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मौत का सांता क्लॉस

  पिंकी आज बहुत ज्यादा खुश थी क्योंकि आज क्रिसमस था वह सुबह से ही अपने माता-पिता के साथ अपने घर को सजा रही थी पिंकी के माता-पिता हर साल बहुत धूमधाम से क्रिसमस का त्यौहार मनाया करते थे मुझे तो लगता है पिंकी की क्रिसमस की खुशी हम सब में ज्यादा तुम्हें है क्रिसमस का दिन मुझे बहुत अच्छा लगता है पापा आज की रात मेरे सारे दोस्त मेरे घर आते हैं और हम अपने घर पर धूमधाम से पार्टी करते हैं लेकिन हर साल आप मुझसे झूठ भी बोलते हो पिंकी यह गलत बात है बेटा आप अच्छी तरह से जानती हो कि आपके पापा कभी झूठ नहीं बोलते रहने दो कनिका पिंकी अभी सिर्फ 10 साल की है अच्छा तो मुझे बताओ पिंकी मैंने तुमसे क्या झूठ बोला यही कि सैंटा हर साल क्रिसमस की रात को बच्चों को गिफ्ट देकर जाते हैं लेकिन मैंने तो आज तक कभी किसी सैंटा को नहीं देखा नहीं पिंकी वो गिफ्ट तुम्हारे तकिए के नीचे सैंटा रख कर जाता है तुम सो रही होती हो ना इसीलिए वह तुम्हें जगाता नहीं है जब आप सोकर उठती हो तो आपको अपने पिलो के नीचे गिफ्ट रखे हुए मिलते हैं ना अगर ऐसी बात है तो फिर मैं आज पूरी रात जागूंगा के हाथों से ही गिफ्ट लूंगी पिंकी की बात सुनकर राज...

डरावना जंगल

 रात के लगभग 11:00 बज चुके थे। शहर के पुराने बाजार की लाइटें आधी बुझ चुकी थी और हवा में धूल और ठंडक का अजीब मिश्रण घुला था। इसी बाजार के कोने पर बना था पुराना रिक्शा स्टैंड, जहां रात को सिर्फ कुछ ही रिक्शा वाले नजर आते थे। आरव एक निजी बैंक में काम करने वाला युवक। उसे अचानक ही एक जरूरी कागजात के लिए देवगढ़ गांव जाना था। जो शहर से करीब 30 कि.मी. दूर था। थोड़ी देर बाद आरव शहर में जो पुराना रिक्शा स्टैंड था वहां पहुंच गया। पास ही में जो चाय की टपरी थी वहां कुछ रिक्शा चालक बैठकर चाय पी रहे थे। तभी आरव ने उन रिक्शा चालकों से कहा। भैया कोई मुझे देवगढ़ छोड़ देगा क्या? मुझे जल्दी से जल्दी देवगढ़ गांव पहुंचना है। तो क्या आप लोगों में से कोई मुझे रिक्शा से देवगढ़ गांव छोड़ देगा? तभी एक रिक्शा चालक आरव से कहता है, क्या बोल रहे हो बेटा? देवगढ़ तुम क्या पागल हो गए हो क्या? रात के लगभग 11:00 बज चुके हैं और इतनी रात को तुमको देवगढ़ जाना है। माफ करना बेटा लेकिन हम लोगों में से कोई भी तुमको इस समय देवगढ़ नहीं छोड़ सकता। हां बेटा इस समय तुम देवगढ़ जाने का तो भूल ही जाओ। अब तुम यहां से घर लौट जाओ और कल सवेरे देवगढ़ चले जाना। लेकिन भैया मुझे तो किसी भी हालत में देवगढ़ अभी जाना है। तो बेटा यहां तुमको किसी का भी रिक्शा इस समय देवगढ़ जाने को नहीं मिलेगा। अगर तुमको देवगढ़ जाना ही है तो तुमको चलकर ही जाना होगा। हम लोगों में से तुमको देवगढ़ तो कोई छोड़ने वाला नहीं है। तभी अचानक पीछे से एक रिक्शा चालक अपना रिक्शा ले आने लगता है। जैसे ही रिक्शा उस [संगीत] चाय के टपरी के पास रुक जाती है। तभी आरव उस रिक्शा चालक से कहता है, भैया, मुझे देवगढ़ जाना है। क्या आप मुझे आपके रिक्शा से देवगढ़ गांव तक छोड़ दोगे? मुझे अर्जुन देवगढ़ जाना है। बेटा इस वक्त देवगढ़ यह तो नहीं हो सकता। रात में देवगढ़ पहुंचना ठीक नहीं बेटा। क्या हुआ भैया? देवगढ़ गांव क्यों नहीं जा सकते? क्या देवगढ़ गांव का रास्ता खराब है क्या? बेटा रास्ता खराब नहीं है। तुम्हारा वक्त खराब है। देवगढ़ जाना रात में अच्छा नहीं माना जाता। तुम चाहो तो आगे जुनेदपुर कस्बे में उतर जाओ। वहां तुम्हें छोटे-छोटे ठहरने के कमरे मिल जाएंगे। सुबह होते ही देवगढ़ चले जाना। आरव को उस ऑटो वाले की बात अजीब लगी। पर आरव को मजबूरी थी। उसे आज ही काम निपटाकर शहर वापस लौटना था। नहीं भैया मुझे देवगढ़ तो आज ही पहुंचना है। आप पैसा थोड़ा ज्यादा लो लेकिन मुझे देवगढ़ अभी पहुंचा दो। ठीक है बेटा। मैं तुमको देवगढ़ अभी पहुंचा देता हूं। लेकिन मेरी बात याद रखना। रात के कुछ रास्ते इंसानों के लिए नहीं होते। आरव उसकी बातों को अंधविश्वास समझकर चुप बैठ गया और रिक्शा में बैठ गया। रिक्शा धीरे-धीरे खाली सुनसान अंधेरी सड़कों से गुजरने लगी। हवा में अजीब खामोशी थी। कुत्ते भी आज कम भौंक रहे थे। रास्ते से अजीब तरह से आवाजें सुनाई दे रही थी। बेटा तुम अकेले इतनी रात को देवगढ़ क्यों जा रहे हो? तुमको पता नहीं बेटा देवगढ़ में इतनी रात को कोई इंसान जाता नहीं। मुझको रिक्शा चलाते हुए आज 15 साल हो रहे हैं। लेकिन मैंने मेरी जिंदगी में पहला इंसान देखा जो इतनी रात को अकेला देवगढ़ गांव जा रहा है। भैया मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि देवगढ़ जाने के लिए कोई भी रिक्शा वाला तैयार क्यों नहीं होता। ऐसा क्या है उस देवगढ़ गांव में। बेटा वह तो मुझे भी पता नहीं कि देवगढ़ में क्या है। लेकिन लोग कहते हैं कि रात को देवगढ़ गांव जाना मौत को दावत देने जैसा है। करीब आधे घंटे के बाद रिक्शा जुनैदपुर पहुंच गया। रिक्शा रुक जाता है। बेटा मैं आखिरी बार तुमको कह रहा हूं। यहीं जुनैदपुर उतर जाओ। यहां तुमको सामने ही 500 मीटर दूर ही एक छोटा सा कस्बा मिल जाएगा। वहां तुमको रात भर रहने के लिए कमरा मिल जाएगा और सुबह तुम देवघर निकल जाना। नहीं भैया मुझे अभी देवगढ़ पहुंचना है। आप मुझे अभी देवगढ़ गांव छोड़ दीजिए। आप मेरी चिंता मत कीजिए। ठीक है बेटा। लेकिन आगे जंगल वाला रास्ता पड़ेगा। मैं देवगढ़ गांव के दरवाजे तक नहीं जाऊंगा। वहां से तुमको चलकर ही जाना होगा। ठीक है भैया। मुझे देवगढ़ गांव के पास तक छोड़ दो। मैं वहां से चलकर चला जाऊंगा। कुछ देर बाद रिक्शा सुनसान कच्चे रास्ते पर पहुंच गया। रास्ता इतना डरावना था कि उस रास्ते से कोई भी गाड़ी या इंसान दिखाई नहीं दे रहा था। रात के ठीक 12:00 बज चुके थे। इधर-उधर से उल्लूओं की जंगली जानवरों की आवाजें आ रही थी। ऐसा लग रहा था कि रिक्शा के आगे कोई उनको बुला रहा हो। थोड़ी ही देर बाद रिक्शा देवगढ़ गांव के नजदीक पहुंच जाता है। बस बेटा मैं इससे आगे नहीं जा सकता। यहां से देवगढ़ गांव पास में ही है। आधा किलोमीटर। भगवान तुम्हारा भला करे बेटा। तुम अच्छे से देवगढ़ गांव पहुंच जाओ। रिक्शा वाले ने तुरंत अपना रिक्शा घुमाया और वापस लौटने लगा। आरव उसे आवाज देता रहा। पर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब आरव अकेला था। रास्ते के दोनों तरफ ऊंचे-ऊंचे पेड़ थे। हवा उनकी शाखाओं को हिलाकर एक भयानक फुसफुसाहट पैदा कर रही थी। आरव ने अपना बैग ठीक किया और आगे बढ़ा। कुछ कदम चलने पर उसे एक टूटी चाय की दुकान दिखी। दुकान बिल्कुल सुनसान थी। उस दुकान के पास कोई नहीं था। सिर्फ एक लालटेन के और एक लकड़ी का बेंच था। थकावट से टूट चुका आरव उसी पर लेट गया। करीब 20 मिनट बाद आरव को किसी के चलने की आवाज आई। आरव चौकन्ना होकर खड़ा हो गया। तभी सामने से एक लंबा दुबला पतला आदमी [संगीत] काले कपड़े कंधे पर फटा कंबल धीरे-धीरे आगे आ रहा था। भैया रुकिए क्या आप देवगढ़ जा रहे हो? क्या हुआ? तुम मुझे ऐसा क्यों बोल रहे हो? भैया मुझे देवगढ़ जाना है। रात में अकेले रुकना मुश्किल है। अगर आप देवगढ़ गांव जा रहे हो तो मुझे अपने साथ ले चलिए। मेरे साथ चलना है तो मेरी बातें माननी होंगी। नहीं तो तुम्हारी लौटने की सुबह नहीं होगी। आरव डर गया लेकिन उसके ऊपर मजबूरी थी। इसके कारण उसने हां कर दी। ठीक है भैया। आप जो कहोगे मैं वही करूंगा। बस मुझे देवगढ़ गांव तक आपके साथ आने दो। ठीक है तो आ जाओ मेरे साथ-साथ। और हां भूल कर भी पीछे मुड़कर मत देखना। क्यों भैया? क्या होगा अगर मैंने पीछे मुड़कर देखा तो? मैंने तुमको पहले ही बताया था कि मैं जो कहूंगा वह तुमको करना होगा। तो भी तुम मेरे बात को काट रहे हो। अगर मेरे साथ चलना है तो मैं जैसा बोलूंगा वैसा तुमको करना पड़ेगा। नहीं तो मैं चला। ठीक है भैया मैं अब कुछ नहीं बोलूंगा और आपकी हर बात मानूंगा। तभी आरव और वो आदमी रास्ते से आगे बढ़ते गए। कुछ ही दूर जाने के बाद चलते-चलते आदमी बोला, "अगर तुमको पीछे से कोई पुकारे, तो भी मुड़कर मत देखना। इस रास्ते की आवाजें इंसानों की नहीं होती। यह सुन के आरव के रोंगटे खड़े हो गए। वो डर जाता है। लेकिन उसको देवघर गांव किसी भी हालात में पहुंचना था। इसीलिए वो उस आदमी के साथ आगे बढ़ता गया। कुछ देर बाद पीछे से एक लड़की के रोने की आवाज आई। भैया लगता है कोई बच्ची रो रही है। लेकिन इतनी रात को इस समय कौन बच्ची रो रही है? चुप कर बेटा। बोलो मत। यह किसी बच्ची की या किसी इंसान की आवाज नहीं है। यह वो चीजें हैं जो रात में नए शिकार ढूंढती हैं। बस तुम पीछे मत देखना। यह सुन के आरव खामोश हो जाता है। तभी अचानक आरव को जैसे किसी ने पकड़ लिया हो। उसके पैर आगे ही नहीं बढ़ पा रहे थे। भैया मैं आगे ही नहीं बढ़ पा रहा हूं। ऐसा लगता है कि मुझे किसी ने पकड़ लिया हो। मुझे तो बहुत डर लग रहा है। बेटा तुम जैसे खड़े हो वैसे ही खड़े रहो। तुमको किसी ने पकड़ लिया है। तुम्हारा हाथ आगे बढ़ाओ। मैं तुमको खींच लेता हूं। उसके बाद आरव ने कांपते हाथ आगे बढ़ाए। तभी उस आदमी ने आरव को अपनी ओर खींच लिया। अगर मैंने तुम्हारा हाथ खिंचाना होता तो तुम इसी अंधेरे में खो जाते हमेशा के लिए। कुछ आगे पहुंचते ही आरव उस आदमी से बोला, "भैया, अब मुझे मेरे पैरों का बोझ कम लग रहा है। अगर आज आप नहीं होते, तो मैं आज उसी अंधेरे में कहीं गुम हो जाता। आपकी वजह से आज मेरी जान बची। बेटा तुम अभी-अभी मौत के मुंह से बचे हो। अब तुम सुरक्षित हो। अब हम गांव में आ गए हैं। अब तुमको डरने की कोई जरूरत नहीं है। कुछ ही मिनट बाद दोनों गांव की पहली बस्ती तक पहुंच गए। थोड़ी देर बाद वो आदमी आरव को अपने मिट्टी के बने घर में ले आया। सुनो जी, आज फिर रात में आप उस भयानक दरावने रास्ते पर निकल गए थे। मैंने आपको कितनी बार कहा है कि रात को उस रास्ते से मत आया करो। लेकिन आप मेरी बात सुनते कहां हो? अरे वो विमला डरता नहीं मैं किसी से और इस शहर वाले लड़के को आज मैंने भूत के चंगुल से बचा कर लाया हूं। और तुम कह रहे हो कि इतनी रात को बाहर क्यों जाते हो? क्या इस गांव वाले रात को बाहर नहीं जाते? नहीं बेटा। इस गांव के लोग रात को कभी बाहर नहीं निकलते। देवघर गांव के बाहर रात में आत्माओं का पहरा होता है। रात इस गांव से बाहर जो गया वापस कभी नहीं लौट आया। तो आप आज इतनी रात को कहां से आ रहे थे? और अभी आपने कहा कि इस गांव के लोग रात को बाहर कभी नहीं निकलते। तो आप कैसे रात को बाहर निकले थे? अपने बेटे को ढूंढने। वह भी तुम्हारी तरह रात को उसी राह पर गया था। पर कभी लौट कर नहीं आया। बेटा यह बातें हम कल करते हैं। अब रात बहुत हो चुकी है। अब तुम सो जाओ। रात बहुत बीत चुकी थी। आसमान धीरे-धीरे हल्का होने लगा था। थोड़ी देर बाद सवेरा हो जाता है। घर के बाहर अलाव जलाकर दोनों पति-पत्नी आग के सामने बैठ के अपना शरीर गर्म कर रहे थे। सुनो जी सुबह हो गई है। आपके उस शहर वाले की भी नींद पूरी हो गई होगी। अब उसके मन से रात का डर निकल गया होगा। घर के अंदर से आरव चुपचाप खिड़की के पास बैठा था। वो रात की घटनाओं से अब भी कांप रहा था। तभी आरव बाहर अलाव के पास आ जाता है। रात को आपने जो कहा था कि आपके बेटे के साथ क्या सच में वही हुआ जो मेरे साथ हुआ था? बेटा इस बात को पूरा एक साल हो गया। हर रात मैं उसे उसी रास्ते से ढूंढने निकलता हूं। कभी-कभी ऐसा लगता है कि वह मेरे पास मैं ही खड़ा है। लेकिन छूने जाऊं तो हवा में बदल जाता है। और कई बार तो ऐसा लगता है कि कोई घर में चल रहा है। पर जब देखते हैं तो कोई नहीं होता। मैं आज दोपहर में कागजात लेकर वापस चला जाऊंगा। नहीं बेटा आज दोपहर नहीं। सूरज पूरी तरह सिर पर आए तब निकलना। यहां सुबह के वक्त भी साया भटकता रहता है। साया कौन सा साया? मैं कुछ समझा नहीं। आखिर यह साया किसका है? और इस गांव के लोग इसे इतना डरते क्यों है? वही जो मेरे बेटे को ले गया। और मेरा बेटा कभी वापस नहीं आया। उस साए ने मेरे बेटे को निगल लिया बेटा। थोड़ी देर बाद उस आदमी ने आरव को गांव के बाहर जो तालाब है वहां तक छोड़ने आ जाता है। तालाब का पानी ठहरा हुआ था जैसे सालों से कोई लहर ना उठी हो। वहां एक बुजुर्ग औरत मिट्टी के घड़े में पानी भर रही थी। अरे वो दामोदर आज फिर रात में अपने बच्चे को ढूंढने गए थे क्या? हां। लेकिन बूढ़ी अम्मा इस बार मैं घर अकेला नहीं आया था। इस बार मैंने इस शहर के लड़के को उस रास्ते से बचा कर लाया हूं। बेटा तुम इस गांव में शहर से क्यों आए हो? तुमको पता नहीं। रात को इस गांव में किसी का साया घूमता रहता है। बूढ़ी अम्मा। मैं इस गांव में मजबूरी में आया था। इसीलिए इस भैया ने मुझे बचाया। बेटा देवगढ़ में दो तरह के लोग आते हैं। एक जिन्हें यहां कुछ खोजना होता है और दूसरे जिन्हें यहां कुछ खोजना नहीं चाहिए था। उसी पल हवा में एक अजीब सी गंध फैल गई। जैसे कोई पुरानी सड़ी हुई मिट्टी उठ गई हो। तभी आदमी चिल्ला कर बोलता है। चलो यहां से जल्दी। वो साया फिर हमारे गांव की तरफ आ रहा है। जल्दी भागो बेटा। भागो अम्मा। नहीं तो हम सबको यह साया निगल लेगा। चलो जल्दी भागो भागो। तीनों वहां से गांव की तरफ तेजी से घर की ओर भागने लगते हैं। भागते-भागते आरव ने उस आदमी से पूछा। भैया आखिर यह साया है कौन? कोई मुझे बताएगा? अभी नहीं बता सकता बेटा। तुम बस दौड़ते रहो। घर जाने के बाद सब बता दूंगा। भागते-भागते दोनों आधे रास्ते में पहुंच गए। तभी अचानक आरव ने पीछे मुड़कर देखा तो उसको अपने पीछे लंबी सी काली परछाई आती हुई दिखती है। उसका ना कोई चेहरा ना आकार। बस एक ऊंची लहराती परछाई जो हवा के साथ आरव के पीछे-पीछे आ रही थी। आरव डर से जम गया। तभी सामने से भागते हुए आदमी चिल्लाने लगा। बेटा पीछे मुड़कर मत देख। तू फिर से उसी जाल में फंस जाएगा। आरव झट से आगे मुड़ा और आगे भागने लगा। थोड़ी देर बाद दोनों घर पहुंच जाते हैं। घर पहुंचते ही दरवाजे पर खड़े होकर उस आदमी ने दरवाजा खटखटाया। अरे वो विमला जल्दी दरवाजा खोल। नहीं तो वो साया हमको निगल लेगा। तभी घर के अंदर से उस आदमी के पत्नी विमला ने दरवाजा खोला और दोनों घर के अंदर चले गए। क्या हुआ जी? आप तो इस लड़के को छोड़ने गए थे। तो आप दोनों घर वापस क्यों लौट आए और तुम दोनों इतने घबराए क्यों लग रहे हो? विमला वो साया हमारे पीछे लग गया था। हम दोनों जैसे तैसे घर तक पहुंच गए। हे भगवान इस गांव पर किसकी नजर लग गई है जो अब दिन में भी यह साया हमारा पीछा नहीं छोड़ रहा है। हे भगवान यह अच्छा संकेत नहीं है। बेटा आज जो हमारे पीछे पड़ा हुआ था यह वही साया है जिसने मेरे बेटे को निगल लिया था। और लगता है यह साया तुम्हारे पीछे भी पड़ा है। लेकिन क्यों यह साया मेरे पीछे क्यों पड़ गया है? मेरा इससे क्या लेना देना? क्योंकि तुम देवगढ़ में ऐसे दिन आए हो जिस दिन यह साया नए मेहमान को ढूंढता है। क्या मतलब? आप कहना क्या चाहते हो? आपका मतलब कि मुझे यह साया मारना चाहता है। आज इसके चुने हुए व्यक्ति की मौत का दिन है। उस आदमी की बात सुनकर आरव का चेहरा सफेद पड़ जाता है। मेरी मौत का दिन अब क्या कह रहे हो? मैं तो बस इस गांव में मेरे कागजात लेने आया था। बेटा इस साए का लक्ष्य कभी अचानक नहीं होता। यह उसी को चुनता है जो किसी अधूरी आत्मा से जुड़ जाता है। लेकिन मेरी किसी आत्मा से क्या दुश्मनी हो सकती है? तुमने वही गलती की जो मेरे बेटे ने की थी। कौन सी गलती? रास्ते में रात को किसी पुकार का जवाब देना। जो मेरे बेटे ने की थी और कल तुमने की। मैंने तुमको कल रात को समझाया था कि पीछे मुड़कर मत देखो और किसी का जवाब मत दो। लेकिन तुमने मेरी बात नहीं सुनी। यह सुन के आरव का दिल मानो धड़कना भूल गया था। उसका पूरा शरीर नीचे से ऊपर तक थर-थर कांप रहा था। तभी आरव कांपते हुए बोला, "कल रात को जो मुझे रोने की आवाज आई थी, वह लड़की जिसने बचाओ कहा था। हां बेटा वही आवाज लेकिन वो आवाज लड़की की नहीं थी। वो उसी साईं की लुभाने वाली पुकार थी। जो भी उसकी पुकार पर ध्यान देता है वो उसके निशान पर आ जाता है। तो अब मैं उस साए की मौत का शिकार बन गया हूं क्या? तभी उधर से उस गांव की बूढ़ी अम्मा आने लगती है। बेटा तुम उस साए के शिकार तो बन गए हो लेकिन बच भी सकते हो अगर अपनी किस्मत का एक काम पूरा कर दो तो। बूढ़ी अम्मा आप जानती हैं यह लड़का इस साए से कैसे बच सकता है? साया जिसे चुन ले वो डर से नहीं सच से मारा जाता है। कौन सा सच बूढ़ी अम्मा? बेटा तुम यहां कागज लेने आए हो ना? कौन सा कागज लेने आए थे पहले? यह मुझे बताओ। मेरी कंपनी के पुराने खातों के कागजात जो यहां देवगढ़ में एक बंद पड़े गोदाम में रखे हैं। दामोदर और बुरी औरत एक दूसरे को देखने लगे। उनके चेहरों पर डर की एक नई परत उभर आई थी। यह तो वही गोदाम है जहां मेरा बेटा आखिरी बार गया था। क्या? आपका बेटा उस सरकारी गोदाम में गया था। लेकिन आपका बेटा उस सरकारी गोदाम में क्यों गया हुआ था? बेटा वही गोदाम इस देवघर गांव की सबसे पुराने मौतों का घर है। उस गोदाम में सालों पहले आग लगी थी। कई मजदूर अंदर फंसकर मरे थे। और कहते हैं उनकी आत्माएं आज तक उस गोदाम के बाहर नहीं आ पाई। अब तक उस गोदाम में उनकी आत्माएं भटकती है। तो मैं अब क्या करूं? बेटा अगर तुम सच में बचना चाहते हो तो आज उन्हीं आत्माओं को तुमको मुक्त करना होगा। मैं मैं कैसे? उन आत्माओं को मुक्त कर सकता हूं। बेटा जिस कागज के लिए तुम इस गांव में आए हो वही कागज आग के असली कारण को छुपाता है। कई मजदूरों की मौत को दुर्घटना नहीं माना गया था। वो किसी बड़े घोटाले का राज छुपाता है। बेटा वो साया तुम्हारा पीछा इसलिए कर रहा है क्योंकि अगर तुम वो कागज ढूंढ लो तो उसके कैद किए गए लोगों की आत्माएं आजाद हो जाएंगी। मतलब यह सिर्फ भूतिया मामला नहीं एक अपराध भी है। हां। और जिनकी आत्माएं मरी वह अपनी सच्चाई चाहते हैं और उनको न्याय मिलने की प्रतीक्षा कर रही है। तभी अचानक उधर से वो काली परछाई दरवाजे के बाहर दिखाई देने लगती है। ना चेहरा ना आंखें सिर्फ अंधेरा। चलो आरव तुम्हारा समय पूरा हो गया है। यह साया तो दिन में भी आने लगा है। यह तो कभी दिन में नहीं आता था और आज तो यह घर के दरवाजे के पास तक आ गया है। इसका मतलब है इस शहर के लड़के को यह साया अपने साथ ले जाना चाहता है। तभी अचानक साया आगे बढ़ने लगा। उसकी परछाई कमरे में फैलने लगी। आरव दीवार से टिक गया। उसकी सांसे रुकने लगी। तभी उस आदमी ने एक पुरानी राख की थैली उठा ली। बेटा पीछे हट। यह मेरी आखिर की कोशिश है। उस आदमी ने उस राख को हवा में उछाल कर ऊपर और फेंका। राख चमकती हुई परछाई पर गिरती है और परछाई जोर से चीखती है। साया पीछे हट जाता है। तभी आदमी सबको भागने के लिए कहता है। भागो जल्दी नहीं तो साया फिर से जाग जाएगा। बेटा गोदाम में जो सच है वही तुम्हें बचाएगा। जल्दी मेरे साथ बाहर निकलो। यह साया कुछ देर तक ही रुकेगा। डर से कांपता हुआ उस आदमी के पीछे-पीछे दौड़ पड़ा। थोड़ी देर बाद रात हो जाती है। बाहर रात का अंधेरा अब और भी भारी लग रहा था। पेड़ों की शाखाएं ऐसे हिल रही थी जैसे कोई बड़ी ताकत उन्हें खींच रही हो। बेटा भागते रहो। गोदाम यहीं से 1/2 कि.मी. दूर है। ध्यान रखना रास्ते में अगर कोई पुकारे मुड़ना मत। और गोदाम में जाकर जल्दी अपना काम खत्म करना। मैं कोशिश करूंगा लेकिन वो साया मुझे छोड़ तो देगा ना। नहीं वो तब तक तुम्हारा पीछा करेगा जब तक तुम सच्चाई उसे नहीं सौंप देते। बेटा वो रहा देवगढ़ गांव का पुराना गोदाम। गोदाम आधा जला हुआ था। कांच टूटा दीवारें काली। दरवाजा आधा टेढ़ा। दोनों गोदाम के दरवाजे के अंदर चले जाते हैं। अंदर की हवा बिल्कुल ठंडी थी। मानो पूरा गोदाम मृत आत्माओं की सांसों से भरा हो। भट्टी की गंध, जली लाशों का एहसास और दीवारों पर गहरे काले हाथों के निशान। आरव की टांगे कांपने लगी। ये ये कैसी जगह है? बेटा यहीं वो सभी मजदूर चलकर मरे थे और यहीं बंद है वो राज जिसके लिए तुम आए हो। दूर एक लोहे की अलमारी थी धूल से भरी पर ताला टूटा हुआ। दोनों अलमारी के पास पहुंचते ही आरव ने अलमारी खोली। अंदर फाइलें, पुराने रिकॉर्ड और एक मोटा रजिस्टर था। उस आदमी ने झट से रजिस्टर उठाया और आरव को दिया। बेटा यही है मौत का सच। आरव ने उस रजिस्टर को खोला। उसमें साफ-साफ लिखा था मजदूरों की मौत कोई हादसा नहीं थी। गोदाम मालिक ने बीमा राशि पाने के लिए जानबूझकर आग लगवाई थी। उसी समय गोदाम का पूरा दरवाजा धड़ाम से बंद हो गया। और अंधेरे में वो साया प्रकट हो गया। सच देने के लिए नहीं खत्म करने के लिए खोजा जाता है। तभी काला धुंधला भूत आरव की ओर बढ़ा। आरव पीछे हट रहा था। लेकिन साया हर तरफ फैल चुका था। दामोदर ने एक और राख की मुट्ठी उठाई। लेकिन इस बार उस साए पर उस राख का कोई भी असर नहीं हुआ। उस साई ने उस आदमी को पकड़ कर उसे हवा में उछाल दिया। आदमी दीवार से टकरा कर गिरा। साया धीरे-धीरे आरव के सामने आया और बोला अब तुम भी उन आत्माओं की तरह यहीं रहोगे। अचानक गोदाम से डरावने डरावने आवाजें आनी शुरू हो जाती है। जैसे सभी आत्मा एक साथ वहां चिल्लाने लगी। आरव समझ नहीं पाया कि यह क्या हो रहा है। तभी दीवारों से दर्जनों मजदूरों की आत्माएं बाहर निकली। आग से झुलसे शरीर, काली आंखें, हाथ फैले हुए। वो आदमी फर्श पर पड़ा। चिल्लाया। बेटा तुम डरो मत। ये सभी आत्मा तुम्हें मारने नहीं आई हैं। यह तो इस साए को खत्म करने आए हैं। वो इन्हें वर्षों से बांधे रखता था। इन सभी आत्माओं को देख के साया पीछे हटने लगता है। पर मजदूर आत्माएं उस साए को घेरने लगी। यह सब देख के साया चीख पड़ा। रुक जाओ। मैंने तुम्हें बांधा था। तुम सब मेरा आदेश मानोगे? नहीं तो मैं तुम सबको निगल जाऊंगी। लेकिन इस बार मजदूर की आत्मा उस साए की बात नहीं सुन रहे थे। उन्होंने उस साए को पकड़ कर घसीटना शुरू कर दिया। गोदाम में ऐसी भयानक आवाजें गूंजने लगी कि आरव अपने कान बंद कर लेता है। भागो आरव सच लेकर यहां से निकल जाओ। लेकिन भैया मैं तुमको छोड़कर कैसे चला जाऊं? तुम भी मेरे साथ चलो। आरिफ तुम्हारे पास ज्यादा समय नहीं है। और तुम मेरी चिंता मत करो। तुम यहां से जल्दी भाग जाओ और सभी गांव वालों को इस साए से बचाओ। तभी सभी गोदाम को आग लग जाती है। लेकिन दोनों गोदाम के बाहर निकल जाते हैं। लेकिन वो आदमी पूरा घायल हो जाता है। उसका शरीर खून से लथपथ हो जाता है। बेटा तुम यहां से अब चले जाओ। अब मेरी सांसे पूरी हो गई हैं। तू बस सच बाहर ले जा। यही मेरी मुक्ति है। दूर मजदूरों की आत्माएं उस साया को घसीट रही थी। साया तड़प रहा था, चीख रहा था। लेकिन मजदूरों की आत्माएं उस साए की एक ना सुनती। उन्होंने साया को गोदाम के बीचों-बीच खींचा और अचानक पूरे गोदाम में आग की भयंकर लपट उठी। साया की अंतिम चीख पूरे गांव में गूंज उठी। आंखों के सामने वो काला साया टूटने लगा। धुएं की तरह बिखरने लगा। और एक झटके में पूरी तरह खत्म हो गया। जैसे उसने कभी जन्म ही नहीं लिया हो। जैसे उस साए के साथ इस देवघर गांव का वर्षों का श्राप खत्म हो गया हो। थोड़ी देर बाद उस आदमी की सांसे रुक जाती हैं। आरव फूट-फूट कर रोया। लेकिन वो जानता था उसे उस आदमी की आखिरी इच्छा पूरी करनी है। वो फाइल और रजिस्टर लेकर उस गांव में लौट आया। पहली बार देवघर गांव में अंधेरे की जगह सुबह हुई थी। आरव दीवार के किनारे बैठा था। हवा हल्की थी और अचानक उसके सामने उस आदमी की आत्मा आ जाती। धन्यवाद बेटा जो तुमने इस गांव को उस साए से मुक्त कर दिया और यह सब करके तूने मुझे मुक्त कर दिया। उतना बोल के उस आदमी की आत्मा वहां से गायब हो जाती है। आरव को समझ आ गया था कि उस आदमी की आत्मा मुक्त हो चुकी है। इसीलिए कहते हैं जब तक किसी आत्मा को मुक्ति नहीं मिल जाती तब तक वह आत्मा ऐसे ही हमारे बीच घूमती रहती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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