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दो भाई की कहानी

  FULL STORY   N कड़ाके की ठंड अपनी पूरी ताकत के साथ गांव पर उतर आई थी। तालाब के किनारे बने कच्चे घर की दीवारों की दरारों से सर हवा सीटी बजाती हुई भीतर घुस रही थी। मिट्टी के उस छोटे से घर   में टूटी चारपाई पर एक पुरानी पतली रजाई ओढ़े हरीलाल   और उसका बीटा सोहन सिमटे बैठे थे। SON बाबा घर में आटा भी खत्म हो चुका है और जलाने के लिए लकड़ियां भी नहीं बची हैं। अगर सुबह तक कुछ इंतजाम नहीं हुआ तो हम क्या खाएंगे और इतनी ठंड में रात कैसे गुजरेगी ? FATHER बेटा   आज पूरा दिन गांव में काम की तलाश में भटकता रहा। पर किसी ने एक वक्त की मजदूरी तक नहीं दी। जेब खाली है और दिमाग जैसे सुन्न पड़ गया है। समझ नहीं आ रहा कि किस दरवाजे पर जाऊं। SON आप फिर से जाइए बाबा। कहीं ना कहीं तो काम मिलेगा ही। जब तक आप हिम्मत नहीं हारेंगे , मैं भी नहीं हारूँगा । FATHER जाऊंगा बेटा   जरूर जाऊंगा। जब तक मेरे बूढ़े हाथ चल रहे हैं , तब तक तुझे भूखा पेट नहीं सोने दूंगा। N अगली सुबह धुंध के बीच हरीलाल   अलग-अलग घरों के दरवाजों पर जाता है। FATHER काकी कोई भी छोटा-मो...

तुलसी पर जल चढ़ाने का रहस्य

 एक दिन सत्यभामा भगवान श्री कृष्ण से पूछने लगी रुक्मिणी हर रोज तुलसी को जल क्यों चढ़ाती है तुलसी के पास दीपक क्यों जलाती है इसके पीछे क्या कारण है देवी सत्यभामा बहुत अच्छा सवाल पूछा है तुमने सभी पेड़ों और पौधों में तुलसी श्रेष्ठ मानी जाती है और तुलसी मुझे भी सबसे अधिक प्रिय है अब मैं तुम्हें एक कथा सुनाता हूं कि तुलसी पर जल चढ़ाने और तुलसी के पास दीपक जलाने का क्या महत्त्व है जो भी स्त्री इस कथा को ध्यान से सुनती है वह हमेशा सौभाग्यशाली रहती है उसके घर में सुख समृद्धि आती है और गरीबी दूर हो जाती है एक समय की बात है श्याम नाम का एक वैश्य था जिसके पास धन सुख संपत्ति सब कुछ था

लेकिन एक चीज की कमी थी और वह थी संतान संतान ना होने से वैश्य और उसकी पत्नी हमेशा उदास रहते थे हमारे पास धन संपत्ति किसी चीज की कमी नहीं है पर मन को सुकून तभी मिलेगा जब हमारी संतान होगी हां हम कितनी भी दौलत जमा कर ले लेकिन संतान के बिना हमारा जीवन अधूरा है मैंने सारे उपाय किए दान पुण्य किया वैद्य को बुलाया पर कोई परिणाम ना मिला मैं समझ नहीं पा रहा क्या आखिर कारण क्या है एक दिन वह वैश्य वशिष्ठ मुनि के आश्रम गया वहां उसने वशिष्ठ जी से याचना की हे मुनिवर मैं बहुत दुखी हूं मेरी कोई संतान नहीं है कृपया मुझे बताएं ऐसा कौन सा कारण है जिसके लिए मैं निसंतान हूं हे श्याम मैं अपनी दिव्य दृष्टि से तुम्हारे पिछले जन्म के कर्मों को देखता हूं

 मुनि वशिष्ठ ने अपनी दिव्य दृष्टि से वैश्य के पिछले जन्म का दृश्य देखा पिछले जन्म में तुम एक धनी वैश्य थे एक दिन एक भूखी प्यासे गाय तुम्हारे द्वार पर आई थी तुमने ना उसे रोटी खिलाई ना चारा दिया और ना ही पानी पिलाया इसके विपरीत तुमने निर्दयता से उस गाय को अपमानित किया और अपने घर से भगा दिया उस गाय ने अभी-अभी एक बछड़े को जन्म दिया था और भूख से व्याकुल होने के कारण वहीं मूर्छित होकर गिर पड़ी अपने बछड़े को दूध नहीं पिला सकी इसी क्रूरता के कारण गाय ने तुम्हें श्राप दे दिया उस गाय ने मुझे श्राप दिया इसका मतलब है इस जीवन में संतान न होने का कारण वही श्राप है हां तुम्हारी वर्तमान स्थिति इसी श्राप के कारण है वैश्य श्याम शर्मा बहुत दुखी हुआ और अपनी गलती पर पछताया हे मुनिवर मैं इस पाप से कैसे मुक्ति पा सकता हूं क्या कोई उपाय है

तुम्हें पुत्र यज्ञ करना होगा यज्ञ संपन्न करने के बाद ब्राह्मणों को गायों का दान करने से तुम्हें संतान प्राप्त होगी और पाप से मुक्ति मिलेगी मुनिवर आपका धन्यवाद मैं शीघ्रता से पुत्र यज्ञ करूंगा और इस पाप से मुक्ति पाऊंगा श्याम शर्मा घर लौटा और सब कुछ विस्तार से सुनाया अब हमें संतान की प्राप्ति होगी हां वशिष्ठ जी ने बताया कि यज्ञ के फल स्वरूप हमें न प्राप्त होगी लेकिन एक शर्त थी हमारा पुत्र केवल 18 वर्ष का होगा केवल 18 वर्ष यह कितनी छोटी आयु है हां पर हमें इस पाप से मुक्ति भी मिल जाएगी और कम से कम हमारा वंश तो आगे बढ़ेगा श्याम शर्मा और उसकी पत्नी ने पुत्र यज्ञ का आयोजन किया उन्होंने कई ऋषियों मुनियों और ब्राह्मणों को आमंत्रित किया और विधि पूर्वक यज्ञ संपन्न किया तभी अग्निदेव प्रकट हुए हे अग्निदेव मेरे पुत्र यज्ञ को सफल करो मुझे संतान का वरदान दे हे श्याम शर्मा तुम्हारा यज्ञ सफल हुआ है तुम्हें संतान प्राप्त होगी परंतु ध्यान रहे

वह केवल 18 वर्ष तक ही जीवित रहेगा धन्यवाद अग्निदेव मैं वचन देता हूं कि अपने पुत्र की देखभाल पूरी श्रद्धा के साथ करूंगा यज्ञ समाप्त हुआ और श्याम शर्मा को संतान का वरदान मिला कुछ समय बाद उनकी पत्नी ने एक सुंदर तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया उन्होंने सभी आवश्यक संस्कार पूरे किए और उसे शिक्षा ग्रहण के लिए गुरुकुल भेजा यह बालक अत्यंत तेजस्वी है उसके गुणों से सभी प्रभावित हो रहे [संगीत] हैं मेरा बेटा बड़ा हो रहा है पर मुझे उसकी आयु को लेकर चिंता है मुनि वशिष्ठ ने कहा था कि उसकी आयु 18 वर्ष तक ही होगी श्याम चिंता मत करो हमें उसके खुशहाल बचपन पर ध्यान देना चाहिए जैसे ही बेटा 16 वर्ष का हुआ माता-पिता ने उसके विवाह की योजना बनानी शुरू की पत्नी ने कहा स्वामी हमारा पुत्र अब विवाह योग्य है हमें जल्दी ही उसका विवाह कर देना चाहिए भाग्य के अनुसार हमारे पुत्र की आयु केवल 18 वर्ष तक है 18 वर्ष के बाद उसकी मृत्यु निश्चित है

 यदि अब उसका विवाह हो गया तो उसकी पत्नी विधवा हो जाएगी और उसे जीवन भर दुखों का सामना करना पड़ेगा मुझे अपने पुत्र को अविवाहित मरते हुए नहीं देखना है मैं उसके लिए एक अच्छी पत्नी की तलाश करूंगी पत्नी ने अपने पुत्र के लिए सुभद्रा के नाम की एक अत्यंत गरीब व्यक्ति की एक गुणवती पुत्री को खोजा और उनका विवाह संपन्न हुआ सुभद्रा अत्यंत चरित्रवान और पतिव्रता नारी थी सुभद्रा को यह पता नहीं था कि उसके पति की आयु केवल 18 वर्ष तक की ही है विवाह के बाद सुभद्रा अपने सास ससुर और पति की बहुत सेवा की और अपनी मधुर वाणी से सबका मन जीत लिया समय बीतता गया और श्याम शर्मा के पुत्र की मृत्यु निकट आने लगी माता-पिता को इसकी घबराहट सताने लगी एक दिन उन्होंने अपनी बहू सुभद्रा को बुलाया और दुखी मन से कहा बहू हमें माफ कर देना हमने तुम्हारे साथ बड़ा अन्याय किया है

 आप लोग ऐसा क्यों कह रहे हैं आप मुझसे क्षमा मांगकर मुझे लज्जित ना करें आप साफ-साफ कहे क्या बात है बेटी हमने तुमसे एक बात छुपाई थी हमें हमारा पुत्र यज्ञ के फल स्वरूप प्राप्त हुआ है हमारे पुत्र की आयु केवल 18 वर्ष तक ही है और वह समय निकट आ गया है यह तो जानकर दुख हुआ पर मैं आपको यह विश्वास दिलाती हूं कि आपकी चिंता बेवजह है मैं अपने पति के प्राण की रक्षा करूंगी मुझे बस एक दीपक जल का घड़ा और एक गाय चाहिए श्याम शर्मा ने तुरंत अपनी बहू को दीपक जल का घड़ा और गाय उपलब्ध कराया बेटी सुभद्रा जैसे तुमने कहा मैंने वह सब मंगवा दिया है धन्यवाद ससुर जी मैं अपने पति की रक्षा के लिए पूरी तैयारी करूंगी जैसे ही वह दिन आया जब उसके पति की मृत्यु होने वाली थी सुभद्रा ने सुबह जल्दी उठकर तुलसी को जल अर्पित किया और तुलसी माता को प्रणाम करके पौधे पर चुनरी बांधी दीपक जलाया और प्रार्थना करने लगी हे

तुलसी मां मैं इस चुनरी के साथ आपकी शरण में आई हूं कृपया मेरे सुहाग की रक्षा करें यमराज के दो दूत श्याम शर्मा के पुत्र के प्राण लेने के लिए घर आए लेकिन तुलसी के पौधे ने उनका मार्ग रोक दिया यह क्या तुलसी का पौधा हमें रोक रहा है हे यमदूत मैं तुम्ह इस घर में आने नहीं दूंगी इस घर की बहू ने मुझे चुनरी रहाई है उसके पति की रक्षा मेरी जिम्मेदारी है हमें यमलोक लौटना होगा यहां प्रवेश करना संभव नहीं लग रहा यमदूत भयभीत होकर वापस यमपुरी चले गए और यमराज से बोले महाराज उस घर में हम प्रवेश नहीं कर पाए उस घर की रक्षा स्वयं तुलसी मां कर रही है यमराज को यह सुनकर बहुत गुस्सा आया उन्होंने तुरंत अपने अन्य चार दूतों को बुलाया और कहा तुम शाम के समय सुभद्रा के घर जाओ जब तुलसी का पौधा सो रहा होगा तब उसके पति के प्राण लेकर आओ शाम के समय यमराज के चार दूत सुभद्रा के घर की ओर निकल पड़े उधर सुभद्रा को यम दूतों के आने की आशंका थी

उसने तुलसी के पास एक दीपक जलाया और प्रार्थना की हे दीपक तुम मेरे पति के प्राणों की रक्षा करो यमराज के यह दूत मेरे पति के प्राण लेने के लिए आ रहे हैं कृपया करके मेरे पति की रक्षा [संगीत] करो जैसे-जैसे शाम हुई तुलसी का पौधा सो गया यमराज के चार दूध सुभद्रा के घर के सामने पहुंच गए उन्होंने तय किया था कि वे सुभद्रा के पति के प्राण लेकर ही यमलोक लौटेंगे जैसे ही यमदूत सुभद्रा के घर में घुसने लगे कि तुलसी के पौधे के पास जले हुए दीपक ने उनका रास्ता दिया हे यमदू तों इस घर की स्त्री ने मुझे प्रज्वलित किया है और मुझसे अपने पति के प्राणों की रक्षा की प्रार्थना की है तुम इस घर में आ नहीं सकते मैं उसके पति की रक्षा कर रहा हूं हमें यमराज ने उसके प्राण लेने भेजा है तुम आज उसके पति के प्राण नहीं ले जा सकते अगर आगे बढ़े तो मैं अपनी अग्नि से तुम्हें जलाकर भस्म कर दूंगा दीपक के ऐसा कहने पर यमदूत डर गए इसके बाद सुभद्रा ने जल के लौटे को दीपक के पास रखा और बोली हे

जल देवता मेरी मदद करो यमराज के दूध हमारे घर में आने से रोको और मेरे पति के प्राण की रक्षा करो जैसे ही यमदूत फिर से सुभद्रा के घर में आने लगे जल ने कहा इस घर के रक्षा की जिम्मेदारी मेरी है अगर तुमने इस घर में आने की कोशिश की तो सोच लेना मैं तुम्हारे नरक की आग को अपने जल से बुझा दूंगा फिर तुम्हारा नरक लोक डगमगा जाएगा यम दूतों ने जल के लौटे की चेतावनी सुनकर भयभीत होकर वापस लौटने का निर्णय लिया लौटकर यम दूतों ने यमराज से सारी बात कही कि किस तरह अग्नि और जल ने उनका मार्ग रोक रखा है यह सुनकर यमराज को गुस्सा आ गया उन्होंने फिर से आठ अन्य बलिष्ठ यम दूतों को कहा तुम सब जाओ और जैसे भी हो सुभद्रा के पति को लेकर आओ इस बार सुभद्रा ने अपने घर के सामने गाय को बांध दिया था और गाय माता से प्रार्थना कर के बोली हे गौ माता यमदूत मेरे पति के प्राण हरने आएंगे मैं आपकी शरण में आई हूं

जैसे भी हो मेरे सुहाग की रक्षा करो गौ माता सुभद्रा तुम बेफिक्र रहो मेरे रहते यमदूत इस घर में प्रवेश नहीं कर सकते तुम्हारे सुहाग की रक्षा मैं जरूर करूंगी जब आठ यमदूत आए तो गाय ने उनका रास्ता रोक दिया और बोली मेरे रहते तुम लोग इस घर में प्रवेश नहीं कर सकते अगर कोशिश भी की तो मैं तुम्हें श्राप दे दूंगी देखो तुम जिद मत करो यमराज ने जैसे भी हो सुभद्रा के पति के प्राण लाने का आदेश दिया है हम अपना काम करके ही जाएंगे ऐसा करने से पहले तुम्हें मेरे प्राण लेने होंगे और अगर तुमने ऐसा किया तो तुम आठ यम दूतों पर गोहत्या का पाप लग जाएगा जानते हो ना इस महापाप का कोई प्रायश्चित नहीं है गाय की बात सुनकर आठों यमदूत पूरी तरह से घबरा गए उन्हें अच्छे से मालूम था गाय के श्राप से मुक्ति नहीं होती और कोई भी गाय को मारकर गोहत्या का पाप अपने सिर पर लेने तैयार नहीं था हमें यमलोक लौटना होगा हम इस गाय के रहते इस घर में प्रवेश नहीं कर सकते आठों यमदूत डर कर यमलोक पहुंचे और यमराज को सब बताया आज उसके पति के मृत्यु का दिन है

 अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा यमराज अपने भैंस पर सवार होकर सुभद्रा के घर के पास पहुंच गए यमराज को अपने द्वार पर खड़ा देखकर सुभद्रा डर गई और यमराज को प्रणाम करके उनकी स्तुति गाने लगी हे धर्मराज आप ही प्राणियों के पाप और पुण्य का लेखा रखते हैं आप न्याय के देवता धर्मराज और मैं धर्म का पालन करने वाली एक पतिव्रता नारी हूं कृपया मेरे पति के प्राणों की रक्षा करें हे धर्मराज मेरा आपको सत सत बार प्रणाम सुभद्रा की स्तुति बारबार सुनकर यमराज बहुत प्रसन्न हुए और अचानक से उनके मुंह से निकला सदा सुहागन रहो फिर यमराज सुभद्रा के पति के प्राण लेने के लिए जाने लगे तब सुभद्रा ने यमराज को फिर से प्रणाम करते हुए कहा हे यमराज आपने अभी मुझे अपने मुख से सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद दिया है फिर आप मेरे पति के प्राण कैसे हर सकते हैं ऐसा करने से तो आपका वचन ही मिथ्या साबित हो जाएगा यह सुनकर यमराज रुक गए और बोले हे सुभद्रा तुमने आज मृत्यु को भी पराजित कर दिया है मैं तुम्हें वर देता हूं

 तुम्हारे पति अब 100 वर्षों तक जीवित रहेंगे तुम्हारी श्रद्धा और पतिव्रत धर्म ने मुझे प्रसन्न किया है यमराज ने वरदान देते हुए कहा आज से जो भी स्त्री अपने घर के सामने तुलसी का पौधा लगाकर रोज शाम को उसके पास दीपक जलाए गी और जिसके घर के सामने गाय बंधी होगी और जल का लौटा रखेगी उसके घर में मेरे दूत कभी प्रवेश नहीं करेंगे इतना कहकर यमराज अंतर्ध्यान हो गए भगवान श्री कृष्ण ने कहा इसी प्रकार पतिव्रता धर्म का पालन करके जो कोई स्त्री अपने घर के सामने तुलसी का पौधा लगाती है उसके पास नित्य दीपक जलाती है घर के सामने जल का लोटा रखती है और जिसके घर के सामने गाय बंधी होती है उसके घर में मृत्यु प्रवेश नहीं करती कभी दुख और दरिद्रता नहीं ऐसे घर में कभी शोक का वास नहीं होता

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