किसनपुर नाम का एक गांव था। जहां एक छोटे से घर में दो अनाथ बेहनें एक दूसरे के सहारे अपना जीवन व्यतीत कर रही थी। बड़ी बेहन का नाम सीता था और छोटी बेहन का नाम गीता था। अपने जीवन यापन के लिए दोनों बेहनें गांव के सब्जी उगाने वाले किसानों से थोड़ी-थोड़ी सब्जियां खरीदती और फिर उन्हें बाजार में बेचकर अपना गुजारा करती थी।
दीदी, आज सब्जी वाले भैया ने हमें सब्जियां लेने जाने
से क्यों मना किया है?
अरे छोटी, उन्होंने कोई वजह नहीं बताई। शायद आज उनके पास
सब्जियां कम होंगी। वे भैया तो बड़े-बड़े व्यापारियों को भी सब्जियां सप्लाई करते
हैं। जबकि हम उनसे बहुत थोड़ी सी सब्जियां लेते हैं। हो सकता है कि आज उनके पास
सब्जियां कम पड़ गई हो। कोई बात नहीं। आज के लिए घर में राशन मौजूद है। कल हम
दोनों जाकर सब्जियां ले आएंगे और उन्हें बेचकर घर के लिए फिर से राशन खरीद लाएंगे।
ठीक है दीदी। क्या मैं
थोड़ी देर बाहर टहलने जाऊं? घर में रेह रेह कर
मेरा मन ऊब गया है।
अरे हां छोटी जाओ थोड़ा
बाहर घूम फिर आओ। इससे तुम्हारा मन भी अच्छा हो जाएगा। लेकिन ज्यादा दूर मत जाना।
तुम्हें तो पता ही है कि मुझे तुम्हारी कितनी चिंता होती रेहती है।
हां दीदी ठीक है। मैं
ज्यादा दूर नहीं जाऊंगी। आप चिंता मत कीजिए और मैं जल्दी ही घर वापस आ जाऊंगी।
ये केहकर गीता घर से बाहर टहलने के लिए निकल जाती है।
भगवान ने मुझे धन दौलत
भले ही ना दी हो लेकिन उससे भी कहीं ज्यादा कीमती चीज दी है। और वो है मेरी छोटी।
अपनी दीदी को इतना कौन समझता है? लेकिन मेरी छोटी
मेरी हर बात को बिना कहे समझ जाती है। मैं बस भगवान से यही प्रार्थना करती हूं कि वो
उसे हमेशा ऐसे ही खुश और मुस्कुराता रखे।
अरे गीता तू यहां? क्या आज तू अपनी दीदी के साथ सब्जी बेचने बाजार नहीं गई?
तू तो हमेशा अपनी दीदी के साथ हर रोज जाती है।
फिर आज अचानक गांव में अकेले क्यों घूम रही है? सब ठीक तो है ना?
अरे किसोर सब ठीक है।
दरअसल जिन भैया से हम सब्जियां लेते हैं उन्होंने आज हमें सब्जी लेने आने से मना
कर दिया है। इसलिए आज मैं और दीदी घर पर ही है। घर में बैठे-बैठे मेरा मन नहीं लग
रहा था। तो मैंने सोचा थोड़ा बाहर घूमा आऊं।
चलो कोई बात नहीं। सब्जी
वाले भैया ने मना किया तो इसी बहाने आज बहुत दिनों बाद तुझसे मुलाकात तो हो गई।
वैसे तू भी अपनी दीदी के साथ बहुत मेहनत करती है। तेरे जैसी बेहन हर किसी को नहीं
मिलती। सीता दीदी सच में बहुत भाग्यशाली
है कि उन्हें तेरे जैसी समझदार और साथ निभाने वाली छोटी बेहन मिली है।
अरे किसोर तू तो जानता ही
है। बचपन में ही हमारे मां-पिताजी गुजर गए थे। उसके बाद दीदी ही मेरी मां और
पिताजी दोनों बन गई। उन्होंने मुझे कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी और
बड़े प्यार से मेरा पालन पोषण किया। अब अगर मैं उसी दीदी को ना समझूं तो फिर इंसान
केहलाने के लायक ही नहीं हूं। इसलिए मैं भी उनके साथ बराबरी से मेहनत करती हूं।
ताकि उनके सिर पर जो जिम्मेदारियां है उनमें से कुछ का बोझ मैं भी बांट सकूं।
वाह गीता तू तो सच में बहुत समझदार हो गई है। तेरी बातें
सुनकर बहुत अच्छा लगा। ठीक ही केहती है तू। भगवान करे तुम दोनों बेहनें हमेशा इसी
तरह एक दूसरे का साथ देती रहो। एक दूसरे से प्यार करती रहो और जीवन की हर खुशी
मिलकर बांटो।
हां हां दीदी और मैं
हमेशा ऐसे ही प्यार से साथ रहेंगे। अच्छा अब मैं चलती हूं नहीं तो दीदी चिंता करने
लगेंगी। मैं उनसे केह कर आई थी कि जल्दी घर वापस आ जाऊंगी। चलो फिर कभी आराम से
मुलाकात होगी। अब मैं चलती हूं।
गीता किसोर से ऐसा केहकर मुस्कुराते हुए अपने घर की
ओर चल पड़ती है और धीरे-धीरे अपनी मंजिल की तरफ आगे बढ़ जाती है।
अरे छोटी तू तो बहुत
जल्दी आ गई। मुझे लगा था कि तुझे आने में थोड़ी देर लगेगी। खैर कोई बात नहीं अच्छा
ही हुआ कि तू जल्दी आ गई। अब आ गई है तो खाना बनाने में मेरी थोड़ी मदद कर देना।
वो दीदी मैं ज्यादा दूर
नहीं गई थी। बस थोड़ा बाहर घूमने निकली थी। तभी रास्ते में किसोर से मुलाकात हो
गई। फिर उससे थोड़ी देर बातें की और उसके बाद घर वापस आ गई। अब आप चिंता मत कीजिए।
मैं अभी आपके काम में हाथ बटा देती हूं।
गीता के ऐसा केहने के बाद दोनों बेहनें घर के अंदर
चली गई।
दीदी, आप एक काम कीजिए। आज थोड़ा आराम कर लीजिए। आज
का खाना मैं अकेले ही बना लेती हूं। आखिर दो लोगों का ही तो खाना बनाना है। मैं ये
काम आसानी से संभाल लूंगी। आप बस आराम
कीजिए।
अरे छोटी मैं भी तेरी मदद
कर देती हूं ना। इससे काम जल्दी हो जाएगा। तू अकेले बेकार में इतनी मेहनत क्यों
करेगी? हम दोनों मिलकर बना लेंगे
तो काम भी जल्दी निपट जाएगा और थकान भी कम होगी।
अरे नहीं दीदी आप आराम
कीजिए। आज मैं सब कुछ अकेले ही कर लूंगी।
ठीक है। अगर तू इतनी जिद
कर ही रही है तो आज खाना तू ही अकेले बना ले। और अगर किसी चीज की जरूरत पड़े तो
मुझे आवाज दे देना।
छोटी भी ना आजकल तो मुझसे
भी ज्यादा मेरी चिंता करने लगी है। सच में भगवान ने मुझे चाहे धन दौलत दी हो या ना
दी हो लेकिन ऐसी प्यारी बेहन देकर मुझे सबसे बड़ा सौभाग्य जरूर दे दिया है।
दीदी खाना तैयार हो गया
है। आइए अब आप और मैं दोनों मिलकर आराम से खाना खा लेते हैं।
मेरी छोटी तो अब सच में
बहुत बड़ी हो गई है। मुझसे भी जल्दी खाना बना लिया। चलो अब दोनों मिलकर खाना खा
लेते हैं। आज तो अच्छा ही हुआ कि भैया ने सब्जी नहीं दी। हम दोनों को आराम करने का
मौका भी मिल गया और मुझे तेरे हाथों का बना स्वादिष्ट खाना खाने को भी मिल गया।
सीता के ऐसा केहने के बाद दोनों बेहनें रसोई में जाती
हैं और साथ बैठकर प्यार से खाना खा लेती हैं।
अरे सीता अरे ओ सीता जरा बाहर तो आना।
अरे सीता क्या तुम्हारे पास कुछ बची हुई सब्जियां होंगी?
दरअसल तुम्हारे चाचा जी आज बाजार नहीं गए थे।
इसलिए घर में बिल्कुल भी सब्जी नहीं है। मुझे लगा कि कभी कभार सब्जी बेचने के बाद
तुम्हारे पास थोड़ी बहुत सब्जियां बच जाती होंगी। इसलिए सोचा तुमसे ही थोड़ा सा
खरीद लूं।
अरे चाची जी आप सही केह
रही हैं। कभी-कभी हमारे पास थोड़ी बहुत सब्जी बच जाती है। लेकिन आज बात कुछ और है।
दरअसल हम जिस भैया से सब्जी लेते हैं, उन्होंने आज हमें सब्जी लेने आने से मना कर दिया था। इसलिए हम पूरे दिन घर पर
ही रहे और सब्जी बेचने भी नहीं गए। अभी तो घर में आपको देने लायक सब्जी भी नहीं
है। आप बुरा मत मानिएगा। अगर होती तो हम आपको जरूर दे देते।
अरे कोई बात नहीं सीता बेटी। मैंने सोचा था कि शायद तुम्हारे पास कुछ
सब्जी बची होगी। इसलिए पूछने चली आई। खैर जब नहीं है तो आज किसी और तरह का इंतजाम
करना पड़ेगा। अच्छा सीता बेटी अब मैं चलती
हूं।
चाची सीता से ऐसा केहकर वहां से चली जाती हैं।
चाची पेहले कभी इस तरह
हमारे घर नहीं आई थी। आज पहली बार थोड़ी सी सब्जी लेने आई थी। लेकिन अफसोस कि मैं
उनकी मदद नहीं कर पाई। अगर मैं उन्हें थोड़ी सी सब्जी दे पाती तो मन को अच्छा
लगता। खैर जब घर में सब्जी ही नहीं है तो अब क्या किया जा सकता है?
अरे दीदी इतनी रात गए कौन
आया था?
अरे छोटी हमारे पड़ोस
वाली वीमला चाची आई थी। वे थोड़ी सी सब्जी लेने आई थी। उन्हें लगा था कि दिन में
बेचने के बाद हमारे पास कुछ सब्जियां बची होंगी। लेकिन आज तो हम दोनों पूरे दिन घर
पर ही थे इसलिए मैं उनकी मदद नहीं कर पाई। खैर अब तू बैठ और आराम कर। मैं रसोई में
जाकर रात के खाने का इंतजाम करती हूं।
कुछ देर बाद दोनों बेहनें
रसोई में साथ बैठकर प्यार से रात का खाना खा लेती हैं।
चल छोटी आज किसी तरह
सब्जियां बेचकर घर का राशन लाना पड़ेगा। कल हम घर पर ही रहे थे। इसी वजह से घर का
ज्यादातर राशन खत्म हो गया है।
हां दीदी चलिए ज्यादा देर
ना करते हुए हम दोनों सब्जी वाले भैया के खेत की ओर चल पड़ते हैं।
अरे सीता गीता तुम दोनों सब्जी लेने आ गई। दरअसल कल मैंने तुम
दोनों को आने से मना किया था क्योंकि मुझे एक त्यौहार के अनुष्ठान के लिए ज्यादा
मात्रा में सब्जियां देनी पड़ी थी। इसी वजह से मैं तुम दोनों को सब्जियां नहीं दे
पाया।
अरे कोई बात नहीं भैया।
हम आपको भला कैसे बुरा मान सकते हैं? अगर आप नहीं होते तो शायद आज हम अपने दम पर काम करके जीवन में आगे नहीं बढ़
पाती। आपने ही हमें अपनी बेहनों की तरह समझा। हमारा हौसला बढ़ाया और मुश्किल समय
में हमारा साथ दिया। पेहले तो आप हमें बिना पैसों के ही सब्जियां दे दिया करते थे
और आज भी इतने कम दाम में सब्जियां देते हैं। सच में भैया आप बहुत अच्छे इंसान
हैं।
अरे इसमें धन्यवाद की कोई
बात नहीं है सीता । तुम्हारे पिताजी ने भी एक समय मेरी बहुत मदद की थी। अगर आज मैं
उनकी बेटियों की मदद ना करूं तो फिर कैसा इंसान हुआ? खैर अब मैं तुम दोनों को सब्जियां दे देता हूं ताकि तुम
दोनों बाजार जाकर उन्हें बेच सको।
ऐसा केहने के बाद सब्जी
वाले भैया ने सीता के हाथ में पकड़ी टोकरी
को ताजी सब्जियों से भर दिया।
भैया अब हम चलते हैं। इन
सब्जियों को बेचकर घर के लिए राशन भी खरीदना है। उम्मीद है कि आज ये जल्दी बिक जाएंगी। हम कल फिर आयेंगे ।
ऐसा केहकर सीता और गीता वहां से निकल पड़ती हैं और सब्जियां बेचने के
लिए बाजार की ओर चल देती हैं।
अरे सब्जी ले लो ताजीताजी
सब्जियां ले लो।
अरे बेहन जी ये सब्जियां
किस भाव में दे रही हो? मुझे थोड़ी
ज्यादा मात्रा में चाहिए। अगर कुछ कम भाव लगा दोगी तो मैं ये सारी सब्जियां ही ले जाऊंगा। वैसे भी तुम्हारे
पास ज्यादा सब्जी नहीं है।
अरे भैया हम तो पहले से
ही कम भाव में बेचते हैं। फिर भी अगर आप सारी सब्जियां ले लेंगे तो हम थोड़ा और कम
कर देंगे। वैसे हम 1 किलो ₹40 में बेचते हैं।
लेकिन आप सारी ले रहे हैं तो कुछ कम कर
देंगे।
ठीक है, फिर मुझे ये सारी सब्जियां दे दो। लेकिन एक दिक्कत हो गई है।
मैं घर से ठेली लाना भूल गया। अब इतनी सारी सब्जियां लेकर जाऊं तो कैसे जाऊं?
भैया आप एक काम कीजिए। हम
ये सारी सब्जियां जिस टोकरी में लेकर आए
थे, फिलहाल उसी टोकरी में
इन्हें ले जाइए। शाम को हमारे घर आकर टोकरी वापस दे दीजिएगा। क्योंकि सब्जी लाने
के लिए हमारे पास यही एक टोकरी है।
ठीक है फिर तुम मुझे इसी
टोकरी में ये सारी सब्जियां भर कर दे दो।
मैं शाम को तुम्हारे घर आकर इसे वापस दे जाऊंगा। हो सकता है मुझे थोड़ी देर हो जाए
लेकिन मैं टोकरी तुम्हारे पास जरूर पहुंचा दूंगा।
ऐसा केहने के बाद सीता ने उस भैया को टोकरी में सारी सब्जियां भर कर दे
दी और भैया भी उन्हें लेकर वहां से चले गए।
वाह सीता आज तो तेरी लॉटरी ही लग गई। अभी कुछ ही देर पहले
आई थी और सारी सब्जियां भी बिक गई। सच में तुम दोनों बेहनों की किस्मत बहुत अच्छी
है। मेरा सामान तो पता नहीं कब तक बिकेगा और कब खत्म होगा।
अरे दिनेश भैया चिंता
क्यों करते हैं? आपका भी सारा
सामान जरूर बिक जाएगा। हमारा भी कभी-कभी सामान बिकने में बहुत समय लग जाता है। आज
शायद भगवान ने हम पर थोड़ी कृपा कर दी। इसलिए सारी सब्जियां एक ही बार में बिक गई।
खैर रमेश भैया अब हम चलते हैं। घर के लिए
राशन भी खरीदना है।
ये केहकर सीता अपनी छोटी बेहन के साथ रमेश भैया से विदा लेकर वहां से चल पड़ी।
अब मेरा भी सारा सामान
बिक जाए तो अच्छा है। दोनों बेहनें भी चली गई इसलिए यहां अकेले बैठकर भी अच्छा
नहीं लग रहा है।
सब्जियां बेचने के बाद सीता
और गीता दोनों बेहनें घर का राशन खरीदने के लिए सीधे
राशन की दुकान पर आ गई।
दीदी क्या मैं आपसे एक
बात कहूं?
अरे हां छोटी बोल ना क्या
बात है? तुझे कुछ केहने के लिए
भला पूछने की क्या जरूरत है? जो भी केहना है
बेझिझक सीधे केह दे।
दीदी मां और पिताजी तो
हमें बचपन में ही छोड़कर इस दुनिया से चले गए थे। तब से आप ही मेरे लिए मां पिताजी
और बड़ी बेहन सब कुछ बनकर रही है। अब आपकी शादी की उम्र भी हो गई है। क्या आपने
कभी अपनी शादी के बारे में सोचा है?
अरे छोटी आज तू ये सब क्या पूछने लगी? भला मैं तुझे यहां अकेला छोड़कर कैसे शादी कर सकती हूं?
मुझे तेरे अलावा और किसी की जरूरत नहीं है। तू
मेरे साथ रेहती है। बस यही मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है और तेरे साथ जिंदगी भी
अच्छी लगती है।
अरे दीदी, ये तो
संसार का नियम है। भला आप मेरे लिए अपनी पूरी जिंदगी यूं ही क्यों बिताएंगी?
मुझे ये बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा। आप कोई अच्छा सा जीवन
साथी देखकर शादी कर लीजिए ताकि मुझे भी एक जीजा जी मिल जाए और आपका जीवन भी बचपन
से की गई मेहनत के बाद थोड़ा सुखद और आरामदायक हो सके।
अरे छोटी आज तू ये सब क्या केह रही है? चल मान लिया कि मैंने शादी कर ली लेकिन मेरे जाने के बाद
तेरा ध्यान कौन रखेगा? तू किसके साथ
रहेगी? अकेले अपना जीवन कैसे
बिताएगी? मुझे अपने बारे में नहीं
तेरी चिंता ज्यादा है। जब तेरी उम्र हो जाएगी तब मैं तेरे लिए एक अच्छा सा लड़का
देखकर तेरी शादी कर दूंगी। इसलिए तू मेरी चिंता छोड़ और बेफिक्र रेह।
अरे दीदी ये तो बिल्कुल
गलत बात हुई। आप हर बार अपने बारे में सोचने के बजाय मेरी ही चिंता करने लग जाती
है। लेकिन इस बार मैं चुप नहीं बैठूंगी। आपने अपने जीवन में मेरे लिए बहुत त्याग
किए हैं। बहुत मेहनत की है। अब मेरी बारी है कि मैं आपके लिए कुछ करूं और देखना
भगवान आपके लिए स्वयं एक उत्तम जीवन साथी भेजेंगे जो आपकी हर खुशी का ख्याल रखेगा।
अरे सीता गीता तुम दोनों कहां हो? जरा बाहर तो आओ।
अरे गीता तुम्हारी दीदी सीता घर पर नहीं है क्या? दरअसल मैं दिन में तुम लोगों से जो सब्जियां लेकर गया था
उसी की टोकरी लौटाने आया हूं। और हां साथ ही एक बहुत बड़ी खुशखबरी भी लेकर आया
हूं।
भैया दीदी तो अंदर है और
आप तो टोकरी लौटाने शाम को आने वाले थे। खैर कोई बात नहीं। लेकिन ऐसी क्या बड़ी
खुशखबरी है भैया? जरा हमें भी तो
बताइए।
अरे गीता यहां बाहर खड़े-खड़े ये सब बातें करना ठीक नहीं होगा। क्यों ना हम घर के
अंदर चलकर आराम से बैठे और फिर अच्छे से बात करें।
सीता मैं तुम्हारे लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आया
हूं।
खुशखबरी कैसी खुशखबरी
भैया और आपके साथ जो ये आए हैं इन्हें तो
मैंने पेहले कभी नहीं देखा। मैं इन्हें पहचान नहीं पाई।
वो दरअसल सीता बात ये है कि जब मैं तुम लोगों की दुकान से सब्जी लेकर
घर जा रहा था तब रास्ते में मुझे मेरा दोस्त मिल गया। ये मेरा दोस्त रामू है जो अभी मेरे पास बैठा है। वो मुझे रास्ते में मिल गया और फिर
अरे भाई इतनी सारी सब्जियों की टोकरी लेकर कहां से आ
रहे हो? और इन सारी सब्जियों का
करोगे क्या?
अरे रामू भाई घर में मेहमान आने वाले हैं इसलिए मैं इतनी
सारी सब्जियां लेकर आया हूं। ये सब्जियां
मैं सीता और गीता जो अनाथ दो बेहनें दुकान लगाती हैं उनसे लेकर
आया हूं। वैसे तुम कहां जा रहे थे?
मैं बस ऐसे ही थोड़ा बाहर
निकल आया था। दरअसल आज कारखाना बंद है और सारे कर्मचारियों को भी छुट्टी दे दी है।
वैसे तुमने जो कहा कि तुम दोनों बहनों से सब्जियां लेकर आए हो उसी बारे में मुझे
तुमसे एक जरूरी बात करनी थी।
अरे हां भाई बताओ क्या
जरूरी बात करनी है?
तुम्हें तो पता ही है भाई
मेरी अब शादी की उम्र भी हो चुकी है और तुम्हें ये भी पता है कि मेरा अपना व्यवसाय है। इसलिए मैं
जिससे शादी करूंगा उसे खुश रख पाऊंगा। असली बात ये है कि सीता की भी अब शादी की उम्र हो गई है। मैं उसे काफी
समय से पसंद करता हूं। लेकिन मैं हमेशा यही चाहता था कि पेहले कुछ अच्छा काम कर
लूं फिर उसे बताऊं। शायद अब सही समय आ गया है। क्या तुम इसमें मेरी मदद करोगे?
अरे भाई क्यों नहीं?
मैं जरूर इसमें तुम्हारी मदद करूंगा। वैसे भी
आज मैं शाम या रात को उन लोगों के घर जाऊंगा क्योंकि ये जो सब्जियों की टोकरी है ना इसे लौटाने जाना है।
तो तुम एक काम करना तुम भी मेरे साथ चलना। आज सीता को ये खुशखबरी दे देना अच्छा ही होगा। बेचारी अनाथ है।
बचपन से मेहनत करके ही अपना जीवन बिताया है। अगर उसके जीवन में थोड़ा सुख और
खुशियां आ जाए तो अच्छा लगेगा।
ठीक है। फिर आज हम उन
लोगों के घर जाएंगे और सीता को मेरा
प्रस्ताव दे देंगे। मुझे उम्मीद है कि वो मेरे प्रस्ताव को अस्वीकार नहीं करेगी।
ठीक है। फिर अभी मैं घर
जाता हूं। रात को हम साथ मिलकर सीता के घर
चलेंगे। अब तुम अपना फैसला बताओ सीता । हमने तो अपनी बात बता दी है। और अभी रामू थोड़ा शर्मा रहा है। इसलिए मैंने ही सब कुछ बता
दिया। मेरे हिसाब से तो इतना अच्छा प्रस्ताव ठुकराने की कोई वजह नहीं है। और सच
कहूं तो रामू बहुत अच्छा लड़का है।
भैया मुझे आपकी बात समझ आ
गई है लेकिन मैं ये प्रस्ताव स्वीकार नहीं
कर सकती क्योंकि मेरी छोटी बेहन गीता के
अलावा मेरा कोई और नहीं है। मेरी शादी के बाद वो किसके साथ रहेगी और कैसे रहेगी? इसी कारण मैंने अपनी शादी के बारे में कभी सोचा
ही नहीं। मैं अपनी छोटी बेहन के बिना एक पल भी नहीं रेह सकती।
सीता अगर तुम सिर्फ इसी वजह से इंकार कर रही हो तो ये
कोई बड़ी बात नहीं है। मेरी भी कोई बेहन
नहीं है। इसलिए गीता को हम अपने साथ ही
रखेंगे। मैं उसे साली नहीं बल्कि अपनी सगी बेहन जैसा दर्जा देना चाहता हूं। मैं
तुमसे सच्चे दिल से प्यार करता हूं। इसलिए कृपया मेरा प्रस्ताव स्वीकार कर लो।
ये बात सुनकर गीता बहुत खुश हो जाती है और अपनी दीदी से केहती है
अरे दीदी मैंने आपसे कहा
था ना कि भगवान ने आपके लिए एक उत्तम जीवन साथी हमारे घर भेज दिया है और आपको मेरे
लिए जो चिंता थी वो भी अब दूर हो गई है आप
कृपया ये प्रस्ताव स्वीकार कर लीजिए
ठीक है छोटी तेरी खुशी के
लिए मैं ये प्रस्ताव स्वीकार कर लेती हूं
और भैया आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद कि आप इन्हें हमारे घर तक लेकर आए। मैंने कभी
सोचा भी नहीं था कि मेरे जीवन में कोई इस तरह अचानक मेरे घर आएगा और मुझे तो ये भी नहीं लगा था कि कोई मुझे पसंद करेगा। क्योंकि
मुझे कभी ऐसा नहीं लगता कि मुझ में कोई खासियत है जिसे कोई पसंद कर सके।
अरे तुम ऐसा क्यों सोचती
हो? आज के समय में तुम्हारी
जैसी लड़की बहुत कम मिलती है। तुमने बचपन से ही साहस और मेहनत से अपना जीवन आगे
बढ़ाया और अपनी छोटी बेहन का भी ख्याल रखा। यही सब बातें तुम्हारी खासियत है जिनकी
वजह से मैं तुम्हें पसंद करता हूं। मैंने पहले से ही तय कर लिया था कि अगर तुमसे
विवाह करूंगा तो अपने पैरों पर खड़ा होकर ही आऊंगा ताकि तुम्हें खुश रख सकूं।
इसलिए मैंने पूरी मेहनत करके अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया और उसके बाद ही
तुम्हारे पास आया हूं।
तो सीता और गीता अब ये सारी बातें छोड़ो। आज खुशी का दिन है। आज से तुम
दोनों बेहनों को एक नया जीवन मिलने जा रहा है। इसलिए अब बाकी बातों को भूलकर आगे
के जीवन के बारे में सोचो। और इसी के साथ सीता और रामू के रिश्ते की बात पक्की कर दी जाती है।
इसी तरह सीता और गीता का नया जीवन शुरू होता है और इस कहानी का सुखद
अंत हो जाता है।
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