बहुत समय पहले China के एक बड़े नगर में एक गरीब दर्जी रहता था। उसका नाम मुस्तफा था। उसकी पत्नी और एक बेटा था, जिसका नाम अलादीन था। अलादीन एक चंचल और नटखट लड़का था। उसे खेलना-कूदना बहुत पसंद था, लेकिन पढ़ाई और काम में उसकी बिल्कुल रुचि नहीं थी।
मुस्तफा अपने बेटे की आदतों से बहुत परेशान रहता था। वह चाहता था कि अलादीन
कोई हुनर सीखे और जीवन में कुछ अच्छा करे, लेकिन अलादीन दिनभर अपने दोस्तों के साथ गलियों में खेलता रहता। समय बीतता गया
और एक दिन अधिक मेहनत तथा बीमारी के कारण मुस्तफा की मृत्यु हो गई।
पिता की मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई। अलादीन की माँ
सिलाई-कढ़ाई करके किसी तरह घर का खर्च चलाने लगी। लेकिन अलादीन अब भी अपनी पुरानी
आदतें नहीं छोड़ रहा था।
एक दिन जब अलादीन अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था, तभी एक अजनबी व्यक्ति वहाँ आया। वह दूर देश का एक जादूगर
था। उसने अलादीन को ध्यान से देखा और कुछ सोचने लगा।
जादूगर ने अलादीन के पास जाकर उससे उसके पिता का नाम पूछा। जब उसे पता चला कि
वह मुस्तफा का बेटा है, तो उसने दुखी
होने का नाटक किया। उसने अलादीन को गले लगाकर कहा, "मैं तुम्हारा चाचा हूँ। कई वर्षों से विदेश में था, इसलिए तुमसे कभी मिल नहीं पाया।"
अलादीन को आश्चर्य हुआ, क्योंकि उसने
इस चाचा के बारे में कभी नहीं सुना था। लेकिन जादूगर ने इतनी चालाकी से बातें कीं
कि अलादीन को उस पर विश्वास हो गया।
जादूगर अलादीन को कुछ सोने के सिक्के देकर उसकी माँ के पास भेजा। जब अलादीन घर
पहुँचा और सारी बात बताई, तो उसकी माँ को
भी आश्चर्य हुआ। उसने कभी अपने पति से किसी भाई का ज़िक्र नहीं सुना था। फिर भी
गरीबी के कारण उसने उस व्यक्ति का स्वागत करने का निश्चय किया।
अगले दिन जादूगर उनके घर आया। वह तरह-तरह के उपहार और स्वादिष्ट भोजन लेकर आया
था। उसने अलादीन और उसकी माँ का विश्वास जीत लिया। कई दिनों तक वह उनके साथ बहुत
प्रेम से पेश आता रहा।
फिर एक दिन उसने अलादीन से कहा,
"बेटा, मैं तुम्हें एक बड़ा
व्यापारी बनाना चाहता हूँ। मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें ऐसी जगह ले जाऊँगा जहाँ तुम्हारा भाग्य बदल जाएगा।"
अलादीन उत्साहित हो गया और उसके साथ चल पड़ा।
दोनों नगर से दूर पहाड़ों और जंगलों के बीच पहुँचे। वहाँ पहुँचकर जादूगर ने
कुछ रहस्यमय मंत्र पढ़े। अचानक ज़मीन हिलने लगी और एक बड़ा पत्थर हट गया। उसके
नीचे एक गुप्त दरवाज़ा दिखाई दिया।
जादूगर की आँखों में लालच चमक रहा था।
उसने अलादीन से कहा, "इस सुरंग के
अंदर एक खज़ाना छिपा है। केवल तुम ही वहाँ जा सकते हो। अंदर तुम्हें सोना, चाँदी और बहुमूल्य रत्न मिलेंगे। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण एक
पुराना चिराग है। उसे मेरे लिए लेकर आना।"
अलादीन थोड़ा डर गया, लेकिन खज़ाने
की बात सुनकर उसने साहस किया और सुरंग के अंदर उतर गया।
उसे बिल्कुल पता नहीं था कि यह यात्रा उसके जीवन को हमेशा के लिए बदलने वाली
है, और जल्द ही वह एक ऐसे जादुई
चिराग का मालिक बनने वाला है जिसकी शक्ति की कोई सीमा नहीं थी...
अलादीन सावधानी से उस गुप्त सुरंग में उतर गया। नीचे पहुँचते ही उसने देखा कि
वहाँ एक लंबा और अंधकारमय रास्ता था। जादूगर ने उसे पहले ही चेतावनी दी थी कि
रास्ते में चाहे जितने भी खज़ाने दिखाई दें, वह किसी चीज़ को हाथ न लगाए और सीधे आगे बढ़ता रहे।
अलादीन धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। कुछ दूरी पर पहुँचकर उसने एक विशाल कक्ष देखा, जिसकी दीवारें चमकदार पत्थरों से बनी थीं। वहाँ सोने और
चाँदी के ढेर लगे हुए थे। बहुमूल्य रत्न ऐसे चमक रहे थे जैसे रात के आकाश में तारे
चमकते हैं।
वह यह सब देखकर हैरान रह गया, लेकिन उसे
जादूगर की बात याद थी। इसलिए उसने उन खज़ानों को छुए बिना आगे बढ़ना जारी रखा।
थोड़ी दूर जाने पर वह एक अद्भुत बाग़ में पहुँचा। वहाँ के पेड़ साधारण नहीं
थे। उनकी शाखाओं पर फलों की जगह रंग-बिरंगे रत्न लगे हुए थे। कहीं लाल माणिक चमक
रहे थे, कहीं हरे पन्ने, कहीं नीले नीलम और कहीं हीरे सूरज की रोशनी की तरह दमक रहे
थे।
अलादीन ने पहले कभी ऐसे सुंदर "फल" नहीं देखे थे। उसे यह नहीं मालूम
था कि वे वास्तव में बहुमूल्य रत्न हैं। उसने उन्हें साधारण काँच के खिलौने समझकर
अपनी जेबों में भर लिया।
बाग़ के अंत में एक छोटा-सा कक्ष था। उसके बीचोंबीच एक पुराना, धूल से भरा हुआ पीतल का चिराग रखा था। देखने में वह बिल्कुल
साधारण लग रहा था।
अलादीन को आश्चर्य हुआ कि इतना शक्तिशाली जादूगर इस पुराने और मैले चिराग के
लिए इतना उत्सुक क्यों था। फिर भी उसने चिराग उठा लिया और वापस लौटने लगा।
जब वह सुरंग के प्रवेश द्वार तक पहुँचा, तब ऊपर खड़े जादूगर ने उत्सुकता से पूछा, "क्या तुम्हें चिराग मिल गया?"
"हाँ," अलादीन ने उत्तर दिया।
जादूगर ने तुरंत कहा, "पहले चिराग
मुझे दो, फिर मैं तुम्हें बाहर
निकालूँगा।"
लेकिन अलादीन अभी भी गहरे गड्ढे में था और बाहर निकलने के लिए उसे जादूगर की
सहायता चाहिए थी। उसने कहा, "पहले मुझे ऊपर
खींच लीजिए, फिर मैं आपको चिराग दे
दूँगा।"
यह सुनते ही जादूगर का चेहरा क्रोध से लाल हो गया। वह जानता था कि यदि अलादीन
बाहर आ गया, तो चिराग उसके हाथ से निकल
सकता है।
उसने कई बार चिराग माँगा, लेकिन अलादीन
अपनी बात पर अड़ा रहा। अंततः जादूगर अपना धैर्य खो बैठा। उसने क्रोध में कुछ मंत्र
पढ़े।
अचानक भारी पत्थर फिर से अपनी जगह पर आ गया और सुरंग का द्वार बंद हो गया।
अलादीन अंधेरी गुफा में कैद हो गया।
अब उसे समझ में आ गया कि वह व्यक्ति उसका चाचा नहीं, बल्कि एक लालची और दुष्ट जादूगर था। वह केवल चिराग प्राप्त
करना चाहता था।
अंधकार में अकेला बैठा अलादीन बहुत रोया। उसने बाहर निकलने की अनेक कोशिशें
कीं, लेकिन कोई रास्ता नहीं
मिला। भूख और प्यास से उसकी हालत खराब होने लगी।
निराश होकर उसने हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना की।
प्रार्थना करते समय उसकी उँगली में पहनी हुई एक पुरानी अंगूठी आपस में रगड़
गई। अचानक एक तेज़ प्रकाश प्रकट हुआ।
धुएँ का एक विशाल बादल उठा और उसके सामने एक भयानक लेकिन शक्तिशाली जिन्न
प्रकट हो गया।
जिन्न ने गूँजती हुई आवाज़ में कहा, "मैं अंगूठी का जिन्न हूँ। जिसने इस अंगूठी को धारण किया है, मैं उसका सेवक हूँ। आदेश दीजिए, मेरे मालिक।"
अलादीन भय से काँप उठा। उसने पहले कभी जिन्न नहीं देखा था।
कुछ क्षण बाद उसने साहस करके कहा,
"यदि तुम सचमुच मेरी सहायता कर सकते हो, तो मुझे इस गुफा से बाहर निकाल दो।"
"जैसी आपकी
आज्ञा," जिन्न ने कहा।
अगले ही पल सब कुछ घूमता हुआ-सा महसूस हुआ। जब अलादीन ने आँखें खोलीं, तो वह गुफा के बाहर खुली हवा में खड़ा था।
वह खुशी से उछल पड़ा।
इसके बाद वह तेजी से अपने घर की ओर भागा। घर पहुँचकर उसने अपनी माँ को सारी
घटना बताई। उसकी माँ यह कहानी सुनकर भयभीत और आश्चर्यचकित दोनों हो गई।
कुछ दिनों तक वे शांतिपूर्वक रहे। लेकिन घर में गरीबी अभी भी थी। उनके पास
खाने के लिए पर्याप्त भोजन भी नहीं बचा था।
एक दिन अलादीन ने उस पुराने चिराग को देखा जो वह गुफा से लाया था। उसने सोचा
कि इसे बेच देने से शायद कुछ पैसे मिल जाएँ।
चिराग बहुत गंदा था, इसलिए उसने उसे
साफ़ करने के लिए कपड़े से रगड़ना शुरू किया।
जैसे ही उसने चिराग रगड़ा, अचानक कमरे में
तेज़ रोशनी फैल गई।
एक विशाल जिन्न धुएँ के बादल के साथ प्रकट हुआ। वह अंगूठी वाले जिन्न से भी
अधिक शक्तिशाली दिखाई दे रहा था।
उसने झुककर कहा,
"मैं चिराग का
जिन्न हूँ। जिसने इस चिराग का स्वामित्व प्राप्त किया है, मैं उसका दास हूँ। आदेश दीजिए, मेरे मालिक।"
अलादीन और उसकी माँ भय से पीछे हट गए।
लेकिन जब उन्हें समझ में आया कि जिन्न उनकी आज्ञा मानता है, तब अलादीन ने कहा,
"हम बहुत भूखे
हैं। हमारे लिए भोजन लाओ।"
क्षणभर में सोने की थालियों में सजे स्वादिष्ट व्यंजन उनके सामने प्रकट हो गए।
अलादीन और उसकी माँ आश्चर्यचकित रह गए।
उन्हें अभी यह नहीं पता था कि यह जादुई चिराग उन्हें केवल भोजन ही नहीं, बल्कि अपार धन, सम्मान और ऐसी
शक्ति देने वाला है जो पूरे राज्य का भाग्य बदल सकती है।
जादुई चिराग के जिन्न द्वारा भोजन मिलने के बाद अलादीन और उसकी माँ की जिंदगी
बदलने लगी। अब उन्हें भूख और गरीबी की चिंता नहीं थी। जब भी किसी वस्तु की
आवश्यकता होती, अलादीन चिराग को रगड़ता और
शक्तिशाली जिन्न उसकी इच्छा पूरी कर देता।
शुरुआत में अलादीन ने इस शक्ति का उपयोग केवल अपनी आवश्यकताओं के लिए किया। वह
जिन्न से भोजन, वस्त्र और घर के लिए आवश्यक
सामान मँगवाता था। लेकिन धीरे-धीरे उसे यह समझ में आने लगा कि चिराग की शक्ति
कितनी अद्भुत है।
एक दिन उसने अपनी जेब में रखे रंग-बिरंगे पत्थरों को निकाला, जिन्हें वह गुफा के जादुई बाग़ से लाया था। उसकी माँ ने
उन्हें ध्यान से देखा और समझ गई कि वे साधारण काँच के टुकड़े नहीं, बल्कि अत्यंत बहुमूल्य रत्न हैं।
दोनों आश्चर्यचकित रह गए।
इन रत्नों की कीमत इतनी अधिक थी कि उनसे कई महलों का निर्माण किया जा सकता था।
अब अलादीन केवल गरीब दर्जी का बेटा नहीं रहा। वह धीरे-धीरे नगर के सबसे धनी युवकों
में गिना जाने लगा।
इसी बीच एक दिन एक ऐसी घटना घटी जिसने उसके जीवन की दिशा बदल दी।
नगर में घोषणा हुई कि राज्य की राजकुमारी बदर-उल-बदूर महल से बाहर निकलेगी और
नगर के मुख्य मार्ग से गुज़रेगी। उस समय सभी लोगों को सम्मान के कारण रास्ते से हट
जाना था।
राजकुमारी अपनी सुंदरता, बुद्धिमत्ता और
दयालु स्वभाव के लिए पूरे राज्य में प्रसिद्ध थी।
जिज्ञासा के कारण अलादीन भी उसे देखने गया।
जब राजकुमारी का रथ उसके सामने से गुज़रा और उसने पहली बार उसका चेहरा देखा, तो वह मंत्रमुग्ध रह गया। उसे लगा जैसे उसने संसार की सबसे
सुंदर स्त्री को देख लिया हो।
उसी क्षण अलादीन के मन में राजकुमारी से विवाह करने की इच्छा उत्पन्न हुई।
जब वह घर लौटा, तो उसने अपनी
माँ से कहा,
"मैं राजकुमारी
बदर-उल-बदूर से विवाह करना चाहता हूँ।"
यह सुनकर उसकी माँ हँस पड़ी।
"बेटा, तुम एक साधारण युवक हो और वह राजा की पुत्री है। यह कैसे
संभव हो सकता है?"
लेकिन अलादीन अपने निर्णय पर अडिग रहा।
अंततः उसकी माँ ने कहा कि यदि वह सचमुच ऐसा चाहता है, तो राजा के पास विवाह का प्रस्ताव भेजना होगा।
अलादीन ने जादुई बाग़ से लाए गए सबसे सुंदर और दुर्लभ रत्न चुने। वे इतने
मूल्यवान थे कि पूरे राज्य में किसी ने ऐसे रत्न पहले कभी नहीं देखे थे।
उसकी माँ उन रत्नों को लेकर राजा के दरबार में पहुँची।
जब राजा ने उन अद्भुत रत्नों को देखा, तो वह आश्चर्यचकित रह गया। उसके दरबारियों ने भी ऐसी चमक और सुंदरता पहले कभी
नहीं देखी थी।
राजा ने पूछा,
"ये बहुमूल्य
रत्न कहाँ से आए हैं?"
अलादीन की माँ ने विनम्रतापूर्वक अपने पुत्र का विवाह प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
राजा कुछ देर तक सोचता रहा। वह प्रस्ताव को तुरंत अस्वीकार नहीं करना चाहता था, क्योंकि उपहार अत्यंत असाधारण थे।
लेकिन राजा का मुख्य मंत्री नहीं चाहता था कि राजकुमारी का विवाह किसी अज्ञात
युवक से हो। वह अपनी ही पुत्री का विवाह राजकुमारी से कराना चाहता था।
इसलिए उसने राजा को सलाह दी कि निर्णय टाल दिया जाए।
राजा ने अलादीन की माँ से कहा,
"यदि तुम्हारा
पुत्र वास्तव में योग्य है, तो तीन महीने
बाद फिर आना। तब मैं निर्णय करूँगा।"
अलादीन ने धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा की।
लेकिन इस दौरान मुख्य मंत्री ने चाल चली। उसने राजा को राजकुमारी का विवाह
अपने पुत्र से करने के लिए मना लिया।
जब अलादीन को यह समाचार मिला, तो वह बहुत
दुखी हुआ।
तब उसने जादुई चिराग निकाला और जिन्न को बुलाया।
"क्या तुम
राजकुमारी और मंत्री के पुत्र के विवाह को रोक सकते हो?" उसने पूछा।
"जैसी आज्ञा, मेरे मालिक,"
जिन्न ने उत्तर दिया।
उस रात एक अद्भुत घटना घटी। जब मंत्री का पुत्र विवाह के बाद अपने कक्ष में
पहुँचा, तो जिन्न ने उसे और
राजकुमारी को उठाकर एक दूर स्थान पर पहुँचा दिया।
पूरी रात वे भयभीत रहे। अगले दिन उन्हें वापस महल पहुँचा दिया गया।
यह घटना लगातार दो रातों तक हुई।
मंत्री का पुत्र इतना डर गया कि उसने विवाह करने से ही इनकार कर दिया।
अब राजा के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
कुछ समय बाद अलादीन की माँ फिर दरबार में पहुँची। इस बार राजा ने अपना वचन
निभाने का निर्णय लिया।
लेकिन उसने एक और कठिन शर्त रखी।
उसने कहा,
"यदि तुम्हारा
पुत्र राजकुमारी के योग्य है, तो उसे राजमहल
से भी अधिक भव्य महल बनाकर दिखाना होगा।"
राजा को विश्वास था कि यह कार्य असंभव है।
लेकिन वह नहीं जानता था कि अलादीन के पास जादुई चिराग है।
अलादीन ने उसी रात जिन्न को बुलाया।
"मेरे लिए ऐसा
महल बनाओ जिसे संसार ने पहले कभी न देखा हो," उसने आदेश दिया।
"जैसी आज्ञा, मेरे मालिक,"
जिन्न ने कहा।
अगली सुबह पूरा राज्य आश्चर्य से भर गया।
राजमहल के सामने एक विशाल और अद्भुत महल खड़ा था। उसकी दीवारें संगमरमर की थीं, खिड़कियाँ सोने से सजी थीं और उनमें अनमोल रत्न जड़े हुए
थे। उसके बगीचों में दुर्लभ फूल खिले थे और फव्वारों से सुगंधित जल बह रहा था।
राजा स्वयं यह दृश्य देखकर दंग रह गया।
अब उसे विश्वास हो गया कि अलादीन कोई साधारण युवक नहीं है।
कुछ ही दिनों बाद राजकुमारी बदर-उल-बदूर और अलादीन का विवाह बड़े धूमधाम से
संपन्न हुआ।
सारा राज्य उत्सव में डूब गया।
लेकिन दूर कहीं एक व्यक्ति यह समाचार सुनकर क्रोध से जल रहा था।
वह वही दुष्ट जादूगर था जिसने वर्षों पहले अलादीन को गुफा में फँसा दिया था।
उसे पता चल चुका था कि जादुई चिराग अब अलादीन के पास है।
और उसने निश्चय कर लिया था कि वह किसी भी कीमत पर चिराग वापस प्राप्त करेगा...
अलादीन का विवाह राजकुमारी बदर-उल-बदूर से हो चुका था और वह अब एक भव्य महल
में सुखपूर्वक जीवन बिता रहा था। उसके पास अपार धन, सम्मान और जादुई चिराग की शक्ति थी। पूरा राज्य उसकी प्रशंसा करता था। लेकिन
इस सुख-शांति के बीच कहीं दूर एक व्यक्ति क्रोध और बदले की आग में जल रहा था—वही
दुष्ट जादूगर जिसने कभी अलादीन को गुफा में फँसाया था।
जादूगर ने कई वर्षों तक जादुई चिराग की खोज की थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली थी। अंततः उसे पता चला कि वह
चिराग अब अलादीन के पास है। यह जानकर उसके भीतर लालच और बदले की भावना और भी बढ़
गई।
उसने योजना बनाई कि वह किसी भी तरह चिराग को वापस हासिल करेगा।
वह एक साधारण व्यापारी के वेश में नगर में पहुँचा। उसके हाथ में सुंदर और
चमकदार चिराग बेचने का ढोंग था। लोग उसे एक साधारण फेरीवाला समझ रहे थे, लेकिन उसके मन में खतरनाक इरादे छिपे हुए थे।
उसे पता था कि अलादीन की पत्नी को कीमती वस्तुओं का शौक है। इसलिए उसने महल के
पास जाकर आवाज़ लगाई,
"पुराने चिरागों
के बदले नए चमकदार चिराग लो!"
महल की दासियों ने यह बात राजकुमारी तक पहुँचा दी। राजकुमारी को जादुई चिराग
के असली मूल्य का ज्ञान नहीं था। उसने सोचा कि यह पुराना चिराग किसी काम का नहीं
है।
उसने बिना सोचे-समझे वह पुराना चिराग उस फेरीवाले को दे दिया और बदले में नया
चमकदार चिराग ले लिया।
वह चमकदार चिराग वास्तव में वही जादूगर का जाल था।
जैसे ही चिराग उसके हाथ में आया, वह तेजी से
वहाँ से चला गया और एक सुनसान जगह पर जाकर हँसने लगा।
अब उसके पास असली जादुई चिराग था।
उसने तुरंत चिराग को रगड़ा।
धुएँ का विशाल बादल उठा और शक्तिशाली जिन्न प्रकट हुआ।
लेकिन इस बार जिन्न ने कहा, "मैं तुम्हारी
आज्ञा का पालन करूँगा, क्योंकि तुम
चिराग के धारक हो।"
जादूगर ने कहा, "महल सहित
अलादीन और उसकी राजकुमारी को उनके सभी धन के साथ एक दूरस्थ रेगिस्तान में ले
जाओ।"
क्षणभर में महल अपने स्थान से गायब हो गया।
जब अलादीन ने आँख खोली, तो उसने स्वयं
को एक वीरान रेगिस्तान में पाया। उसके साथ उसका पूरा महल, पत्नी और सेवक भी थे।
राजकुमारी भयभीत थी। पूरा राज्य भी अचंभे में पड़ गया कि राजमहल अचानक कैसे
गायब हो गया।
अलादीन तुरंत समझ गया कि यह जादूगर की चाल है।
लेकिन अब उसके पास चिराग नहीं था। वह पूरी तरह असहाय हो गया था।
उधर जादूगर ने महल पर अधिकार कर लिया और राजकुमारी के पास जाकर कहा,
"अब तुम मेरी
हो।"
लेकिन राजकुमारी बुद्धिमान थी। उसने जादूगर को समय देने का नाटक किया और मौका
खोजने लगी।
इधर अलादीन रेगिस्तान में भटक रहा था। वह थक चुका था और निराश होने लगा था।
तभी उसे अचानक अपनी उँगली में पहनी हुई अंगूठी याद आई।
उसने अंगूठी को रगड़ा।
तुरंत अंगूठी का जिन्न प्रकट हुआ।
जिन्न ने कहा, "आदेश दीजिए, मेरे मालिक।"
अलादीन ने कहा, "मुझे मेरे महल
और राजकुमारी के पास ले चलो।"
क्षणभर में वह उस स्थान पर पहुँच गया जहाँ जादूगर ने महल को रखा था।
वह छिपकर महल के अंदर पहुँचा।
उसे पता था कि जादूगर को केवल चतुराई से हराया जा सकता है, शक्ति से नहीं।
राजकुमारी ने उसे देख लिया और तुरंत समझ गई कि अब उम्मीद बाकी है।
उसने संकेतों में अलादीन को बताया कि जादूगर चिराग को हमेशा अपने पास रखता है।
अलादीन ने योजना बनाई।
उसने जादूगर को शराब (या भोजन) में बहलाकर बेहोश करने का नाटक किया। जब जादूगर
असावधान हुआ, तो अलादीन ने अचानक चिराग
छीन लिया।
जैसे ही चिराग उसके हाथ में आया, जादूगर घबरा
गया।
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
अलादीन ने तुरंत चिराग रगड़ा।
जिन्न प्रकट हुआ।
"इस दुष्ट
जादूगर को उसके राज्य से दूर किसी ऐसी जगह ले जाओ जहाँ से वह कभी वापस न आ सके," अलादीन ने आदेश दिया।
क्षणभर में जादूगर गायब हो गया।
पूरा महल वापस अपने स्थान पर आ गया।
राजकुमारी सुरक्षित हो गई।
राज्य में फिर से शांति और खुशी लौट आई।
राजा ने अलादीन को और भी अधिक सम्मान दिया और उसे अपना उत्तराधिकारी जैसा
दर्जा दिया।
अलादीन और बदर-उल-बदूर सुखपूर्वक रहने लगे।
अब उसने जादुई चिराग का उपयोग केवल अच्छे कार्यों के लिए किया—गरीबों की
सहायता, राज्य की रक्षा और लोगों की
भलाई के लिए।
और इस प्रकार लालच, जादू और खतरे
के बीच से निकलकर अलादीन ने बुद्धि, साहस और धैर्य
से अपना सुखद भविष्य बना लिया।
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