बहुत समय पहले की बात है। हिंदुस्तान पर बादशाह अकबर का शासन था। अकबर अपनी
वीरता, न्यायप्रियता और बुद्धिमानी के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे। उनके दरबार में
अनेक विद्वान, कवि, कलाकार और बुद्धिमान लोग थे, लेकिन उन सभी में बीरबल का
स्थान सबसे अलग था। बीरबल केवल हँसी-मजाक करने वाले दरबारी नहीं थे, बल्कि वे कठिन
से कठिन प्रश्न का उत्तर अपनी सूझ-बूझ से देने के लिए जाने जाते थे। जब भी बादशाह
अकबर किसी उलझन में पड़ते या किसी प्रश्न का सही उत्तर जानना चाहते, तो अक्सर उनकी
नजर बीरबल की ओर चली जाती। बीरबल भी बादशाह के प्रश्नों का उत्तर जल्दबाजी में
नहीं देते थे। वे पहले पूरी परिस्थिति को समझते, फिर सोच-विचार करके ऐसा
उत्तर देते जिससे समस्या का समाधान भी हो जाता और सबको एक नई सीख भी मिलती।
एक दिन की बात है। सुबह का समय था। बादशाह अकबर अपने महल के विशाल बगीचे में
टहल रहे थे। वह बगीचा बहुत सुंदर था। चारों ओर हरे-भरे पेड़, रंग-बिरंगे फूल,
छोटी-छोटी
क्यारियाँ और फव्वारे उसकी सुंदरता बढ़ा रहे थे। बगीचे में गुलाब, चमेली, मोगरा, कमल, गेंदा, कनेर और अनेक
प्रकार के फूल खिले हुए थे। सुबह की ठंडी हवा चल रही थी और फूलों की खुशबू पूरे
वातावरण में फैल रही थी। पक्षी पेड़ों पर बैठकर मधुर स्वर में चहचहा रहे थे। सूरज
की सुनहरी किरणें फूलों की पंखुड़ियों पर पड़ रही थीं और ऐसा लग रहा था मानो
प्रकृति ने स्वयं उस बगीचे को सजाया हो।
अकबर धीरे-धीरे चलते हुए फूलों को ध्यान से देखने लगे। कभी वे किसी गुलाब को
देखते, कभी चमेली की खुशबू लेते और कभी कमल के फूल को देखकर मुस्कुराते। तभी उनकी नजर
एक सुंदर लाल गुलाब पर पड़ी। गुलाब की पंखुड़ियाँ बहुत कोमल थीं और उसकी सुगंध मन
को मोह लेने वाली थी। अकबर ने गुलाब को देखते हुए कहा, “वास्तव में गुलाब से सुंदर
फूल शायद ही कोई दूसरा हो। इसका रंग भी मनमोहक है और इसकी खुशबू भी अद्भुत है।”
उसी समय उनके साथ चल रहे एक दरबारी ने तुरंत कहा, “जहाँपनाह बिल्कुल सही फरमा
रहे हैं। गुलाब संसार का सबसे सुंदर और सबसे अच्छा फूल है। इसकी तुलना किसी दूसरे
फूल से नहीं की जा सकती।” दूसरे दरबारी ने भी उसकी हाँ में हाँ मिलाई और बोला,
“गुलाब तो फूलों
का राजा है। इसकी सुंदरता के सामने बाकी सभी फूल फीके लगते हैं।”
अकबर मुस्कुराए। उन्हें अपने दरबारियों की आदत अच्छी तरह मालूम थी। कई दरबारी
बादशाह की बात का समर्थन करने में ही अपनी भलाई समझते थे। वे अक्सर अपनी स्वतंत्र
राय देने के बजाय वही कहते जो बादशाह को अच्छा लगे। अकबर ने कुछ क्षण गुलाब को
देखा और फिर आगे बढ़ गए।
थोड़ी दूर जाने पर उन्हें चमेली की एक बड़ी क्यारी दिखाई दी। सफेद-सफेद छोटे
फूलों से पूरी क्यारी भरी हुई थी। हवा चलने पर चमेली की सुगंध चारों ओर फैल रही
थी। अकबर ने कहा, “गुलाब अपनी जगह सुंदर है, लेकिन चमेली की खुशबू भी
कितनी मनमोहक है। यदि किसी को केवल सुगंध के आधार पर फूल चुनना हो, तो शायद चमेली
सबसे अच्छी होगी।”
दरबारियों ने फिर तुरंत अपनी बात बदल दी। जो थोड़ी देर पहले गुलाब को सबसे
अच्छा फूल बता रहे थे, वे अब चमेली की प्रशंसा करने लगे। एक दरबारी बोला, “जहाँपनाह,
आपने बिल्कुल
ठीक कहा। चमेली जैसा सुगंधित फूल संसार में दूसरा नहीं है।” दूसरा बोला, “गुलाब की
सुंदरता अपनी जगह है, लेकिन चमेली की खुशबू ऐसी है कि उसे भूलना कठिन है।”
अकबर ने इस बार कुछ नहीं कहा। वे मन ही मन मुस्कुराए। उन्हें लगा कि उनके
दरबारी अपनी बात स्वयं तय नहीं कर पा रहे हैं। वे आगे बढ़े तो उन्हें एक तालाब
दिखाई दिया। तालाब के बीच में बड़े-बड़े हरे पत्तों के बीच गुलाबी और सफेद कमल
खिले हुए थे। पानी में कमल के फूलों का प्रतिबिंब बहुत सुंदर दिखाई दे रहा था।
अकबर कुछ देर वहीं खड़े रहे। उन्होंने कहा, “कमल भी कितना अद्भुत फूल
है। कीचड़ में पैदा होकर भी यह कितना सुंदर और पवित्र दिखाई देता है।”
दरबारियों ने फिर तुरंत कहा, “जी हाँ, जहाँपनाह! कमल ही सबसे अच्छा फूल है। इसकी विशेषता तो सबसे
अलग है।” अब अकबर को हँसी आने लगी। उन्होंने सोचा कि यदि वे कुछ देर और किसी दूसरे
फूल की प्रशंसा कर दें, तो ये दरबारी उसी को दुनिया का सबसे अच्छा फूल घोषित कर
देंगे।
तभी अकबर ने कहा, “तुम लोग हर बार मेरी बात से सहमत हो जाते हो। क्या तुममें
से किसी की अपनी कोई राय भी है?”
दरबारी चुप हो गए। किसी के पास कोई उत्तर नहीं था। सब एक-दूसरे का चेहरा देखने
लगे। तभी अकबर की नजर कुछ दूर खड़े बीरबल पर पड़ी। बीरबल शांत भाव से सब कुछ देख
रहे थे। उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
अकबर ने बीरबल को अपने पास बुलाया और पूछा, “बीरबल, तुमने अब तक
कुछ नहीं कहा। तुम्हारे विचार में सबसे अच्छा फूल कौन-सा है?”
बीरबल ने विनम्रता से सिर झुकाकर कहा, “जहाँपनाह, इसका उत्तर
देना इतना आसान नहीं है।”
अकबर ने पूछा, “क्यों? फूल तो बहुत हैं। इनमें से किसी एक को सबसे अच्छा कहने में
क्या कठिनाई है?”
बीरबल मुस्कुराए और बोले, “हुजूर, फूलों की तुलना मनुष्यों की तरह केवल सुंदरता से नहीं की जा
सकती। हर फूल की अपनी विशेषता होती है। कोई सुंदर होता है, कोई सुगंधित, कोई औषधीय
गुणों से भरपूर, कोई पूजा में उपयोग होता है और कोई फल या बीज बनने की
प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए किसी एक फूल को सबसे अच्छा कहना
इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसकी अच्छाई किस आधार पर माप रहे हैं।”
अकबर को बीरबल का उत्तर पसंद आया, लेकिन वे अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए।
उन्होंने कहा, “तुमने बात को बहुत घुमा दिया, बीरबल। मैं सीधा उत्तर
चाहता हूँ। यदि तुम्हें संसार के सभी फूलों में से केवल एक फूल चुनना हो, तो तुम किसे
चुनोगे?”
बीरबल ने कुछ क्षण सोचा। फिर उन्होंने कहा, “जहाँपनाह, यदि आप मुझे
आदेश दें तो मैं आपके प्रश्न का उत्तर अवश्य दूँगा, लेकिन उसके लिए मुझे थोड़ा
समय चाहिए।”
अकबर ने कहा, “तुम्हें कितना समय चाहिए?”
बीरबल ने उत्तर दिया, “मुझे केवल कुछ दिन दीजिए। तब मैं आपको बताऊँगा कि मेरे
विचार में सबसे अच्छा फूल कौन-सा है।”
अकबर ने हँसते हुए कहा, “ठीक है, बीरबल। मैं तुम्हें कुछ दिन देता हूँ। लेकिन याद रखना,
मैं तुम्हारे
उत्तर की प्रतीक्षा करूँगा।”
बीरबल ने कहा, “जैसी आपकी आज्ञा, जहाँपनाह।”
इसके बाद अकबर और उनके दरबारी महल की ओर लौट गए। रास्ते भर दरबारी बीरबल के
प्रश्न पर चर्चा करते रहे। कुछ दरबारी सोच रहे थे कि बीरबल गुलाब का नाम लेंगे।
कुछ को लगता था कि वे कमल को सबसे अच्छा बताएँगे। एक दरबारी ने कहा, “बीरबल चाहे
कितना भी बुद्धिमान हो, इस प्रश्न का सही उत्तर देना आसान नहीं है।” दूसरा बोला,
“मुझे तो लगता
है कि वह अंत में बादशाह की पसंद के अनुसार ही कोई फूल चुनेंगे।”
बीरबल ने उनकी बातें सुनीं, लेकिन कोई उत्तर नहीं दिया। वे जानते थे कि किसी फूल को
सबसे अच्छा बताना केवल उसकी सुंदरता देखकर संभव नहीं है। उन्हें यह भी समझना था कि
“सबसे अच्छा” कहने का वास्तविक अर्थ क्या है।
अगले दिन सुबह बीरबल अकेले शहर की ओर निकल पड़े। उन्होंने राजमहल के सुंदर
बगीचे से बाहर निकलकर आम लोगों के जीवन को देखने का निर्णय लिया। वे बाजार से
गुजरे। वहाँ फूल बेचने वाली कई महिलाएँ बैठी थीं। किसी के पास गुलाब थे, किसी के पास
गेंदे के फूल, किसी के पास चमेली और किसी के पास कमल। बीरबल कुछ देर वहाँ
रुके और लोगों को फूल खरीदते हुए देखने लगे।
उन्होंने देखा कि एक गरीब महिला गेंदे के फूलों की माला बेच रही थी। उसके पास
बहुत अधिक फूल नहीं थे, लेकिन वह बड़ी मेहनत से उन्हें माला में पिरो रही थी। पास
ही एक आदमी गुलाब बेच रहा था। उसके फूल बहुत सुंदर थे और उनकी कीमत भी अधिक थी।
दूसरी ओर एक बूढ़ा व्यक्ति चमेली की छोटी-छोटी मालाएँ बेच रहा था।
बीरबल ने उस गरीब महिला से पूछा, “माता, तुम कौन-से फूल सबसे अच्छे मानती हो?”
महिला ने मुस्कुराकर कहा, “हुजूर, मेरे लिए तो गेंदा सबसे अच्छा है।”
बीरबल ने पूछा, “क्यों?”
महिला ने कहा, “क्योंकि यही फूल मेरे घर का चूल्हा जलाता है। मैं सुबह
इन्हें खरीदती हूँ, माला बनाती हूँ और बाजार में बेचती हूँ। इन्हीं फूलों से
मेरे बच्चों के लिए भोजन आता है। इसलिए मेरे लिए इससे अच्छा फूल कोई नहीं।”
बीरबल ने उसकी बात ध्यान से सुनी। उन्हें लगा कि प्रश्न का एक नया पहलू उनके
सामने आ गया है। किसी के लिए सुंदरता सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन किसी
दूसरे के लिए वही फूल जीवन का सहारा हो सकता है।
वे आगे बढ़े। रास्ते में उन्हें एक मंदिर दिखाई दिया। वहाँ एक पुजारी फूलों की
टोकरी लेकर पूजा की तैयारी कर रहा था। बीरबल ने उससे भी पूछा, “पंडित जी,
आपके विचार में
सबसे अच्छा फूल कौन-सा है?”
पुजारी ने कहा, “बेटा, जो फूल श्रद्धा से भगवान को अर्पित किया जाए, वही सबसे अच्छा
है। फूल छोटा हो या बड़ा, महँगा हो या साधारण, यदि उसे सच्चे मन से चढ़ाया
जाए तो उसका महत्व बहुत बढ़ जाता है।”
बीरबल ने सिर हिलाया। उन्हें लगा कि इस प्रश्न का उत्तर और भी गहरा होता जा
रहा है।
आगे जाने पर उन्हें एक वैद्य की दुकान दिखाई दी। वहाँ तरह-तरह की जड़ी-बूटियाँ
और सूखे फूल रखे हुए थे। बीरबल ने वैद्य से पूछा, “क्या फूल केवल सुंदरता के
लिए होते हैं?”
वैद्य हँसा और बोला, “बिल्कुल नहीं। प्रकृति ने फूलों को अनेक गुण दिए हैं। कई
फूल औषधियों में काम आते हैं। कुछ शरीर को ठंडक देते हैं, कुछ सुगंध और उपचार में
उपयोगी होते हैं। यदि कोई बीमार व्यक्ति किसी फूल से बनी औषधि से स्वस्थ हो जाए,
तो उसके लिए वह
फूल किसी भी राजमहल के गुलाब से अधिक मूल्यवान होगा।”
बीरबल ने धन्यवाद दिया और वहाँ से आगे बढ़ गए।
अब उन्हें समझ आने लगा था कि बादशाह का प्रश्न केवल फूल के नाम का प्रश्न नहीं
है। असली प्रश्न यह था कि किसी वस्तु की अच्छाई किस आधार पर तय की जाती है। क्या
केवल सुंदर होना ही किसी चीज को सबसे अच्छा बना देता है? क्या उसकी सुगंध ही उसकी
श्रेष्ठता तय करती है? या फिर वह दूसरों के जीवन में कितना उपयोगी है, यह अधिक
महत्वपूर्ण है?
बीरबल वापस महल पहुँचे। उस शाम अकबर ने उन्हें बुलाकर पूछा, “तो बीरबल,
क्या तुम्हें
अपना उत्तर मिल गया?”
बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा, “जहाँपनाह, उत्तर की दिशा मिल गई है, लेकिन अभी मुझे एक अंतिम
बात समझनी बाकी है।”
अकबर ने कहा, “अच्छा! तो तुम्हारी खोज अभी पूरी नहीं हुई?”
“जी हुजूर,” बीरबल ने कहा, “मैं चाहता हूँ कि जब मैं आपको उत्तर दूँ तो केवल
अपनी कल्पना के आधार पर नहीं, बल्कि अनुभव के आधार पर दूँ।”
अकबर ने कहा, “ठीक है। मैं तुम्हें और समय देता हूँ। लेकिन अब मेरी
उत्सुकता और बढ़ गई है।”
बीरबल ने प्रणाम किया और चले गए।
उस रात अकबर देर तक सोचते रहे कि आखिर बीरबल किस फूल को सबसे अच्छा बताएँगे।
दूसरी ओर बीरबल भी अपने मन में एक योजना बना रहे थे। उन्हें पता था कि यदि वे केवल
गुलाब, कमल या चमेली का नाम ले देंगे तो उनके उत्तर का महत्व बहुत कम रह जाएगा।
उन्हें ऐसा उदाहरण चाहिए था जिससे बादशाह और दरबार के सभी लोग समझ सकें कि किसी
चीज की श्रेष्ठता केवल उसके बाहरी रूप से तय नहीं होती।
कुछ दिनों बाद अकबर ने फिर दरबार लगाया। सभी दरबारी उपस्थित थे। बीरबल भी अपने
स्थान पर बैठे थे। अकबर ने सभा की ओर देखते हुए कहा, “आज मैं बीरबल से उस प्रश्न
का उत्तर सुनना चाहता हूँ जो मैंने कुछ दिन पहले पूछा था।”
दरबार में अचानक उत्सुकता फैल गई। सभी की नजर बीरबल पर टिक गई।
अकबर ने पूछा, “बीरबल, बताओ—सबसे अच्छा फूल कौन-सा है?”
बीरबल धीरे से उठे। उन्होंने दरबारियों की ओर देखा और फिर बादशाह को प्रणाम
किया। उनके चेहरे पर वही शांत मुस्कान थी।
उन्होंने कहा, “जहाँपनाह, मेरे विचार में सबसे अच्छा फूल वह है जो केवल देखने में
सुंदर न हो, बल्कि किसी के जीवन में अच्छाई, उपयोगिता और खुशी लेकर आए।”
अकबर ने पूछा, “लेकिन उसका नाम?”
बीरबल ने कहा, “उसका नाम बताने से पहले मुझे आपको एक छोटी-सी जगह पर ले
जाना होगा।”
अकबर ने आश्चर्य से पूछा, “कहाँ?”
बीरबल ने उत्तर दिया, “हुजूर, महल के उस हिस्से में जहाँ आजकल बहुत कम लोग जाते हैं। वहाँ
आपको मेरे उत्तर का अर्थ स्वयं दिखाई देगा।”
अकबर ने तुरंत जाने की इच्छा जताई। वे बीरबल के साथ महल के एक पुराने हिस्से
की ओर चल पड़े। कुछ दरबारी भी उनके पीछे-पीछे हो लिए। किसी को पता नहीं था कि
बीरबल आखिर क्या दिखाने वाले हैं।
पुराने हिस्से के पास पहुँचकर बीरबल ने एक छोटा-सा दरवाजा खोला। वहाँ एक छोटा
बगीचा था, जिसे महल के मुख्य बगीचे की तरह सजाया नहीं गया था। वहाँ मिट्टी की साधारण
क्यारियाँ थीं और कुछ छोटे पौधे लगे हुए थे। लेकिन उन पौधों में कई तरह के फूल
खिले थे। बीरबल ने एक फूल की ओर इशारा किया और कहा, “जहाँपनाह, मेरा उत्तर
यहीं से शुरू होता है।”
अकबर ने उस फूल को ध्यान से देखा। वह न तो सबसे बड़ा था, न सबसे चमकीला
और न ही सबसे महँगा। लेकिन बीरबल की आँखों में उसके लिए विशेष सम्मान था।
अकबर ने पूछा, “इस छोटे-से फूल में ऐसी क्या खास बात है?”
बीरबल ने कहा, “हुजूर, यही बात आपको अगले भाग में समझ आएगी।”
दरबारियों की उत्सुकता और बढ़ गई। अकबर भी उस फूल को देखते हुए सोच में पड़
गए। आखिर ऐसा कौन-सा फूल था जिसे बीरबल संसार का सबसे अच्छा फूल कहने वाले थे?
और यहीं से शुरू होती है बीरबल की उस बुद्धिमानी की कहानी, जिसमें वे
साबित करने वाले थे कि किसी वस्तु की असली कीमत उसकी बाहरी सुंदरता से नहीं,
बल्कि उसके गुण
और दूसरों के जीवन में उसके महत्व से तय होती है।
अकबर और उनके साथ आए दरबारी उस छोटे-से बगीचे में खड़े थे। सभी की निगाहें उस
फूल पर थीं जिसकी ओर बीरबल ने इशारा किया था। फूल देखने में साधारण था। उसमें न
गुलाब जैसी आकर्षक पंखुड़ियाँ थीं, न चमेली जैसी तेज सुगंध और न कमल जैसी भव्यता। फिर भी बीरबल
उसे देखकर ऐसे मुस्कुरा रहे थे, जैसे उन्हें अपने प्रश्न का सबसे महत्वपूर्ण उत्तर मिल गया
हो। अकबर ने कुछ देर फूल को देखा और फिर बोले, “बीरबल, तुमने हमें
यहाँ क्यों बुलाया है? क्या सचमुच यही फूल तुम्हारे अनुसार सबसे अच्छा है?”
बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह, अभी मैं सीधे इसका नाम नहीं बताऊँगा। पहले आप इसके बारे में
कुछ बातें जान लीजिए। उसके बाद यदि आपको लगे कि यह सबसे अच्छा फूल है, तो आप स्वयं
इसका नाम स्वीकार कर लीजिएगा।”
अकबर ने कहा, “ठीक है। मैं तुम्हारी बात सुनने के लिए तैयार हूँ।”
बीरबल ने बगीचे की मिट्टी की ओर देखते हुए कहा, “हुजूर, कुछ दिन पहले
आपने मुझसे पूछा था कि सबसे अच्छा फूल कौन-सा है। उस समय दरबारियों ने तुरंत गुलाब,
चमेली और कमल
के नाम लेने शुरू कर दिए थे। लेकिन मैंने देखा कि वे फूलों को केवल उनकी सुंदरता
और सुगंध से देख रहे थे। मैंने सोचा कि यदि मुझे सही उत्तर देना है, तो मुझे महल के
बगीचे से बाहर निकलकर उन लोगों से पूछना चाहिए जो फूलों का वास्तविक जीवन में
उपयोग करते हैं।”
अकबर ध्यान से सुन रहे थे। बीरबल ने आगे कहा, “मैं बाजार गया। वहाँ एक
गरीब महिला गेंदे की मालाएँ बेच रही थी। मैंने उससे पूछा कि उसके लिए सबसे अच्छा
फूल कौन-सा है। उसने कहा कि गेंदा उसके लिए सबसे अच्छा है, क्योंकि उसी की बिक्री से
उसके घर का चूल्हा जलता है और उसके बच्चों का पेट भरता है। फिर मैं मंदिर गया।
वहाँ एक पुजारी ने कहा कि श्रद्धा से अर्पित किया गया कोई भी फूल मूल्यवान है।
इसके बाद मैंने एक वैद्य से बात की। उसने बताया कि कई फूल औषधियों में काम आते हैं
और बीमार लोगों के लिए उनका महत्व बहुत अधिक हो सकता है।”
अकबर ने कहा, “तो तुम यह कहना चाहते हो कि हर व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा
फूल अलग हो सकता है?”
“जी, जहाँपनाह,” बीरबल ने उत्तर दिया। “जिस वस्तु से किसी का भला होता है,
वह उसके लिए
सबसे अच्छी हो सकती है। किसी राजा को गुलाब पसंद हो सकता है, किसी भक्त को
कमल, किसी गरीब परिवार को गेंदा और किसी रोगी को वह फूल जो औषधि में काम आए।”
एक दरबारी ने बीच में कहा, “लेकिन बीरबल, यदि हर व्यक्ति की पसंद अलग है, तो फिर हम कैसे
तय करेंगे कि सबसे अच्छा फूल कौन-सा है?”
बीरबल ने मुस्कुराकर कहा, “यही तो प्रश्न का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमें यह समझना
होगा कि ‘सबसे अच्छा’ का अर्थ क्या है। यदि हम केवल सुंदरता की बात करें तो एक फूल
अच्छा होगा। यदि सुगंध की बात करें तो दूसरा। यदि धार्मिक महत्व की बात करें तो
कोई तीसरा। और यदि उपयोगिता की बात करें तो शायद कोई चौथा। इसलिए किसी भी वस्तु को
बिना आधार बताए सबसे अच्छा कहना उचित नहीं है।”
अकबर ने कहा, “तुम्हारी बात ठीक है, लेकिन मैं अभी भी उस फूल का
नाम जानना चाहता हूँ जिसे तुमने चुना है।”
बीरबल ने उस छोटे पौधे के पास जाकर कहा, “जहाँपनाह, इस पौधे के फूल
बहुत साधारण हैं, लेकिन इसकी एक विशेषता है। यह उन लोगों के लिए भी उपयोगी है
जिनके पास महँगे फूल खरीदने के पैसे नहीं हैं। इसे उगाना आसान है और यह अनेक
स्थानों पर आसानी से खिल जाता है। इसकी सुंदरता भले ही साधारण हो, लेकिन इसकी
उपयोगिता बहुत बड़ी हो सकती है।”
अकबर ने फूल को ध्यान से देखा। तभी उन्होंने देखा कि बगीचे के एक कोने में कुछ
बच्चे बैठे थे। वे फूलों को देखकर प्रसन्न हो रहे थे। उनमें से एक बच्चा उस फूल के
पास गया और उसे देखकर मुस्कुराने लगा। अकबर ने पूछा, “ये बच्चे यहाँ क्या कर रहे
हैं?”
बीरबल ने कहा, “हुजूर, ये महल के पास रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चे हैं।
इन्हें इस बगीचे में आने की अनुमति है। इनके लिए ये फूल किसी राजसी आभूषण से कम
नहीं हैं। इनके पास महँगे खिलौने नहीं हैं, लेकिन प्रकृति के ये
छोटे-छोटे फूल इनके चेहरों पर मुस्कान ला देते हैं।”
अकबर कुछ देर चुप रहे। उन्होंने बच्चों को देखा। एक बच्चा फूलों को देखकर अपनी
छोटी बहन से कह रहा था, “देखो, कितना सुंदर फूल है!” उसकी बहन खुशी से हँस रही थी। अकबर के
चेहरे पर भी मुस्कान आ गई।
बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह, यही कारण है कि मैं कहता हूँ कि किसी फूल की कीमत केवल उसके
रंग, आकार या सुगंध से नहीं मापी जा सकती। यदि कोई छोटा-सा फूल किसी दुखी व्यक्ति
के चेहरे पर मुस्कान ला दे, तो वह उस क्षण उसके लिए दुनिया का सबसे अच्छा फूल बन जाता
है।”
अकबर ने सिर हिलाया। उन्हें बीरबल की बात समझ आने लगी थी। लेकिन वे चाहते थे
कि दरबारियों को भी यह बात अच्छी तरह समझ आए। उन्होंने अपने एक सैनिक को बुलाकर
कहा, “जाओ और शहर से कुछ अलग-अलग फूल लेकर आओ। गुलाब, चमेली, कमल और
गेंदा—सब ले आना।”
सैनिक थोड़ी देर बाद फूलों की टोकरी लेकर लौट आया। अकबर ने चारों फूलों को
अपने सामने रखवा दिया। फिर उन्होंने दरबारियों से पूछा, “अब बताओ, इनमें से सबसे
अच्छा फूल कौन-सा है?”
एक दरबारी ने तुरंत कहा, “गुलाब।”
दूसरा बोला, “चमेली।”
तीसरे ने कहा, “कमल।”
चौथा बोला, “गेंदा।”
अकबर ने कहा, “तुम सबकी पसंद अलग-अलग क्यों है?”
दरबारी चुप हो गए। बीरबल ने कहा, “क्योंकि हर व्यक्ति किसी वस्तु में अलग गुण
देखता है। कोई सुंदरता देखता है, कोई सुगंध, कोई धार्मिक महत्व और कोई उपयोगिता।”
अकबर ने पूछा, “तो क्या कोई भी उत्तर गलत नहीं है?”
बीरबल ने कहा, “यदि प्रश्न केवल पसंद का हो, तो शायद नहीं। लेकिन यदि
प्रश्न हो कि सबसे अच्छा कौन है, तो हमें यह भी बताना होगा कि किस आधार पर।”
अकबर ने कहा, “मान लो मैं कहूँ कि सुंदरता के आधार पर सबसे अच्छा फूल
चुनो।”
बीरबल बोले, “तब गुलाब सबसे मजबूत दावेदार हो सकता है।”
“और यदि सुगंध के आधार पर?”
“तब चमेली या कोई अन्य सुगंधित फूल आगे आ सकता है।”
“यदि धार्मिक महत्व के आधार पर?”
“तब कमल जैसे फूलों का महत्व बहुत बढ़ जाता है।”
“और यदि उपयोगिता के आधार पर?”
बीरबल मुस्कुराए और बोले, “तब हमें फूलों के गुणों को विस्तार से देखना पड़ेगा।”
अकबर ने कहा, “अच्छा, तो तुम अभी भी अपना उत्तर छिपा रहे हो।”
बीरबल ने विनम्रता से कहा, “मैं उत्तर छिपा नहीं रहा, जहाँपनाह। मैं चाहता हूँ कि
उत्तर केवल मेरे मुँह से सुनकर नहीं, बल्कि अपनी आँखों से देखकर समझा जाए।”
अकबर ने कहा, “ठीक है। अब मुझे बताओ कि तुम्हारे अनुसार सबसे अच्छा फूल
कौन-सा है।”
बीरबल ने कहा, “हुजूर, मेरे अनुसार ऐसा कोई एक फूल नहीं है जिसे हर परिस्थिति में
सबसे अच्छा कहा जा सके। लेकिन यदि मुझे एक फूल चुनना ही पड़े, तो मैं उस फूल
को चुनूँगा जो कम साधनों में भी लोगों के जीवन में उपयोगी हो, जिसे आम लोग
आसानी से प्राप्त कर सकें और जो प्रकृति की सुंदरता के साथ-साथ किसी न किसी रूप
में मनुष्य के काम भी आए।”
एक दरबारी ने हँसते हुए कहा, “बीरबल, यह तो बहुत सामान्य उत्तर है। आपने अभी तक फूल का नाम ही
नहीं बताया।”
बीरबल ने उसकी ओर देखा और कहा, “धैर्य रखिए। नाम भी बता दूँगा। लेकिन पहले एक
घटना सुनिए।”
बीरबल ने कहानी शुरू की। “कुछ समय पहले शहर में एक गरीब माली रहता था। उसका
नाम हरिया था। उसके पास अपनी जमीन बहुत कम थी। वह दूसरों के बगीचों में काम करके
अपना जीवन चलाता था। उसके परिवार में उसकी बूढ़ी माँ, पत्नी और दो छोटे बच्चे थे।
एक वर्ष बहुत तेज गर्मी पड़ी और कई बड़े बगीचों के पौधे सूखने लगे। हरिया का काम
भी कम हो गया। उसके पास परिवार के लिए भोजन खरीदने तक के पैसे नहीं थे।”
अकबर ध्यान से सुन रहे थे।
बीरबल ने आगे कहा, “एक दिन हरिया को रास्ते के किनारे कुछ ऐसे पौधे दिखाई दिए
जिनमें छोटे-छोटे फूल खिले थे। उसने सोचा कि शायद इन फूलों को बाजार में बेचकर कुछ
पैसे कमाए जा सकते हैं। उसने कुछ फूल तोड़े, उनसे छोटी-छोटी मालाएँ
बनाईं और बाजार में बैठ गया। उस दिन उसकी सारी मालाएँ बिक गईं। उसे बहुत कम पैसे
मिले, लेकिन इतने मिले कि वह अपने बच्चों के लिए भोजन खरीद सके।”
“अगले दिन उसने फिर फूल इकट्ठे किए। धीरे-धीरे उसने उसी काम को अपना छोटा
व्यवसाय बना लिया। कुछ महीनों में उसने थोड़ा पैसा बचाया और जमीन का एक छोटा
टुकड़ा किराए पर लिया। वहाँ उसने वही फूल उगाने शुरू किए। कुछ समय बाद उसकी आय
इतनी बढ़ गई कि वह अपने परिवार का ठीक से पालन-पोषण करने लगा।”
अकबर ने पूछा, “क्या वह फूल गेंदा था?”
बीरबल ने मुस्कुराकर कहा, “जी हाँ, जहाँपनाह। उसके लिए गेंदा केवल एक फूल नहीं था। वह उसके
परिवार की रोजी-रोटी का साधन था।”
अकबर कुछ क्षण चुप रहे। फिर उन्होंने कहा, “तो तुम्हारे अनुसार गेंदा
सबसे अच्छा फूल है?”
बीरबल ने उत्तर दिया, “उस माली के लिए निश्चित रूप से। लेकिन मैं अभी भी इसे संसार
का सबसे अच्छा फूल नहीं कहूँगा। क्योंकि यदि कोई व्यक्ति गुलाब उगाकर अपना परिवार
पालता है, तो उसके लिए गुलाब भी उतना ही अच्छा है। यदि कोई वैद्य किसी फूल से औषधि बनाकर
किसी रोगी को स्वस्थ करता है, तो उस रोगी के लिए वह फूल सबसे अच्छा है। और यदि किसी भक्त
को कोई फूल भगवान के प्रति उसकी श्रद्धा व्यक्त करने में सहायता करता है, तो उसके लिए
वही फूल सबसे अच्छा है।”
अकबर की आँखों में संतोष दिखाई देने लगा। उन्होंने कहा, “अब मैं समझ रहा
हूँ कि तुम मेरे प्रश्न को किस दिशा में ले जा रहे हो।”
बीरबल बोले, “जहाँपनाह, फूलों की दुनिया हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है। प्रकृति ने
किसी फूल को केवल इसलिए नहीं बनाया कि वह दूसरे फूल से सुंदर दिखे। हर फूल का अपना
स्थान और अपना महत्व है। इसी प्रकार मनुष्यों में भी कोई व्यक्ति धनवान होता है,
कोई विद्वान,
कोई मेहनती,
कोई दयालु और
कोई साहसी। केवल एक गुण देखकर यह कहना कि वही सबसे अच्छा मनुष्य है, उचित नहीं
होगा।”
अकबर ने कहा, “तुम्हारी बात केवल फूलों तक सीमित नहीं है।”
“जी हुजूर,” बीरबल ने कहा। “फूल तो केवल उदाहरण हैं। असली बात मनुष्य के
जीवन की है।”
दरबार में बैठे सभी लोग अब शांत होकर बीरबल की बातें सुन रहे थे। जो दरबारी
कुछ देर पहले जल्दी-जल्दी उत्तर दे रहे थे, वे भी अब सोच में पड़ गए
थे।
अकबर ने फिर पूछा, “लेकिन बीरबल, यदि कोई फूल सुंदर भी हो, सुगंधित भी हो और उपयोगी भी,
तो क्या हम उसे
सबसे अच्छा कह सकते हैं?”
बीरबल ने कहा, “हम उसे बहुत श्रेष्ठ कह सकते हैं, जहाँपनाह। लेकिन फिर भी
हमें यह देखना होगा कि हम उसे किस परिस्थिति में देख रहे हैं। किसी व्यक्ति के लिए
सुंदरता जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता हो सकती है, जबकि किसी दूसरे के लिए
भोजन या औषधि अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।”
अकबर ने कहा, “तो क्या तुम्हारे उत्तर का सार यही है कि सबसे अच्छा वही है
जो सबसे अधिक भलाई करे?”
बीरबल ने सिर झुकाकर कहा, “जी हाँ, यही मेरे उत्तर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।”
अकबर ने कहा, “और यदि किसी फूल की सुंदरता लोगों को खुशी देती है?”
बीरबल ने उत्तर दिया, “तो वह भी भलाई ही है।”
“यदि उसकी सुगंध किसी का मन प्रसन्न करती है?”
“वह भी भलाई है।”
“यदि उससे किसी का रोजगार चलता है?”
“वह तो और भी बड़ी भलाई है।”
“यदि उससे किसी रोगी को लाभ मिलता है?”
“तब उसका महत्व और बढ़ जाता है।”
अकबर मुस्कुराए। “तो अंत में तुम फूल के नाम से अधिक उसके गुण को महत्व दे रहे
हो।”
बीरबल ने कहा, “बिल्कुल, जहाँपनाह।”
अकबर ने दरबार की ओर देखा और कहा, “आज बीरबल ने हमें एक महत्वपूर्ण बात समझाई है।
हम अक्सर किसी वस्तु को देखकर तुरंत निर्णय कर लेते हैं कि यह सबसे अच्छी है।
लेकिन सही निर्णय लेने के लिए हमें यह देखना चाहिए कि उसका वास्तविक महत्व क्या है
और वह किसके लिए कितनी उपयोगी है।”
दरबारियों ने एक साथ कहा, “बिल्कुल, जहाँपनाह।”
लेकिन तभी अकबर ने बीरबल की ओर देखकर कहा, “फिर भी मैं तुम्हें पूरी
तरह छोड़ने वाला नहीं हूँ। मैंने पूछा था कि सबसे अच्छा फूल कौन-सा है। तुम्हें
अंत में एक नाम तो देना ही होगा।”
बीरबल मुस्कुराए। उन्होंने अपनी जेब से एक छोटा-सा फूल निकाला और बादशाह के
सामने रख दिया।
अकबर ने फूल को देखते ही पूछा, “यह कौन-सा फूल है?”
बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह, यही वह फूल है जिसे मैं इस कहानी का उत्तर मानता हूँ। लेकिन
इसके पीछे की असली कहानी अभी बाकी है।”
अकबर ने आश्चर्य से पूछा, “अभी बाकी है?”
“जी हुजूर,” बीरबल ने कहा। “क्योंकि इस फूल ने एक ऐसे व्यक्ति की सहायता
की थी जिसे उस समय इसकी सबसे अधिक आवश्यकता थी। जब आप उस घटना को सुनेंगे, तब आपको समझ
आएगा कि मैंने इसे सबसे अच्छा फूल क्यों कहा।”
अकबर ने उत्सुक होकर कहा, “तो फिर वह कहानी मुझे अभी सुनाओ।”
बीरबल ने कहा, “जैसी आपकी आज्ञा, जहाँपनाह। लेकिन उस घटना को समझने के लिए हमें
शहर के उस हिस्से में जाना होगा जहाँ एक गरीब परिवार रहता है।”
अकबर ने तुरंत आदेश दिया कि अगले दिन वे स्वयं उस स्थान पर जाएँगे।
दरबार समाप्त हो गया, लेकिन अकबर के मन में बीरबल का प्रश्न घूमता रहा। वे सोचने
लगे कि आखिर वह छोटा-सा फूल किस प्रकार किसी के जीवन में इतना बड़ा परिवर्तन ला
सकता है। दूसरी ओर बीरबल जानते थे कि अगले दिन की घटना से बादशाह को केवल फूल की
अच्छाई नहीं, बल्कि मनुष्य की असली अच्छाई का भी अर्थ समझ में आएगा।
अगली सुबह सूर्य निकलने से पहले ही महल में हलचल शुरू हो गई। अकबर साधारण वेश
में जाने के लिए तैयार हुए ताकि आम लोग उन्हें पहचान न सकें। बीरबल भी उनके साथ
थे। दोनों शहर की गलियों से होते हुए उस गरीब परिवार के घर की ओर चल पड़े, जिसके बारे में
बीरबल ने पिछली शाम संकेत दिया था।
उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वहाँ उन्हें क्या देखने को मिलेगा। और सबसे
महत्वपूर्ण बात यह थी कि जिस फूल को बीरबल ने अपने उत्तर के रूप में चुना था,
उसकी असली
कहानी अभी सामने आनी बाकी थी।
अगली सुबह बादशाह अकबर साधारण कपड़े पहनकर बीरबल के साथ महल से बाहर निकले।
उनके साथ केवल एक विश्वसनीय सैनिक था, जो कुछ दूरी बनाकर उनके पीछे चल रहा था। अकबर ने
जान-बूझकर शाही वस्त्र नहीं पहने थे, क्योंकि वे उस गरीब परिवार की वास्तविक स्थिति
अपनी आँखों से देखना चाहते थे। बीरबल रास्ता जानते थे, इसलिए वे आगे-आगे चल रहे
थे। शहर की मुख्य सड़क से निकलकर वे धीरे-धीरे एक ऐसी बस्ती में पहुँचे जहाँ
छोटे-छोटे मिट्टी और ईंट के घर बने हुए थे। कुछ घरों की दीवारें टूटी हुई थीं और
कई घरों की छतें घास-फूस से बनी थीं। सुबह का समय होने के कारण लोग अपने दैनिक कामों
में लग चुके थे। कोई पानी भर रहा था, कोई दुकान खोल रहा था और कोई मजदूरी के लिए निकल
रहा था।
कुछ दूर चलने के बाद बीरबल एक छोटे-से घर के सामने रुक गए। घर बहुत साधारण था।
उसके बाहर मिट्टी का एक छोटा-सा आँगन था और आँगन के एक कोने में मिट्टी का घड़ा
रखा था। पास ही कुछ सूखे लकड़ियाँ पड़ी थीं। दरवाजे के पास एक छोटी लड़की बैठी थी।
उसके हाथ में कुछ फूल थे और वह उन्हें बहुत सावधानी से एक धागे में पिरो रही थी।
अकबर ने लड़की को देखकर बीरबल से धीमे स्वर में पूछा, “यही वह परिवार है?”
बीरबल ने सिर हिलाया और कहा, “जी, जहाँपनाह। यही वह घर है।”
बीरबल ने लड़की से पूछा, “बेटी, तुम्हारी माँ कहाँ हैं?”
लड़की ने सिर उठाकर देखा और बोली, “अंदर हैं। उनकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है।”
बीरबल ने कहा, “क्या हम उनसे मिल सकते हैं?”
लड़की ने तुरंत दरवाजा खोल दिया। अंदर एक महिला चारपाई पर बैठी थी। उसके चेहरे
पर थकान साफ दिखाई दे रही थी। पास ही एक वृद्ध महिला चूल्हे के पास बैठी थी और एक
छोटा लड़का जमीन पर चुपचाप बैठा था। घर में बहुत कम सामान था, लेकिन सब कुछ
साफ-सुथरा रखा गया था।
महिला ने बीरबल और अकबर को देखकर पूछा, “आप कौन हैं?”
बीरबल ने साधारण यात्री की तरह उत्तर दिया, “हम राहगीर हैं। इस रास्ते
से गुजर रहे थे। आपकी बेटी से बात हुई तो पता चला कि आपकी तबीयत ठीक नहीं है,
इसलिए हाल
पूछने चले आए।”
महिला ने मुस्कुराने की कोशिश की और कहा, “आपका बहुत धन्यवाद। मैं ठीक
हो जाऊँगी।”
अकबर ने घर के चारों ओर देखा। उन्हें महसूस हुआ कि इस परिवार के पास बहुत कम
साधन थे। फिर भी घर में किसी प्रकार की शिकायत का वातावरण नहीं था। बच्ची फूलों की
माला बना रही थी और उसका छोटा भाई उसे ध्यान से देख रहा था।
अकबर ने पूछा, “ये फूल कहाँ से लाए हो?”
लड़की ने मुस्कुराकर कहा, “हमारे घर के पीछे थोड़ी-सी जमीन है। वहाँ मैंने और माँ ने
ये फूल लगाए हैं।”
अकबर ने पूछा, “इनसे क्या करते हो?”
लड़की ने कहा, “माँ इनकी मालाएँ बनाती हैं। मैं बाजार में बेचने जाती हूँ।
इससे हमें कुछ पैसे मिल जाते हैं।”
अकबर ने आश्चर्य से बीरबल की ओर देखा। बीरबल शांत खड़े थे।
लड़की ने आगे कहा, “जब माँ बीमार पड़ गईं तो मैंने अकेले मालाएँ बनानी शुरू कर
दीं। पहले मुझे डर लगता था कि बाजार में लोग मेरी मालाएँ खरीदेंगे या नहीं। लेकिन
धीरे-धीरे कुछ लोग मुझे पहचानने लगे। अब वे रोज मेरे पास से फूल खरीदते हैं।”
अकबर ने पूछा, “तुम्हें कौन-से फूल सबसे अच्छे लगते हैं?”
लड़की ने बिना सोचे एक फूल उठाया और कहा, “मुझे यह फूल सबसे अच्छा
लगता है।”
अकबर ने फूल को ध्यान से देखा। वही साधारण फूल था जिसे बीरबल ने पिछली शाम
अपने हाथ में रखा था।
अकबर ने पूछा, “क्यों?”
लड़की ने मासूमियत से कहा, “क्योंकि इसी फूल की मालाएँ बेचकर मैं अपनी माँ के लिए दवा
खरीदती हूँ।”
अकबर कुछ क्षण के लिए बिल्कुल शांत हो गए। उन्हें लगा कि बीरबल के प्रश्न का
उत्तर उनके सामने स्वयं खड़ा है।
बीरबल ने लड़की से पूछा, “यदि तुम्हें इस फूल और गुलाब में से एक चुनना हो, तो तुम किसे
चुनोगी?”
लड़की ने कहा, “गुलाब बहुत सुंदर होता है। मुझे गुलाब भी पसंद है। लेकिन
मैं यह फूल चुनूँगी, क्योंकि इससे मेरी माँ की दवा आती है और हमारे घर में खाना
बनता है।”
अकबर ने उसकी बात सुनी तो उनका मन भर आया। उन्होंने पहली बार महसूस किया कि
किसी वस्तु का वास्तविक मूल्य उसके बाजार भाव या बाहरी सुंदरता से नहीं, बल्कि उससे
होने वाले लाभ से भी तय होता है।
उन्होंने बच्ची से पूछा, “तुम्हारे पिता कहाँ हैं?”
बच्ची ने कुछ देर चुप रहकर कहा, “मेरे पिता बहुत पहले गुजर गए। तब मैं बहुत छोटी
थी।”
अकबर ने सिर झुका लिया। उन्हें इस परिवार की कठिनाइयों का अंदाजा होने लगा।
वृद्ध महिला ने धीरे से कहा, “बेटी बहुत मेहनती है। छोटी उम्र में ही उसने घर संभाल लिया।
भगवान ने उसे फूलों का सहारा दिया है।”
बीरबल ने कहा, “माता जी, आपकी बेटी बहुत समझदार है।”
महिला ने कहा, “गरीबी इंसान को जल्दी बड़ा कर देती है।”
यह बात सुनकर अकबर ने बीरबल की ओर देखा। बीरबल ने कोई उत्तर नहीं दिया।
कुछ देर बाद अकबर ने पूछा, “यदि तुम्हारे पास बहुत सारे पैसे आ जाएँ, तो तुम क्या
करोगी?”
लड़की ने तुरंत कहा, “सबसे पहले माँ का अच्छा इलाज करवाऊँगी। फिर अपने भाई को
पढ़ाऊँगी। और हमारे घर के पीछे फूलों की और क्यारियाँ बनाऊँगी।”
अकबर ने पूछा, “और अपने लिए?”
लड़की मुस्कुराई और बोली, “मेरे लिए? मैं भी पढ़ना चाहती हूँ।”
अकबर ने कहा, “तुम्हें पढ़ना क्यों है?”
लड़की ने उत्तर दिया, “क्योंकि मैं चाहती हूँ कि बड़ी होकर ऐसी दवाएँ बनाना सीखूँ
जिससे गरीब लोगों का इलाज हो सके। मेरी माँ बीमार हैं, इसलिए मुझे पता है कि दवा
कितनी जरूरी होती है।”
अकबर उस बच्ची की बात सुनकर बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने महसूस किया कि कठिन
परिस्थितियों के बावजूद उसके मन में अपने लिए ही नहीं, दूसरों के लिए भी कुछ करने
की इच्छा थी।
बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह, अब शायद आपको मेरे उत्तर का अर्थ समझ में आ रहा होगा।”
अकबर ने धीरे से कहा, “हाँ, बीरबल। अब मैं समझने लगा हूँ।”
बीरबल बोले, “जिस फूल को हम केवल एक छोटा-सा साधारण फूल समझ रहे थे,
वही इस परिवार
के लिए भोजन, दवा और भविष्य की आशा बन गया है। यदि हम केवल इसकी सुंदरता देखें तो शायद यह
गुलाब से पीछे रह जाए। लेकिन यदि हम देखें कि इसने इस परिवार के जीवन में क्या
योगदान दिया है, तो इसका महत्व बहुत बड़ा हो जाता है।”
अकबर ने कहा, “तुम सही कहते हो। मेरे लिए अब यह फूल सचमुच बहुत मूल्यवान
है।”
तभी बच्ची ने पूछा, “आप लोग कौन हैं? आप फूलों के बारे में इतने सवाल क्यों पूछ रहे
हैं?”
अकबर मुस्कुराए और बोले, “हम दूर से आए यात्री हैं। तुम्हारी कहानी हमें बहुत अच्छी
लगी।”
बीरबल ने बच्ची की ओर देखकर कहा, “और शायद तुम्हें पता नहीं कि तुम्हारी बात आज
बहुत दूर तक जाएगी।”
बच्ची कुछ समझ नहीं पाई, लेकिन मुस्कुराकर फिर फूल पिरोने लगी।
अकबर ने बीरबल से कहा, “चलो, अब हमें महल लौटना चाहिए।”
दोनों वहाँ से निकल पड़े। रास्ते में अकबर बहुत देर तक चुप रहे। आखिर उन्होंने
कहा, “बीरबल, आज तुमने मुझे एक ऐसी बात समझाई है जो शायद बड़े-बड़े ग्रंथ भी नहीं समझा
सकते।”
बीरबल ने कहा, “हुजूर, मैंने केवल आपको एक परिवार दिखाया है। असली शिक्षा तो उस
बच्ची ने दी है।”
अकबर ने पूछा, “तुम्हारा मतलब?”
बीरबल ने कहा, “उसने हमें बताया कि सुंदरता से अधिक महत्वपूर्ण उपयोगिता और
करुणा है। उसने उस फूल को इसलिए नहीं चुना कि वह सबसे सुंदर था, बल्कि इसलिए
चुना कि उससे उसकी माँ की दवा और परिवार का भोजन मिलता था।”
अकबर ने कहा, “लेकिन क्या इसका अर्थ यह है कि सुंदरता का कोई महत्व नहीं?”
बीरबल ने उत्तर दिया, “नहीं, हुजूर। सुंदरता भी प्रकृति का एक सुंदर उपहार है। जब कोई
फूल किसी के मन को प्रसन्न करता है, तब वह भी अच्छा काम करता है। लेकिन सुंदरता के
साथ यदि उपयोगिता और दूसरों के लिए भलाई भी जुड़ जाए, तो उसका महत्व और बढ़ जाता
है।”
अकबर ने कहा, “तो क्या हम कह सकते हैं कि सबसे अच्छा फूल वह है जो सबसे
अधिक भलाई करता है?”
बीरबल ने कहा, “जी, यही बात मैं आपको समझाना चाहता था।”
महल लौटने के बाद अकबर ने तुरंत अपने दरबारियों को बुलाया। सभी दरबारी दरबार
में उपस्थित हुए। अकबर ने कहा, “कुछ दिन पहले मैंने तुम लोगों से पूछा था कि सबसे अच्छा फूल
कौन-सा है। तब तुममें से हर किसी ने अपनी पसंद का फूल बता दिया था। लेकिन आज मैं
तुम्हें एक कहानी सुनाना चाहता हूँ।”
अकबर ने उस गरीब लड़की और उसके परिवार की पूरी कहानी दरबारियों को सुनाई। सभी
दरबारी ध्यान से सुनते रहे। जब अकबर ने बताया कि उस साधारण फूल की मालाएँ बेचकर
लड़की अपनी माँ की दवा खरीदती है, तो दरबार में सन्नाटा छा गया।
एक दरबारी ने धीरे से कहा, “जहाँपनाह, अब मुझे समझ में आ गया कि आपने यह प्रश्न क्यों पूछा था।”
अकबर ने कहा, “हाँ। हम अक्सर किसी चीज को देखकर उसकी कीमत तय कर देते हैं।
लेकिन वास्तविक मूल्य जानने के लिए हमें यह देखना चाहिए कि वह किसी के जीवन में
क्या परिवर्तन ला रही है।”
बीरबल ने कहा, “हुजूर, यही बात मनुष्यों पर भी लागू होती है।”
अकबर ने पूछा, “कैसे?”
बीरबल ने कहा, “मान लीजिए कोई व्यक्ति बहुत सुंदर है, लेकिन वह
दूसरों को दुख देता है। और दूसरा व्यक्ति देखने में साधारण है, लेकिन वह हमेशा
जरूरतमंदों की मदद करता है। बताइए, दोनों में से वास्तव में श्रेष्ठ कौन है?”
एक दरबारी ने तुरंत कहा, “जो दूसरों की मदद करता है।”
बीरबल ने कहा, “यही तो। इसलिए मनुष्य की वास्तविक सुंदरता उसके चेहरे में
नहीं, उसके व्यवहार में होती है। इसी तरह फूल की
वास्तविक श्रेष्ठता केवल उसकी पंखुड़ियों में नहीं, बल्कि उससे मिलने वाली खुशी
और उपयोगिता में भी हो सकती है।”
अकबर ने बीरबल की ओर देखकर कहा, “आज से मैं इस प्रश्न का उत्तर एक वाक्य में दे
सकता हूँ।”
बीरबल मुस्कुराए। “क्या, जहाँपनाह?”
अकबर ने कहा, “सबसे अच्छा फूल वह है जो अपने गुणों से किसी के जीवन में
सुंदरता और भलाई लाए।”
दरबारियों ने तालियाँ बजाईं।
लेकिन बीरबल ने कहा, “एक बात और है, हुजूर।”
अकबर ने पूछा, “अब क्या?”
बीरबल बोले, “इस कहानी का सबसे सुंदर फूल वह नहीं है जो हमारे हाथ में
है। सबसे सुंदर फूल तो उस बच्ची का हृदय है, जिसने अपनी कठिन
परिस्थितियों के बावजूद अपनी माँ की सेवा करने और भविष्य में दूसरों की मदद करने
का सपना देखा।”
अकबर कुछ क्षण बीरबल को देखते रहे। फिर उनके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान आई।
उन्होंने कहा, “बीरबल, आज तुमने फिर सिद्ध कर दिया कि असली सुंदरता देखने के लिए
आँखों से अधिक समझदार हृदय की आवश्यकता होती है।”
फिर अकबर ने अपने खजांची को बुलाया और आदेश दिया कि उस गरीब परिवार को
पर्याप्त धन दिया जाए ताकि माँ का अच्छा इलाज हो सके, बच्चों की पढ़ाई हो सके और
वे फूलों का अपना छोटा व्यवसाय बढ़ा सकें।
कुछ दिनों बाद उस परिवार को सहायता मिल गई। लड़की की माँ का इलाज शुरू हुआ।
बच्चे पढ़ने लगे और घर के पीछे फूलों की कई नई क्यारियाँ तैयार की गईं। धीरे-धीरे
उनका छोटा-सा फूलों का व्यवसाय बढ़ने लगा। वह लड़की पढ़ाई भी करने लगी और जब भी
उसे अवसर मिलता, वह अपनी माँ की मदद करती।
कई वर्षों बाद वह लड़की बड़ी हुई। उसने पढ़-लिखकर औषधियों के बारे में ज्ञान
प्राप्त किया और गरीब लोगों की सहायता करने लगी। उसे हमेशा वह छोटा-सा फूल याद
रहता, जिसने उसके कठिन समय में उसके परिवार का सहारा दिया था।
एक दिन अकबर फिर अपने बगीचे में टहल रहे थे। उनके सामने वही तरह-तरह के सुंदर
फूल खिले थे। गुलाब, चमेली, कमल और गेंदा—सब अपनी-अपनी सुंदरता बिखेर रहे थे। अकबर एक
फूल के सामने रुके और मुस्कुराए।
बीरबल पास ही खड़े थे।
अकबर ने कहा, “बीरबल, अब यदि कोई मुझसे पूछे कि सबसे अच्छा फूल कौन-सा है,
तो मैं क्या
कहूँ?”
बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह, आप कह सकते हैं कि हर फूल अपने स्थान पर अच्छा है। लेकिन जो
फूल किसी के जीवन में आशा, खुशी, भोजन, दवा या रोजगार लेकर आए, वह उस व्यक्ति के लिए सबसे
अच्छा फूल है।”
अकबर ने कहा, “और यदि कोई मुझसे पूछे कि सबसे सुंदर चीज क्या है?”
बीरबल ने उत्तर दिया, “तो कहिए—एक ऐसा हृदय जो दूसरों के दुख को समझे और अपनी
क्षमता के अनुसार उनकी सहायता करे।”
अकबर ने संतोष से कहा, “बीरबल, यही आज की सबसे बड़ी सीख है।”
उस दिन से अकबर जब भी अपने बगीचे में फूल देखते, वे केवल उनके रंग और
सुंदरता को नहीं देखते थे। उन्हें उस गरीब बच्ची की याद आती थी, जिसके लिए एक
साधारण फूल उसकी माँ की दवा, उसके परिवार की रोटी और उसके भविष्य की आशा बन गया था।
और इस तरह एक छोटे-से फूल ने बादशाह अकबर को यह बड़ी सीख दी कि दुनिया में
किसी चीज की असली महानता उसके बाहरी रूप से नहीं, बल्कि उसके गुण, उपयोगिता और
दूसरों के जीवन में लाई गई भलाई से तय होती है।
कुछ दिन बीत गए। बादशाह अकबर के मन में बीरबल की कही हुई बातें अब भी घूम रही
थीं। उन्होंने समझ लिया था कि किसी चीज की असली अच्छाई केवल उसकी बाहरी सुंदरता से
तय नहीं होती। फिर भी अकबर के मन में एक प्रश्न था। वे जानना चाहते थे कि क्या
बीरबल अपनी कही हुई बात को हर परिस्थिति में सही साबित कर सकते हैं। इसलिए एक सुबह
उन्होंने बीरबल को दरबार में बुलाया और कहा, “बीरबल, पिछली बार
तुमने फूलों के बारे में मुझे एक बहुत सुंदर सीख दी थी। लेकिन मैं तुम्हारी बुद्धि
की एक और परीक्षा लेना चाहता हूँ।”
बीरबल ने मुस्कुराकर कहा, “जहाँपनाह, आपकी परीक्षा लेना मेरा काम नहीं, आपकी परीक्षा में सफल होना
मेरा सौभाग्य है। आप जो प्रश्न पूछना चाहें, पूछ सकते हैं।”
अकबर हँस पड़े। उन्होंने कहा, “अच्छा, तो सुनो। यदि किसी राज्य में केवल एक फूल उग सकता हो और
बाकी सभी फूल हमेशा के लिए समाप्त हो जाएँ, तो तुम कौन-सा फूल चुनोगे?”
दरबार में बैठे सभी लोग एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। उन्हें लगा कि इस बार
प्रश्न पहले से भी कठिन था। एक दरबारी ने मन ही मन सोचा कि अब बीरबल निश्चित रूप
से किसी एक फूल का नाम लेने के लिए मजबूर हो जाएँगे।
बीरबल ने कुछ देर सोचा और कहा, “जहाँपनाह, मैं किसी एक फूल का नाम
लेने से पहले उस राज्य की आवश्यकता जानना चाहूँगा।”
अकबर ने पूछा, “यदि मैं तुम्हें कोई अतिरिक्त जानकारी न दूँ तो?”
बीरबल बोले, “तब मैं ऐसा फूल चुनूँगा जो अधिक से अधिक लोगों के लिए
उपयोगी हो, जिसे अलग-अलग स्थानों पर उगाया जा सके और जिसका उपयोग केवल सजावट तक सीमित न
हो।”
अकबर ने कहा, “लेकिन तुम्हें केवल एक फूल चुनना है।”
बीरबल ने कहा, “तो मैं ऐसा फूल चुनूँगा जिसके माध्यम से लोगों को भोजन,
रोजगार,
पूजा, औषधि या किसी
अन्य आवश्यक कार्य में सहायता मिल सके। लेकिन मैं यह भी कहूँगा कि प्रकृति को केवल
एक फूल तक सीमित करना उचित नहीं है।”
अकबर ने कहा, “तुम फिर प्रश्न से बचने की कोशिश कर रहे हो।”
बीरबल ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “नहीं, हुजूर। मैं प्रश्न का वास्तविक अर्थ समझने की
कोशिश कर रहा हूँ।”
अकबर ने कहा, “ठीक है। मान लो कि तुम्हें एक ही फूल चुनना ही पड़े। तुम
क्या चुनोगे?”
बीरबल ने कहा, “मैं गेंदा चुनूँगा।”
दरबारियों में हलचल हुई। एक दरबारी ने तुरंत कहा, “गुलाब को छोड़कर गेंदा?”
बीरबल ने उसकी ओर देखकर कहा, “हाँ। क्योंकि गेंदा अनेक सामान्य परिवारों के लिए आसानी से
उपलब्ध होता है, पूजा और सजावट दोनों में उपयोग होता है, इसकी मालाएँ
बनती हैं और कई लोगों की आजीविका इससे जुड़ी होती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि
गुलाब या कमल कम अच्छे हैं।”
अकबर ने कहा, “तो तुमने आखिर एक फूल चुन ही लिया।”
बीरबल बोले, “जी, क्योंकि इस बार आपने मुझे एक चुनाव करने के लिए कहा था।
लेकिन यदि आपने पूछा होता कि सबसे सुंदर फूल कौन-सा है, तो मेरा उत्तर अलग हो सकता
था।”
अकबर ने कहा, “और यदि मैं कहूँ कि तुमने गेंदा केवल इसलिए चुना क्योंकि उस
गरीब परिवार की कहानी तुम्हारे मन में है?”
बीरबल ने कहा, “उस परिवार की कहानी ने मुझे सोचने का एक तरीका दिया है,
लेकिन मेरा
उत्तर केवल उसी परिवार पर आधारित नहीं है। उस परिवार ने मुझे यह समझाया कि जिस
वस्तु को हम साधारण समझते हैं, वह किसी दूसरे व्यक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती
है।”
अकबर ने सिर हिलाया।
फिर उन्होंने दरबार के सामने एक और चुनौती रखी। उन्होंने कहा, “मान लो,
दो बागवान हैं।
एक के बगीचे में केवल गुलाब हैं और दूसरा गेंदा उगाता है। पहला बागवान महँगे फूल
बेचकर बहुत धन कमाता है। दूसरा बागवान साधारण फूल बेचकर कम धन कमाता है, लेकिन वह अपने
गाँव के गरीब लोगों को काम देता है। तुम दोनों में से किसे श्रेष्ठ कहोगे?”
बीरबल ने उत्तर दिया, “मैं केवल उनकी कमाई देखकर निर्णय नहीं करूँगा। मैं यह
देखूँगा कि दोनों अपने काम को किस ईमानदारी से करते हैं और दूसरों के साथ कैसा
व्यवहार करते हैं।”
अकबर ने पूछा, “यदि पहला बहुत धनवान है लेकिन मजदूरों को उचित मजदूरी नहीं
देता?”
“तो उसकी दौलत उसे श्रेष्ठ नहीं बनाती।”
“और यदि दूसरा कम कमाता है लेकिन अपने मजदूरों के साथ अच्छा व्यवहार करता है?”
“तो उसका छोटा काम भी महान हो सकता है।”
अकबर ने मुस्कुराते हुए कहा, “यानी फिर वही बात—असली सुंदरता और अच्छाई व्यवहार में है।”
“जी, जहाँपनाह।”
तभी एक बुजुर्ग दरबारी ने हाथ जोड़कर कहा, “हुजूर, आज मुझे एक बात
समझ आई है। हम दरबार में अक्सर किसी व्यक्ति की पोशाक, पद और धन देखकर उसका सम्मान
करते हैं। लेकिन बीरबल कह रहे हैं कि हमें उसके कर्म भी देखने चाहिए।”
अकबर ने कहा, “बिल्कुल।”
बीरबल ने कहा, “किसी के पास बहुत धन हो सकता है, लेकिन यदि वह उसका उपयोग
केवल अपने लिए करता है तो उसकी संपत्ति दूसरों के लिए कोई लाभ नहीं देती। दूसरी ओर
कोई गरीब व्यक्ति थोड़ा-सा होने पर भी यदि जरूरतमंद के साथ बाँटता है, तो उसका
छोटा-सा दान बहुत बड़ा हो सकता है।”
अकबर ने कहा, “तुम्हारी बात में दम है।”
फिर अकबर ने एक सैनिक को बुलाया और कहा, “महल के बगीचे से सबसे सुंदर
गुलाब लेकर आओ।”
सैनिक कुछ देर बाद एक बहुत सुंदर गुलाब लेकर आया। उसकी पंखुड़ियाँ लाल थीं और
खुशबू बहुत अच्छी थी। अकबर ने गुलाब को हाथ में लेकर कहा, “बीरबल, यह देखो। क्या
तुम मानते हो कि यह सुंदर है?”
बीरबल ने कहा, “निश्चित रूप से, जहाँपनाह। यह बहुत सुंदर है।”
“तो क्या यह सबसे अच्छा फूल है?”
बीरबल ने कहा, “यह सुंदर फूल है, लेकिन केवल सुंदर होने के कारण इसे सबसे अच्छा
कहना उचित नहीं होगा।”
अकबर ने पूछा, “क्यों?”
बीरबल बोले, “क्योंकि यदि इसी फूल से किसी गरीब व्यक्ति को भोजन मिले,
तो इसका महत्व
बढ़ जाएगा। यदि इससे किसी दुखी व्यक्ति को खुशी मिले, तो इसका महत्व बढ़ जाएगा।
यदि इसकी खेती से किसी परिवार का रोजगार चले, तो इसका महत्व बढ़ जाएगा।
फूल वही रहेगा, लेकिन उसके उपयोग से उसका महत्व बदल जाएगा।”
अकबर ने गुलाब को देखा और कहा, “अर्थात वस्तु का महत्व केवल वस्तु में नहीं,
बल्कि उसके
उपयोग में भी छिपा होता है।”
“जी हुजूर।”
अकबर ने गुलाब दरबारी को दे दिया और कहा, “इसे उस माली को दे देना
जिसने इसे उगाया है। उससे कहना कि बादशाह ने उसकी मेहनत की प्रशंसा की है।”
दरबारी चला गया।
फिर अकबर ने कहा, “बीरबल, मुझे लगता है कि आज तुमने मेरे प्रश्न का उत्तर दे दिया है।
लेकिन मैं चाहता हूँ कि इस सीख को पूरे राज्य में पहुँचाया जाए।”
बीरबल ने कहा, “यह बहुत अच्छा विचार है, जहाँपनाह।”
अकबर ने आदेश दिया कि राज्य के विद्यालयों और पाठशालाओं में बच्चों को फूलों
के माध्यम से प्रकृति, मेहनत और अच्छे व्यवहार की शिक्षा दी जाए। उन्होंने यह भी
कहा कि गरीब माली और फूल बेचने वालों को उचित अवसर दिए जाएँ ताकि वे अपनी मेहनत से
सम्मानजनक जीवन जी सकें।
अकबर का आदेश सुनकर दरबारी आश्चर्यचकित हुए। उन्हें लगा था कि फूलों का प्रश्न
केवल मनोरंजन के लिए पूछा गया था, लेकिन अब वह राज्य के लोगों के लिए एक नई सीख बन गया था।
कुछ समय बाद राजधानी में एक बड़ा फूलों का उत्सव आयोजित किया गया। इस उत्सव
में अलग-अलग गाँवों से किसान और माली अपने फूल लेकर आए। किसी ने गुलाब लाया,
किसी ने चमेली,
किसी ने कमल और
किसी ने गेंदा। लोगों ने अपने-अपने फूलों की विशेषताएँ बताईं। बच्चों ने फूलों पर
कविताएँ लिखीं और कलाकारों ने फूलों की सुंदर तस्वीरें बनाईं।
उत्सव में वही गरीब लड़की भी आई, जिसका परिवार कभी बहुत कठिन परिस्थितियों में
था। अब वह पहले से अधिक आत्मविश्वासी थी। उसकी माँ का स्वास्थ्य भी सुधर चुका था
और उसका छोटा भाई पढ़ाई कर रहा था। लड़की ने अपने हाथों से बनाई फूलों की मालाएँ
प्रदर्शित कीं।
अकबर ने उसे पहचान लिया। उन्होंने बीरबल से कहा, “देखो, यही वह बच्ची
है।”
बीरबल ने कहा, “जी हुजूर। और देखिए, आज उसके फूल केवल उसके घर
का सहारा नहीं हैं। वह अब दूसरे लोगों को भी फूल उगाने और मालाएँ बनाने का तरीका
सिखाती है।”
अकबर ने लड़की को अपने पास बुलाया और पूछा, “तुम अब भी वही फूल सबसे
अच्छा मानती हो?”
लड़की ने मुस्कुराकर कहा, “जी, हुजूर। लेकिन अब मुझे समझ आ गया है कि हर फूल अच्छा होता
है। कोई फूल सुंदर होता है, कोई सुगंधित और कोई किसी के जीवन का सहारा बन जाता है।”
अकबर ने प्रसन्न होकर कहा, “तुमने बहुत अच्छी बात सीखी है।”
लड़की ने कहा, “यह बात मैंने आपसे नहीं, फूलों से सीखी है।”
अकबर और बीरबल दोनों हँस पड़े।
उत्सव के अंत में अकबर ने घोषणा की कि सबसे अच्छा फूल चुनने के बजाय इस वर्ष
उस व्यक्ति को सम्मान दिया जाएगा जिसने फूलों की खेती या व्यापार के माध्यम से
सबसे अधिक लोगों की सहायता की हो।
दरबारियों को यह निर्णय बहुत अच्छा लगा।
एक गरीब किसान को यह सम्मान मिला। उसने अपनी छोटी-सी जमीन पर फूल उगाकर गाँव
की कई महिलाओं को काम दिया था। उसने उन्हें फूलों की मालाएँ बनाना सिखाया और बाजार
तक पहुँचने में सहायता की। उसकी वजह से कई परिवारों की आय बढ़ी थी।
अकबर ने उसे सम्मानित करते हुए कहा, “आज तुम्हें फूल के लिए नहीं, बल्कि फूलों से
लोगों के जीवन में खुशियाँ लाने के लिए सम्मान दिया जा रहा है।”
किसान ने हाथ जोड़कर कहा, “जहाँपनाह, मैंने तो केवल अपना काम किया है।”
बीरबल बोले, “यही तो सबसे बड़ी बात है। जो व्यक्ति भलाई को अपना सामान्य
कर्तव्य समझता है, वही वास्तव में महान होता है।”
अकबर ने कहा, “बीरबल, अब मुझे लगता है कि तुम्हारे प्रश्न का उत्तर केवल फूल में
नहीं, इंसान में छिपा है।”
बीरबल ने कहा, “बिल्कुल, हुजूर। फूल हमें यह सिखाते हैं कि प्रकृति में विविधता
सुंदर है। हर फूल अलग है, लेकिन सभी मिलकर बगीचे को सुंदर बनाते हैं। उसी तरह समाज
में भी हर व्यक्ति अलग है। कोई विद्वान है, कोई किसान, कोई सैनिक,
कोई कलाकार और
कोई मजदूर। सबका अपना महत्व है।”
अकबर ने कहा, “यदि सभी लोग एक जैसे होते तो?”
बीरबल ने उत्तर दिया, “तो दुनिया शायद बहुत नीरस होती। जैसे केवल एक फूल वाला
बगीचा अपनी विविधता खो देगा, वैसे ही केवल एक प्रकार के गुण वाले मनुष्यों का समाज भी
अधूरा होगा।”
अकबर ने संतोष से कहा, “आज की परीक्षा में तुम फिर सफल हुए।”
बीरबल ने मुस्कुराकर कहा, “जहाँपनाह, आपकी परीक्षा में सफलता मेरी नहीं, उस गरीब परिवार और उन फूलों
की है जिन्होंने हमें यह सीख दी।”
शाम होने लगी थी। फूलों के उत्सव में लगी रोशनियाँ जल उठीं। पूरा बगीचा
रंग-बिरंगे फूलों और दीपों से चमकने लगा। हवा में गुलाब और चमेली की खुशबू थी।
गेंदा की मालाएँ रास्तों पर सजी थीं और कमल के फूल तालाब में शांत दिखाई दे रहे
थे।
अकबर और बीरबल बगीचे के बीच खड़े होकर यह दृश्य देख रहे थे।
अकबर ने कहा, “बीरबल, अब यदि मैं कहूँ कि मुझे गुलाब पसंद है, तो क्या तुम
मुझे गलत कहोगे?”
बीरबल हँसते हुए बोले, “कदापि नहीं, हुजूर। पसंद में कोई गलत या सही नहीं होता। बस इतना याद
रखिए कि अपनी पसंद को दूसरों पर थोपना उचित नहीं है।”
अकबर ने कहा, “और यदि कोई दरबारी कहे कि गुलाब ही संसार का सबसे अच्छा फूल
है?”
बीरबल बोले, “तो मैं उससे पूछूँगा—किसके लिए और किस आधार पर?”
अकबर जोर से हँसे।
फिर उन्होंने कहा, “बीरबल, तुमने एक छोटे-से प्रश्न को इतना बड़ा बना दिया कि अब मुझे
हर चीज को नए नजरिए से देखने की आदत हो जाएगी।”
बीरबल ने कहा, “यही तो बुद्धि का काम है, जहाँपनाह। सही प्रश्न हमें
केवल उत्तर नहीं देता, बल्कि सोचने का नया तरीका देता है।”
उस रात अकबर ने अपने महल की खिड़की से बाहर देखा। चाँदनी में बगीचे के फूल चमक
रहे थे। उन्होंने देखा कि हर फूल अपनी जगह सुंदर था। कोई दूसरे से प्रतिस्पर्धा
नहीं कर रहा था। गुलाब गुलाब था, चमेली चमेली थी, कमल कमल था और गेंदा गेंदा। फिर भी सब मिलकर
बगीचे को सुंदर बना रहे थे।
अकबर ने मन ही मन सोचा, “शायद मनुष्य भी ऐसे ही हैं। हर किसी में कोई न कोई विशेषता
है। यदि हम केवल तुलना करेंगे तो हमेशा कोई न कोई कम दिखाई देगा। लेकिन यदि हम
सबके गुणों को समझेंगे तो संसार अधिक सुंदर बन सकता है।”
उसी समय बीरबल भी वहाँ आ पहुँचे।
अकबर ने कहा, “बीरबल, मुझे लगता है कि आज मैंने वास्तव में जान लिया कि सबसे
अच्छा फूल कौन-सा है।”
बीरबल ने मुस्कुराकर पूछा, “कौन-सा, जहाँपनाह?”
अकबर ने कहा, “वह फूल जो हमें दूसरों के लिए अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा
दे।”
बीरबल ने सिर झुकाकर कहा, “इससे अच्छा उत्तर मैं भी नहीं दे सकता।”
दोनों मुस्कुराए और कुछ देर तक चुपचाप फूलों से भरे बगीचे को देखते रहे।
तो दोस्तों
किसी वस्तु की श्रेष्ठता
केवल उसकी सुंदरता से नहीं आँकनी चाहिए। हर व्यक्ति और हर वस्तु का अपना महत्व
होता है। सच्ची महानता तब होती है जब हमारी सुंदरता, प्रतिभा या संपत्ति दूसरों
के काम आए और उनके जीवन में खुशी, आशा या सहायता लेकर आए।
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