Skip to main content

गरीब जामुन वाले का भाग्य

  सूर्यनगर नामक गांव में आदित्य नाम का एक गरीब जामुन वाला रहता था वो जामुन बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था गरीबी के कारण उसे अपने जीवन में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था जामुन ले लो जामुन ताजा और मीठा जामुन आदित्य यह जामुन कितने रुपए किलो है भाई जामुन ₹50 किलो है अरे बाप रे इतने महंगे जामुन तुम्हारे जामुन में कोई कीमती सोने जड़े हुए हैं क्या जो तुम इतने महंगे जामुन बेच रहे हो भाई यह अभी-अभी जंगल से आए हैं बिल्कुल ताजे जामुन है और वैसे भी अब तो जामुन के दाम भी बढ़ गए हैं नहीं अगर ₹20 किलो देना है तो दो वरना मैं कहीं और से ले लूंगा ₹20 यह तो बहुत ही कम है ठीक है तो तुम अपनी जामुन अपने पास रखो मैं तो चला ऐसा कहकर वह आदमी वहां से चला जाता है आज मेरा एक भी जामुन नहीं बिका पूरा दिन बीतने के बाद एक ग्राहक आया और वह भी चला गया अब मैं क्या करूं अरे आदित्य क्या सोच रहे हो नमस्ते मुखिया जी हां हां नमस्ते क्या हुआ तुम किस सोच में डूबे हुए थे मुखिया के पूछने पर आदित्य उन्हें सब कुछ बता देता है आदित्य की बात सुनकर मुखिया जी अपने मन में सोचते हैं इसके जामुन तो वाकई बहुत ही अच...

दो बहनों का ससुराल

 एक गांव में नदी किनारे दो बहनें रहती थी। बड़ी बहन कमला का पति कुछ समय से बीमार रह रहा था। इसलिए वो रोज छोटी बहन माया के घर काम करने जाती थी। माया की शादी एक अमीर व्यापारी से हुई थी। वह बहुत कंजूस और लालची थी। सुबह के समय कमला जल्दी-जल्दी अपने घर का काम निपटा के अपनी छोटी बहन माया के घर की ओर निकलती है। अरे दीदी आज फिर तुमको देर हो गई। सुबह-सुबह इतने बड़े घर का काम पड़ा रहता है और तुम आराम से घर में बैठी रहती हो। जल्दी आना चाहिए था। खैर अब आ ही गई हो तो चलो। काम में लग जाओ। माफ करना बहन। मेरा मुन्ना रात भर रोता रहा पेट दर्द से इसलिए देर हो गई। मैं जल्दी-जल्दी सब काम कर दूंगी। ठीक है, चलो। पहले आंगन और बैठक अच्छे से झाड़ पोंछ दो। घर चमकना चाहिए।

उसके बाद रसोई में जाकर सारे बर्तन मांझ देना। और हां काम ठीक से होना चाहिए। कमला तुरंत काम पर लग जाती है। सबसे पहले माया के घर का आंगन बैठक और सारे कमरों में झाड़ू पूछा करती है। वह एक-एक कोना साफ करती है। फिर बर्तन मांझने बैठ जाती है। उधर माया आराम से बैठकर चाय पीती है। अच्छा सुनो। सारे काम तो तुमने कर ही दिए हैं। अब यह ध्यान रखा है। इसमें से अच्छे-अच्छे चावल चुनकर साफ कर दो। टूटा फूटा चावल और कचरा अलग कर देना। मेरे घर में सिर्फ बढ़िया चावल पकते हैं। समझी? और फिर जल्दी से रसोई में जाकर दोपहर का खाना बना देना। कमला चुपचाप बैठकर चावल साफ करती है।

 फिर रसोई में जाकर खाना बनाने लगती है। वो अपने मन में सोच रही होती है कि माया ने कहा था कि वो पैसे तो नहीं देगी। पर रोज के काम के बदले अनाज देगी। कमला सोच रही थी इन चावलों में से उसे भी थोड़ा मिलेगा। माया जैसा तुमने कहा था मैंने अच्छे चावल और टूटे हुए कंकड़ वाले चावल दोनों अलग-अलग कर दिए हैं। तुम देख लो। सारे काम निपटाने के बाद कमला घर जाने लगती है। माया उसे रोकती है। रुको दीदी। ये लो यह टूटे हुए चावल है। मेरे घर में इसे तो कोई खाता नहीं है। इसलिए तुम ही ले जाओ। तुम्हारे घर में तो यह आराम से सब खा लेंगे। माया टूटा फूटा टुकड़ों वाला थोड़ा सा चावल थैली में डालकर कमला को थमा देती है। कमला ने बिना कुछ कहे चावल लिया और घर की ओर चल पड़ी। आंखों में आंसू थे।

मगर होठों पर एक भी शिकायत का शब्द नहीं आया। क्योंकि उसे पता था उसकी मजबूरी और गरीबी में यह चावल भी उसके लिए कीमती है। कमला घर जाकर वही चावल बनाकर अपने पति और बच्चे को खिलाती है। अगली सुबह फिर वही सिलसिला शुरू हुआ। सुबह के समय कमला दरवाजे पर दस्तक देती है। अरे दीदी आज तो जल्दी आ गई। अच्छा हुआ। सुनो आज मुझे मछली खाने का बहुत मन है। तुम जल्दी से झाड़ू पोछा कर लो, बर्तन मांझ लो और फिर रसोई में जाकर मछली बना देना। लेकिन हां मसाला अच्छे से पीसना। मछली एकदम स्वादिष्ट होनी चाहिए। मेरे पति को मजेदार खाना चाहिए। ठीक है बहन। जैसा तुम कहो, मैं जल्दी से काम निपटाकर मछली बना देती हूं।

 कमला चुपचाप झाड़ू पोछा करने लगी। फिर बर्तन मांझे और आखिर में बैठकर मछली पकाने लगी। वो आज भी मन ही मन सोच रही है। उसके बेटे मुन्ना को यह मछली बहुत पसंद है। कमला मसाले कूटती है। प्याज लहसुन छौकती है। फिर मछली तलकर बड़ी मेहनत से ढेर सारी स्वादिष्ट करी बनाती है। घर महक उठता है। माया आकर देखती है। वाह! आज तो बहुत अच्छी खुशबू आ रही है। चलो खाना बढ़िया बना है आज तो। उनको मजा आ जाएगा। तुमने तो आज बहुत मेहनत कर दी। माया और उसका पति आराम से बैठकर मछली खाते हैं। कमला की आंखों में एक आंस झलक रही थी कि शायद आज उसे भी माया थोड़ी सी मछली देगी उसके बेटे के लिए। शाम के वक्त कमला अपना काम पूरा करके घर जाने लगती है। रुको दीदी। आज तुम्हारे लिए भी कुछ है।

 यह लो कल रात का बचा हुआ चावल और सब्जी पड़ी थी। तुम यह अपने घर ले जाकर गर्म करके खा लेना। कमला ने बिना कोई शिकायत किए बासी चावल और गली हुई सब्जी की थैली उठाई और अपने घर की ओर चल पड़ी। दिन पर दिन ऐसे ही गुजरते गए। कमला हर सुबह माया के घर काम करने जाती और लौटते वक्त माया कुछ ना कुछ बासी या खराब खाना उसे देकर भेजती। सुनो दीदी कल तुम जरा सुबह-सुबह जल्दी आ जाना। मेरे पति को व्यापार में बहुत बड़ा लाभ हुआ है। इसलिए कल हमारे घर पूजा का बड़ा आयोजन होगा। बहुत सारे मेहमान आएंगे। ढेर सारी मिठाइयां और पकवान बनने हैं। समझी ना? मुझे तुम्हारी पूरी मदद चाहिए। ठीक है बहन। जैसे तुम कहो मैं कल सुबह जल्दी आ जाऊंगी। जो भी काम होगा पूरी मेहनत से करूंगी। अगली सुबह कमला जल्दी उठकर अपने घर का सारा काम निपटा कर जा रही थी।

अचानक उसका बेटा घर के बाहर आ गया। मां आज तुम इतनी सुबह-सुबह कहां जा रही हो? मौसी के घर तो तुम 8:00 बजे जाती हो। तो अभी कहां जा रही हो? और घर के सारे काम भी जल्दी खत्म कर दिए। क्या बात है मां? बेटा आज तेरी मौसी के घर बहुत बड़ा आयोजन हो रहा है। तेरे मौसा को व्यापार में बहुत लाभ हुआ है। इसलिए वहां पूजा रखी गई है। बहुत सारे मेहमान आएंगे और ढेर सारी मिठाइयां पकवान बनेंगे। इसीलिए मुझे आज जल्दी जाना पड़ रहा है। मां, बहुत सारे लोग आ रहे हैं। तो मौसी ने मुझे भी तो बुलाया होगा ना। तुम मुझे लेकर क्यों नहीं जा रही हो? अरे बेटा तेरे पिताजी की तबीयत ठीक नहीं है। अगर तू मेरे साथ चल जाएगा तो वो घर पर अकेले हो जाएंगे इसलिए। ठीक है मां आज मौसी के घर मिठाइयां बन रही होंगी। वो हमारे लिए भी देगी ना। तुम लेकर आना मां। मैं इंतजार करूंगा। तुम जल्दी आना। हां बेटा। बस तू अच्छे से रहना। मैं काम करके जल्दी लौट आऊंगी। और सुन बेटा अपने पिताजी का ख्याल रखना।

उनकी दवाइयां खिड़की के पास रखी हैं। उनको समय से दे देना। कमला अपने बेटे के सामने कैसे भी बहाना बनाकर चली गई। वो सोच रही थी कि उसकी बहन ने सारे गांव को निमंत्रण दिया। पर उसे एक भी बार नहीं बोला कि तुम अपने बेटे को भी साथ लेकर आना। माया के आंगन में चहल-पहल थी। बड़ी-बड़ी देखजियाओं चढ़ चुकी थी। हलवाई बुलाए गए थे और तरह-तरह के पकवानों की खुशबू पूरे घर में फैल रही थी। केसर, बादाम वाली खीर, पूरी, कचौरी, पुलाव, मिठाइयां बन रही थी। मानो पूरा घर स्वाद की खुशबू से महक उठा हो। अरे, तुम आ गई तो अब, जल्दी-जल्दी काम निपटाओ। देख नहीं रही हो।

हलवाई आ चुके हैं और पकवान बन रहे हैं। मुझे सारे बर्तन साफ चाहिए। वो कोने में जो पत्तल पड़ी हैं, उन्हें भी गिन कर रख दो। आज हमारे घर बहुत मेहमान आने वाले हैं। कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। सबसे पहले तुम घर के बाहर झाड़ू लगाओ। फिर जहां पूजा होगी वहां झाड़ू पोछा करो। फिर पूरा घर साफ करना। ठीक है बहन। मैं सब कर दूंगी। तुम निश्चिंत रहो। तुम्हें आज शिकायत का कोई मौका नहीं मिलेगा। कमला जल्दी-जल्दी सारे काम करने लगी। उसने एक-एक कोना साफ किया। धीरे-धीरे पूजा का समय भी आ पहुंचा। माया सजी धजी। अपने पति के साथ पूजा के स्थान में आ बैठी। उसके चेहरे पर शांत थी। सिर पर गहनों की चमक थी। गांव के सबसे बड़े पुजारी को बुलाया गया था। पूरे विधि विधान के साथ पूजा हो रही थी। सारे मेहमान भी वहीं बैठे थे। कुछ देर बाद पूजा समाप्त हुई। मेहमानों को बैठाकर पत्तल में भोजन परोसा गया।

 सारा गांव माया के छत में स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले रहा था। खीर की खुशबू, मिठाइयों का स्वाद और पकवानों की रौनक चारों ओर छा गई। हर कोई स्वादिष्ट खाने का मजा ले रहा था। सबको खाना बहुत पसंद आया। फिर धीरे-धीरे मेहमान खाना खाकर अपने-अपने घर चल गए। घर में अब शांति छा चुकी थी लेकिन अभी भी बहुत सारे पकवान और मिठाइयां बच गई थी। अरे दीदी आज तो भगवान की कृपा से बहुत बड़ा आयोजन हो गया। इतना सब पकवान बना। इतने मेहमान आए। पर देखो यह देखो कितनी सारी मिठाइयां और पकवान अभी भी बच गए हैं। तुम ऐसा करो। इन सबको उठाकर रसोई में अच्छे से रख दो। और जो मिठाई के बर्तन में नीचे मिठाई के चूरे और शक्कर की परत है उसको निकालकर अलग कर देना।

 कमला सिर झुका कर बिना थके बिना कुछ कहे सारी मिठाइयां, पकवान और बचे हुए व्यंजन रसोई में ले जाकर जमाने लगी। माया अपने कमरे में एक पोटली लिए खड़ी थी। उसने कमला को अपने कमरे में बुलाया। लो दीदी, यह तुम्हारे लिए है। बड़े-बड़े बर्तनों में। मिठाई के जो टूटे फूटे टुकड़े बचे थे और जो चीनी के चिपके हुए टुकड़े किनारों पर लगे हैं थे, यह सब तू ले जा। तेरे घर बेटे को खिला देना क्योंकि मेरे घर तो यह सब कोई खाता नहीं है। कमला चुपचाप मिठाई के टुकड़े लेकर अपने घर की ओर निकल गई। उसने एक शब्द भी नहीं कहा। आज वह जान गई थी कि उसकी बहन के अंदर इंसानियत नाम की चीज ही नहीं है।

 रोते-रोते ठोकरें खाती कमला जब जंगल के रास्ते से गुजर रही थी तभी उसकी नजर उस पुराने मंदिर पर पड़ी। गांव की मान्यता थी उस मंदिर की रक्षा स्वयं नाग देवता करते हैं और कहते हैं जिसने भी नाग देवता से सच्चे मन से कुछ मांगा उसे कभी खाली हाथ नहीं लौटना पड़ा। हे नाग देवता आज मैं आपके चरणों में आखिरी बार आई हूं। अब मुझसे यह गरीबी यह बेबसी नहीं सही जाती। हर रोज अपमान झेलते-झेलते मेरा दिल पत्थर हो गया है। अगर आपको सच में दया आती है तो मुझे यहीं तस लीजिए ताकि मेरा जीवन यहीं खत्म हो जाए। मेरा बच्चा अब और मेरी आंखों के आंसू ना देखे। आज भी वो मासूम मेरा इंतजार कर रहा होगा कि मां मिठाई लेकर आएगी। लेकिन मैं मैं तो बस यह शक्कर का चूरा और टूटी फूटी मिठाइयां लेकर घर लौट रही हूं।

 क्या जवाब दूंगी उसे? कह दूंगी कि तेरी मां दूसरों की थालियां साफ करती है और रोज बदले में बस यह टुकड़े पाती है। नाग देवता बस अब मुझे यहीं अपने विष से मुक्ति दे दीजिए। कमला का हर शब्द नाग देवता के कानों तक पहुंचा। नाग देवता ने सब कुछ सुना लेकिन उसे डसा नहीं। उनकी आंखों में भी मानो करुणा उतर आई थी। कमला रोते-रोते वहां से जा ही रही थी। तभी अचानक नाग देवता के चारों ओर एक तेज रोशनी फैलने लगी। मानो उन्होंने कमला को आशीर्वाद दिया हो। कमला जैसे ही अपने घर के बाहर पहुंचती है। उसका बेटा दरवाजे पर बैठा उसका इंतजार कर रहा था।

 उसकी आंखों में चमक और चेहरे पर मासूम उम्मीद थी। मां तुम आ गई। देखो ना मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा था। क्या तुम मेरे लिए मिठाई लेकर आई हो? मां जल्दी से पोटली खोलो ना। मुझे आज मिठाई और पकवान खाने हैं। कमला कांपते हाथों से पोटली खोलती है और तभी एक चमत्कार घटता है। उस पोटली में ढेर सारी रंग बिरंगी मिठाइयां, लड्डू, जलेबी, पेड़ा, कचौड़ी और स्वादिष्ट पकवान नजर आते हैं। उसका बेटा खुशी से उछल पड़ता है और मिठाइयां खाने लगता है। हे भगवान, यह कैसे संभव हुआ? मैं तो सिर्फ चूरा और शक्कर लेकर आई थी। यह मिठाइयां, यह पकवान ये सब कहां से आ गए? सचमुच वो क्षण किसी चमत्कार से कम ना था।

कमला यह समझ ही नहीं पा रही थी कि यह कैसे हुआ। कमला धीरे-धीरे घर के अंदर जाती है और वहां का दृश्य देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह जाती है। उसका घर सोने चांदी से भरा हुआ था। इतना ही नहीं उसका बीमार पति जो महीनों से बिस्तर पर पड़ा था अचानक खड़ा हो जाता है। उसके चेहरे पर तेज और शरीर में नई ऊर्जा थी। हे भगवान ये कैसा प्रकाश है? यह सारा घर सोने, चांदी और हीरे जवाहरात से कैसे भर गया? और आप ठीक हो गए। आप अपने पैरों पर खड़े हैं। यह कैसा चमत्कार है? अरे कमला यह क्या हो गया? मैं तो बिस्तर से उठ भी नहीं पाता था और आज मुझे बिल्कुल अच्छा लग रहा है। और इतना सोना हमारे घर में कहां से आ गया? उसका बेटा भी मासूमियत से कमला से सवाल पर सवाल पूछता है।

फिर कमला अपने बेटे और पति को सारी बातें बताती है। यह सब नाग देवता की कृपा है। मैं तो माया के घर से सिर्फ शक्कर और चूड़ा लेकर निकली थी। रास्ते में मंदिर में रुक गई और नाग देवता से अपनी सारी पीड़ा कह दी। मैंने प्रार्थना की थी कि मुझे जीवन का बोझ अब और ना उठाना पड़े। इसलिए आप मुझे यही दस लो। पर नाग देवता ने मुझे मारा नहीं। उन्होंने मेरी पुकार सुन ली और देखो उनकी कृपा से आज हमारा जीवन ही बदल गया। उस दिन से सब कुछ बदल गया। गरीब और लाचार परिवार जिसने केवल आंसू और भूख जानी थी। आज उनका जीवन खुशियों से भर गया था। अगले ही दिन कमला और उसका परिवार गांव में बने नए सुंदर और आलीशान घर को खरीद कर उसमें रहने चले गए। तीन दिन बीत चुके थे।

 कमला अब अपने नए, सुंदर और विशाल घर में सुख और चैन से रह रही थी। उसके चेहरे पर अब चिंता नहीं बल्कि संतोष और खुशियों की चमक थी। उसके पति की तबीयत अब ठीक हो गई थी। इसलिए वह फिर से अपनी खेतीबाड़ी को संभालने लगा। उधर माया अपने घर में बैठी सोच में डूबी हुई थी कि आखिर कमला काम पर क्यों नहीं आ रही है? अरे तीन दिन हो गए पर कमला अभी तक काम पर क्यों नहीं आई? ना सफाई करने, ना बर्तन धोने, ना ही रसोई में हाथ बटाने। कहीं बीमार तो नहीं पड़ गई या फिर कुछ और बात है? इतना सोचकर माया ने अपने नौकर को आवाज दी। अरे सुनो तुम अभी इसी वक्त जाकर देखो कि मेरी बड़ी बहन कहां है। वो काम पर नहीं आ रही। जाकर पता लगाओ कि वह क्या कर रही है।

 माया का नौकर जी हुजूरी करता हुआ फौरन कमला के घर की ओर चल पड़ा। जब वह वहां पहुंचा और घर की चौखट पर कदम रखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई। उसने देखा कि वो नया घर खरीद लिए हैं। उसका पति ठीक हो गया। वो खेत जा रहा था। नौकर ने चुपके से घर में झांक कर देखा कि कमला इतने बड़े घर में आराम से अपने बेटे के साथ प्रसन्न मुद्रा में बैठी थी। हर तरफ सुख समृद्धि का सागर बह रहा था। हे भगवान यह क्या देख रहा हूं मैं? कुछ दिन पहले तक तो इनका घर जजर हालत में था और अब तो मानो यह किसी राजा महाराजा के महल में रह रहे हो। नौकर भागा माया के पास पहुंचा और हाफतेहाफते सारी कहानी सुनाई।

 मालकिन यह तो चमत्कार हो गया। आपकी बड़ी बहन तो अब बहुत अमीर हो गई है। उनका घर सोने चांदी से भरा पड़ा है। उनके पति की बीमारी भी ठीक हो गई है। और तो और उनके बेटे के हाथ में नईनई मिठाइयां और पकवान थे। लगता है जैसे उनकी किस्मत रातोंरात बदल गई हो। क्या यह कैसे हो गया? जब मैंने उसे भेजा था तो सिर्फ बचे खुचे मिठाई के टुकड़े और बर्तन में चिपकी शक्कर ही दी थी। फिर यह सब मिठाई, वैभव और दौलत कहां से आ गया? वो नौकरानी अचानक इतनी अमीर कैसे हो गई? यह रहस्य तो मुझे जानना ही होगा। उस शाम जब माया का पति काम से लौट कर घर आया तो उसने उसे सारी बातें बताई। सुनते हो जी? आपको पता है मेरी बड़ी बहन कमला अचानक अमीर हो गई है।

 उसका टूटा फूटा घर अब महल बन गया है। उसके पति की बीमारी भी छूमंतर हो गई। मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर रातोंरात ऐसा चमत्कार हुआ कैसे? अरे वाह, यह तो बहुत अच्छी बात है। तुम्हारी बहन ने बहुत तकलीफें सही है। तुम जाकर उसी से पूछ लो। आखिर यह सब कैसे हुआ? माया ने ठान लिया कि अब वह इस रहस्य से पर्दा उठाकर ही दम लेगी। वह उसी समय जल्दी से तैयार होकर कमला के घर की ओर निकल पड़ी। वहां पहुंचकर जब उसने महल जैसा घर देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई। उसके मन में जलन और हैरानी दोनों साथ-साथ उमड़ पड़े। फिर वह घर के अंदर गई।

 अरे बहन तू काम पर नहीं आ रही थी इसलिए मुझे तेरी चिंता हो गई थी। इसलिए मैं तुझसे मिलने आ गई। पर यह सब कैसे हुआ? तू इतनी अमीर कैसे बन गई? जरा मुझे भी तो बता आखिर क्या हुआ ऐसा कि तू रातोंरात अमीर बन गई? माया तू रोज जो मुझे बचे खुचे बासी चावल और सब्जी देती थी और उस दिन तूने मुझे मिठाई के चूरे और शक्कर दी थी ना मैं वहीं सब लेकर घर लौट रही थी। तभी रास्ते में नाग देवता मिले। मैंने उन्हें अपनी सारी दुख तकलीफ बता दी और नाग देवता की कृपा से यह सब बदल गया। माया को कमला का नया घर देखकर और इतनी समृद्धि देखकर जलन होने लगी। उसकी लालच अब और बढ़ गई थी। अगले ही दिन माया ने मन ही मन ठान लिया कि उसे अपनी बड़ी बहन से भी ज्यादा अमीर बनना है।

उसके भीतर का लालच और जलन उसे चैन से बैठने नहीं दे रहा था। उसने अपने पति से सारी बातें बताई। सुनो जी मुझे सब पता चल गया है। दीदी इतनी अमीर कैसे बनी? मैं रोज जो खराब खाना उसे देती थी उसने नाग देवता को जाकर सब बता दिया और देखो नाग देवता ने उसे पल भर में राजमहल जैसा घर दे दिया। हमें भी वैसा ही करना होगा। अरे पगली हम तो पहले से ही सुखी और अमीर हैं। भगवान ने हमें सब कुछ दिया है। इतना लालच अच्छा नहीं होता। लालच हमेशा इंसान को बर्बाद कर देता है। नहीं, मुझे कुछ नहीं सुनना।

वो मुझसे ज्यादा अमीर नहीं हो सकती है उसकी। मेरे सामने कोई औकात नहीं थी और आज वो मुझसे ज्यादा अमीर हो गई। अब मैं भी वह सब करूंगी जो वो करती थी। पति ने बहुत समझाया। पर माया पर लालच का भूत सवार हो चुका था। उसी दिन थोड़ी देर बाद दोपहर के समय वो कमला के घर पहुंची और झूठे आंसू बहाने लगी। दीदी मुझे माफ कर दे। मैंने तेरे साथ बुरा किया इसलिए आज मेरे पति के कारोबार में थोड़ी मुसीबत आ गई है। अब तो घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है। मुझे अपने घर पर काम पर रख लो। जैसे मैं तुम्हें काम करवाया करती थी वैसे ही अब मैं कर लूंगी। अरे माया तू क्यों चिंता करती है? तू तो मेरी सगी बहन है। तू बोल बहन। मैं तेरी पूरी मदद करूंगी। अरे नहीं दीदी मुझे पैसों की मदद नहीं चाहिए।

 बस तुम मुझे काम पर रख लो और बदले में मुझे खाना दे देना। ठीक है। अगर तेरा मन है तो आजा मेरे घर पर काम कर लेना। मुझे तुझसे कोई गिला शिकवा नहीं है। कमला दिल से साफ थी। उसने अपनी छोटी बहन के झूठ को पहचान भी लिया। लेकिन फिर भी उसने कुछ नहीं कहा। उसने माया को अपने घर काम पर रख लिया। अगली सुबह माया कमला के घर पहुंच गई। मन में बस एक ही ख्वाहिश थी। किसी तरह वही चमत्कार दोहराया जाए और वो कमला से भी ज्यादा अमीर बन जाए। अरे माया तू आ गई। आज घर में बहुत काम है। तू सफाई कर ले। मैं रसोई देख लेती हूं। हां हां दीदी। मैं सब कर लूंगी। तेरा पूरा घर साफ कर दूंगी।

 दिनभर काम करने के बाद जब शाम को घर लौटने का समय आया तब कमला ने माया के लिए अच्छे-अच्छे पकवान और मिठाई एक थैले में लाकर दी। ले माया यह ताजा गरमगरम खाना और मिठाई अपने साथ ले जा। नहीं दीदी तू मुझे वही देना जो मैं तुझे दिया करती थी। बासी बचा खुचा सूखा सड़ा खाना। मैं तेरा अच्छा खाना नहीं लूंगी। कमला यह सुनकर चौंक गई। लेकिन माया की जिद इतनी मजबूत थी कि आखिरकार कमला ने मजबूरी में उसे बासी खाना ही दे दिया। माया खुशी-खुशी वो बचा खुचा खाना लेकर अपने घर लौट गई। अगले दिन फिर वही हुआ। माया सुबह काम पर आई। दिनभर काम किया और जब जाने लगी तो कमला ने फिर से ताजी मिठाई और खाना दिया। लेकिन फिर माया ने मना कर दिया और जबरदस्ती बासी और खराब सब्जियां लेकर चली गई।

 दिन कटते गए माया रोज काम पर आती और जाते वक्त रोज जबरदस्ती बासी खाना लेकर जाती। कमला सोच में पड़ गई थी कि आखिर माया ऐसा क्यों कर रही है? अब तो काफी दिन हो गए दीदी के घर काम करते-करते। अब मुझे भी वही करना पड़ेगा जो उसने किया था। मैं आज ही मंदिर जाऊंगी और वहां जाकर नाग देवता से वही वही बोलूंगी जो दीदी ने कहा था। तब जाकर मैं उससे भी ज्यादा अमीर बनूंगी। बस यही सोचते-सचते माया के कदम तेज हो गए। उसका दिल लालच से भरा हुआ था। उसे अब ना अपने पति की बात सुनाई दे रही थी ना ही अपने घर की चिंता थी। उसके मन में तो सिर्फ एक ही चाहत थी। दौलत, सोना, रुपया और शानो शौकत। और इसी चाहत से वह मंदिर की ओर गई।

 वहां पहुंचकर वह नाग देवता के सामने बहुत रोने लग गई। हे नाग देवता, मैं बहुत गरीब हूं। मेरे जीवन में केवल दुख ही दुख हैं। मैं रोज अपनी बड़ी बहन के घर काम करने जाती हूं। पर वो मुझे कभी ताजा खाना नहीं देती। हमेशा बासी ही थमा देती है। आज भी उसने मुझे वही बासी खाना दिया। हे नाग देवता मैं अब बहुत दुखी हो चुकी हूं। आप मुझे यहीं पर डस लीजिए ताकि मैं इस दुखी जीवन से छुटकारा पा सकूं। अचानक मंदिर के भीतर गूंजती हुई एक भारी आवाज सुनाई देती है। अरे मूर्ख स्त्री तू लालच में अंधी हो चुकी है। तेरे दिल में अपनी ही बड़ी बहन के लिए जलन भरी हुई है। मुझे सब पता है। तुझे रोज तेरी बहन ताजा और अच्छा खाना ही देती थी। लेकिन तूने जानबूझकर उससे रोज बासी खाना मांगा।

मुझे सब पता है। नहीं नाग देवता ऐसा नहीं है। मैं सच बोल रही हूं। झूठ मत बोल माया तूने अपनी बहन से ईर्ष्या की झूठ बोला और अब लालच में आकर मुझसे मौत की भीख मांग रही है तो ठीक है तेरी इच्छा मैं पूरी करता हूं तू चाहती है कि मैं तुझे दस लूं तो ठीक है मुझे माफ कर दीजिए नाग देवता आप सच कह रहे हैं मैं लालच में अंधी हो गई थी मुझे मत काटिए नाग देवता ठीक है मैं तुझे नहीं काटूंगा पर तेरे लालच का फल आज तुझे मिलकर ही रहेगी। जहां मैं तुझे श्राप देता हूं तेरे आलीशान घर एक झोपड़ी में बदल जाए। तेरे घर का पूरा सोना, चांदी, हीरा, मोती, धन, दौलत सब ईट पत्थर में बदल जाए।

 तू मेरे सामने गरीब बनकर आई थी ना अब कुदरत तुझे बताएगी असली गरीबी क्या होती है। माया भागती भागती रोते हुए अपने घर की ओर जाती है। उसके मन में हजारों ख्याल आ रहे हैं। वो जैसे ही अपने घर के पास पहुंची उसकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उसका घर एक झोपड़ी में बदल गया। उसने देखा कि उसके घर के सारे हीरे जेवरात ईंट पत्थर में बदल गए। अरे माया यह सब कैसे हुआ? हमारा घर इस झोपड़ी में कैसे बदल गया? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। बताओ क्या किया है तुमने? माया ने रोते-रोते अपने पति को सारी बातें बताई। मैंने कहा था ना माया लालच मत करो। आज तुम्हारी लालची सोच के कारण मेरे जीवन भर की मेहनत मिट्टी में मिल गई। तुम्हें पता भी है कि मैंने कितनी मेहनत की है अपनी जिंदगी में। पता नहीं क्या पाप किया था मैंने जो तुम जैसी लालची औरत से मेरी शादी हुई।

माया के लालच की वजह से उसका ऐशो आराम, धन दौलत और पति का प्यार सब छीन गया। इस तरह लालच और जलन में अंधी हुई माया ने अपने ही हाथों अपनी जिंदगी बर्बाद कर

Comments