एक छोटे से गांव में एक गरीब किसान अपनी एकमात्र बेटी रानी के साथ रेहता था। रानी की मां का देहांत उसके जन्म के कुछ ही समय बाद हो गया था। उस वक्त रानी इतनी छोटी थी कि उसे मां का चेहरा भी याद नहीं रहा। गांव के लोगों ने कई बार पिता को समझाया कि वो दूसरी शादी कर ले ताकि बच्ची को मां का साया मिल सके। पर उसने हर बार मना कर दिया। रानी मेरी पत्नी की आखिरी निशानी है। मैं उसे किसी और के साए में नहीं पालना चाहता। सौतेली मां चाहे कितनी भी अच्छी क्यों ना हो उसके मन में वो अपनापन नहीं हो सकता जो एक सगी मां के दिल में होता है। मैं ही इसका पिता भी हूं और मां भी। जब तक जिंदा हूं इसे किसी की कमी मेंहसूस नहीं होने दूंगा। उसने ठान लिया था कि वो अपनी बेटी को खुद ही पाल पोस कर बड़ा करेगा। चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों ना आये । वो खेतों में दिन रात मेहनत करता और जो थोड़ा बहुत कमाता उसी में दोनों का जीवन चलता। गरीबी थी पर उस घर में प्रेम और अपनापन की कोई कमी नहीं थी। रानी के लिए उसके पिता ही उसका पूरा संसार थे। मां भी , पिता भी और ...
FULL STORY N कड़ाके की ठंड अपनी पूरी ताकत के साथ गांव पर उतर आई थी। तालाब के किनारे बने कच्चे घर की दीवारों की दरारों से सर हवा सीटी बजाती हुई भीतर घुस रही थी। मिट्टी के उस छोटे से घर में टूटी चारपाई पर एक पुरानी पतली रजाई ओढ़े हरीलाल और उसका बीटा सोहन सिमटे बैठे थे। SON बाबा घर में आटा भी खत्म हो चुका है और जलाने के लिए लकड़ियां भी नहीं बची हैं। अगर सुबह तक कुछ इंतजाम नहीं हुआ तो हम क्या खाएंगे और इतनी ठंड में रात कैसे गुजरेगी ? FATHER बेटा आज पूरा दिन गांव में काम की तलाश में भटकता रहा। पर किसी ने एक वक्त की मजदूरी तक नहीं दी। जेब खाली है और दिमाग जैसे सुन्न पड़ गया है। समझ नहीं आ रहा कि किस दरवाजे पर जाऊं। SON आप फिर से जाइए बाबा। कहीं ना कहीं तो काम मिलेगा ही। जब तक आप हिम्मत नहीं हारेंगे , मैं भी नहीं हारूँगा । FATHER जाऊंगा बेटा जरूर जाऊंगा। जब तक मेरे बूढ़े हाथ चल रहे हैं , तब तक तुझे भूखा पेट नहीं सोने दूंगा। N अगली सुबह धुंध के बीच हरीलाल अलग-अलग घरों के दरवाजों पर जाता है। FATHER काकी कोई भी छोटा-मो...