एक समय की बात है गोवर्धन नाम का एक पशुपालक अपनी पत्नी दामिनी के साथ बीजापुर नामक गांव में रहता था वह अपने मवेशियों को चारे के लिए पास के पहाड़ों पर ले जाता था सारा दिन वहीं बिताने के बाद शाम को वो उनके साथ घर लौट आता था और शाम को लौटूंगा तुम ध्यान रखना तैयार करके रखा हुआ है तुम मुझे थोड़ा ताजा मक्खन दे दो जो तुमने कल रात मिट्टी के बर्तन में बनाया था किसे खिलाओगे रास्ते में भगवान कृष्ण की एक मूर्ति है और कोई भी उन्हें कभी कुछ नहीं चढ़ता मैंने सोचा क्यों ना आज उन्हें ताजा बनाया हुआ मक्खन अर्पित किया जाए है ना उनको भी अच्छा लगेगा अब हमारे पास और कुछ तो है नहीं तो कम से कम हम मक्खन तो चड्ढा ही सकते हैं
लेकिन हमारे
मवेशियों का भी ख्याल रखना इन दिनों आप ज्यादा ही आध्यात्मिक होते जा रहे हैं कहीं
उनसे ध्यान ना है जाए आपका ध्यान रखूंगा गोवर्धन अपनी पत्नी से नाश्ता और मक्खन
साथ लेकर घर से निकल पड़ा रास्ते में वो विशाल बरगद के पेड़ के नीचे भगवान कृष्ण
की मूर्ति के पास रुक गया जैसा की वो हर रोज करता आया था उसने पहले भगवान की
मूर्ति से प्रार्थना की और फिर उनसे बातें करने लगा वो उनसे अपने दिनचर्या के बारे
में बात करने लगाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपकी कृपा से मेरा जीवन खुशहाल
बीत रहा है आज मैं आपके लिए अपने घर से ताजा मक्खन लाया हूं यह लीजिए खा कर देखिए
मेरी बीवी ने निकाला है आपको तो ताजा मक्खन पसंद है ना इतना कहकर गोवर्धन ने
मूर्ति के सामने मक्खन रखा और फिर पहाड़ों में मवेशियों को चराने के लिए निकल पड़ा
सूरज डूबने के बाद
वो वापस आया और फिर आकर कृष्ण की मूर्ति के पास रुक गया उसने देखा की मिट्टी का वो
पूरा घड़ा खा ली था खाली घड़े को देख कर वो आश्चर्यचकित हो गया और भगवान ने उसकी
भेंट स्वीकार कर ली यह सोचकर काफी प्रसन्न हो गया की और मेरी भेंट स्वीकार कर ली
आप मेरी सारी बातें सन लेते हैं आज आपने मेरी भेंट स्वीकार कर ली मैं तो धन्य हो
गया अगर आप स्वीकार करें तो मैं आपको प्रतिदिन खुशी से मक्खन अर्पण करूंगा शुद्ध
घर का निकाला हुआ मक्खन ने अपनी अपार प्रसन्नता व्यक्ति वह बोलता ही जा रहा था
भगवान कृष्ण को गोवर्धन की मासूमियत और अत्यंत शुद्ध भाव उसे पर इतने प्रसन्न हो
गए की उसे दर्शन देने के लिए साक्षात उसकी समक्ष हाजिर हो गए और फिर बोले गोवर्धन
हमें तो मक्खन बहुत पसंद है तो हम इसे स्वीकार क्यों नहीं करेंगे
गोवर्धन भगवान
कृष्ण की आवाज़ सुनकर चौक गया उसे यकीन ही नहीं हुआ की यह हकीकत है भगवान कृष्ण
क्या आप स्वयं मुझसे बात कर रहे हैं मैं तो आपकी आवाज़ सुनकर ही धन्य हो गया पर
अगर यह आप ही हैं तो मैं आपको देख क्यों नहीं सकता अगर आप दर्शन देंगे तो मुझे
यकीन हो जाएगा भगवान कृष्ण उसके सामने प्रकट हो गए और गोवर्धन पुरी तरह से
आश्चर्यचकित हो गया आप साक्षात मेरे सामने है मैं आपका बहुत बड़ा भक्त हूं मैं
प्रतिदिन आपको यहां आकर मक्खन का भोग लगाऊंगा उसके शिव मैं आपके लिए और क्या कर सकता
हूं हमें तुम्हारे द्वारा चड्ढा जाने वाले मक्खन के अलावा और कुछ नहीं चाहिए
तुम्हारी भक्ति से हम अति प्रसन्न हुए हैं और तुम्हें वरदान देना चाहते हैं तुम जो
चाहो मांग सकते हो ही कृष्ण मेरे पास जो कुछ है मैं उसमें पुरी तरह संतुष्ट हूं और
मुझे कुछ नहीं चाहिए मैं केवल हर दिन आपके दर्शन करना चाहता हूं ठीक है हम तुम्हें
यह वरदान देते हैं लेकिन एक शर्त है ये बात तुम कभी किसी को नहीं बताओगे क्या तुम
ऐसा कर सकोगे
मैं आपसे वादा करता
हूं की यह बात किसी को नहीं बताऊंगा अब आप अनुमति दें तो मैं चलूं बछड़े अपनी माता
की प्रतीक्षा कर रहे होंगे उनके बिना वह विचलित होते होंगे प्रभु जरूर जाओ गोवर्धन
लेकिन कल हमारे लिए ताजा मक्खन लाना मत भूलना जरूर ले आऊंगा प्रभु जरूर ठीक है
गोवर्धन कल मिलते हैं और गोवर्धन फिर से घर लौट आया आज की घटना के बारे में उसने
अपनी पत्नी तक को नहीं बताया लेकिन अगले दिन फिर मक्खन का घड़ा लेकर वह घर से निकल
पड़ा वह घड़ा कृष्ण की मूर्ति के सामने रखकर वह फिर से उनसे प्रार्थना करने लगा
भगवान कृष्ण कृपया मेरी भीड़ को स्वीकार करें मैं आपके लिए मक्खन लाया हूं भगवान
कृष्ण गोवर्धन के सामने आज फिर प्रकट हुए गोवर्धन के मन में एक शंका थी उसने भगवान
कृष्ण से पूछ ही लिया प्रभु एक बात बताइए आप हम सबके लिए हमेशा हाजिर हैं और अपने
सभी भक्तों का ध्यान रखते हैं लेकिन आप कभी एक शब्द नहीं बोलते और हर समय खड़े
रहते हैं आप थक जाते होंगे ना आपको कभी-कभी आराम भी कर लेना चाहिए
मैंने ठीक कहा ना प्रभु गोवर्धन तुम पृथ्वी लोग के मनुष्य
भी अजीब होते हो जब तक भगवान जवाब नहीं देता तुम कहते हो की भगवान का अस्तित्व
नहीं है अब जब हमने तुम्हें दर्शन दिए तब तुम हमें ही सुझाव देने लगे बेहतर होगा
की कल से हम दर्शन ना दें ही भगवान कृपया ऐसा ना करें मुझसे गलती हो गई मुझे आपकी
चिंता होती है की आप हर समय खड़े रहते हैं बिल्कुल आराम नहीं करते हैं आपको थोड़ी
देर बैठने तक नहीं मिलता आप थक जाते होंगे ना तुम्हारी भक्ति के अलावा तुम्हारी
मासूमियत ने भी हमारा दिल जीत लिया है तुम्हारे इस प्रश्न का उत्तर हम तुम्हें एक
उदाहरण देकर समझते हैं क्या तुम उदाहरण सुनने के लिए तैयार हूं बोलो जी प्रभु जरूर
इस स्थान पर हम प्रतिदिन विभिन्न प्रकारों के भक्तों को देखते हैं हम चाहते हैं आज
तुम भी यहां रुक कर उन सभी भक्तों को देखो लेकिन एक शर्त पर की तुम उन्हें हमारी
उपस्थित के बारे में नहीं बताओगे और किसी भी बात की प्रतिक्रिया भी नहीं दोगे
सिर्फ चुपचाप देखते रहोगे की क्या हो रहा है ठीक है पर प्रभु अगर मैं सारा दिन यही
खड़ा रहूं मेरे मवेशियों का क्या होगा उनका ध्यान कौन रखेगा हम करेंगे तुम्हारे
मवेशियों की देखभाल इसकी चिंता तुम मत करो जाओ पेड़ के पीछे चले जाओ पेड़ के पीछे
जाकर इंतजार करने लगा वो सोच रहा था
की भगवान कृष्ण
इसकी शंका को कैसे दूर करेंगे कुछ समय बाद एक व्यापारी पैसों से भारी थैली लेकर
वहां पर आया मुझे बहुत खुशी है की आपने मुझे इतना बड़ा वरदान दिया और आज मेरे
प्रभु का उत्तर भी मुझे समझ ए रहा है उसने पैसे की उसे थैली को मूर्ति के सामने
रखा और प्रार्थना करने लगा गोवर्धन पेड़ के पीछे खड़े रहकर यह सब देख रहा था मैंने
अभी अभी नया कारोबार शुरू किया है कृपया उसमें अच्छे-अच्छे आशीर्वाद दें उसने अपनी
प्रार्थना पुरी की और उसके बाद अनजाने में ही बिना पैसों की थैली उठाएं वहां से
निकल गया गोवर्धन यह सारा माजरा देख रहा था उसने यह भी देखा की वो व्यापारी पैसों
की थैली वहीं पर भूल गया था अरे वो व्यापारी अपने पैसे यहीं भूल कर चला गया अब मैं
उसे याद भी नहीं दिला सकता क्योंकि मैं भगवान कृष्ण की किसी भी बात पर प्रतिक्रिया
ना करने की शर्त से बंधा हुआ हूं थोड़ी ही देर बाद एक गरीब आदमी आकर मूर्ति के
सामने खड़ा हो गया और भगवान कृष्ण से प्रार्थना करने लगा के पास खाने के लिए कुछ
नहीं है और हम कई दिनों से भूखे हैं मैं यहां आपकी शरण में आया हूं
क्योंकि आप लोगों
के उधर करता है मुझे कोई ऐसा मार्ग दिखाओ जिससे मैं अपने परिवार का भरण पोषण कर
सकूं की मूर्ति के पास पैसे की थैली दिखाई दी वो खुश हो गया और बोला ही भगवान आपने
इतनी जल्दी मेरी इच्छा पुरी करती अब मैं इन पैसों से अपनी परिवार का भरण पोषण कर
सकता हूं आप बहुत दयालु है प्रभु वो गरीब आदमी पैसे की थैली लेकर वहां से खुश होता
हुआ निकल गया और उसके फौरन बाद आया एक और भक्त बोला राम जो की एक सपेरा था वो भी
प्रार्थना करने लगा और लोगों के जान बचाने के अपने कम से खुश हूं लेकिन मुझे कभी
कभी डर लगता है मेरे जीवन का कोई भरोसा नहीं है मेरे परिवार में कमाने वाला और कोई
भी नहीं है इसलिए मैं आपसे प्रार्थना करता हूं की आप मुझे हर खतरे से बचाए रखें तो
यही मेरी आपसे प्रार्थना है
उसी समय वो व्यापारी अपना कर्मियों के साथ पैसों की थैली
लेने वापस आया उसने देखा की पैसों से भारी वो थैली गायब है और भोलाराम वही बैठकर
प्रार्थना कर रहा है उसने इसके लिए सपेरे को ही दोषी मैन लिया आदमी ने वह थैली
चुरा कर उसमें से पैसे ले लिए होंगे निर्दोष हूं मुझे छोड़ दो रहा गोवर्धन को बोला
राम के लिए बहुत बुरा लग रहा था ही भगवान पैसे की थैली तो उसे गरीब आदमी ने ले ली
है प्रभु आप तो सब कुछ जानते हैं अब आप उसे नहीं बचाएंगे तो मैं सब जाके बता दूंगा
लेकिन भगवान कृष्ण ने कोई उत्तर नहीं दिया यह देखकर गोवर्धन ने भगवान कृष्ण को
किया हुआ वादा तोड़ दिया और उनके सामने आकर उन लोगों से सारी सच्चाई बयान कर दी
भाई साहब इस आदमी को छोड़ दो इसने पैसे नहीं लिए हैं यह निर्दोष है क्यों तुम कौन
हो और तुम्हें कैसे पता की उसने पैसे नहीं लिए हैं
मैं गोवर्धन हूं पशुपालक हूं मैंने गरीब आदमी को यहां से
पैसे की थैली लेते हुए देखा है और वह कुछ ही देर पहले उसे दिशा में गया है जल्दी
करोगे तो वह रास्ते में ही मिल जाएगा और उसे पड़कर उसे सारे पैसे वापस ले लिए
उन्होंने निर्दोष भोलाराम को छोड़ दिया बोला राम उसका आभार व्यक्त करके वहां से
चला गया उसे निर्दोष आदमी को इंसाफ तिलकर गोवर्धन बहुत खुश था उसने भगवान कृष्ण को
फिर से याद किया गोवर्धन के याद करने पर भगवान कृष्ण उसके सामने फिर से प्रकट हुए
उसने फिर भगवान के सामने अपना संदेह व्यक्त किया प्रभु आप चुप क्यों द जब आपके
सामने ये पुरी घटना हुई जैसे मैंने किया आप ही तो इस समस्या का समाधान कर सकते द
आपने कुछ क्यों नहीं किया गोवर्धन क्या तुम्हें एहसास है की तुमने अभी क्या किया
मैंने एक निर्दोष आदमी को बचाया क्योंकि मैंने सब कुछ देखा है मुझे पता है की पैसे
की थैली उसे गरीब आदमी ने ले ली थी लेकिन निर्दोष भोलाराम को ऐसे अपराध की सजा
मिलती जो उसने किया ही नहीं इसलिए मैंने आपकी शर्त तोड़ दी और एक निर्दोष आदमी को
बचाने के लिए सच कहा तुम्हें लगता है की तुमने भोलाराम को बचाया
लेकिन वास्तव में तुम ही उसकी मृत्यु का कारण बन गए हो
जानते हो कैसे ही भगवान क्या मैं उसकी मौत के लिए जिम्मेदार हूं वह कैसे मुझे समझ
में नहीं आया प्रभु गोबर धन हम जो भी कर्म करते हैं वे एक दूसरे से जुड़े होते हैं
हमें सिर्फ अपने कर्म करते रहना है लेकिन जो हो रहा है उसकी खिलाफ जाने की कोशिश
कभी नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे आपदा ही आएगी इसलिए मैंने तुम्हें दर्शन बने
रहने के लिए कहा था किसी भी चीज का जवाब नहीं देने के लिए कहा था पर भगवान मुझे
इसमें अपनी गलती समझ में नहीं आई कृपया मेरा मार्गदर्शन करें बताता हूं सबसे पहली
बात यह है की भोलाराम का कुछ समय पहले ही निधन हुआ है क्या भोलाराम की मृत्यु हो
गई है हान ये तुम्हारी गलती के कारण हुआ है अगर तुमने उसे जेल जाने दिया होता तो
वो सांप को पकड़ने नहीं जाता और बच जाता और बेचारा वो गरीब आदमी खुशी-खुशी उन
पैसों को अपने परिवार पर खर्च कर देता
लेकिन अब उसे पहरेदारों ने कैद कर लिया है और
उसका परिवार भूख से मार जाएगा है और यह इसलिए हुआ क्योंकि तुमने मेरी बात ना मानकर
उन्हें सब कुछ बता दिया ही प्रभु लेकिन कम से कम मेरे कारण वह व्यापारी नुकसान से
तो बच गया है ना तुम सही का रहे हो पर ये भी तो सच है की अगर व्यापारी ने अपने
पैसे की थैली खोदी होती तो इस नुकसान का उसे पर ज्यादा असर नहीं होता लेकिन उसे
गरीब आदमी को पैसे से फायदा होता और साथ ही भोलाराम जेल में रहकर बच जाता अपने
प्राणनाथ होता आपने जो कहा वह बिल्कुल सच है कन्हैया मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई
मुझे आपकी इरादों का एहसास नहीं हुआ आप तो सभी के प्रभु है सबके कर्मों का हिसाब
रखते हैं लेकिन फिर भी आप शांत रहे क्योंकि नियति में जो लिखा है वैसे ही होना
चाहिए आप ही है जो हमारे भाग्य का फैसला करते हैं
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