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लालची सेठ

एक छोटा सा गांव था। वहां के सभी लोग खेती किया करते थे। सबका जीवन खेती पर ही निर्भर करता था। उस गांव में चतुर लाल नाम का जमींदार रेहता   था। जिसके पास बहुत सारी जमीन थी। वो अपने गांव में सबसे अमीर व्यक्ति था। उसके पास एक बड़ा सा घर और बहुत सारे   नौकर चाकर थे। धन दौलत की उसे कोई कमी नहीं थी। लेकिन उसे इस बात का बड़ा ही घमंड था और चतुर लाल बहुत बड़ा कंजूस भी था। एक दिन उसके घर एक भिक्षुक भिक्षा मांगने आता है। मालिक कुछ खाने को दे दो। बहुत भूख लगी है मालिक। आप तो बड़े ही धनी हो। प्रभु की कृपा से आपके पास सब कुछ है। इस गरीब की थोड़ी मदद कर दीजिए मालिक। बड़ी कृपा होगी। अरे हट यहां से दूर रेहकर बात कर। मेरे पास भी मत आना। नहीं तो मुझे नहाना पड़ेगा। पता नहीं कहां-कहां से आ जाते हैं। अमीर आदमी देखा नहीं कि भीख मांगना शुरू। अरे खुद से कमाओ और खाओ ना। तभी वहां पर चतुर लाल की पत्नी सीता   आ जाती है। आप यहीं रुकिए बाबा। मैं अभी आई। तभी चतुर लाल सीता   के पीछे जाता है और उसे केहता है ये   तुम क्या कर रही हो ? कुछ नहीं द्वार पर भिक्षुक आया है। उसे खाना दे रही हू...

गाव मे गरीब मोमोस वाला

रामपुर  एक सुंदर सा गांव था जहां की सुबह आमतौर पर पक्षियों के चहचहाने से होती थी। उसी गांव के चौक पर रामू  अपनी रेड़ी को जोर लगाकर धक्का दे रहा था। जिस पर केवल पत्ता गोभियों का ढेर लगा था। सूरज सिर पर था और रामू  के चेहरे पर निराशा।

गोभी ले लो ताजी पत्ता गोभी ले लो।

तभी एक काकी उसके पास आई और कहा

अरे रामू  कल भी तो गोभी ही लाया था। क्या तेरे खेत में इसके अलावा और कुछ नहीं उगता? घर में सब अब गोभी देखकर मुंह बनाने लगे हैं।

क्या करूं काकी? खेत में फसल ही यही हुई है। बहुत सस्ती दे रहा हूं। 2 किलो ,ले लो।

नहीं रे बेटा मुफ्त में भी देगा तो कोई नहीं खाएगा। कुछ नया लाए तो बता देना।

सबको कुछ नया चाहिए। पर नया लाने के लिए पैसे कहां से आएंगे? अगर आज ये  गोभी नहीं बिकी तो कल का चूल्हा भी नहीं जल पाएगा।

रामू  वहीं सड़क किनारे बैठ गया। तभी उसका पुराना दोस्त धनिया  वहां से गुजरा।

क्या हुआ रामू ? आज फिर गोभी का ढेर घर ले जा रहा है।

हां धनिया  कोई भी इसे खरीदने को तैयार नहीं है। सब इन पत्ता गोभी से पक गए हैं। समझ नहीं आता इन पत्ता गोभियों का क्या करूं?

भाई तूने शेहर में कुछ समय उस दुकान पर काम किया था ना जहां लोग इसी गोभी को बारीक काट कर कुछ सफेद पोटली जैसा बनाते थे। क्या नाम था उसका?

मोमोज। हां सोनू वो लोग पत्ता गोभी का ही इस्तेमाल करते थे।

धनिया  की बात रामू  के दिमाग में घर कर गई थी। उस शाम रामू  घर लौटा तो उसके मन में एक ही धुन सवार थी। उसने अपनी बची हुई सबसे अच्छी पत्ता गोभी उठाई और उसे बारीक काटना शुरू किया।

अगर मैं इन गोभीयों को फेंकने  के बजाय इनका रूप बदल दूं तो शायद बात बन जाए। मैदा घर में थोड़ा पड़ा ही है।

वो रसोई में मसालों के साथ कुछ प्रयोग करने लगा। खुशबू फैलने लगी तो उसका पड़ोसी भोला  चाचा अंदर आए।

रामू  ये  कैसी खुशबू आ रही है? आज क्या कोई दावत की तैयारी है?

आइए चाचा दावत तो नहीं पर एक कोशिश कर रहा हूं। ये  देखिए मैंने इन गोभीयों को मसालों के साथ पका कर इस मैदे की लोई में भर दिया है।

अरे ये तो छोटी-छोटी सफेद पोटलियां लग रही हैं। इन्हें तेल में तलोगे क्या?

नहीं चाचा इन्हें बस भाप में पकाऊंगा। ये  बिना तेल का खाना होगा जो गांव वालों के लिए बिल्कुल नया होगा।

बिना तेल का? क्या लोग खाएंगे? यहां तो सबको तला भुना पसंद है।

स्वाद अच्छा हुआ तो सब खाएंगे चाचा। बस दुआ कीजिए कि ये  भाप में ठीक से पक जाए। कल सुबह गांव के चौराहे पर मैं इसी का ठेला लगाऊंगा।

हिम्मत तो बड़ी है तेरी। चल ये  पक जाए तो एक मुझे भी चखाना।

अगली सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही रामू  गांव के चौराहे पर पहुंच गया था। उसने अपनी रेडी  के एक तरफ कटी हुई पत्ता गोभी रखी थी और दूसरी तरफ पीतल के एक बड़े बर्तन से भाप निकल रही थी। गांव के लोग जो रोज रामू  को गोभी बेचते देखते थे आज रुक-रुक कर उसे ताकने लगे। तभी गांव का हलवाई  उसके ठेले पर आया और केहने  लगा

अरे रामू  आज तेरा ये  पत्ता गोभी का ठेला बड़ा चमक रहा है। ये  बड़े बर्तन में क्या उबाल रहा है भाई? सुबह-सुबह चाय बना रहा है क्या?

नहीं  भाई ये  चाय नहीं है। इसे मोमोज केहते हैं। शेहर का बड़ा मशहूर नाश्ता है। आज पहली बार अपने गांव में लाया हूं।

मो क्या नाम तो बड़ा अजीब है पर खुशबू बड़ी सौधी आ रही है। इसमें डाला क्या है?

वही अपनी ताजी पत्ता गोभी है भाई। बस बनाने का अंदाज नया है। ये  देखिए। साथ में ये  लाल चटनी भी है।

तभी गांव का एक बुजुर्ग उसके पास आया और उसने कहा,

बेटा ये दिखने में तो बड़ा कोमल लग रहा है। क्या ये बुजुर्गों के खाने लायक है? मेरे दांत अब सख्त चीजें  नहीं चबा पाते

बाबा ये तो मुंह में जाते ही घुल जाएगा। ये  भाप में  पका है। बिल्कुल रुई जैसा नरम। आप बस एक बार जरा सा चखकर  देखिए।

बुजुर्ग ने एक छोटा सा टुकड़ा चखा। पूरा चौराहा शांत हो गया। सब बुजुर्ग के चेहरे के भाव देख रहे थे। जैसे ही बुजुर्ग ने मोमोज का टुकड़ा चबाया, उनके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान फैल गई। रामू  ने उन्हें थोड़ी और लाल चटनी दी।  देखते ही देखते वहां मौजूद दूसरे लोग भी अपनी बारी का इंतजार करने लगे।

वाह रामू , ये  तो वाकई कमाल की चीज है। इतना नरम और जायकेदार। और ये  लाल चटनी इसने तो सोई हुई जुबान को जगा दिया।

तभी वहां रामू  का दोस्त धनिया  भी आ जाता है।

रामू  मुझे भी एक प्लेट दे भाई। कल तो तू बड़ा परेशान था और आज तूने यहां कमाल कर दिया। अब जल्दी-जल्दी इसका स्वाद सबको चखा दे। लोग इंतजार कर रहे हैं।

हां धनिया  सबको दूंगा। पर ध्यान रखना चटनी थोड़ी तीखी है। संभल कर खाना।

अरे रामू  तीखा ही तो असली मजा है। शेहर में लोग क्या वाकई रोज यही खाते हैं? मुझे तो लगता था वहां के लोग बस महंगा खाना जानते हैं।

हां काका शेहर में तो इसे खाने के लिए लंबी लाइनें लगती हैं। मैंने सोचा जब हमारे खेत में इतनी अच्छी गोभी होती है तो हम गांव वालों को ये  स्वाद क्यों ना मिले।

भाई रामू  तूने तो मेरी मिठाई की दुकान के सामने रौनक लगा दी। एक प्लेट मेरे लिए भी लगा। देखूं तो सही इस पत्ता गोभी के नए अवतार में ऐसा क्या जादू है।

दोपहर होते-होते रामू  की सारी पत्ता गोभी खत्म हो गई थी। लेकिन सब्जी के रूप में नहीं बल्कि मोमोज के रूप में। रामू  ने आज पेहली बार अपने हाथ में इतने पैसे देखे थे। उसकी आंखों में खुशी के आंसू थे और मन में एक नया हौसला। उसे समझ आ गया था कि मेहनत और नयापन कभी बेकार नहीं जाता। जिसके बाद अगले कुछ दिनों तक रामू  का काम तेजी से चल पड़ा। अब लोग सुबह से ही रामू  के आने का इंतजार करने लगे थे। लेकिन जैसे-जैसे काम बढ़ा रामू  के पास संसाधनों की कमी होने लगी। उसके पास सिर्फ एक छोटा बर्तन था और अकेले सारा काम करना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा था।

गोभी काटना, मैदा गूंधना, फिर उसे बेलना और फिर भाप देना अकेले करते-करते हाथ जवाब देने लगे थे । पर अगर रुक गया तो लोग निराश हो जाएंगे।

तभी भोला  चाचा उसके पास आते हैं और केहते हैं

क्या बात है रामू  काम कैसा चल रहा है? आज चेहरे पर वो चमक नहीं है जो हमेशा रेहती है। काफी थके थके से भी लग रहे हो।

चाचा काम तो बहुत है पर हाथ सिर्फ दो हैं। लोग को मेरे हाथों के मोमोज बहुत पसंद आने हैं और अब वे उसे ज्यादा मात्रा में मांग रहे हैं। और मेरे पास बर्तन इतना छोटा है कि एक बार में सिर्फ कुछ  मोमोज ही बन पाते हैं।

अरे ये तो बहुत अच्छी बात है। अगर बरकत हो रही है तो घबराता क्यों है? शेहर जा और एक बड़ा स्टीमर लेकर आ। और सुन सारा काम अकेले क्यों करता है? किसी को साथ लगा ले।

पैसे तो आ रहे हैं चाचा। पर क्या ये  काम टिकेगा? कहीं लोग कुछ ही  दिन बाद ऊब गए तो मेरी सारी कमाई डूब जाएगी।

मेहनत कभी नहीं डूबती बेटा। तूने साधारण सी पत्ता गोभी को पहचान दिलाई है। अब खुद को एक बड़ा व्यापारी बनाने की सोच।

भोला  चाचा की सलाह मानकर रामू  ने अगले दिन अपनी रेड़ी नहीं लगाई। वो पास के बड़े कस्बे के बाजार में  गया। वहां की भीड़भाड़ देखकर उसे अपने पुराने दिन याद आ गए। जब वो दूसरों की दुकानों पर काम करता था। आज वो अपनी खुद की दुकान के लिए सामान खरीदने आया था।

आइए भाई साहब क्या दिखाऊं? होटल के लिए बर्तन चाहिए या घर के लिए?

मुझे मोमोज बनाने वाला सबसे बड़ा तीन मंजिला बर्तन चाहिए। और हां, एक ऐसी मशीन भी देना जिससे सब्जियां बहुत बारीक कट सके।

बड़े बर्तन की मांग तो बहुत है। आप कहां से आए हैं? शेहर में दुकान खोल रहे हैं क्या?

नहीं साहब। गांव में मेरा छोटा सा मोमोज बेचने का काम है। वहां लोगों को उसका स्वाद बहुत पसंद आ रहा है।

ये  तो बड़ी अच्छी बात है। ये  लीजिए। ये  स्टील का सबसे बढ़िया बर्तन है। इसमें एक साथ 50 मोमोज आराम से बन जाएंगे। और ये  रही आपकी नई मशीन। इससे आपकी मेहनत आधी हो जाएगी।

शुक्रिया। अब गांव लौट कर मुझे सिर्फ खाना नहीं बनाना बल्कि अपने काम को और बेहतर बनाना है। कल से गांव वालों को मोमोज खाने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

रामू  जब नए बर्तनों के साथ गांव लौटा तो शाम हो चुकी थी। रास्ते में उसने ढेर सारी पत्ता गोभी खरीदी। उसे पता था कि अब उसका संघर्ष एक नए मुकाम पर पहुंच चुका है। उसने रात भर जागकर नए बर्तनों को साफ किया और अगले दिन की तैयारी की। अगली सुबह जब रामू  चौराहे पर पहुंचा तो उसकी रेड़ी का नजारा बदला हुआ था। तीन मंजिलों वाला ऊंचा स्टील का स्टीमर सूरज की रोशनी में चमक रहा था। गांव वाले भी  नया अजूबा देखने के लिए जमा हो गए। रामू  के चेहरे पर एक नई चमक थी। क्योंकि अब उसे ग्राहकों को इंतजार नहीं कराना पड़ता था।

वाह भाई रामू  ये क्या रॉकेट ले आया आज? ये तो बड़ा आलीशान लग रहा है।

रॉकेट नहीं है धनिया  भाई। ये  तीन मंजिला स्टीमर है। अब एक साथ कई लोग मोमोज खा पाएंगे। कल तक तुम लोग शिकायत करते थे ना कि देर लगती है लेकिन अब इसकी मदद से नहीं लगेगी।

अरे भाई बर्तन तो बड़ा कर लिया। पर क्या स्वाद वही रहेगा? अक्सर काम बढ़ने पर लोग जायका भूल जाते हैं।

भाई जायका तो मेरी मेहनत में है। बर्तन में नहीं। आप बस  देखते जाइए। आज मैंने चटनी में एक खास चीज और मिलाई है। खेत का ताजा पुदीना।

रामू  सुना है तूने कस्बे से कोई मशीन भी मंगवाई है? क्या अब मशीन से खाना बनाएगा?

नहीं काका। मशीन सिर्फ सब्जियां बारीक काटने के लिए है। मेहनत तो अभी भी इन हाथों की ही रहेगी। मशीन से बस मेरा समय बचेगा ताकि मैं आप सबको गरमा गरम खाना खिला सकूं।

उस दिन रामू  की रेड़ी पर इतनी भीड़ थी कि गांव का मुख्य रास्ता जाम होने लगा। रामू  बड़ी फुर्ती से हाथ चला रहा था। वो पत्ता गोभी की फिलिंग भरता, उन्हें आकार देता और स्टीमर में सजाता। कुछ ही मिनटों में भाप के साथ मोमोज तैयार हो जाते। तभी गांव के मुखिया  जी अपनी गाड़ी से वहां रुके।

रामू , ये  क्या शोर मचा रखा है तुमने? पूरा गांव यहीं जमा हो गया है क्या?

प्रणाम मुखिया  जी, कुछ नया शुरू किया है। ये  पत्ता गोभी के मोमोज हैं। आप भी जरा चखकर देखिए। फिर बताइएगा कि गांव में ये  कैसा लग रहा है?

मुखिया  जी ने जैसे ही एक निवाला खाया तो उन्होंने कहा

वाकई मैंने शेहर में कई जगह के मोमोज खाए हैं पर तुम्हारी ये पत्ता गोभी की फिलिंग और ये देसी पुदीने वाली चटनी इसका कोई जवाब नहीं तुमने तो कमाल कर दिया

शुक्रिया साहब बस सोच रहा था कि अपनी गोभी को फेंकने से अच्छा है उसे इस तरह लोगों तक पहुंचाया जाए

रामू  अगले हफ्ते तहसील के कुछ बड़े अधिकारी गांव आ रहे हैं क्या तुम उनके लिए भी ऐसा कुछ इंतजाम कर सकते हो। मैं चाहता  हूं की  वो देखें कि हमारे गांव के युवक कितने मेहनती हैं।

ये  तो मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी साहब। मैं उनके लिए सबसे बेहतरीन मोमोज तैयार रखूंगा।

रामू  के लिए ये  सिर्फ एक ऑर्डर नहीं था बल्कि उसके हुनर को मिलने वाली सरकारी पहचान की शुरुआत थी। उस रात रामू  ने चैन की नींद ली क्योंकि अब वो सिर्फ एक गरीब सब्जी वाला नहीं बल्कि  गांव का मोमोज मैन बन चुका था। मुखिया  जी का वादा रामू  के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती और अवसर दोनों था।  तहसील के अधिकारियों का आना कोई छोटी बात नहीं थी। रामू  ने तय किया कि वो इस मौके को हाथ से जाने नहीं देगा। उसने अपने छोटे  से रसोई घर को साफ किया और अपनी रेड़ी को अच्छे से सजाया।

रामू  बेटा कल का दिन बहुत बड़ा है। सुना है शेहर से बड़े साहब लोग आ रहे हैं। क्या तूने सारी तैयारी कर ली?

हां चाचा मैंने आज सुबह ही खेत से सबसे ताजी और कोमल पत्ता गोभी तोड़ी है। मैं नहीं चाहता कि स्वाद में जरा भी कमी रहे। बस थोड़ा डर लग रहा है।

डर कैसा? तूने तो पूरे गांव का दिल जीत लिया है। वो तो फिर भी बाहर के लोग हैं। बस अपनी सादगी और सफाई का ध्यान रखना।

धनिया  तू कल मेरी मदद करेगा। मुझे प्लेटें लगाने और पानी पिलाने के लिए किसी भरोसेमंद इंसान की जरूरत होगी।

तू चिंता क्यों करता है भाई? मैं सुबह ही पहुंच जाऊंगा। हम दिखा देंगे कि हमारे गांव का स्वाद किसी बड़े शेहर के होटल से कम नहीं है।

दोपहर का समय था। तहसील के अधिकारी अपनी गाड़ियों से गांव की चौपाल पर पहुंचे। मुखिया  जी ने गर्व के साथ रामू  की रेडी  की ओर इशारा किया। रामू  के चेहरे पर एक विनम्र मुस्कान थी। उसने बड़ी ही सफाई से अधिकारियों के सामने गरमा गरम मोमोज परोसे।

मुखिया  जी, मैंने सुना था कि यहां का कोई युवक बहुत अच्छा काम कर रहा है।

अरे ये  तो वाकई लाजवाब है। इतना हल्का और इतना शुद्ध स्वाद।

शुक्रिया साहब। ये  सब मेरे खेत की पत्ता गोभी का कमाल है। मैंने इसमें कोई बनावटी मसाला नहीं डाला है।

हैरानी की बात तो ये  है कि गांव के माहौल में तुमने इतनी सफाई और हाइजीन का ध्यान रखा है। तुम्हारा ये  तरीका वाकई काबिले तारीफ है।

रामू , क्या तुम कभी शेहर आकर अपना स्टॉल लगाना चाहोगे? वहां तुम्हें और भी बड़ा बाजार मिल सकता है?

साहब शेहर में तो बहुत लोग हैं। मैं चाहता हूं कि मेरे गांव के लोगों को यहीं पर अच्छी और नई चीजें खाने को मिले। मैं यहीं रेहकर अपने काम को बड़ा बनाना चाहता हूं।

बहुत खूब। तुम्हारी ये  सोच देखकर अच्छा लगा। हम तुम्हारी मदद करेंगे ताकि तुम एक छोटी सी पक्की दुकान खोल सको। हमें ऐसे ही मेहनती युवाओं की जरूरत है।

अधिकारियों ने ना केवल पेट भर खाया बल्कि जाते समय रामू  की काफी तारीफ भी की। उस दिन रामू  को समझ आया कि सफलता के लिए गांव छोड़ना जरूरी नहीं बल्कि अपनी जगह रेहकर कुछ अलग करना जरूरी है। अधिकारियों की मदद और अपनी मेहनत की कमाई से रामू  ने आखिरकार गांव के मुख्य चौराहे पर एक छोटी सी पक्की दुकान किराए पर ले ली। अब उसे धूप और बारिश में रेडी  खड़ी करने की चिंता नहीं थी। उसने अपनी दुकान का नाम रखा रामू  का देसी जायका। दुकान की दीवारों पर उसने खेत और गांव के सुंदर चित्र बनवाए थे।

अरे भाई रामू , अब तो तू सेठ बन गया। इतनी सुंदर दुकान और वो  भी गांव के सबसे मुख्य मोड़ पर। अब तो हमें बैठने के लिए कुर्सियां भी मिलेंगी।

सेठ नहीं भाई। बस आप सबका प्यार है। दुकान पक्की हो गई है तो क्या हुआ? स्वाद तो आज भी वही मिट्टी से जुड़ा रहेगा। आइए आज उद्घाटन के दिन पेहली प्लेट आप ही के नाम।

रामू  देख रहे हो? जहां तू कभी गोभी का ढेर लेकर उदास बैठा रहता था। आज वही  तेरे नाम की धूम मची है। मैंने कहा था ना गोभी को पहचान तूने दी है।

चाचा ये  सब आपकी बातों का ही असर है। अब मैंने सोचा है कि मैं गांव के दो और बेरोजगार युवकों को यहां काम पर रखूंगा। उन्हें मैं खुद ट्रेनिंग दूंगा ताकि वो भी अपना हाथ साफ कर सकें।

बहुत नेक ख्याल है बेटा। तरक्की वही है जो सबको साथ लेकर चले।

वक्त बीतता गया  और रामू  की दुकान अब केवल रामपुर  ही नहीं बल्कि आसपास के कई  गांव में मशहूर हो गई। लोग दूर-दूर से उसके पत्ता गोभी मोमोज खाने आने लगे। रामू  ने कभी अपनी गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। वो आज भी रोज सुबह अपने खेत से ताजी गोभी खुद तोड़ कर लाता था।

रामू  भाई आज तो शेहर से भी कुछ लोग आए थे। केह रहे थे कि सोशल मीडिया पर तुम्हारी दुकान की बड़ी चर्चा है। अब तो तुम्हें शेहर में भी ब्रांच खोल लेनी चाहिए।

धनिया  शेहर की चकाचौंध अपनी जगह है। पर जो सुकून इस गांव की हवा और अपनों के बीच काम करने में है वो कहीं नहीं। मेरा मकसद सिर्फ पैसा कमाना नहीं था बल्कि अपनी मेहनत को एक नई दिशा देना था।

तुमने वाकई साबित कर दिया कि अगर इरादा पक्का हो तो एक गरीब सब्जी बेचने वाला भी अपने हुनर से तकदीर बदल सकता है।

मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता धनिया । आज जब मैं पीछे मुड़कर उन पत्ता गोभी से भरी रेड़ियों को देखता हूं तो मुझे गर्व होता है कि मैंने हार नहीं मानी।

 

 

 

 

 

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