N बिहार के दिल में बसा एक छोटा सा गांव मधावपुर , जहां चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है। खेतों में लहराती फसलें और मिट्टी की खुशबू में बसी एक शांत जिंदगी। ये गांव इसलिए फेमस था क्योंकि यहां खाने की तरह-तरह के व्यंजन मिला करते थे। इसी गांव के एक कोने में रहता है रामु । एक गरीब लेकिन ईमानदार आदमी जिसके पास पैसा कम है लेकिन हौसला और मेहनत की कोई कमी नहीं। रामु गिरधर सेठ के यहां काम किया करता था। वो बहुत ज्यादा मेहनती आदमी था। जितना भी काम करता था वो बड़े ही दिल लगा के काम किया करता था। RAMU सेठ जी मैंने अपना आज का काम पूरा कर दिया है। मुझे मेरी मजदूरी के पैसे दे दीजिए। SETH एक तो काम सही समय पर करते नहीं हो लेकिन पगार मांगने तो तुम समय से आ जाते हो। कल तुमको प्रधान के घर अनाज पहुंचने के लिए कहा था। काम भी ढंग से तुमसे नहीं हो पाया। तुम्हारा जितना भी पैसा होता है उसका आधा पैसा मिलेगा। RAMU लेकिन सेठ जी मैंने तो अपना काम सही से किया है। प्रधान के घर में मैंने सही से सामान पहुंचा दिया था। मुझे तो मेरी मेहनत के पूरे प...
N बिहार के दिल में बसा एक छोटा सा गांव मधावपुर , जहां चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है। खेतों में लहराती फसलें और मिट्टी की खुशबू में बसी एक शांत जिंदगी। ये गांव इसलिए फेमस था क्योंकि यहां खाने की तरह-तरह के व्यंजन मिला करते थे। इसी गांव के एक कोने में रहता है रामु । एक गरीब लेकिन ईमानदार आदमी जिसके पास पैसा कम है लेकिन हौसला और मेहनत की कोई कमी नहीं। रामु गिरधर सेठ के यहां काम किया करता था। वो बहुत ज्यादा मेहनती आदमी था। जितना भी काम करता था वो बड़े ही दिल लगा के काम किया करता था। RAMU सेठ जी मैंने अपना आज का काम पूरा कर दिया है। मुझे मेरी मजदूरी के पैसे दे दीजिए। SETH एक तो काम सही समय पर करते नहीं हो लेकिन पगार मांगने तो तुम समय से आ जाते हो। कल तुमको प्रधान के घर अनाज पहुंचने के लिए कहा था। काम भी ढंग से तुमसे नहीं हो पाया। तुम्हारा जितना भी पैसा होता है उसका आधा पैसा मिलेगा। RAMU लेकिन सेठ जी मैंने तो अपना काम सही से किया है। प्रधान के घर में मैंने सही से सामान पहुंचा दिया था। मुझे तो मेरी मेहनत के पूरे प...