एक छोटा सा गांव था। वहां के सभी लोग खेती किया करते थे। सबका जीवन खेती पर ही निर्भर करता था। उस गांव में चतुर लाल नाम का जमींदार रेहता था। जिसके पास बहुत सारी जमीन थी। वो अपने गांव में सबसे अमीर व्यक्ति था। उसके पास एक बड़ा सा घर और बहुत सारे नौकर चाकर थे। धन दौलत की उसे कोई कमी नहीं थी। लेकिन उसे इस बात का बड़ा ही घमंड था और चतुर लाल बहुत बड़ा कंजूस भी था। एक दिन उसके घर एक भिक्षुक भिक्षा मांगने आता है।
मालिक कुछ खाने को दे दो।
बहुत भूख लगी है मालिक। आप तो बड़े ही धनी हो। प्रभु की कृपा से आपके पास सब कुछ
है। इस गरीब की थोड़ी मदद कर दीजिए मालिक। बड़ी कृपा होगी।
अरे हट यहां से दूर रेहकर
बात कर। मेरे पास भी मत आना। नहीं तो मुझे नहाना पड़ेगा। पता नहीं कहां-कहां से आ
जाते हैं। अमीर आदमी देखा नहीं कि भीख मांगना शुरू। अरे खुद से कमाओ और खाओ ना।
तभी वहां पर चतुर लाल की
पत्नी सीता आ जाती है।
आप यहीं रुकिए बाबा। मैं
अभी आई।
तभी चतुर लाल सीता के पीछे जाता है
और उसे केहता है ये तुम क्या कर रही हो?
कुछ नहीं द्वार पर
भिक्षुक आया है। उसे खाना दे रही हूं। भूखा है बेचारा।
कोई जरूरत नहीं है। तुम
चुपचाप अपने कमरे में जाओ। ये सब धन दौलत
मेरी है। मैंने ये ऐसे भूखे नंगे को
बांटने के लिए नहीं कमाया है।
ये आप क्या केह रहे हैं? उसने पैसे तो नहीं
मांगे। खाना ही तो मांग रहा है। एक वक्त का खाना दे दोगे तो कौन सा तुम्हारा धन
खत्म हो जाएगा?
अरे इस खाने के लिए भी
मेहनत करनी पड़ती है। फोकट में कुछ नहीं मिलता। मैं तो एक गिलास पानी भी ना दूं।
तुम खाने की बात कर रही हो।
कभी तो कोई पुण्य कर लिया
करो। किसी का पेट भरो तो वो तुम्हें दुआ
ही देकर जाएगा ना।
अरे मुझे ऐसे भिखारी की
दुआ नहीं चाहिए। तुमसे जितना कहा गया है उतना करो। अंदर जाओ।
अरे लेकिन वो बाबा मेरी
राह देख रहे होंगे।
उसे मैं संभाल लूंगा। तुम
अंदर जाओ।
सीता अपने कमरे में चली जाती है। चतुर लाल बाहर आकर
उस भिखारी से केहता है,
तुम अब तक यहीं खड़े हो गये
नहीं
मालिक मालकिन खाना लेने
गई है ना?
अभी खाना नहीं बना है।
तुम दोपहर में आ जाना। अभी जाओ यहां से।
वो भिखारी वहां से चला जाता है। और दोपहर में फिर
से आता है और चतुर लाल उसे केहता है
क्या है भाई तुम फिर से आ
गए
मालिक आपने तो बोला था
दोपहर में आ जाना अभी खाना दे दो मालिक घर में पत्नी बीमार है उसे खाने की बहुत
जरूरत है मालिक थोड़ा सा ही दे दो मैं भूखा रेह लूंगा लेकिन मेरी पत्नी के लिए दे
दो।
थोड़ा जल्दी आना चाहिए था
फिर तो , अभी खाना खत्म हो चुका है। रात में आना अभी जाओ यहां से।
वो भिखारी निराश होकर फिर
से चला जाता है। और शाम होने की राह देखता है।
कब शाम होगी और कब खाना
मिलेगा। मालिक ने शाम को बुलाया है। जल्दी जाना पड़ेगा। नहीं तो मालिक फिर से
कहेंगे कि देरी से क्यों आया? गंगा तुम चिंता मत करो। शाम होने वाली है। थोड़ी देर
की ही बात है। मालिक खाना देने वाले हैं। और रामू कहां है? दिखाई नहीं दे रहा।
जी। वो काम की तलाश में
गया है। वो बेचारा भी क्या करें? हमारी तो किस्मत
ही फूटी है। घर में अन्न का दाना तक नहीं है। बेचारा दिन रात काम की तलाश में
भटकता रेहता है। लेकिन कोई काम ही नहीं
देता। बोल रहा था कि आज एक मालिक ने उसे बुलाया है और उसे काम देने वाले हैं।
भगवान करे आज उसे काम मिल जाए।
हां गंगा तुम सही केह रही हो। तुम चिंता मत करो। गंगा उसे काम जरूर मिल जाएगा। फिर हमारी मुसीबत भी कम
हो जाएगी। ज्यादा तो नहीं लेकिन दो वक्त की रोटी का इंतजाम तो हो ही जाएगा। फिर
मुझे किसी से भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
शाम होने के बाद फिर
भिक्षुक चतुर लाल के यहां पहुंच जाता है।
मालिक कृपा कर अब तो खाना
दे दीजिए। भगवान आपका भला करेगा मालिक।
अरे तुम्हें एक बार में
समझ में नहीं आता क्या? बार-बार आ जाते
हो तुम्हें। समझ में नहीं आ रही कि मुझे तुम्हें कोई खाना नहीं देना। बेशर्म कहीं
का। अब निकल यहां से और दोबारा यहां दिखना भी मत।
वो बाबा बहुत ही निराश हो जाता है। उसे बहुत बुरा
लगता है। वो एक पेड़ के नीचे बैठ जाता है
और सोचता है।
घर जाकर गंगा को क्या मुंह दिखाऊंगा। वो बेचारी तो खाने का इंतजार कर रही होगी। मेरी ही
गलती है। मैं उसे खाने की आस लगाकर आ गया। लेकिन मुझे क्या पता था? मालिक मना कर देंगे। हे भगवान ये कैसा न्याय है तेरा? इस आदमी के पास इतना धन, इतनी संपत्ति होने के बावजूद ये एक आदमी का पेट भी नहीं भर सकता। इतनी संपत्ति
और धन किस काम का? हे प्रभु मुझे धन
का कोई लालच नहीं है। बस इतनी कृपा कर दो
प्रभु कि दो वक्त की रोटी नसीब हो जाए। उसके लिए मुझे दर-दर की ठोकरें ना खानी
पड़े। लेकिन अभी मैं क्या करूं? घर कैसे जाऊं?
नहीं, मैं घर नहीं जाऊंगा। मैं घर जाऊंगा तो गंगा खाने के बारे में पूछेगी, तो मैं उसे क्या जवाब दूंगा? उसका उदास चेहरा और उसकी तकलीफ मुझसे नहीं देखी जाएगी। मैं एक काम करता हूं। आज रात यहीं
रुक जाता हूं। वैसे भी रामू घर आ गया होगा।
ऐसा सोचकर वो बाबा चतुर
लाल के बगीचे में रुक जाता है और वहीं लेट जाता। ऊधर सीता चतुर लाल से केहती है
क्यों बेचारे गरीब की
बद्दुआ ले रहे हो अगर आपको खाना देना ही नहीं था तो पेहली बार में ही उसे केह देते
बेचारा खाना मिलने की आस लगाए बार-बार आ रहा था और आपने उसके साथ ऐसा किया
तुम चुप रहो तुम कुछ नहीं
जानती मुझे पता है किस लोगों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए और याद रहे मेरे पीठ
पीछे घर में से एक फूटी कौड़ी भी बाहर नहीं जानी चाहिए। अगर मुझे पता लगा तो मुझसे
बुरा कोई नहीं होगा। मेरे पास किसी को देने के लिए कुछ नहीं है। अगर तुमने किसी को
कुछ दिया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।
मैं केहती हूं भगवान का
दिया हमारे पास तो सब कुछ है। लेकिन इतना घमंड करना भी ठीक नहीं। कल को अगर आप
उसकी जगह होते या फिर आपको किसी चीज की जरूरत होती और कोई आपकी मदद नहीं करेगा तो
आपको कैसा लगेगा?
मैं और उस भिखारी की जगह
ऐसा कभी नहीं हो सकता। इस गांव का सबसे अमीर आदमी हूं। किसी की औकात नहीं है मेरे
सामने खड़े रहने की। मेरे पास इतना धन है कि मुझे कभी किसी चीज की जरूरत नहीं
पड़ेगी। मेरे पास सब कुछ है। मुझे किसी से मदद मांगने की कभी आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
इतना घमंड से बोल रहे हो
देखना कहीं समय बदल ना जाए और आपको किसी की मदद की जरूरत ना पड़ जाए तब आपकी भी
मदद कोई नहीं करेगा क्योंकि आपने कभी किसी की मदद नहीं की। कभी किसी को अन्न का
दाना या फिर एक गिलास पानी तक नहीं दिया। अगर सामने वाला आपके मतलब का है तो ही आप
उसे पूछते हो। नहीं तो बिना मतलब के तो आप किसी को पानी भी नहीं देते। इतनी कंजूसी
और इतना घमंड अच्छी बात नहीं है। देखना एक दिन तुम जरूर पछताओगे। मैं केहती हूं
अभी से सुधर जाओ। नहीं तो एक दिन आपको जरूर पछताना पड़ेगा। आप लोगों की मदद करो।
जरूरतमंद लोगों की सहायता करो। समझे?
मैं जैसा हूं वैसा ही
रहूंगा। किसी के लिए नहीं बदलूगा। और हां, मुझे घमंड है मेरी धन दौलत का। और घमंड क्यों ना करूं? पूरे गांव में मेरे इतना अमीर आदमी है कोई? तुम बताओ। अगर किसी के पास मेरे इतना धन हो तो
बताओ।
तुम नहीं सुधरने वाले।
भगवान ना करे की आपके ऊपर कोई बुरा समय ना
आ जाए।
अरे मेरे पास बहुत पैसा हैं। समय आया भी तो मैं उसे चुटकी में निपट
लूंगा। तुम मेरी चिंता मत करो।
सीता सोचती है
हे भगवान इन्हें
सद्बुद्धि देना। ये बार-बार गरीबों का
अपमान करते हैं। कभी भी किसी से सीधे मुंह से बात तक नहीं करते। ये तो मेरी बात सुनने से रहे। इनका इतना घमंड कहीं
इन पर ही भारी ना पड़ जाए।
रात में चतुर लाल बाहर
टहलने निकलता है तो उसे अपने बगीचे में वो बाबा दिखाई देते हैं जो बगीचे में सो रहे होते
हैं।
ये भिखारी अब तक यहीं है गया नहीं। इसकी इतनी
हिम्मत कि मेरे बगीचे में सो रहा है। अभी इसको बताता हूं।
चतुर लाल गुस्से से उसके
पास जाकर बोलता है,
अबे वो भिखारी उठ यहां
से। इतनी रात को तू यहां क्या कर रहा है? तेरे जैसा बेशर्म आदमी मैंने आज तक नहीं देखा। मैंने तुझे जाने के लिए कहा था
ना।
मालिक, मैं तो बस सो रहा था। सुबह होते ही यहां से चला
जाऊंगा। बस एक रात की बात है मालिक। आज रात इस बगीचे में रुकने की अनुमति दे
दीजिए।
बिल्कुल नहीं। अगर तुझे
मैंने मेरे बगीचे में रुकने दिया तो मुझे और चार लोगो को तेरी निगरानी में रखना पड़ेंगा ।
मालिक मैं कुछ समझा नहीं।
मुझे निगरानी की क्या जरूरत?
अरे ऐसे कैसे जरूरत नहीं
है? बिल्कुल निगरानी की जरूरत
है। क्या पता तुम मेरे बगीचे में से कुछ चुरा के ले जाओगे। कही तुम चोर निकले तो मुझे क्या पता। रात में मेरे
घर में घुस जाओगे। कोई चीज चुरा लोगे तो मैं तुझे कहां ढूंढता फिरूंगा?
मालिक आप मुझे चोर समझ
रहे हो। मैं कोई चोर नहीं। बस एक लाचार गरीब हूं।
अरे सारे चोर ऐसे ही केहते
हैं कि मैं कोई चोर नहीं हु । तुम्हारा क्या भरोसा? मैं तो लुट जाऊंगा ना। एक तो दिन भर बेशर्म की तरह मेरे घर
में बार-बार आ रहे थे। मुझे तो पूरा शक है कि तुम कोई चोर ही हो। इतना सुनाने के
बाद भी मेरे बगीचे में पड़े हो। निकल यहां से चोर कहीं के। और हां, आज के बाद मेरे घर के आसपास भी दिखा न, तो तेरी टांगे तोड़ दूंगा। ये याद रखना। भूल कर भी यहां मत देखना।
वो उदास होकर वहां से चला
जाता है। चतुर लाल की बातों से उसके दिल पर बहुत चोट लगती है। वो एक जगह बैठता है
और सोचता है
हे भगवान आज लोग मुझे चोर
समझ रहे हैं। चोरी करना मेरी नजर में पाप है। मैंने आज तक कभी चोरी के बारे में
सोचा भी नहीं। चाहे मुझ पर कितना भी बुरा समय आ जाए। मैंने आज तक मेहनत करके खाया
है। अगर ना मिला तो मजबूरी में मांग कर खाया है। लेकिन कभी किसी घर में चोरी नहीं
की। फिर भी लोग मेरे बारे में ऐसा सोचते हैं।
फिर अगले दिन सुबह के वक्त बाबा अपने घर पहुंचता है तो गंगा उसे केहती है
जी आप रात भर कहां थे?
हम कितने परेशान हो रहे थे कि आप कहां चले गए?
अरे क्या बात है?
वो गंगा कल मैं मालिक के यहां जा रहा था। तो अचानक से
मेरा पांव मुड़ गया था। मुझसे चला भी नहीं जा रहा था। मालिक ने मुझे अपने घर में
ही रोक लिया और खाना भी खिलाया। कहा कि सुबह चले जाना। अभी भी पैर में थोड़ा दर्द
है। फिर भी मैं थोड़ी देर में जाकर खाने का बंदोबस्त करता हूं। तुम्हें बहुत भूख
लगी होगी ना। मुझे तुम्हारी बड़ी चिंता हो रही थी। लेकिन मैं क्या करता? आ ही नहीं पाया। तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना?
आप मेरी चिंता मत कीजिए।
मैं बिल्कुल ठीक हूं। और हां, कल रामू खाना
लेकर आ गया था और दवाई भी लेकर आया। हम दोनों ने खाना खा लिया। आपकी बड़ी चिंता हो
रही थी कि आप कहां हैं और आपने खाना खाया भी होगा या नहीं? रामू को एक मालीक के पास का काम मिल गया है। बहुत अच्छे मालिक
हैं। और कल ही उन्होंने रामू को थोड़े पैसे भी दे दिए हैं। उससे राजू राशन का
सामान लेकर आया। अब आपको कहीं जाकर भीख मांगने की जरूरत नहीं। अब हम सुकून से घर
पर बैठकर खाना खा सकते हैं। बस रामू का इस तरह काम चलता रहे तो हमें कभी खाने की कमी नहीं होगी और ना ही कहीं जाने की।
ये तो बड़ी अच्छी बात है गंगा । आज मैं बहुत खुश
हूं। भले देर से ही सही लेकिन भगवान हमारे तरफ देख रहा है। क्या करूं गंगा को कल रात वाली बात बता दूं? नहीं नहीं गंगा अभी खुश है। मैं कल रात वाली बात बाद में
बताऊंगा नहीं तो उसे बहुत बुरा लगेगा। राजू कहीं दिखाई नहीं दे रहा। कहां चला गया?
अरे वो काम पर गया है।
मैंने आपको बताया था ना कि उसे सेठ जी के यहां काम मिल गया हे । वो वहीं पर गया
है। चलो मैं आपके लिए खाना लगा देती हूं।
कुछ दिन ऐसे ही बीत जाते
हैं। एक दिन चतुर लाल घोड़े पर सवार होकर अपने आदमी के साथ सैर पर निकलता है। वो जंगल के रास्ते से जा रहे होते हैं। चतुर लाल का
घोड़ा आगे-आगे चल रहा होता है और उसके लोग पीछे चल रहे होते हैं। चतुर लाल का
घोड़ा उन लोगों से आगे निकल जाता है और एक घने जंगल में पहुंच जाता है। उसके साथ
आए हुए लोग पीछे रेह जाते हैं और फिर वो लोग सोचते हैं
अरे ये क्या मालिक का
घोड़ा तो कहीं नजर नहीं आ रहा मालिक किस रास्ते से चले गए अब हमें कैसे पता चलेगा
और यहां तो बहुत बड़ा घना जंगल है सुना है यहां जंगली जानवर रेहते हैं अब हम क्या
करें
थोड़ी देर यहीं रुकते हैं
आगे जाना ठीक नहीं होगा हमारे लिए
वो बहुत देर तक इंतजार
करते हैं। लेकिन चतुर लाल और उसका घोड़ा वापस नहीं आता।
अब यहां रुकना ठीक नहीं
है। नहीं तो जंगली जानवर आ जाएंगे। मालिक की छोड़ो। हमें हमारी जान बचानी है तो
यहां से जाना पड़ेगा। पता नहीं वो किस रास्ते से चले गए।
हां, तुम ठीक केह रहे हो भाई। वैसे भी इसने कभी आज
तक किसी की परवाह की है जो हम इसकी करें। इसके जैसा घमंडी और निर्दई आदमी तो मैंने
आज तक नहीं देखा। अगर वापस घर आ गया तो बोल देंगे कि हमने आपको बहुत ढूंढा पर आप
मिले ही नहीं। चलो वापस चलते हैं।
फिर दोनों वहां से लौट
जाते हैं। घर जाने के बाद सीता पूछती है,
अरे तुम्हारे मालिक कहां
है? तुम दोनों तो उनके साथ ही
गए थे ना? क्या हुआ? वो अभी तक लौटे नहीं।
मालकिन उनका घोड़ा बहुत
तेज था। वो तो हमसे बहुत आगे निकल चुके थे। अभी तक तो उन्हें आ जाना चाहिए था। अब
तो हमें भी उनकी चिंता हो रही है।
सीता भी बहुत चिंता में पड़ जाती है। इधर चतुर लाल एक
जंगल में खो जाता है।
ये मैं कहां फंस गया? यहां तो दूर-दूर तक कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा। वापस
कैसे जाऊं? क्या मुसीबत है।
जैसे ही चतुर लाल रास्ता
खोजने निकलता है और वापस आकर देखता है तो उसका घोड़ा उसकी जगह पर नहीं होता। वो भी
खो जाता है।
ये क्या? मेरा घोड़ा कहां गया? अब क्या करूं? इस घने जंगल में वही तो मेरा साथी था। कहां जाऊं? यहां तो दूर-दूर
तक कोई नजर भी नहीं आ रहा। मेरा इतना महंगा घोड़ा जरूर किसी ने चुरा लिया होगा।
अरे कामचोर मेरे लोग कहां मर गए? मेरे पीछे तो आ
रहे थे। एक बार घर पहुंच जाने दो। इनकी टांगे तोड़ दूंगा।
चतुर लाल बहुत परेशान हो
जाता है और फिर रात हो जाती है। जंगल में इधर-उधर रास्ता ढूंढने की बहुत कोशिश
करता है लेकिन उसे कहीं भी रास्ता नहीं दिखाई देता। वो बहुत परेशान होकर एक जगह पर
बैठ जाता है और केहता है
अब मैं क्या करूं?
कहां जाऊं? क्या करूं? हे ऊपर वाले मेरी कुछ तो मदद कर। मेरे पेट में तो चूहे दौड़
रहे हैं। क्या करूं? कैसे इस जंगल से
बाहर निकलूं? अब तो मुझे बहुत डर लगने
लगा है। कोई तो मेरी मदद करो। मुझे यहां से निकालो।
बहुत देर तक चतुर लाल राह
देखता है। लेकिन कोई नहीं आता। फिर थोड़ी देर बाद दूर से कोई आदमी चतुर लाल को आता
हुआ दिखाई देता है। उसे देख चतुर लाल की जान में जान आ जाती है। बहुत खुश हो जाता
है और उस आदमी को आवाज लगाता है। वो लड़का सोचता है
इतनी रात को कौन है?
कौन मुझे आवाज लगा रहा है? लगता है कोई मुसीबत में है। मुझे जाकर देखना
होगा। उसकी मदद करनी होगी मुझे।
वो लड़का चतुर लाल के पास
जाता है और उससे पूछता है
कौन हो भाई और इतनी रात
गए इस घने जंगल में क्या कर रहे हो? आपको पता है यहां रुकना खतरे से खाली नहीं। यहां जंगली जानवर रेहते हैं?
बहुत अच्छा हो गया बेटा
जो तुम मिल गए। तुम मेरे लिए किसी भगवान से कम नहीं हो। तुम्हें देखा तो मेरी जान
में जान आ गई। नहीं तो आज मेरी खैर ही
नहीं थी। मैं रास्ता भटक गया हूं। मेरे साथ आए हुए लोग पता नहीं कहां रेह गए। मैं
बहुत देर से यहां भटक रहा हूं। बाहर जाने का कोई रास्ता नजर ही नहीं आ रहा।
कैसे नजर आएगा? जिसको इस जंगल के बारे में पता है, बस वही यहां से बाहर निकल सकता है। ये जंगल बहुत घना है। यहां आने की कोई हिम्मत नहीं
करता। आपको यहां आना ही नहीं चाहिए था। अगर मैं यहां नहीं आता तो आपका पता नहीं
क्या होता। आप यहां से बाहर निकल भी पाते या नहीं।
मेरी तो मती मारी गई थी
जो मैं इस जंगल में घुस गया। मुझे तुम्हारी मदद की बहुत जरूरत है। बेटा कृपया मेरी
मदद कर दो। मुझे यहां से बाहर निकाल दो।
क्यों नहीं? मैं जरूर आपकी मदद करूंगा। और अभी आपका यहां से जाना ठीक नहीं होगा। पास ही में मेरी
झोपड़ी है। आप वहां चलिए। यहां ज्यादा देर रुकना ठीक नहीं। जल्दी चलिए।
फिर वो लड़का चतुर लाल को अपने झोपड़ी में ले जाता है
और बड़े ही आदर से उनको बिठाता है।
आप आराम से बैठिए। आपको
बहुत भूख लग रही होगी ना? मैं आपके लिए
खाना लेकर आता हूं।
हां बेटा भूख तो बहुत लगी
है। अगर तुम्हारे पास कुछ भी हो तो जल्दी से खाने को ला दो।
फिर वो लड़का चतुर लाल को खाना देता है। चतुर लाल उसे
पूछता है,
तुमने खाना खा लिया?
नहीं। मां ने ये खाना मेरे लिए ही बनाया था। लेकिन आप खा लो। आप
मेरे मेहमान हो और मेहमान भगवान समान होते हैं। मेहमान का बहुत सम्मान करना चाहिए।
मेरे पिताजी ने मुझे यही शिक्षा दी है।
लेकिन बेटा ये तो तुम्हारे हिस्से का खाना है।
मेरे हिस्से का खाना था।
लेकिन अब ये आपके हिस्से का हो गया
क्योंकि आप मेरे मेहमान बनकर आए हो। आप मेरी चिंता मत कीजिए। मैं भूखा रेह लूंगा।
पहले भी कई दिनों तक भूखा रेह चुका हूं।
आज आपके लिए एक दिन भूखा रेह लूंगा तो कुछ नहीं होगा। मुझे आदत है। आप खाना खा
लीजिए।
चतुर लाल सोच में पड़
जाता है।
इस लड़के के संस्कार
कितने अच्छे हैं। कोई इतना अच्छा कैसे हो सकता है? ये लड़का खुद भूखा रेहकर
अपने हिस्से का खाना मुझे दे रहा है।
किस सोच में पड़ गए साहब?
खाना खा लीजिए ना।
फिर चतुर लाल खाना खाने
लगता है। खाना खाने के बाद वो लड़का चतुर लाल के लिए बिस्तर लगा देता है।
साहब आप अब घर में सो
जाइए। मैं घर के बाहर जाकर सो जाऊंगा। आप आराम से रहिए।
बेटा तुम भी यहीं सो जाओ।
बाहर जाकर क्यों सोना?
नहीं साहब आपको तकलीफ
होगी। आप मेरे मेहमान हो। अगर पिताजी को पता चला कि आपकी सेवा में कोई कमी हो गई
तो वो मुझे बहुत डांटेंगे।
तुम्हारे पिताजी कहां है
बेटा? तुम अकेले रेहते हो और
तुम काम क्या करते हो?
साहब मैं दूसरों के खेत
में मजदूरी करने जाता हूं और मैं अकेला नहीं रेहता । मेरे माता-पिता भी मेरे साथ
ही रेहते हैं। वो मेरे एक रिश्तेदार के यहां गए हैं। शाम तक आने वाले हैं।
तुम्हारा बड़ा एहसान रहा
बेटा मुझ पर। नहीं तो आज शायद में जिंदा नहीं होता।
अरे साहब कोई बात नहीं। ये
तो हमारा फर्ज है। हम इंसान एक दूसरे की
मदद नहीं करेंगे तो कौन करेगा? हमें जरूरत के
समय एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।
ये बात सुन चतुर लाल को शर्म आने लगती है। वो सोचता
है
आज तक तो मैंने कभी किसी
की मदद नहीं की। मेरे पास इतनी धन दौलत होने का क्या फायदा? आज इस गरीब लड़के ने मेरी जान बचाई और अपने हिस्से का खाना
भी मुझे खिलाया है। मेरे पास तो खाने की कोई कमी नहीं। फिर भी मैंने कभी किसी को अन्न का दाना भी नहीं दिया ना एक फूटी कौड़ी।
मुझे आज अपने आप पर शर्म आ रही हे । आज इस लड़के ने मेरी आंखें खोल दी।
इधर सीता बहुत परेशान हो जाती है। बहुत से लोग चतुर लाल की
तलाश में लग जाते हैं। फिर अगली सुबह
साहब आपको रात में नींद
तो अच्छे से आई ना? कोई तकलीफ तो
नहीं हुई?
नहीं बेटा मुझे कोई तकलीफ
नहीं हुई। कल दिन भर भटकते-भटकते बहुत थक गया था। कब नींद लग गई पता ही नहीं चला?
मुझे तो बहुत सुकून की नींद आई।
अच्छा ठीक है साहब। मैं
आपके लिए चाय लेकर आता हूं।
चतुर लाल चाय पीने लगता
है। फिर वो लड़का चतुर लाल से पूछता है,
और बताइए साहब आपकी और
क्या सेवा करूं?
तुमने मेरे लिए बहुत कुछ
किया है बेटा। तुम्हारा यही उपकार मैं कभी नहीं चुका सकता। और मुझे तुम्हें एक बात
बतानी थी। तुम यहीं रेहते हो तो जंगल के बारे में तुम्हें सब कुछ पता होगा। मेरा
एक घोड़ा लापता हो गया हे । उसे ढूंढ कर ला दोगे तो तुम्हारी बड़ी कृपा होगी।
आप चिंता मत कीजिए साहब।
मुझे जंगल का चप्पाचप्पा पता है। मैं अभी जाकर देखता हूं कि आपका घोड़ा कहां है।
मैं आपके घोड़े को ढूंढने की पूरी कोशिश करूंगा।
फिर वो लड़का घोड़े की
तलाश में निकल पड़ता है। सुबह से दोपहर हो जाती है। बहुत ढूंढने के बाद उस लड़के
को घोड़ा मिल जाता है। उसे लेकर वो घर जाता है। घोड़े को देखते ही चतुर लाल बहुत
खुश हो जाता है।
अरे वाह जियो बेटे जियो।
आखिर ये घोड़ा तुम्हें मिल ही गया। मुझे
तो समझ ही नहीं आ रहा कि मैं किस शब्द में तुम्हारा शुक्रिया करूं।
अरे शुक्रिया की कोई बात
नहीं साहब। आपकी जरूरतों का ध्यान रखना, आपकी आज्ञा का पालन करना मेरा फर्ज है। आखिर आप मेरे मेहमान जो ठहरे आप थोड़ी
देर रुकिए साहब। मैं एक घोड़े के लिए कुछ खाने को लाता हूं। पता नहीं बेचारा कल से
भूखा होगा। कुछ खाया भी होगा या नहीं।
चतुर लाल सोच में पड़
जाता है।
इस जानवर से भी इस लड़के
को इतना लगाव कि उसे इसकी इतनी फिक्र हो रही है। आज तक तो मैंने इतनी फिक्र कभी
किसी इंसान की भी नहीं की। इसको मेरे घोड़े की भी चिंता हो रही है। ये बात तो मेरे दिमाग में भी नहीं आई कि मेरे घोड़े
ने कुछ खाया होगा या नहीं। सच में धन्य है
इसके मां-बाप जिसने इसको इतने अच्छे संस्कार दिए। अब तो मैं इसके पिताजी से मिलकर
ही जाना चाहूंगा।
सुनो बेटे, तुम्हारे माता-पिता आज आने वाले हैं ना?
क्या मैं उनके आने तक मैं यहां रुक सकता हूं क्या?
तुम्हें कोई तकलीफ तो नहीं होगी?
अरे तकलीफ की क्या बात है
साहब? आपका जितना मन करे आप
उतना रुकिए।
फिर थोड़ी ही देर में उस
लड़के के माता-पिता वहां पर आ जाते हैं।
साहब ये मेरे पिताजी हैं। पिताजी ये हमारे मेहमान हैं।
और सारी घटना बताता है।
उस लड़के के पिताजी को देख चतुर लाल को धक्का सा लगता है। शर्म से उसकी आंखें झुक
जाती हैं और सोचता है।
ये तो वही भिखारी है जो उस दिन मेरे घर बार-बार भीख
मांगने आ रहा था और मैंने उसे भगा दिया था । यहां तक कि मैंने उसे अपने बगीचे से
भी अपमानित करके भगाया था।
अरे साहब आप अरे रामू मैं इनको जानता हूं। तुम नहीं जानते बहुत बड़े
साहब हैं। बहुत अमीर है। तुम ने इनका
अच्छे से ख्याल तो रखा ना? आप बताइए साहब।
आपको कोई तकलीफ तो नहीं हुई? अगर मेरे बेटे से
कोई गलती हो गई हो तो क्षमा कर देना।
ऐसा केहकर मुझे शर्मिंदा
मत करो। और अमीर मैं नहीं तुम हो। मैं तो बस धन से अमीर हूं। कर्म से तो तुम अमीर
हो। आज मैं अपने आप को तुम्हारे सामने बहुत छोटा मेंहसूस कर रहा हूं। मुझे उस दिन
के लिए माफ कर दो। मुझे मेरे दौलत का बहुत घमंड था। लेकिन आज मेरा घमंड चकनाचूर हो
गया। आज मेरी जान मेरी दौलत ने नहीं, तुम्हारे दिए गए संस्कार ने बचाई है। तुम्हारे बेटे ने मेरी जान बचाई और मेरा
बहुत अच्छे से ख्याल भी रखा। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मुझे उस दिन के लिए माफ
कर दो। मैं तुम्हारे पैर पड़ता हूं।
अरे साहब, ये क्या केह रहे हो? मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है। आप ऐसा मत कहिए। आप इतने
बड़े आदमी होकर मुझसे माफी मत मांगिए। मुझे अच्छा नहीं लग रहा।
तुमने तो मुझ पर बहुत
बड़ा एहसान किया है। तुम्हारे बेटे ने मेरी जान बचाई है। मैं तुम्हारे लिए कुछ
करना चाहता हूं। मना मत करना। मैं तुम्हारे बेटे को अपने यहां नौकरी पर रखना चाहता
हूं। मैं उसे इतनी अच्छी तनख्वाह दूंगा कि तुम्हें कभी किसी के सामने हाथ ना फैलाना
पड़े। तुम्हें कभी किसी बात की कमी नहीं होगी। और हां, तुम इस झोपड़ी में नहीं रहोगे। मेरे दो-तीन मकान ऐसे ही
पड़े हैं। उनमें से एक मकान मैं तुम्हें दे दूंगा। तुम उसमें रेहना।
अरे नहीं साहब हम ठीक है।
हमें इसी घर में बहुत अच्छा लगता है।
अरे मना मत करना। नहीं तो
मुझे बहुत बुरा लगेगा। मुझे लगेगा कि तुमने मुझे अभी तक माफ नहीं किया है। अगर सच
में तुमने मुझे माफ कर दिया है तो मेरी बात मान लो और मेरे साथ चलो।
फिर वो बाबा उसकी बात मान
लेते हैं और बड़े ही आराम से नए घर में रेहने लगते हैं और राजू भी चतुर लाल के
यहां काम करने लगता है और चतुर लाल उस दिन से सुधर जाता है। वो लोगों का आदर करने
लगता है। फिर एक दिन एक साधु बाबा चतुर लाल के घर आते हैं। चतुर लाल उन साधु बाबा
को आदर सम्मान के साथ स्वागत करता है। उन साधु बाबा के लिए भोजन की व्यवस्था करता
है और उनको कुछ अंश अनाज दान करके उनको सम्मान के साथ विदा करता है। चतुर लाल का ये
आचरण और स्वभाव देखकर उसकी पत्नी सीता बहुत खुश होती है।
Comments
Post a Comment