढ भी लेती है लड़की का
नाम नंदिनी के पिता से बहुत पैसे दहेज में मिलते हैं राजेश को नंदिनी को सरल के
बड़े में बताने अच्छा है यह जान के बावजूद राजेश नंदिनी से शादी कर लेट है और
नंदिनी को घर लता है अपना रंग दिखाना शुरू कर देती है इसलिए मैं तुझे कम काम
करवाऊंगी मेरा सर कम तू ही करेगी सरल कुछ नहीं बोलती वो बोलेगी भी क्या उसके पास
अभी जान के लिए कोई जगह ही नहीं है वो चुपचाप सब कुछ सुनती जाति है सरल खाना बनती
है और घर का सर कम करती है नंदिनी कार्ड को परेशान करने के बड़े में सोचती है वो
चुपचाप सरल के बनाए हुए खाने में बहुत ज्यादा नमक मिला देती है जब राजेश और जानकी
वो खाना खाता हैं
तब वो गुस्सा हो जाते हैं ये क्या इतना नमक तुझे नमक की समझ
नहीं है क्या निकम्मी कहानी की या फिर से बना कर ऐसी नंदिनी शर्मा को परेशान करते
रहती है एक दिन जानकी का पेट खराब है उसने सब्जी ज्यादा तीखा बनाने के लिए माना
किया है नंदिनी सरल के बनाए हुए खाने में बहुत सर लाल मिर्च पाउडर दाल देती है वह
खाकर जान की बहुत गुस्सा हो जाति है बेटा यह मुझे मारना चाहती है खाना भी नहीं
बनाना आता तुझे रो कर अपनी जान की भीख मांगती रहती है मैंने सब कुछ ठीक-ठाक ही
बनाया था राजेश शर्मा को घर के बाहर ले जाता है और जोर से थकीर देता है और उसके सर
पर चोट ग जाति है और कर देता है अब सरल कहां जाएगी क्या करेगी वह चलते चलते एक
जंगल के अंदर चली जाति है और एक पेड़ के नीचे खड़ी होकर होती रहती है मेरा सब कुछ
चला गया अब मैं क्या करूंगी उसने अच्छा तो मैं आत्महत्या कर लेती हूं तभी वह अचानक
देखते है
की एक बंदरिया जमीन पर जख्मी पड़ी हुई है उसके साइन में तीर
घुसा हुआ है वो जोर-जोर से सिख रही है बहुत दर्द हो रहा है और अपना कपड़ा फाड़ कर
जख्मी जगह पर बंद देती है तुम चिंता मत करो यह जख्म कुछ ही दोनों में ठीक हो जाएगा
तभी वहां पर एक चमत्कार हो जाता है वह बंदरिया जंगल की देवी में बादल जाति है जंगल
की देवी कहती मैं बंदरिया इस रूप में तेरी परीक्षा ले रही थी तो बहुत दयालु है खुद
इतनी दुखी होने के बावजूद तूने जानवर की मदद की मैं तुझे प्रश्न हूं यह ले यह जादू
मसाले इसे खाने में इस्तेमाल करेगी तो कोई भी खाना बहुत ही ज्यादा स्वादिष्ट हो
जाएगा जा अब शहर जाकर खाना बेचना शुरू कर मगर एक चीज याद रखना ये मसाले सिर्फ तेरे
हाथ में ही कम करेंगे अगर किसी ने इसे चूड़ा कर खाने में इस्तेमाल किया तो जो कोई
भी वो खाना खाएगा वो तुरंत मा जाएगा यह बोलकर जंगल की देवी अदृश्य हो जाति है
और रास्ते में एक
छोटी सी दुकान बनाकर बैठ जाति है खाना बनती है और कर देती है सब लोग खाकर बहुत
तारीफ करते हैं वह ऐसे राजमा चावल तो मैंने जिंदगी में नहीं खाया वह आपके पकवान का
तो जवाब नहीं ऐसी बहुत सारे लोग रोज खाना खाने लगता हैं सड़ना के पास बहुत पैसे ए
जाते हैं उन पैसों से सरल अपने लिए घर खरीदता है यह सब नंदिनी को पता चला है तो वो
लालची हो जाति है मुझे भी चाहिए पैसे मुझे भी चाहिए असली चीज जादू मसाले मुझे भी
चाहिए वो मसाले मुझे भी अमीर बन्ना है तब नंदिनी चुपके से घर के अंदर घुसकर मसाले
का डिब्बा चोरी करके ले जाति है और घर जाकर बहुत उत्साहित हो जाति है जादू मसाले
अब मैं इसे खाना बनाऊंगी देखना कितना स्वादिष्ट बनता है
और तीनों उसे खाने
को खाता हैं मगर उन लोगों को जंगल की देवी के शर्ट के बड़े में तो पता नहीं था
इसीलिए चोरी के मसाले का खाना का कर तीनों के तीनों मा जाते हैं की नंदिनी ने
मसाले का डिब्बा चोरी किया है वह जंगल की देवी के पास वापस जाति है और देवी उसे
फिर से एक डिब्बा दे देती है सरल को इंसाफ मिलता है और उसके बाद उसको एक बेटी भी
होती है अंजलि अपनी बेटी के साथ खुशी-खुशी जीवन बीता देती हे
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