Skip to main content

चिकन और रोटी

    N बिहार   के दिल में बसा एक छोटा सा गांव मधावपुर   , जहां चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है। खेतों में लहराती फसलें और मिट्टी की खुशबू में बसी एक शांत जिंदगी। ये   गांव इसलिए फेमस था क्योंकि   यहां खाने की तरह-तरह के व्यंजन मिला करते थे। इसी गांव के एक कोने में रहता है रामु । एक गरीब लेकिन ईमानदार आदमी जिसके पास पैसा कम है लेकिन हौसला और मेहनत की कोई कमी नहीं। रामु   गिरधर   सेठ के यहां काम किया करता था। वो बहुत ज्यादा मेहनती आदमी था। जितना भी काम करता था वो बड़े ही दिल लगा के काम किया करता था। RAMU सेठ जी मैंने अपना आज का काम पूरा कर दिया है। मुझे मेरी मजदूरी के पैसे दे दीजिए। SETH एक तो काम सही समय पर करते नहीं हो लेकिन पगार मांगने तो तुम समय से आ जाते हो। कल तुमको प्रधान के घर अनाज पहुंचने के लिए कहा था। काम भी ढंग से तुमसे नहीं हो पाया। तुम्हारा जितना भी पैसा होता है उसका आधा पैसा मिलेगा। RAMU लेकिन सेठ जी मैंने तो अपना काम सही से किया है। प्रधान के घर में   मैंने सही से सामान पहुंचा दिया था। मुझे तो मेरी मेहनत के पूरे प...

चिकन और रोटी

 

 

N

बिहार  के दिल में बसा एक छोटा सा गांव मधावपुर  , जहां चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है। खेतों में लहराती फसलें और मिट्टी की खुशबू में बसी एक शांत जिंदगी। ये  गांव इसलिए फेमस था क्योंकि  यहां खाने की तरह-तरह के व्यंजन मिला करते थे। इसी गांव के एक कोने में रहता है रामु । एक गरीब लेकिन ईमानदार आदमी जिसके पास पैसा कम है लेकिन हौसला और मेहनत की कोई कमी नहीं। रामु  गिरधर  सेठ के यहां काम किया करता था। वो बहुत ज्यादा मेहनती आदमी था। जितना भी काम करता था वो बड़े ही दिल लगा के काम किया करता था।

RAMU

सेठ जी मैंने अपना आज का काम पूरा कर दिया है। मुझे मेरी मजदूरी के पैसे दे दीजिए।

SETH

एक तो काम सही समय पर करते नहीं हो लेकिन पगार मांगने तो तुम समय से आ जाते हो। कल तुमको प्रधान के घर अनाज पहुंचने के लिए कहा था। काम भी ढंग से तुमसे नहीं हो पाया। तुम्हारा जितना भी पैसा होता है उसका आधा पैसा मिलेगा।

RAMU

लेकिन सेठ जी मैंने तो अपना काम सही से किया है। प्रधान के घर में  मैंने सही से सामान पहुंचा दिया था। मुझे तो मेरी मेहनत के पूरे पैसे मिलने चाहिए।

SETH

वाह ,वाह जबान चलाने  को केह दो बस। ये  लो पैसे और तुम कल से काम पर मत आना। मैं तुम्हें काम से निकल रहा हूं। काम चोर कहिके ।

N

गिरधर  सेठ बहुत  ही लालची किस्म का आदमी था। एसेही  ही लोगों को बातें में घुमाकर उनका पैसा हजम कर लिया करता था। उसके बाद रामु  उदास होकर अपने घर आ जाता है। उसके घर में उसकी एक राधा  नाम की पत्नी भी थी।

WIFE

आज तो आप थके होने के साथ उदास भी लग रहे हो। बताइए क्या हुआ आपको?

RAMU

अरे आज सेठ जी ने मुझे महीने के आधे पैसे दिए हैं। काम तो सही से किया था। पर मुझे पैसे आधे मिले।

WIFE

आधे पैसे क्यों दिए? इससे  तो  हमारा घर का किराया और  खाना पीना कैसे चलेगा?

RAMU

मैं जानता हूं राधा । लेकिन सेठ जी ने आधे ही पैसे दिए हैं और उन्होंने कहा हे की कल से तुम्हें आने की कोई जरूरत नहीं। वो  बड़े लोग हैं। में इसमे  क्या ही कर सकता हूं।

WIFE

आपके मजदूरी के पैसे तो आधे मिले हैं। इससे हमारा महीना भर कैसे चलेगा? आपको अब अपना खुद का काम या फिर कहीं और पर काम देखना होगा।

RAMU

राधा  तुम तो ठीक केह रही हो। लेकिन नया काम शुरू करने के लिए हमको पैसे चाहिए। और हमारे पास बचत के नाम पर कुछ भी नहीं है। हम तो  बस रोज के खानेपीने के लिए ही कमा पाते हैं।

WIFE

अगर ऐसा ही चला तो हमको तो भीख मांगना पड़ जाएगा जी | आप कुछ काम खोजिए  वरना हमारा घर कैसे चलेगा?

RAMU

ठीक है । मैं कल ही गांव में काम ढूंढता हूं।

N

तभी रामु  काम की तलाश में गांव के बाजार की तरफ जाता है। तभी उसको धनिया काका मिलते हैं।

KAKA

अरे रामु  बेटा आज काम पे नहीं गए हो क्या?

RAMU

अरे काका मैंने  वहां पर काम छोड़ दिया हे । सेठ  बहुत काम करवाता था और पैसे भी नहीं देता था और अब में नये  काम के तलाश में हूं।

KAKA

अरे तो काम मिला क्या गांव में?

RAMU

नहीं काका ये  कैसा गांव है? यहां करने के लिए कुछ काम ही नहीं है और कहीं काम करने जाऊं तो लोग दिन के 100 रु  देते हैं। अरे इतने पैसे में तो दिन भर का राशन भी नहीं आता।

KAKA

अरे अगर यहां पर कोई काम नहीं है तो शहर जाकर काम ढूंढो ना। शहर में तो लोगों के पास बहुत काम होता है। हमारे गांव से भी तो कितने लोग शहर में काम करने के लिए गए हैं।

RAMU

एक तो मैं पढ़ा लिखा हूं नहीं । और वहां पर अगर 10,000 भी कमाऊं ना, तो आधे से ज्यादा पैसे तो वहां किराए और खाने-पीने में खर्च हो जाएंगे। वहां पर रहने के लिए कमरा भी बहुत महंगा मिलता है।

KAKA

अब ना तुझे अपने  गांव में काम मिल रहा है और ना ही तू शहर जाने के लिए मान रहा है। तो फिर ऐसे कैसे काम चलेगा?

N

तभी वहां पर एक आदमी पेपर  बांटता हुआ दिखा।

RAMU

अरे भैया, ये  किस चीज का पेपर बाट रहे हो  हैं?

KAKA

अरे यहां पर क्या बांट रहे हो? कहीं भंडारा लगा है क्या?

MEN

यहां पर एक ढाबा खुला है। तो ये  उसी का है। आपको हमारे ढाबे पर स्पेशल बिहार  का चिकन और रॉटी  मिलेगा। अगर आपको भी ढाब पर जाकर खाना खाना है तो जरूर जाइए।

N

उसकी बातें सुनकर रामु  केहता है,

RAMU

भाई इधर मेरे पास राशन खरीदने के पैसे नहीं है। तो ढाबा  पर जाकर खाना कहां से खाऊंगा?

KAKA

अरे ठीक तो है रामु  बेटा अभी नया-नया ढाबा खुला है। मजदूरों की  भी तो जरूरत  होगी । एक काम करो तुम  वहां पर खाना बनाना तुझे बहुत अच्छा पैसा मिल जाएगा।

RAMU

ठीक कहा आपने। मैं अभी जाकर उस ढाबे में पूछता हूं। मेरे लायक अगर कोई काम खाली हो तो।

MAN

हां भैया। अभी ढाबा नया-नया खुला है। तो सेठ जी केह रहे थे की  काम करने के लिए  लोगों की जरूरत है। सेठ धीरज का तो नाम सुना ही होगा आप लोगोने । उन्हीं का ढाबा है। आप एक बार जाइए और सेठ जी से बात कर लीजिए।

RAMU

ठीक है भाई। ठीक है। मैं अभी जाता हूं।

N

रामु  खुश हो जाता है और खुशी-खुशी ढाबे पर पहुंच जाता है।

RAMU

अरे सेठ जी , आपका जो आदमी ढाबे के पचे बांट रहा है ना वो मुझसे मिला था। उसने कहा कि अभी ढाबा नया खुला है तो आपको काम करने वाले लोगों की जरूरत है। इसीलिए मैं यहां पर आया हूं। मुझे कुछ काम चाहिए।

MALIK

ठीक है, लेकिन तुम ये  बताओ कि तुम्हें क्या-क्या करना आता है। अगर तुम्हें खाना बनाना आता है, तो मेरे पास खाना बनाने वालों का भी काम है। और अगर तुम्हें वो नहीं आता है, तो तुम मेरे यहां साफ सफाई का काम कर सकते हो।

RAMU

गरीब आदमी हूं साहब। मुझे तो खाना बनाना बचपन से ही आता है। खाना मैं आपको बहुत अच्छे से बना कर दूंगा। आप ये  बताओ मुझे हर रोज के कितने पैसे मिलेंगे?

MALIK

देखो हर रोज मैं तुम्हें 300 दूंगा लेकिन खाना तुम्हें अच्छे से बनाना होगा।

RAMU

अरे दिन भर खाना बनाने के बस 300 बाकी हलवाई और रसोइयों को तो 600 मिलता है।

MALIK

देखो भाई अभी-अभी नया ढाबा खोले हैं। अगर तुमको और ज्यादा पैसे चाहिए तो तुम जा सकते हो। यहां पर काम करने के लिए लोगों की कमी नहीं है।

RAMU

नहीं नहीं सेठ जी। मैं इतने में ही काम कर लूंगा। आपको किसी और को रखने की जरूरत नहीं है।

N

रामु  की मजबूरी थी इसलिए वो  इतने कम पैसों में काम करने के लिए भी तैयार हो जाता है। वो ढाबे में पूरा दिन अच्छे से चिकन , रॉटी , और सेठ जी जो जो केहते वो  सारा चीज बना देता।

MALIK

वाह भाई खुशबू तो काफी अच्छी आ रही है। तुमको खाना बनाना भी अच्छे से आता है।

N

ऐसे ही रामु  दिन भर खाना बनाता और शाम को उसे  जो रुपए मिलते  उन पैसों से  वो  घर पर राशन लेकर चला जाता है।

RAMU

ये लो राधा । आज मेरी जो भी कमाई हुई थी, उससे मैं ये  थोड़ा दाल, चावल और सब्जियां खरीद लाया हु ।

WIFE

आज के राशन का तो इंतजाम हो गया, लेकिन अब कल के राशन का क्या करेंगे?

RAMU

अब तुम्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। राधा । गांव में एक नया ढाबा खुला है। मुझे वहां रसोई की नौकरी मिल गई है। अब हमारा यहां रोज खाना बनेगा। तुम चिंता मत करो।

WIFE

ऊपर वाले का  लाख-लाख शुक्रिया जो आपको अच्छा एक काम मिल गया।

N

राधा  भी ये  बात सुनकर खुश हो जाती है। उसके बाद रामु  के लाए हुए सामान से वो खाना बनाकर खाना खाते हैं। उसके बाद रामु  फिर ढाबे पर जाता है। सारा खाना बनाता है। तभी गांव के कुछ लोग आते हैं।

CUSTMOR

अरे हमने सुना है की यहाँ एक  नया ढाबा खुला है। एक प्लेट  भैया हमारे लिए भी चिकन और रॉटी लगा दो  

CUSTMOR 2

हां भैया सुबह का नाश्ता हो जाएगा। चिकन के साथ गरमा गरम रॉटी ।

MALIK

बैठो ना बाबूजी अभी देता हूं आप लोगों को।

N

उसके बाद उन लोगों को गरमा गरम रॉटी  और चिकन दिया जाता है। लोग बड़े चाव से वहीं पर चिकन रॉटी  खाने लगते हैं और ऐसे ही तारीफ करके वहां से चले जाते हैं। उनके ढाबे पर सबसे ज्यादा बिक रही थी तो चिकन और रॉटी । ऐसे ही शाम हो जाती है।

RAMU

सेठ जी शाम हो चुकी है। आज के पैसे दे देते तो मैं घर के लिए राशन लेकर जाता।

MALIK

अरे मैं तुम्हें बताना भूल गया था। मैं तुम्हें रोज रोज के पैसे नहीं दे सकता। महीने का पैसा एक बार में ही दे दूंगा।

RAMU

लेकिन सेठ जी मुझे अपने घर के लिए राशन लेकर जाना है। मेरे पास बिल्कुल भी पैसे नहीं है। अगर आपने पैसे नहीं दिए तो हम भूखे मर जाएंगे।

MALIK

देखो अगर ऐसी बात है तो तुम किसी से उधार ले लो। उसके बाद जब मैं तुम्हें महीने का पैसा दे दूंगा तो उसको तुम चुका देना।

RAMU

अरे सेठ जी आप समझने की कोशिश कीजिए ना। महीने में  पैसे दो या एक दिन के  पैसे बात तो वही है ना

MALIK

अरे वही तो बोल रहा हूं। तुम किसी और से उधारी ले लो । अगर मैं तुम्हें रोज के पैसे दूंगा तो क्या भरोसा तुम कब काम छोड़ कर चले जाओ। हां लेकिन अगर तुम कुछ गिरवी रख सकते हो तो मैं तुमको पैसे दे सकता हूं।

RAMU

अरे सेठ जी में  गरीब आदमी हूं। मेरे पास ऐसा कुछ भी नहीं है जिसको मैं आपके यहां गिरवी रख सकूं।

MALIK

वो सब मुझे नहीं पता भाई।

N

सेठ उसकी एक बात भी नहीं सुनता है। उसके बाद मजबूरी में आकर रामु  को गांव के  एक जमींदार के पास जाना पड़ता है। इधर रामु  जमींदार के यहां अपने घर को गिरवी रख देता है।

JAMINDAR

देखो मैं तुम्हें पैसे उधार दे रहा हूं। लेकिन अगर तूने मेरे पैसे सही समय पर नहीं लौटाए तो अपना घर तुझे मेरे नाम पर करना होगा।

RAMU

मुझे मंजूर हे आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए। मेरी पगार मिलते ही मैं आपको आपके पैसे चुका दूंगा।

N

रामु  जमींदार से पैसे उधार पर लेता है। और अपने  घर राशन लेकर आता है। इस तरह एक महीना बीत जाता है। ऐसे ही उसका ढाबा भी चल रहा था और लोग खाने भी आ रहे थे। ऐसे ही करते-करते पगार मिलने का दिन आ जाता है।

RAMU

सेठ जी मुझे काम करते हुए एक महीना बीत गया। अब तो आप मुझे महीने की पगार दे दीजिए।

MALIK

देखो आज मेरे पास इतने पैसे नहीं है। तुम कल तक इंतजार करो। मैं कल तुम्हें पैसे दे दूंगा।

RAMU

लेकिन सेठ जी मुझे जमींदार जी को पैसे देने हैं। अगर आज मैंने उनके पैसे नहीं लौटाए तो वो मेरा घर हड़प लेंगे।

MALIK

अरे एक दिन के लिए कोई किसी का घर थोड़ी ना हड़पता है। कुछ नहीं होगा। मैं कल तुम्हें तुम्हारे पैसे दे दूंगा।

RAMU

आप मेरे साथ खेल मत खेलिए सेठ जी। मैंने अपनी आंखों से देखा हे । आपके यहां चिकन रॉटी  बहुत ज्यादा बिकती है। महीने  भर से आपकी बहुत अच्छी कमाई हुई है।

N

ये  सब बातें सुनकर सेठ  गुस्सा हो जाता है।

MALIK

तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझसे इस तरह से बात करने की? जा नहीं देता मैं तुझे तेरे पैसे। तुझे जो करना है कर ले। और अब तो मैं तुझे कभी पगार भी  नहीं दूंगा और ना ही तुझे अब यहां पर काम करने के लिए आने की जरूरत है।

RAMU

आप ये  बिल्कुल ठीक नहीं कर रहे हैं। सेठ जी। एक गरीब के साथ छल करके बहुत बड़ा पाप कमा रहे हो। ऊपर वाला देख रहा है। भगवान आपको इसकी सजा जरूर देंगे।

MALIK

अरे चल निकल यहां से। बड़ा आया मुझे  भगवान की धमकी देने वाला।

N

सेठ रामू  को बहुत  खरी खोटी सुनाकर  वहां से निकाल देता है। रामु  बहुत ही ज्यादा उदास होकर अपने घर की ओर जाता है। तभी थोड़ी देर बाद जमींदार का आदमी  रामु  के घर आता है।

MAN

हां भाई याद है ना रामु , आज तुझे जमींदार के पैसे देने हैं। सेठ जी ने तुझे याद दिलाने के लिए मुझे भेजा है।

RAMU

हां, मैं जानता हूं  भाई। जमींदार जी को केहना कि मैं रात तक उनके पैसे लेकर आऊंगा।

MAN

ठीक है, लेकिन रात तक पैसे लेकर आ जाना। वरना तुम्हें पता है ना तुम्हारा घर तुम्हारे हाथों से चला जाएगा।

N

वो आदमी उसके  दरवाजे पर खड़ा ही था। तभी रामु  का एक पड़ोसी रोहन वहां से गुजर रहा था। उसने जैसे ही उस आदमी  को रामु  के दरवाजे पर खड़ा देखा तो वो  समझ गया कि पक्का कोई ना कोई गड़बड़ जरूर है।

ROHAN

अरे ये  तो जमींदार का आदमी है। लेकिन ये  रामु  के घर पर क्या कर रहा है?

N

वो आदमी  जैसे ही वहां से निकलता है , रोहन वहां पहुंच जाता है।

ROHAN

अरे रामु  ये  जमींदार का आदमी तुम्हारे घर पर क्या कर रहा था? तुमने जमींदार से कोई उधार लिया है क्या?

RAMU

हां भाई उधार लिया तो था लेकिन चुका नहीं पाया।

N

उसके बाद रामु  ने अपने  साथ घटी सारी  घटना अपने दोस्त रोहन को सुनाई। उसकी सारी बात रोहन सुनता है। फिर रोहन केहता है

ROHAN

अरे इस तरह परेशान मत हो। कोई ना कोई तो हल जरूर मिल जाएगा। लेकिन पहले ये  तो बता कि तुझे जमींदार को कितने पैसे देने हैं?

RAMU

पैसे ज्यादा तो नहीं लेकिन 3000 देने हैं। मैं महीने भर के राशन के लिए लाया था। मगर मेरे पास उतने भी नहीं है और मेरी गरीबी की वजह से कोई मुझे उधार देने को भी तैयार नहीं है।

ROHAN

अरे कोई बात नहीं रामु  भाई। मेरे पास कुछ पैसे हैं। मैं तुझे पैसे दे देता हूं। वरना इतने से पैसों की वजह से तेरे हाथ से तेरा घर चला जाएगा। और जमींदार  तो है ही लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने वाला। वरना 3000 के ऊपर कोई किसी का घर नहीं लेता ।

N

उसके बाद रोहन अपने घर से पैसे लेकर रामु  को दे देता हे । उसके बाद रामु जमींदार के यहां जाकर उसके सारे पैसे लोटा  देता है।

RAMU

अरे रोहन भाई आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। भाई अगर आज तूने मेरी मदद नहीं की होती तो मेरा घर मेरे हाथों से चला जाता। पता नहीं भगवान ने मुझे इतना मजबूर क्यों बनाया है। एक तो मुझे कहीं काम नहीं मिलता। ऊपर से जहां काम मिलता है वहां पर लोग ऐसे छल करते हैं।

ROHAN

अरे देख भाई रामु  ज्यादा परेशान मत हो। मैं तो केहता हूं की तूम  अपना कोई काम शुरू करो । मैं तुम्हें और 5000 दे रहा हूं। तुमने कहा था ना तुम सेठ  के यहां चिकन और रॉटी  बनाया करते थे । अब से उसी का धंधा करो।

RAMU

अरे दोस्त तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद। लेकिन मेरे पास ना तो ढाबा है ना ही दुकान। आखिर मैं अपना चिकन रॉटी  कैसे लोगों को खिलाऊंगा?

ROHAN

अरे शुरू से हर कोई अमीर नहीं होता। तुम अपने घर के बाहर ही एक छोटा सा ढाबा खोल लो । वही  पर ही अपना चिकन रॉटी  बेचा करना। और  तुमने बताया सेठ लोगों को सही से खाना भी नहीं दे रहा था । और बात भी ठीक से नहीं करता था । देख लेना। सारे लोग धीरे-धीरे तुम्हारे पास ही आएंगे।

N

ये  सब बातें सुनकर रामु  को एक उम्मीद दिखाई देती है। उसके बाद रामु  अपने घर आ जाता है और अपनी पत्नी राधा  को सारी बात बताता है।

WIFE

ये  तो सही है जी। हम लोग अपने घर में ही एक ढाबा खोल लेते हैं। इससे आपको इधर-उधर काम करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

RAMU

ठीक है। मैं कल सुबह ही जाकर चिकन और मसाला ले आऊंगा।

N

उसके बाद अगले ही दिन सुबह-सुबह रामु  बाजार जाकर चिकन लेकर आ जाता है। उसके बाद दोनों पति-पत्नी मिलकर गरमागरम रॉटी  बनाकर तलने लगते हैं। गरमा गरम चिकन के साथ चिकन मसाला और ग्रेवी बनाते हैं जिसे  रॉटी  के साथ खाया जा सके। दोनों ही घर के बाहर साफ सफाई कर एक ढाबा जैसा बना लेते हे और वहां लिख देते हैं, ₹100 में चिकन और रॉटी । तभी खाने  की खुशबू से वहां पर कुछ लोग आते हैं।

COSTMER

अरे वाह आपने तो बहुत ही अच्छा छोटा सा ढाबा बनाया है। ये  तो बिल्कुल एक घर की तरह लग रहा है।

COSTMER 2

अरे तुम तो  धीरज  सेठ के  वहां काम कर रहे थे ना? मैंने एक दो बार तुमको  वहां देखा है।

RAMU

जी हां, पहले में  वही  पर काम कर रहा था। पर सेठ  ने मुझे पैसे नहीं दिये  और निकाल दिया। वो  सब छोड़ो। आपको वही स्वाद यहां पर मिलने वाला है।

COSTMER

ठीक है फिर। लगाओ हम दोनों के लिए एक प्लेट।

N

रामु  दोनों के लिए एक-एक प्लेट चिकन और रॉटी  लगा देता हे । उसके बाद और लोग वहां पर आ ने लगते हैं।

COSTMER 2

अरे  भाई तुम्हारा चिकन रॉटी  तो बहुत ही स्वादिष्ट है। दाम भी बहुत कम है। अगली बार से तुम चिकन के साथ चावल भी रखना। मुझे चावल के साथ चिकन खाना अच्छा लगता है।

RAMU

जी,जी, बिल्कुल अभी हमारे पास पैसे थोड़े कम थे। इसीलिए हमने चिकन और रॉटी  ही बनाया। अगली बार से हम चावल के साथ सैलेड और पापड़ भी देंगे।

N

लोगों को उनके घर वाला ढाबा बहुत ही ज्यादा पसंद आ रहा था। जो  भी उस रास्ते से जा रहा था। उनको एक ना एक बार रुक  के वहां का चिकन रॉटी  तो खा ही रहा था। तभी वहां पर उस रास्ते से एक गाड़ी गुजरती हे  और उसमें दो लड़के होते हैं। मोनू  और सोनू

SONU

अरे मोनू  गाड़ी रोकना। वहां पर एक ढाबा है। मैं अभी आता हूं वहां से कुछ लेकर।

MONU

अरे भाई ये  गांव देहात का ये  छोटा-मोटा धाबा का खाना खाएगा क्या?

SONU

अरे भाई मैं भी गांव का ही हूं। अभी बाहर शहर में काम रहा हूं वो अलग बात हे ।

N

उसके बाद वो आदमी  उनके होटल के पास जाता है।

SONU

आपके यहां का सबसे फेमस जो भी है वो मेरे लिए पैक कर दो।

N

शहरी आदमी को देखकर दोनों खुश हो जाते हैं और दोनों ही उन लोगों को अपना चिकन और रॉटी  पैक करके दे देते हे ।

SONU

कितना हुआ भैया?

RAMU

मात्र ₹100

SONU

ये  लो 500 रख लो। अगर हम शहर में खाते तो यही 500 देना पड़ता। मैं भी  गांव का हूं मैं समझता हूं। अभी आपने  ढाबा नया-नया ही खोला  हे ।

RAMU

हम अपने मेहनत से कमा कर खाते हैं। आपसे हम ज्यादा पैसे कैसे ले सकते हैं?

SONU

अरे ले लो। ये  आपके लिए ज्यादा होगा। अगर हम बड़े किसी रेस्टोरेंट में खाते तो यही 500 खर्चा हो  ही  जाता।

N

सोनू  उन लोगों को 500 देकर वहां से चला जाता है। ये  सब देखकर दोनों पति-पत्नी खुश हो जाते हैं।

WIFE

आज हमारा ढाबे का कितना अच्छा मुनाफा हुआ अब  तो आपको कहीं जाकर काम करने की भी जरूरत नहीं है।

RAMU

ठीक केहती हो । उस  लड़के  ने जो 500 दिए हैं ना उसे पैसे से मैं राशन ले आऊंगा कल। तुम मुझे चावल, पापड़ और थोड़ा सैलेड और अचार भी दे दिया करो।

N

अगले ही दिन दरवाजे पर दस्तक होती है। गांव के एक अमीर आदमी का नौकर आया होता है।

MAN

अरे सेठ  जी ने कहा है उनके घर मेहमान आ रहे हैं। छ  प्लेट पैक करके पहुंचा देना। पहुंचाने के पैसे भी मिलेंगे।

RAMU

ठीक है भैया। मैं सब गरमा गरम बना के ले आऊँगा ।

N

रामु  खुशी-खुशी अपनी पत्नी को बताता है।

RAMU

सुनो सेठ  जी का नौकर आया था। एक बड़ा आर्डर मिला है। अच्छे से सब चीज बनाकर रेडी कर दो।

WIFE

ठीक है। ये  सब मैं अभी रेडी कर देती  हूं और टिफिन में पैक कर देती  हूं। आप  देकर आ जाना।

N

रामु  खाने को डिलीवर करने चला जाता है। तभी उसके ढाबे के पुराने मालिक की नजर उस पर पड़ती है।

MALIK

अरे ये  तो वही रामु  है ना । लेकिन ये  इतना सारा खाना लेकर जा कहां जा  रहा है? इसने किसी दूसरे ढाबे पर काम करना शुरू किया है क्या?

NOKAR

अरे नहीं साहब रामु  ने किसी दूसरे ढाबा पर काम करना शुरू नहीं किया बल्कि उसने तो अपने घर को ही एक ढाबा बना दिया है। सुना हे उसने बहुत ही  कम दाम में और स्वादिष्ट खाना लोगों को दे रहा है।

MALIK

अच्छा लेकिन मेरे ढाबे के सामने इसका ढाबा ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाएगा और वैसे भी इसके छोटे से घर में कितना ही बड़ा ढाबा बन पाया होगा। अरे कुछ ही लोगों के बैठते ही वहां तो जगह भी भर जाती होगी।

N

ये  बोलकर सेठ उसका मजाक उड़ा देता है। लेकिन कुछ समय बाद उसके ढाबे पर जाने वाले सब ग्राहक रामु  के ढाबे पर जाकर खाना खाने लगते हैं। क्योंकि एक तो वो  खाना स्वादिष्ट भी बनाता  था  और दूसरा उसके खाने का दाम भी बहुत कम था।

COUSTMER

अरे अच्छा हुआ रामु  भाई ,जो आपने अपना ढाबा खोल लिया। वरना वो  सेठ ने तो बहुत लूट मचा रखी है। जहां आप एक प्लेट खाना 100 में देते हो, वही खाना वो लोग 300 में देते हैं।

RAMU

भैया, हम अपने मुनाफे के साथ-साथ लोगों का भी फायदा देखते हैं। मैं खुद एक गरीब आदमी हूं और गरीब की भूख समझता हूं साहब। इसलिए खाने का दाम उतना ही रखता हूं जिसमें ना तो मेरा नुकसान हो और ना ही ग्राहकों के लिए महंगा हो।

COUSTMER 2

वाह भाई साहब। अगर हर इंसान की सोच आपके जैसी हो जाए तो ये  दुनिया बहुत सुंदर हो जाएगी। लेकिन अफसोस हर इंसान आज के समय में केवल अपने फायदे के लिए ही सोचता है।

N

रामु  के ढाबे के अच्छे और सस्ते खाने ,और उनके अच्छे व्यवहार के चलते हर कोई उनके ढाबे पर जाकर ही खाना खाता था। जिसकी  वजह से सेठ के ढाबे पर लोगों ने जाना ही बंद कर दिया था । जिस वजह से उसका काम बिल्कुल ठप पड़ गया था ।

MALIK

अरे उस रामु  के चक्कर में मेरा ढाबा बंद हो गया। मुझे कुछ भी करके उसका ढाबा बंद करवाना होगा। वरना मेरा काम दोबारा नहीं चल पाएगा।

NOKAR

अरे मालिक कुछ गुंडों को उसके पास भेजकर उसे धमकी दिलवा दो। अरे वो इतना डरपोक है कि डर कर ही काम बंद कर देगा।

N

सेठ को नौकर की बात में दम लगता है और वो  कुछ गुंडों को पैसे देकर  रामु  के पास भेज देता है।

MALIK

जो नया ढाबा खुला है रामु  का उसको  किसी भी तरीके से बंद करवाना है। ये  लो पैसे।

GUNDA

अरे ओ  चल जल्दी-जल्दी हफ्ता निकाल।

RAMU

माफ करना साहब लेकिन हमारे यहां ऐसी कोई डिश नहीं मिलती।

GUNDA

अरे ओए खुद को ज्यादा होसयार समझता है क्या? अरे हफ्ते का मतलब हमारा हफ्ता दे। पैसे दे हमें। हां। और अगर तूने हमें  पैसे नहीं दिए तो तेरा पूरा घर तोड़ दूंगा।

RAMU

अरे ऐसे कैसे ? क्या दादागिरी है आप लोगों का।

GUNDA

गुंडागर्दी तो हमने अब तक तुझे दिखाई ही नहीं। अच्छा चल हमें हफ्ता मत दे। लेकिन कल से तेरा ये  ढाबा खुलना नहीं चाहिए। अगर ये  ढाबा खुल गया तो तेरा हम जो हाल करेंगे ना वो तू  सपने में भी नहीं सोच सकता।

N

वो गुंडे रामु  को धमकी देकर चले जाते हैं।

RAMU

सुनो आज । गुंडे आए हुए थे। उन्होंने धमकी दिया है। अगर हमने ढाबा खोला तो वो हमारा ढाबा तोड़ देगा । क्या करें ?

WIFE

अरे कोई भी आकर हमको धमकी देगा तो क्या डर जाओगे  क्या?

N

उसके बाद राधा  के कहने पर रामु  भी  मान जाता  हैं और अगले दिन  अपना ढाबा खोल लेते हैं। रामु  का ढाबा खुला होता है जिसे देखकर सेठ का खून खौल उठता है।

MALIK

तुम लोग किसी  काम के नहीं हो? जब तुम एक डरपोक इंसान को भी नहीं डरा पाए। तुम्हारी चेतावनी देने के बावजूद भी उसकी हिम्मत कैसे हुई ढाबा खोलने की?

GUNDA

 सेठ जी आजकल बातों से कौन डरता है? अगर उसे दो-चार लगवा दिए होते तो ढाबा खोलने की हिम्मत भी नहीं करता।

MALIK

तो खड़े-खड़े मेरा मुंह क्या देख रहे हो? उसकी हड्डी पसली तोड़ दो ताकि वो कल से ढाबा ना लगा पाए।

GUNDA

आपका काम कर देंगे सेठ जी। लेकिन हमको हमारे पैसे तो दो। मारपीट के  अलग पैसे लेते हैं हम सेठ जी।

MALIK

पैसे तुम्हें कल भी दिए थे लेकिन तुमने  कुछ काम नहीं किया । आज तुम अपना काम करो उसके बाद पैसे दूंगा।

N

उसके बाद गुंडों के साथ सेठ भी रामु  के ढाबे पर चला जाता है , ढाबे पर ग्राहक खाना खा रहे थे।

MALIK

रामु  कल ही  मेरे आदमी ने तुझे धमकाया  था। तूने उनकी बातों को अनसुना करके आज फिर ढाबा लगा लिया।

RAMU

अच्छा तो ये  दोनों आपके आदमी थे। अच्छा किया कि मैंने  अपना ढाबा बंद नहीं किया। मुझे पहले ही लग रहा था क्योंकि मेरे ढाबा  खोलने के बाद तुम्हारे उस ढाबे पर कोई खाना खाने जो नहीं जा रहा है। लेकिन आप मेरी भी बात सुन लीजिए सेठ जी। मैं अपना ढाबा किसी भी हाल में बंद नहीं करने वाला हूं। जो करना है कर लो। बहुत हो गई आपकी दादागिरी।

MALIK

अच्छा तू ऐसे नहीं मानेगा। तेरी खातिरदारी करनी  ही पड़ेगी । सुनो तुम लोग इसको इतना पीटो, इतना पीटो कि जब तक ये  अपना ढाबा खुद से ही बंद ना कर दे। कोई रहम मत करना इसके ऊपर।

WIFE

बस बहुत हो गया सेठ जी। आप बस अपनी मनमानी ही कर रहे हैं। पहले भी आप इनको महीने भर काम करवाएं पर ₹1 नहीं दिए। अब जब हम लोग अपना ढाबा खोल लिए हैं तो आप उसको ही बंद करवाने पर तुले हो।

MALIK

अरे क्या कर लेगी तू? नहीं डरते हम।

WIFE

अगर आप यहां से नहीं जाओगे तो मैं पुलिस कंप्लेंट कर दूंगी।

N

उसके बाद सेठ एक नहीं सुनता है और उन लोगों को पीटने लगता है। तभी उनके ढाबे से एक आदमी खड़ा होता है और उन लोगों को पीटने लगता है।

POLICE

अरे बड़ा शौक है ना तुम्हें गरीबों पर अत्याचार करने का। लेकिन कोई बात नहीं तुझे तो अब मैं बताऊंगा।

MALIK

अरे तुम कौन हो और क्यों हमारे मामले के बीच में आ रहे हो?

POLICE

मैं एक पुलिस ऑफिसर हूं। अभी नई  मेरी पोस्टिंग हुई है। में खाना बनाने की जगह  यहां आकर खाया करता हूं।

N

वो आदमी पुलिस ऑफिसर था जिसकी इस गांव में नई-नई पोस्टिंग हुई थी।

POLICE

अब मैं तुम्हें बताऊंगा कि दादागिरी किसे कहते हैं।

N

वो सेठ कों रंगे  हाथों पकड़ता है और उसे जेल में डाल देता है। सेठ को उसके किए की सजा मिलती है। ऐसे ही उसके बाद रामु  भी अपने ढाबे पर गरीबों और सबको खाना खिलाता है। धीरे-धीरे उसके चिकन और रॉटी  की चर्चा दूर-दूर गांव में फैल जाती है। धीरे-धीरे वो अपना एक बड़ा सा ढाबा भी खोल लेता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Comments

Popular posts from this blog

शेरू: एक वफ़ादार आत्मा

गाँव के बाहर पीपल के एक पुराने पेड़ के नीचे एक छोटा-सा कुत्ता अक्सर बैठा दिखाई देता था। उसकी आँखें भूरी थीं , लेकिन उनमें एक अजीब-सी चमक थी , जैसे उसने बहुत कुछ देखा हो , बहुत कुछ सहा हो। गाँव वाले उसे “शेरू” कहकर बुलाते थे , हालाँकि कोई नहीं जानता था कि उसका असली नाम क्या है , या कभी कोई नाम था भी या नहीं। शेरू जन्म से आवारा नहीं था , लेकिन परिस्थितियों ने उसे आवारा बना दिया था। वह कभी किसी के घर का प्यारा पालतू रहा होगा , यह उसकी आदतों से साफ झलकता था—वह इंसानों से डरता नहीं था , बच्चों के पास जाते समय पूँछ हिलाता था , और किसी के बुलाने पर तुरंत ध्यान देता था। शेरू को सबसे ज़्यादा पसंद था सुबह का समय। जब सूरज धीरे-धीरे खेतों के पीछे से निकलता और हवा में ठंडक घुली रहती , तब वह पूरे गाँव का चक्कर लगाता। कहीं कोई रोटी का टुकड़ा मिल जाए , कहीं कोई दुलार कर दे , तो उसका दिन बन जाता। लेकिन गाँव के ज़्यादातर लोग उसे बस एक आवारा कुत्ता ही समझते थे—कोई पत्थर मार देता , कोई डाँट देता , और कोई अनदेखा कर देता। फिर भी शेरू का भरोसा इंसानों से कभी पूरी तरह टूटा नहीं। गाँव में एक छोटा-सा घर था , जह...

लालची दूधवाला

हमारी साइकिल है फर्राटेदार लेकर जाती हमको गांव के उस पार ओ हो निकला हूं मैं करने दूध का व्यापार मनसुख सुनीता चाची के घर के बाहर साइकिल रोकता है और घंटी बजाता है हे काकी आ जाओ दूध ले लो लाओ भाई आज जरा आधा लीटर दूध ज्यादा दे देना मेरी बिटिया को खीर खाने का मन है हां हां अभी ले लो बढ़िया सी खीर बनाकर कर खिलाना बिटिया को। मनसुख फिर से साइकिल लेकर दूसरे घर दूध देने चला जाता है। अरे मनसुख भाई ये लो तुम्हारे दूध के पैसे। आज महीना पूरा हो गया ना ? हां दीदी लाओ दो। आपका हिसाब एकदम साफ रहता है। आप एकदम समय पर पैसे दे देती हो। अरे मनसुख भैया , तुम गांव में सबसे सस्ता दूध देते हो और रोज समय पर भी आते हो। तो फिर हमारा तो फर्ज बनता है ना कि तुम्हें समय से तुम्हारे पैसे दें। अरे आपका धन्यवाद दीदी। अच्छा मैं चलता हूं। हां। इस दूध वाले की ज्यादा तारीफ नहीं कर रही थी तुम। अरे तो और क्या ? सच ही तो कह रही थी। मैंने कुछ गलत कहा क्या ? अरे मनसुख इतना ईमानदार है बेचारा। पहले हम शहर से पैकेट वाला दूध मंगाते थे। वो कितना महंगा पड़ता है और उसे लेने के लिए आपको इतनी दूर दुकान तक जाना पड़ता था। बेचारा मनसुख तो...

अंधेरे में खड़ा साया

  महाद्वीप आर्यवर्त के बीचोंबीच बसा था देश “रुद्रायन” ,  एक ऐसा राष्ट्र जो बाहर से शांत और समृद्ध दिखता था ,  लेकिन भीतर ही भीतर रहस्यों ,  साज़िशों और छिपे युद्धों से भरा हुआ था। रुद्रायन की सीमाएँ ऊँचे पहाड़ों ,  घने जंगलों और रेगिस्तानी इलाकों से घिरी थीं ,  जिससे बाहरी दुनिया से इसका संपर्क सीमित रहता था। राजधानी “वज्रनगर” आधुनिक तकनीक और प्राचीन स्थापत्य का अद्भुत मिश्रण थी। इसी राजधानी के नीचे ,  ज़मीन से कई मंज़िल नीचे ,  स्थित था देश का सबसे गोपनीय संगठन — “त्रिनेत्र एजेंसी”। इस एजेंसी का अस्तित्व आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया गया था ,  लेकिन देश की सुरक्षा इसी के हाथों में थी। अद्वित वर्मा त्रिनेत्र एजेंसी का सबसे तेज़ ,  सबसे शांत और सबसे रहस्यमय एजेंट था। उसकी उम्र करीब बत्तीस साल थी ,  चेहरा साधारण ,  आँखें गहरी और भावनाओं को छुपाने में माहिर। जो लोग उसे पहली बार देखते ,  वे कभी अंदाज़ा नहीं लगा सकते थे कि यही व्यक्ति अकेले दम पर कई देशों की खुफिया योजनाओं को नाकाम कर चुका था। अद्वित का अतीत उतना ही ध...